राजस्थान चुनाव: कन्हैयालाल की हत्या के बाद उनका परिवार किस हाल में, अभियुक्त के परिवार क्या बोले

कन्हैयालाल
    • Author, अभिनव गोयल, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता और बीबीसी के सहयोगी पत्रकार

राजस्थान में उदयपुर के हिरण मगरी इलाक़े का एक घर आम घरों से बिल्कुल अलग है.

यहाँ चौबीस घंटे पुलिस का पहरा रहता है. घर के बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और घर में आने-जाने वाले पर कड़ी नज़र रखी जाती है.

घर में दाखिल होने के लिए एक पुलिसकर्मी पहले रजिस्टर में एंट्री करता है, उसके बाद ही कोई व्यक्ति परिवार से मिल सकता है.

यह मकान कन्हैयालाल का है, जिनकी पिछले साल 28 जून को गला रेत कर हत्या कर दी गई थी.

कन्हैयालाल पेशे से टेलर थे. न सिर्फ़ दुकान पर बल्कि घर पर भी वो सिलाई का काम करते थे, लेकिन अब उनके कमरे में रखी सिलाई मशीन को कोई चलाने वाला नहीं है.

घर के मुखिया की मौत के 17 महीनों के बाद भी परिवार ख़ुद को संभालने की कोशिशों में लगा है और इस सबके बीच परिवार की सबसे बड़ी चिंता, कन्हैयालाल के नाम पर राजस्थान में हो रही राजनीति है.

कन्हैयालाल की हत्या के बाद राजस्थान में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. कई जगहों पर सरकार को क़र्फ्यू तक लगाना पड़ा था और उदयपुर में महीना भर इंटरनेट बंद रहा था.

धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई लेकिन चुनाव आते ही राजस्थान में कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर सियासी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कई चुनावी सभाओं में उनका ज़िक्र कर चुके हैं.

चित्तौड़गढ़ की रैली में पीएम मोदी ने कहा, “जो कांग्रेस सरकार जान माल की सुरक्षा नहीं कर सकती, उसे हटाना बहुत ज़रूरी है. आप मुझे बताइए, जो उदयपुर में हुआ, उसकी आपने कल्पना भी की थी?"

"जिस राजस्थान ने धोखे से वार न करने की परंपरा को जिया है, उस राजस्थान की धरती पर इतना बड़ा पाप हुआ. कपड़े सिलाने के बहाने लोग आते हैं और बिना डर, ख़ौफ़ के टेलर का गला काट देते हैं और वीडियो बनाकर गर्व से वायरल कर देते हैं.”

न सिर्फ़ पीएम मोदी बल्कि देश के गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से लेकर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने अपने भाषणों में कन्हैयालाल हत्याकांड का मुद्दा उठाया.

वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इसमें पीछे नहीं रहे. वे शुरू से इस हत्याकांड के लिए बीजेपी को दोष दे रहे हैं.

कन्हैयालाल का परिवार
इमेज कैप्शन, कन्हैयालाल का परिवार. छोटा बेटा तरुण (बाएं), बड़ा बेटा यश और पत्नी जशोदा

चुनावी भाषणों में कन्हैयालाल के नाम से दुखी परिवार

कन्हैयालाल के नाम पर हो रही इस राजनीति से उनका परिवार बेहद दुखी है.

उनकी पत्नी जशोदा कहती हैं, “मैंने पीएम मोदी का वो भाषण सुना, जिसमें उन्होंने कन्हैयालाल का ज़िक्र किया. हमको अच्छा नहीं लगता है कि उनका नाम राजनीति में घसीटा जाए. हम चाहते हैं कि उनका ज़िक्र चुनावी मंचों से न हो.”

वे कहती हैं, “मैं चाहती हूँ कि मेरे पति के नाम का इस्तेमाल वोट के लिए नहीं होना चाहिए. हर चीज़ में उन्हें घसीट रहे हैं, कभी कांग्रेस करती है तो कभी बीजेपी.”

पिछले दो महीनों में कन्हैयालाल हत्याकांड का ज़िक्र तो बार-बार हुआ लेकिन कोई भी नेता परिवार से मिलने नहीं पहुंचा.

कन्हैयालाल की पत्नी जशोदा

कन्हैयालाल के छोटे बेटे तरुण तेली पिता की मौत के बाद सरकारी नौकरी कर रहे हैं. यह नौकरी राज्य सरकार ने उन्हें दी है. फ़िलहाल इस नौकरी से उन्हें 14,600 रुपये मिलते हैं.

पिता के नाम पर हो रही राजनीति से तरुण भी दुखी हैं. वे कहते हैं, “नेता अपनी-अपनी राजनीति करते हैं. मेरे पिता को चुनावी मुद्दा बना रखा है."

"दोनों पार्टियों की तरफ़ से मेरे पापा के नाम का फ़ायदा उठाया जा रहा है. हम चाहते हैं कि ऐसा न हो. हमने भाषण सुने हैं, हर जगह उनका ज़िक्र हो रहा है, जो ठीक नहीं है.”

कन्हैयालाल का बड़ा बेटा यश तेली
इमेज कैप्शन, कन्हैयालाल की हत्या के बाद राजस्थान सरकार ने उनके बेटे यश तेली को भी सरकारी नौकरी दी है.

न्याय मिलने पर करूंगा पिता का अस्थि विसर्जन

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कन्हैयालाल की मौत के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार ने परिवार को पचास लाख रुपये की आर्थिक मदद और दोनों बेटों को सरकारी नौकरी दी.

परिवार का कहना है कि इसके अलावा बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने क्राउड फंडिंग के ज़रिए उस वक्त एक करोड़ रुपये से ज़्यादा की मदद की थी.

लेकिन हत्या के दोषियों को सज़ा अब भी नहीं मिली है, जिसे लेकर परिवार नाराज़ है.

कन्हैयालाल के पत्नी जशोदा कहती हैं, “पैसों से उनकी तुलना नहीं हो सकती. त्योहार आए लेकिन उनके बिना मनाने की इच्छा ही नहीं होती. सरकार ने चार महीने के अंदर अपराधियों को फांसी दिलाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कुछ अता-पता नहीं है.”

फ़िलहाल यह मामला नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(एनआईए) के पास है.

कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश तेली कहते हैं, “एनआईए हमें केस के बारे में कुछ नहीं बताती. केस की जानकारी हमें भी वैसे ही मिलती है, जैसे न्यूज़ चैनलों से दूसरे लोगों को मिलती है. आज तक हमें चार्ज़शीट की कॉपी तक नहीं मिली है."

"देर से इंसाफ़ मिलना, इंसाफ़ नहीं मिलने की तरह है. अगर हमें दस पंद्रह साल बाद इंसाफ़ मिला भी तो उसका क्या मतलब रह जाएगा. फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलाने की तब बात हुई थी, लेकिन कहीं कुछ नहीं हो रहा है."

कन्हैयालाल के बड़े बेटे

यश कहते हैं, “हिंदुओं में अस्थि विसर्जन इसलिए करते हैं कि व्यक्ति की आत्मा को शांति मिले, लेकिन जब तक मेरे पिता को इंसाफ़ नहीं मिलेगा, तब तक उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी.”

पिता की मौत के बाद यश को भी राजस्थान सरकार ने सरकारी नौकरी दी है. वे उदयपुर में ही कोषाधिकारी कार्यालय में क्लर्क पद पर काम कर रहे हैं.

वह नौकरी पर नंगे पांव ही जाते हैं और इस दौरान उनके साथ एक पुलिसकर्मी हमेशा रहता है.

कन्हैयालाल हत्याकांड के अभियुक्त गौस मोहम्मद के पिता रफीक मोहम्मद ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, "बेटे से जेल में मुलाकात होती है. कोई वकील हमारा केस लड़ने के लिए तैयार नहीं है. हम कोशिश कर रहे हैं. फिलहाल एनआईए की तरफ से हमें एक सरकारी वकील मिली हैं, जो गौस और रियाज का केस लड़ रही हैं."

पिता रफीक का कहना है, "देश में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या करने वालों के भी तो केस वकीलों ने लड़े हैं लेकिन हमारी मदद करने कोई नहीं आ रहा है. देश में हर रोज कितने मर्डर हो रहे हैं लेकिन कन्हैयालाल की हत्या पर ही बात हो रही है. हर रोज़ अखबारों में छप रहा है. ये सब राजनीति की वजह से हो रहा है."

वे कहते हैं, "गौस मोहम्मद का एक बेटा और एक बेटी है. उसे जेल होने के बाद किसी प्राइवेट स्कूल ने हमारे बच्चों को स्कूल में एडमिशन नहीं दिया. एक स्कूल ने तो पैसे लेने के बाद भी एडमिशन नहीं दिया. अब वे मदरसे में पढ़ रहे हैं."

वे कहते हैं, "गौस मेरा इकलौता लड़का था. कोई मां-बाप नहीं चाहता कि उसका बच्चा ऐसा काम करे. हमें दुख है जो कन्हैयालाल के परिवार के साथ हुआ."

कन्हैयालाल की दुकान, जहां उनकी हत्या हुई
इमेज कैप्शन, कन्हैयालाल की दुकान, जहां उनकी हत्या हुई. इस दुकान को जांच एजेंसी एनआईए ने सील किया हुआ है.

वो दुकान, जहाँ हत्या हुई

घर से करीब 9 किलोमीटर दूर उदयपुर शहर की मालदास स्ट्रीट पर कन्हैयालाल ‘सुप्रीम टेलर्स’ नाम से दुकान चलाते थे, जो उन्होंने किराए पर ली हुई थी.

उनके बड़े बेटे यश बताते हैं, “नूपुर शर्मा की पैग़ंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी से जुड़ी एक पोस्ट मेरे पिता से शेयर हो गई थी, जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई और हमें उनकी बेल करवानी पड़ी. हमें पुलिस ने सतर्क रहने के लिए कहा था, उसी के चलते पापा ने एक हफ़्ते तक दुकान बंद रखी.”

वे बताते हैं, “पापा ने वापस से दुकान खोली तो उन्हें लगा कि कोई उन पर नज़र रख रहा है. पापा ने पुलिस में शिकायत की और वहाँ हिंदू-मुस्लिम पक्ष के लोगों ने बैठकर समझौता कर लिया. मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि आप दुकान खोलिए कोई दिक़्क़त नहीं होगी, लेकिन तीन चार दिन ही बीते थे कि दुकान पर उनकी हत्या कर दी गई.”

कन्हैयालाल की हत्या का वीडियो ऑनलाइन इतना वायरल हुआ कि राजस्थान में तनाव की स्थिति पैदा हो गई. हत्या के आरोप में पुलिस ने मोहम्मद रियाज़ और गौस मोहम्मद को गिरफ्तार किया था, जो अभी जेल में हैं.

इस वक्त ‘सुप्रीम टेलर्स’ के बाहर ताले लटके हुए हैं. जांच एजेंसी एनआईए ने दुकान को सील किया हुआ है.

गली में मौजूद एक दुकानदार ने कन्हैयालाल को याद करते हुए कहते हैं, “किराए पर कन्हैयालाल ने दुकान ली थी, उनकी मौत के बाद से यह बंद है. वे अच्छे आदमी थे, लोग बिना मतलब इन चुनावों में उनकी मौत का ज़िक्र कर रहे हैं, सिर्फ़ चुनावी फ़ायदा उठाना चाहते हैं.”

कन्हैयालाल
इमेज कैप्शन, कन्हैयालाल दुकान के अलावा घर पर भी सिलाई करने का काम करते थे. यह मशीन उन्होंने घर पर रखी हुई थी.

कन्हैयालाल हत्याकांड पर धुव्रीकरण

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "ये साफ़ है, जिस तरह से बर्बर हत्या की गई, सर धड़ से अलग किया गया, उन अपराधियों को कांग्रेस सरकार ने पकड़ने में ढिलाई बरती, उन्हें आम लोगों ने पकड़कर पुलिस को दिया. इस मामले में कांग्रेस सरकार ने लगातार देरी की. वह बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस है जो इस हत्याकांड पर राजनीति कर रही है."

पिछले पांच साल में राजस्थान के टोंक, डूंगरपुर, झालावाड़, करौली, जोधपुर, छबड़ा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, मेवात, मालपुर और जयपुर जैसे बड़े शहरों से सांप्रदायिक तनाव की ख़बरें आईं.

राज्य में क़रीब दस प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, वहीं अगर उदयपुर की बात करें तो यह क़रीब 15 प्रतिशत है.

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ कहते हैं कि कन्हैयालाल हत्याकांड का चुनावी मंचों से ज़िक्र कर पार्टियां अपने वोटरों को गोलबंद करने की कोशिश कर रही हैं.

वे कहते हैं, “जब किसी राजनीतिक व्यवस्था के पास विकास का ठोस कार्यक्रम नहीं होता तो वे जज्बात या भावनाओं में पनाह लेते हैं और भाषा, प्रांत, धर्म, जाति जैसे तत्वों की मदद से राजनीतिक पूंजी बनाना चाहते हैं. यही वजह है कि लोगों के मुद्दे छोड़कर कन्हैयालाल हत्याकांड का ज़िक्र किया जा रहा है.”

बारेठ मानते हैं कि राजस्थान का समाज समावेशी है और कन्हैयालाल हत्याकांड का इन चुनावों में कोई असर पड़ने वाला नहीं है.

सवाल है कि उदयपुर के स्थानीय लोग कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर क्या सोचते हैं. हमारी मुलाकात शाम के वक्त उदयपुर की फ़तहसागर झील किनारे सैर करने आए कुछ लोगों से हुई.

झील किनारे बैठे चैतन्य कुमार कहते हैं, “कन्यैहालाल हत्याकांड का जिस तरीके़ से बीजेपी वाले ज़िक्र कर रहे हैं उससे बीजेपी को फ़ायदा मिल सकता है. हर पार्टी इस तरह के मुद्दों को भुनाने की कोशिश करती है, ऐसे में बीजेपी भी वोट बैंक के लिए हत्याकांड पर राजनीति कर रही है. मुझे लगता है कि करीब बीस-तीस प्रतिशत फ़ायदा पार्टी को मिल सकता है.”

ऐसी ही बात उनके साथ आए सुभाष मेहता भी करते हैं. वे कहते हैं, “मुझे लगता है कि करीब 70 प्रतिशत हिंदू लोग कन्हैयालाल हत्याकांड को नज़र में रखकर वोट करेंगे. खुद मोदी जी ने अपनी सभाओं में इसे उठाया है. ये भड़कीला मुद्दा है, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है.”

वहीं अपने दोस्तों के साथ सैर करने आए मोहम्मद रफीक़ कहते हैं, “कन्हैयालाल हत्याकांड का ज़िक्र कर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है, पार्टियां सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए ऐसा कर रही हैं. मुझे नहीं लगता है कि लोग कन्हैयालाल हत्याकांड को ध्यान में रखकर वोट करेंगे.”

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