राजस्थान: कोटा के स्कूल में धर्मांतरण के आरोप में निलंबित शिक्षक बोले- 'हम हैं बेकसूर', क्या है मामला

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान के कोटा ग्रामीण के खजूरी ओदपुर के सरकारी स्कूल में कथित 'लव जिहाद और धर्मांतरण' के आरोप की जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है.
इस मामले की शिकायत शिक्षा मंत्री से की गई थी. इसके बाद से स्कूल के तीन मुसलमान शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया था.
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) सांगोद रामअवतार रावल ने स्कूल शिक्षकों, छात्रों और अभियुक्त शिक्षकों के बयानों पर रिपोर्ट तैयार की है.
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया,''शिक्षकों और छात्रों ने आरोपों को ग़लत बताया है. एक मानवीय भूल के कारण यह सारा विवाद खड़ा हुआ था.''
दो बार हुई जांच

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इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से दो बार जांच कराई गई है.
कोटा की मुख्य ज़िला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) चारूमित्रा सोनी के आदेश पर एक जांच सीबीईओ सांगोद राम अवतार ने की है. जबकि, दूसरी जांच सांगोद सीबीईओ रामअवतार रावल के आदेश पर एसीबीईओ पुरुषोत्तम मेघवाल समेत तीन जांच अधिकारियों ने की है.
दोनों ही रिपोर्ट सीडीईओ चारूमित्रा सोनी को भेजी जा चुकी हैं.
रिपोर्ट तैयार करने वाले रामअवतार रावल ने कहा, "मैंने इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है."
उन्होंने रिपोर्ट के संदर्भ में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. इस मामले में सीडीईओ चारूमित्रा सोनी ने भी कुछ कहने से इनकार कर दिया है.
स्कूल शिक्षकों ने लिखित में अपने बयान दिए हैं. छात्रों से भी सवालों के ज़रिए उनका पक्ष लिया गया है.
स्कूल की प्रिंसिपल डॉ कमलेश बैरवा ने भी शिक्षकों पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "स्कूल में कभी भी किसी अभिभावक, छात्र ने इस तरह की कोई शिकायत नहीं की है. शिक्षकों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं. शिक्षा विभाग की ओर से अधिकारी जांच करके गए हैं."
इस स्कूल में बारह साल से पढ़ा रहे दीपक ने शिक्षकों पर लगे आरोप को लेकर बीबीसी से कहा, "धर्मांतरण या नमाज पढ़ाने जैसे कोई गतिविधि स्कूल में नहीं हुई. यह सब ग़लत आरोप हैं."
सस्पेंड हुए शिक्षक फ़िरोज़ ख़ान और शबाना ने भी अपने बयान जांच अधिकारी को दिए हैं. जबकि, मिर्जा मुजाहिद के बयान नहीं लिए गए हैं.
शिक्षक मिर्जा मुजाहिद कहते हैं, "जांच के दौरान मैं 19 से 22 तारीख़ तक अस्पताल में भर्ती था. मुझसे बात नहीं की गई है."
फ़िरोज़ ख़ान कहते हैं, "हम पर लगे आरोप के बारे पूछा गया था. हमने बताया कि निराधार आरोप हैं. सब शिक्षकों से अलग-अलग बात की गई, सबसे लिखित में बयान लिया गया था."
जांच के दौरान स्कूली छात्रों को लिखित में चार सवाल दिए गए. उनसे हां या नहीं में उत्तर लिए गए.
इस बारे में जब एसीबीईओ पुरुषोत्तम मेघवाल से जब बात की गई तो उन्होंने उच्चाधिकारियों का हवाला देते हुए बात करने से इनकार कर दिया.
क्या है मामला?

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सांगोद पुलिस थाने में पांच फ़रवरी को खजूरी निवासी बलराम गौड़ नाम के एक शख़्स ने एफ़आईआर दर्ज करवाई. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बालिग़ बेटी मुस्कान गौड़ को लक्की अली ख़ान बहला फुसलाकर साथ ले गया है. जो अपने नाना मोहम्मद सलीम के साथ खजूरी में रहता है.
मुस्कान अपने माता-पिता, एक बड़ी और एक छोटी बहन के साथ खजूरी गांव के गौड़ मुहल्ले में रहती थीं. तीन बीघे खेत के मालिक बलराम कहते हैं, "मेरा परिवार टूट गया है. मैं अस्पताल में भर्ती था आज ही लौटा हूं और मेरी पत्नी भी अस्पताल में भर्ती है. मुस्कान अभी तक लौट कर नहीं आई है."
सांगोद थाना प्रभारी हीरा लाल मीणा ने बताया, "पुलिस ने जांच करते हुए खजूरी ओदपुर स्कूल से मुस्कान का रिकॉर्ड मांगा, मुस्कान इसी स्कूल से पढ़ाई कर चुकी थी."
"स्कूल ने साल 2019 में मुस्कान के दसवीं कक्षा में दाखिला लेने का आवेदन पत्र पुलिस को उपलब्ध कराया. इस आवेदन पत्र के धर्म के कॉलम में मुस्कान गौड़ का धर्म इस्लाम लिखा हुआ था.”
इस आवेदन पत्र के सामने आने के बाद से ही इस विवाद की शुरुआत हुई.
वहीं मुस्कान की ओर से 23 फ़रवरी को स्टांप पेपर पर दिया शपथ पत्र भी सामने आया है. जिसमें लिखा है, "मैं दसवीं का फॉर्म भरा था जिसमें मेरे द्वारा गलती से जाति मुस्लिम, धर्म इस्लाम लिखने में आ गया था. जबकि, मेरा धर्म हिंदू और जाति खाती है."
स्कूल के शिक्षक फ़िरोज़ ख़ान आरोप लगाते हैं, "मुसलमान होने की वजह से हम तीनों शिक्षकों को टारगेट किया गया है. जबकि, हमारा कोई गुनाह नहीं है."
धर्मांतरण का आरोप

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मुस्कान गौड़ के पिता बलराम गौड़ ने बीबीसी से कहा, "मुस्कान का दाखिला साल 2019 में खजूरी ओदपुर स्कूल में कक्षा दसवीं में करवाया था."
"पांच फ़रवरी 2024 को सांगोद थाने में जब एफ़आईआर दर्ज करवाई तो पुलिस ने मुस्कान की उम्र को आधार कार्ड के आधार पर मानने से इनकार कर दिया. पुलिस को स्कूल जो काग़ज मिले, उनमें मुस्कान का धर्म इस्लाम लिखा गया था, हमें भी तभी मालूम हुआ."
थाना प्रभारी हीरा लाल मीणा बीबीसी से कहा, "मुस्कान को आठ फ़रवरी को बुलाकर नारी निकेतन में रखा गया. बाद में कोर्ट में पेश किया गया."
उनके मुताबिक, "मुस्कान ने कोर्ट को बताया है कि वो स्वेच्छा से लक्की अली ख़ान के साथ गईं. वह बालिग है इसलिए वह स्वेच्छा से जाने के लिए स्वतंत्र है."
हालांकि, स्कूल का सर्टिफिकेट सामने आने से पहले कभी इस तरह के आरोप स्कूल के शिक्षकों पर नहीं लगाए गए थे. साल 2021 में मुस्कान स्कूल से पासआउट हो गई थी.
जब यह जानकारी हिंदू संगठनों को मिली तो मामला बढ़ गया. सांगोद एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन हुआ. रैली निकाली गई और 20 फ़रवरी को शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया.
कोटा में बजरंग दल के प्रांत संयोजक योगेश रेनवाल ने बीबीसी से कहा, "स्कूल में धर्म परिवर्तन, लव जिहाद होता था. शिक्षकों के भारत में प्रतिबंधित संगठनों के साथ संबंध हैं और मुस्कान का ब्रेनवॉश किया गया."
शिक्षकों पर कार्रवाई

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शिक्षा मंत्री को मिली शिकायत के आधार पर 22 फ़रवरी को कोटा के ज़िला शिक्षा अधिकारी ने दो आदेश जारी कर मिर्जा मुजाहिद और फ़िरोज़ ख़ान को सस्पेंड कर दिया.
कोटा के ज़िला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) यतीष कुमार ने 24 फ़रवरी को आदेश जारी शिक्षिका शबाना को भी सस्पेंड कर दिया.
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बयान दिया, "खजूरी स्कूल में एक हिंदू लड़की के धर्म के कॉलम में अध्यापक ने मुस्लिम लिख दिया. उस स्कूल के बारे में शिकायत मिल रहीं थी कि वहां ज़बरदस्ती नमाज पढ़ाई जाती थी."
खजूरी स्कूल में एक हिंदू लड़की के धर्म के कॉलम में अध्यापक ने मुस्लिम लिख दिया. उस स्कूल के बारे में शिकायत मिल रहीं थी कि वहां ज़बरदस्ती नमाज पढ़ाई जाती थी.
उन्होंने कहा, "शिक्षकों को निलंबित किया गया है. वहां धर्मांतरण का बड़ा भारी षड्यंत्र चल रहा था. इस धर्मांतरण के षड्यंत्र को हम चलने नहीं देंगे. राजस्थान के स्कूलों को धर्मांतरण और लव जिहाद का अड्डा नहीं बनने देंगे."
इधर, इस पूरे मामले में बीते दिनों खजूरी ओदपुर स्कूल के छात्रों ने निलंबित शिक्षकों के समर्थन में प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्रों ने शिक्षकों पर लगे आरोपों को झूठा बताया और शिक्षकों को बहाल करने की मांग की.
मिर्जा मुजाहिद कहते हैं, "विभाग ने हम पर लगे आरोप पर हमारा पक्ष तक नहीं जाना और जल्दबाजी में हमें सस्पेंड कर दिया. विभाग से निष्पक्ष जांच की उम्मीद है."
वो कहते हैं, "जांच के बाद बहाल भी हो जाएंगे तब भी संदेह की निगाहों से देखे जाएंगे."
शबाना पर क्यों हुई कार्रवाई?

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राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खजूरी ओदपुर पहले आठवीं कक्षा तक था.
साल 2018 में यह क्रमोन्नत कर दसवीं कक्षा तक किया गया और साल 2019 में बारहवीं कक्षा तक क्रमोन्नत किया गया.
स्कूल में पंद्रह शिक्षक हैं. इनमें से तीन मुसलमान शिक्षक मिर्जा मुजाहिद, फ़िरोज़ ख़ान और शबाना हैं. मिर्जा मुजाहिद पांच साल और फ़िरोज़ ख़ान आठ साल से पोस्टेड हैं.
जबकि, तीसरी निलंबित शिक्षक शबाना ने बीते साल की 9 अक्टूबर को ही अपनी नौकरी ज्वॉइन की थी. महज़ चार महीने की नौकरी के बाद उन्हें एक पांच साल पुराने मामले में अभियुक्त बनाते हुए निलंबित कर दिया गया.
शबाना से उनका पक्ष जानने के लिए प्रयास किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका.
फ़िरोज़ ख़ान कहते हैं, "अगर किसी से गलती हुई है तो वो साल 2019 में हुई थी, शबाना ने तो चार महीने पहले ही ज्वाइन किया था. उनकी क्या ग़लती है."
फ़िरोज़ ख़ान कहते हैं, "जो स्कूल में प्रवेश लेता है वही अपना आवेदन पत्र भरकर लाता है. लड़की ने अब स्टांप पेपर पर लिखित में दिया है कि उसने ही लिखा था, उससे ग़लती हुई थी."
कौन हैं लक्की अली ख़ान

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लक्की अली ख़ान खजूरी गांव में अपने नाना अब्दुल सलीम के घर रहते पले और बड़े हुए.
मुस्कान गौड़ और लक्की ख़ान अब कहां रह रहे हैं, अब्दुल सलीम इस बात की जानकारी होने से इनकार करते हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "लक्की मेरी बेटी का बेटा यानी मेरा नाती है. लक्की जब अपनी मां के पेट में था तभी मेरी बेटी को उसके शौहर ने तलाक दे दिया. तभी से मेरे पास रहता था."
"वह दोनों अब कहां रह रहे हैं हमें नहीं मालूम. कुछ दिन पहले मैं मिला था, मुस्कान ने स्टांप पेपर पर ख़ुद कबूल किया है कि उसने स्कूल के आवेदन पत्र में गलती से इस्लाम लिखा था. पुलिस के डर के मारे वह छिपे फिर रहे हैं."
उन्होंने आरोप लगाया, "मुस्कान का कोर्ट में बयान होने के बाद भी सांगोद पुलिस हमें तंग कर रही है. मुझे थाने ले जा कर बैठा देते हैं, कहते हैं लड़की के बयान बदलवा दो नहीं तो बुलडोजर चलवा देंगे."
सलीम के इन आरोपों पर राजू लाल मीणा ने कहा कि जब मुस्कान के कोर्ट में बयान हो चुके हैं और वह स्वतंत्र हो चुकी है. तो अब बयान बदलवाने के दबाव के आरोप बेबुनियाद हैं.
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