यूपी: 'लव जिहाद' के शोर में बेज़ुबान हो गई पिंकी-राशिद की कहानी

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- Author, चिंकी सिन्हा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
घर के बाहर जिस चीज़ पर आपकी नज़र सबसे पहले जाती है वह है एक मुड़ा हुआ पेड़, जो ठूंठ खड़ा है. पेड़ की डालियां झुककर दरवाजों और छतों तक पसर गई हैं.
यहां दो घर हैं और दोनों घरों की खिड़कियां लगभग जुड़ी हुई हैं. इनमें से एक घर राशिद के अब्बा मोहम्मद रज़ा अली का है.
कुछ वक्त पहले इस घर की एक युवा महिला अपने पति का इंतजार कर रही थी. उसके लिए ये दर्द भरे दिन थे. लेकिन पति जेल से लौटा तो उसने मुस्कुराकर उसका स्वागत किया. पति को इस आरोप में जेल भेजा गया था कि उसने ज़बरदस्ती उसका धर्म बदलवा कर उससे शादी की थी. 'लव जिहाद' का मुद्दा उठाकर कुछ संगठनों ने बवाल मचाया और पति को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
पिंकी का कहना है कि उसने अपनी मर्ज़ी से छह महीने पहले राशिद से शादी की थी.
पिंकी का आरोप है कि जब वह नारी निकेतन में थीं तो उनका गर्भपात हो गया था. लेकिन कहा गया कि वह झूठ बोल रही हैं. पिंकी बार-बार कहती रहीं कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से राशिद से शादी की है.
जेल भेजे गए राशिद की रिहाई के लिए उन्होंने क़ानूनी जंग भी लड़ी. पति जेल से लौट आया. लेकिन अब वह इस घर में नहीं रहतीं. वो यहां से जा चुकी हैं. अब इस पुराने कमज़ोर मकान में ताला जड़ा है और सामने खड़ा है एक अजीब-सा ठूंठ पेड़.
पिंकी और इस घर के बारे में यहां कोई बात नहीं करता. सब कहते हैं वक्त अच्छा नहीं है.
आस-पड़ोस में सन्नाटा पसरा हुआ है. यहां अब सिर्फ़ राशिद के पिता रहते हैं. सड़क की दूसरी ओर दुकान पर बैठी बूढ़ी महिला कहती हैं कि राशिद का अब्बा शराबी है.
वो कहती हैं, "वो क्या कहेगा? छोटा-मोटा काम करता है, जो पैसे मिलते हैं शराब में उड़ा देता है और हम क्या कहें. हमें इस बारे में कुछ पता नहीं है. हम उन्हें नहीं जानते".

राशिद के बरेली जेल से रिहा होने के बाद यह युवा जोड़ा यहां से चला गया. अपनी कहानी बताने के लिए ये जोड़ा अब यहां मौजूद नहीं है.
उनके वकील जुल्फ़िकार ठेकेदार कहते हैं कि मामला अब ख़त्म हो गया है. वो कहते हैं, "वो ग़रीब हैं. उन्हें इस बात का भी डर है कि वो मुसलमान हैं. वो किसी के ख़िलाफ़ मुक़दमा नहीं करना चाहते. वो तो केस के बारे में बात भी नहीं करना चाहते."
ठेकेदार कहते हैं कि उन्होंने अपने वॉट्सऐप और ई-मेल से इस केस से संबंधित दस्तावेज़ डिलीट कर दिए हैं. कुछ वक्त पहले तक पिंकी का मामला सुर्खियों में था. उन्होंने आरोप लगाया था कि नारी निकेतन में उनका गर्भपात हो गया है. पुलिस ने पति की गिरफ़्तारी के बाद उन्हें नारी निकेतन भेजा था.
पिंकी का जो वीडियो वायरल हुआ था उसमें पुलिस थाने के अंदर बजरंग दल के कार्यकर्ता उनके ख़िलाफ़ हंगामा करते और नारे लगाते दिख रहे हैं. उनसे बार-बार अपनी शादी के कागज़ात दिखाने को कहा जा रहा है. लेकिन शादी के कागज़ात दिखाने के बावजूद बजरंग दल के कार्यकर्ता यह आरोप लगाते रहे कि राशिद ने ज़बरदस्ती धर्म बदलवा कर उससे शादी की है.

पिंकी-राशिद कहां गए, किसी को पता नहीं
किसी को पता नहीं कि राशिद और पिंकी अब कहां हैं. कुछ लोग कहते हैं कि वे लोग देहरादून चले गए, जहां राशिद एक सैलून में काम करता था. यहीं पर पहली बार दोनों की मुलाक़ात हुई थी. लेकिन राशिद के पिता का कहना है कि वे लोग रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं. उनके पास पैसा नहीं था और उन्हें डर था कि घर पर रहे तो उनकी हत्या हो जाएगी.
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का कांठ सांप्रदायिक लिहाज़ से एक संवेदनशील जगह है. यहां पहले भी दंगे हो चुके हैं.
2014 में एक धार्मिक विवाद को लेकर यहां 'महापंचायत' बुलाने की अपील की गई थी. इसी दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक बड़े जत्थे का पुलिस से आमना-सामना हुआ था. इससे पहले 2013 में सितंबर महीने के दौरान मुजफ्फरनगर में महापंचायत हुई थी. इसी महापंचायत के बाद मुजफ्फरनगर में दंगे भड़क उठे थे. इस दंगे में 60 लोग मारे गए थे और 40 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए थे.
यहां वही एक पुराना सिंड्रोम फैलाया गया कि हिंदुओं की आबादी घटती जा रही है. अंतर-धार्मिक शादियों के विरोध के पीछे यही सिंड्रोम काम करता है. इसी वजह से कुछ संगठन इस तरह के विवाह के ख़िलाफ़ खड़े हो जाते हैं.
पिंकी बिजनौर ज़िले की रहने वाली हैं. लॉकडाउन के दौरान जुलाई में देहरादून में राशिद से शादी के बाद पिंकी ने अपना नाम बदल कर 'मुस्कान जहान' रख लिया था. देहरादून में पिंकी एक लोन एजेंट के तौर पर काम करती थीं. वहीं 2019 में उनकी राशिद से मुलाकात हुई. लॉकडाउन के दौरान 2020 में उन्होंने शादी कर ली और फिर राशिद के साथ मुरादाबाद उनके घर आ गई है.

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राशिद के पिता यहीं रहते हैं. लोगों ने उन्हें अपनी शादी 'रजिस्टर्ड कराने की' सलाह दी क्योंकि तब तक यूपी में धर्मांतरण के ख़िलाफ़ अध्यादेश आ चुका था. राशिद की मां की मौत हो गई थी. 2003 में उनके पिता मोहम्मद रज़ा ने दूसरी शादी कर ली थी. मोहम्मद रज़ा कहते हैं कि वे राशिद और उसकी पत्नी को अपने घर में घुसने नहीं देंगे और उन्हें संपत्ति में भी कोई हिस्सा नहीं देंगे.
मोहम्मद रज़ा कहते हैं, "उन्होंने मेरी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी की. मैं क्या करूं? जेल जाऊं? मैंने उन्हें कोर्ट न जाने के लिए कहा था लेकिन पिंकी शादी को रजिस्टर्ड कराने पर अड़ी हुई थी. उन्होंने इसके लिए वकील को सात हज़ार रुपये भी दिए."
मोहम्मद रज़ा अकेले रहते हैं और वे डरे हुए हैं. फ़ोन पर बातचीत के दौरान कभी कहते हैं कि जो हुआ वे उससे डरे हुए हैं, तो कभी कहते हैं कि उनकी बहू ग्रेजुएट है, उसने बीए फाइनल की परीक्षा पास कर ली है.
पांच दिसंबर को पिंकी और राशिद अपनी शादी की रजिस्टरी के लिए मुरादाबाद तहसील गए थे लेकिन वहां उन्हें बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने घेर लिया और शादी के दस्तावेज़ मांगने लगे. ये लोग उन्हें पुलिस थाने ले गए.
नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर राशिद के एक पड़ोसी और पारिवारिक दोस्त ने कहा कि "जब पिंकी ने पुलिस को कहा कि उसने छह महीने पहले अपनी मर्ज़ी से राशिद से शादी की है और वह नाबालिग है तो पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया."
पड़ोसी ने कहा, "बग़ैर सबूत के पुलिस उन्हें पकड़ कर नहीं रख सकती थी. लेकिन बजरंग दल के लोगों ने उन्हें थाने में बंद करवाए रखा. इसके लिए वे बिजनौर से पिंकी की मां को ले आए और उनसे बेटी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर करवाई. नए क़ानून की वजह से ही पुलिस उन्हें पकड़ कर रख सकी."
राशिद को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया और मुस्कान जहान को कथित तौर पर आठ घंटे से अधिक देर तक पुलिस थाने में रखा गया. इसके बाद छह दिसंबर को रात दो बजे उसे मुरादाबाद के नारी निकेतन भेज दिया गया.

मां से ही करवाई बेटी के ख़िलाफ़ शिकायत
पिंकी की मां बाला देवी अनसूचित जाति से हैं और बिजनौर के एक गांव में रहती हैं. आईपीसी की धारा 154 के तहत कांठ थाने में 5 दिसंबर को दायर की गई बाला देवी की एफ़आईआर में कहा गया है कि राशिद और उसके भाई सलीम ने धोखाधड़ी की और राशिद ने पिंकी का धर्म बदलवाने के लिए उससे शादी की.
बीबीसी न्यूज़ के पास इस एफ़आईआर की कॉपी है. पिंकी की मां ने इसमें कहा है कि राशिद उनकी बेटी को 1 दिसंबर, 2020 को उनके घर से ले आया था. जब उनका परिवार अपनी बेटी को बचाने कांठ पहुंचा तो उन्हें राशिद के मुसलमान होने का पता चला. परिवार का आरोप है कि राशिद ने उनसे अपनी पहचान छिपाई थी.
पिंकी की मां ने अपनी शिकायत में लिखा है कि उन्होंने अपनी बेटी को बुर्के में देखा और राशिद के पड़ोस से पकड़ कर ले आई. रात आठ बजे वह राशिद और अपनी बेटी को थाने ले गईं.
"मेरी बेटी डरी हुई थी क्योंकि उन्होंने उसे धमकी दी थी. इसी वजह से मैं एफ़आईआर करा रही हूं".
एफ़आईआर पर पिंकी की मां बाला देवी के अंगूठे का निशान था. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्होंने एफ़आईआर टाइप करवाई है. इसलिए बाला देवी का नाम भी टाइप किया गया है.
एफ़आईआर संख्या 484/2020 में राशिद और उनके भाई सलीम को आरोपी बनाया गया है. दोनों के ख़िलाफ़ पुलिस ने उत्तर प्रदेश ग़ैरक़ानूनी धर्मांतरण निरोधक अध्यादेश, 2020 की सेक्शन (3) और सेक्शन 5 (1) के तहत मुक़दमा दर्ज किया था.
फ़ोन पर बातचीत के दौरान बाला देवी कुछ अलग बात कर रही थीं. उन्होंने कहा, "ये हमारी इज़्ज़त की बात थी. हमारी लड़की गायब हो गई थी. बजरंग दल के लोगों ने हमारी मदद की."
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने एफ़आईआर क्यों की तो वह कहती हैं कि उन्हें कुछ नहीं पता. फिर कहती हैं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पिंकी को ढूंढने में मेरी मदद की.
पिंकी को कुछ दिनों तक नारी निकेतन में रखा गया और फिर स्थानीय सरकारी अस्पताल में ले जाया गया. पिंकी को राशिद के परिवार से 15 दिसंबर को मिलाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि नारी निकेतन में उन्हें प्रताड़ित किया गया. जब उसने रक्तस्राव की शिकायत की तो न तो उसे ठीक से दवा दी गई और न ही इलाज करवाया गया. इस वजह से उसका गर्भपात हो गया. लेकिन पुलिस और नारी निकेतन प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किया है.
राशिद की रिहाई के बाद जोड़े ने कहा कि वे मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते. उनका इरादा किसी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराना नहीं है.
राशिद के वकील ठेकेदार ने कहा, "वे इतने ताकतवर नहीं हैं कि बजरंग दल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराएं. हमने राशिद के पिता की वजह से मामला वापस ले लिया. वह साथ नहीं दे रहे थे."
मुरादाबाद की कांठ तहसील में 54 फीसदी आबादी हिंदू हैं और लगभग 44 फीसदी मुसलमान. राशिद का घर पत्तेगंज की पिछली गलियों में है. राशिद और पिंकी 2020 के सितंबर महीने में घर लौटे थे. लॉकडाउन के दौरान राशिद की नौकरी छूट गई थी. उन्होंने अपने माता-पिता को बताया कि जुलाई में उन्होंने पिंकी से शादी की थी. पड़ोसियों का कहना था कि परिवार ने शादी को मंजूर कर लिया था.

हिंदू लड़कियों को बचाने दावा
मोनू विश्नोई ख़ुद को कांठ में बजरंग दल का संगठनकर्ता बताते हैं. वो गले में गेरुए रंग का गमछा डालकर चलते हैं. इस इलाक़े में उन्हें हर कोई जानता है. युवा नोटरी और वकील उनके आने पर खड़े होकर उनसे हाथ मिलाते हैं, उन्हें नमस्ते करते हैं.
एक स्थानीय रिपोर्टर हमेशा उनके साथ चलती हैं. मोनू के फ़ोन पर आने वाली कॉल का जवाब वही देती हैं.
वह कहती हैं, "पहले मैं हिंदू हूं उसके बाद रिपोर्टर. हिंदू धर्म को बचाने के लिए जो किया जाना चाहिए मोनू वह सब कर रहे हैं."
विश्नोई ने ही पिंकी और राशिद की रिपोर्ट पुलिस को दी थी. लेकिन मोनू का कहना है कि दोनों के ख़िलाफ़ हंगामे में उनका हाथ नहीं था. हमने पूछा, "लेकिन वीडियो में तो आपके समर्थक थाने में लड़की से दस्तावेज़ दिखाने की मांग कर रहे हैं. आपके पास इस तरह दस्तावेज़ मांगने का कोई क़ानूनी अधिकार है?"
वह कहते हैं, "लड़की हमें ग़लत दस्तावेज़ दिखा रही थी. उस वक्त हमारे कार्यकर्ताओं ने उससे कुछ सवाल पूछ लिए इसमें गलत क्या है?"
35 साल के मोनू विश्नोई सात साल पहले बजरंग दल में शामिल हुए थे. मेन मार्केट में उनकी एक दुकान है.
मोनू कहते हैं कि वह स्थानीय आरएएस नेतृत्व से बेहद प्रभावित हैं और उन्होंने अपने समुदाय की सेवा करने का व्रत लिया है.
वह कहते हैं "हम हिंदू समाज की महिलाओं को बचाना चाहते हैं. इन महिलाओं को 'लव जिहाद' से बचाना हमारा काम है."
"यह सब यहां काफी लंबे समय से चल रहा है. लेकिन हमारे पास अपने लोगों का एक नेटवर्क है जो हमें इस तरह के मामलों के बारे में बताता रहता है और फिर हम दखल देते हैं. महिलाओं को वही करना चाहिए जो उनके परिवार और समुदाय के हित में हो. हमने ऐसी शादियों को होने से रोका है. हम आपको यह तो नहीं बताएंगे कि हमारे काम करने का तरीका क्या है. लेकिन हमारा अपना सिस्टम है और हमारे पास इस तरह की शादियों की जानकारी देने वाले लोग है. इन्हीं सूचनाओं के आधार पर हम पुलिस को एक्शन लेने को कहते हैं".

हालांकि विश्नोई कहते हैं कि पिंकी के बारे में सूचना उन्हें उनके लोगों ने नहीं दी थी, बल्कि पिंकी की मां ही उनसे मदद मांगने पहुंची थीं.
लेकिन राशिद के पड़ोसी का कहना है कि बजरंग दल के लोगों ने ही पिंकी की मां को लाकर बेटी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर करवाई थी. पिंकी के दस्तावेज़ों और निकाहनामे से उन्हें उसके घर का पता मालूम हो गया था. आप सोचिए, अगर पिंकी की मां को आपत्ति थी तो उन्होंने पहले रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवाई."
पड़ोसी कहते हैं, "बजरंग दल के लोग पिंकी की मां को अपनी कार में बैठा कर कांठ लाए थे. उन्होंने ही उनसे राशिद के ख़िलाफ़ शिकायत करने को कहा. पुलिस ने बजरंग दल के दबाव में बाध्य होकर केस दर्ज किया."

पुलिस ने साध रखी है चुप्पी
कांठ तहसील में छजलैट पुलिस थाने के सर्किल अफ़सर बलराम सिंह
थाने की बिल्डिंग में बलराम सिंह दोपहर की धूप सेंकते हुए अपने कुछ दूसरे पुलिस अधिकारियों के साथ बैठे हुए थे.
उन्होंने कहा कि उनके पास इस मामले में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन कई रिपोर्टों में उनके हवाले से कहा गया है कि पिंकी अपनी शादी को सही ठहराने के पक्ष में कोई दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाई थी.
वे कहते हैं, "मुझे इस केस के बारे में कुछ पता नहीं. लेकिन बजरंग दल का इससे कोई लेना-देना नहीं है."
वे हमें कांठ पुलिस थाने के इंचार्ज अजय कुमार गौतम से मिलने को कहते हैं. वे कहते हैं, "मैं यहां आपके सवालों का जवाब देने के लिए नहीं बैठा हूँ. पूरे जहान का ठेका ले रखा है क्या".
हमने पूछा, "वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि बजरंग दल के कार्यकर्ता लड़की के ख़िलाफ़ हंगामा कर रहे हैं तो आपने उन्हें गिरफ़्तार क्यों नहीं किया?".
इस पर उन्होंने कहा, "लड़की की मां और बहन शिकायत दर्ज कराने थाने आई थीं. पिंकी इसके बाद नारी निकेतन जाने के लिए तैयार हो गई थी. बजरंग दल का इससे कोई लेना-देना नहीं है. हम क़ानून के हिसाब से काम कर रहे हैं. जब तक लड़की नारी निकेतन में थी तब तक उसका गर्भपात नहीं हुआ था. हमारे पास इतनी ही जानकारी है. जब लड़की ने कह दिया है कि उसने अपनी मर्ज़ी से शादी की है तो फिर वह घर जा सकती है. अब आप जा सकते हैं."
पिंकी को मुरादाबाद सेशन कोर्ट में पेश किया गया था. कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से कहा है कि वे पिंकी को नारी निकेतन से उनके ससुराल भेज दें. पिंकी ने कोर्ट से गुज़ारिश की थी उनके पति और जेठ को छोड़ दिया जाए.
मुरादाबाद की एएसपी (ग्रामीण) विद्यासागर मिश्रा कहते हैं उन्हें मीडिया से बात करने की इजाज़त नहीं है क्योंकि पुलिस अभी तक मामले की जांच कर रही है.
अब हम उस गली में खड़े हैं जहां कुछ महीने पहले तक पिंकी और राशिद रहते थे. मकान के सामने झुकी डालियों वाला ठूंठ पेड़ अभी भी चुपचाप खड़ा है. घर पर ताला पड़ा है. जो कुछ भी हुआ था उसे कोई मानने को तैयार नहीं. हर कोई इसे भुला कर अपनी ज़िंदगी में रमा हुआ है. सिर्फ़ वे नहीं भूले हैं जिनके साथ यह सब कुछ घटा और जो यहां का आशियाना छोड़ कर कहीं दूर चले गए हैं.
उनका जाना अपने साथ घटी घटना को भुला कर आगे बढ़ जाना नहीं है. वे सिर्फ़ यहां से चले गए हैं, कहीं और, ज़िंदगी जीने की कोशिश करने के लिए.

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