मुस्लिम-हिन्दू जोड़े को बजरंग दल ने रोका, लड़के को भेजा गया जेल – प्रेस रिव्यू

बजरंग दल

इमेज स्रोत, Getty Images

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में शनिवार को अंतर-धार्मिक विवाह का रजिस्ट्रेशन कराने जा रहे एक जोड़े को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया और उन्हें पुलिस थाने लेकर गए.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020' के भाग-3 के तहत राशिद और उनके भाई सलीम पर मामला दर्ज करके उसे जेल भेज दिया गया.

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हो रहा है जिसमें गले में भगवा गमछा बांधे बजरंग दल के कार्यकर्ता महिला से कांठ पुलिस थाने में सवाल कर रहे हैं.

एक कार्यकर्ता महिला से पूछ रहा है, "हमें डीएम की अनुमति दिखाओ कि तुम अपना धर्म बदल सकती हो."

दूसरा आदमी पूछता है, "क्या तुमने नया क़ानून पढ़ा है या नहीं."

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कांठ पुलिस स्टेशन पर रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में दिख रहा है कि लड़की निकाहनामे की एक कॉपी दिखा रही है जिसमें उसका मुस्लिम नाम है और उसी रीति-रिवाज से शादी की है.

लड़की सबूत के तौर पर अख़बार में छपा विज्ञापन भी दिखा रही है जिसमें उसने अपना नाम बदला था. उत्तर प्रदेश में जो नया क़ानून पास हुआ है उसमें शादी के लिए धर्मपरिवर्तन को प्रतिबंधित कर दिया गया है लेकिन इस लड़की की शादी नया क़ानून आने से पहले हुई है.

कांठ पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अजय गौतम ने कहा कि लड़की की मां की शिकायत के बाद राशिद और उनके भाई सलीम के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की गई है. लड़की की मां का आरोप है कि राशिद ने उनकी बेटी के आगे अपनी असली पहचान छिपाई और वो अब उनकी बेटी पर धर्मांतरण का दबाव डाल रहा था.

हालांकि, वायरल वीडियो में 22 वर्षीय लड़की का कहना है कि वो बालिग़ है और पाँच महीने पहले उन्होंने राशिद से शादी की थी और वो इसका पंजीकरण कराने के लिए कोर्ट आई थीं. अभी यह साफ़ नहीं है कि लड़की ने अपना धर्म परिवर्तन किया है या नहीं.

यूपी में 24 नवंबर से लागू हुए इस अध्यादेश के ज़रिए शादी के लिए किए गए धर्म परिवर्तन को आपराधिक बना दिया गया है. धर्म परिवर्तन के लिए पहले डीएम से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है.

महिलाएं

इमेज स्रोत, NOAH SEELAM/AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, प्रतीकात्मक तस्वीर

आंध्र प्रदेश में रहस्यमय बीमारी के 300 मामले, एक की मौत

आंध्र प्रदेश के एलुरू शहर में बीते कुछ दिनों में एक रहस्यमय बीमारी से ग्रस्त 300 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि अब तक 170 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और टेस्ट के रिज़ल्ट आना अभी बाक़ी हैं.

शनिवार आधी रात को सरकारी जनरल अस्पताल में 55 मरीज़ आए थे इसके बाद रविवार को यह संख्या 170 हो गई. रविवार शाम को मरीज़ों की संख्या 270 थी जबकि आधी रात तक यह संख्या 315 तक पहुंच गई.

वहीं, कुछ अपुष्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग-अलग निजी अस्पताल में 50 से अधिक मरीज़ों का इलाज चल रहा है.

मरीज़ों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि मरीज़ों में चक्कर आने, सिरदर्द और मिर्गी के लक्षण थे.

राज्य के उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अल्ला कली कृष्ण श्रीनिवास ने कहा है कि मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने हालात के बारे में जानकारी ली है. स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि घर-घर जाकर सर्वे किए गए हैं और स्थिति नियंत्रित है.

उनका कहना था कि बेहतर इलाज के लिए 7 मरीज़ों को विजयवाड़ा ले जाया गया है जहां उनकी हालत स्थिर है.

डॉक्टरों का कहना है, "पानी, खाने और ख़ून के नमूने फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफ़एसएल) को भेजे गए हैं. अभी रिपोर्ट का इंतज़ार है. मरीज़ों के सीटी स्केन और एक्स-रे की रिपोर्ट सामान्य है. सभी मरीज़ों का कोविड-19 टेस्ट किया गया है और वे नेगेटिव पाए गए हैं."

ओली और मोदी

इमेज स्रोत, HINDUSTAN TIMES via Getty Images

नक़्शा विवाद पर नेपाल फ़िलहाल पीछे हटने को राज़ी नहीं

भारतीय विदेश सचिव की नेपाल यात्रा और दोनों देशों के बीच नए सिरे से हो रहे जुड़ाव के बीच यह साफ़ दिख रहा है कि नेपाल कालापानी विवाद से फ़िलहाल पीछे नहीं हट रहा है.

अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस साल की विदेश नीति रिपोर्ट में नेपाल के नए नक़्शे का ज़िक्र किया है. नेपाल की विदेश नीति की रिपोर्ट उस समय पर आई है जब इस महीने विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली भारत दौरे पर आने वाले हैं.

2019-20 की नेपाल की विदेश नीति की रिपोर्ट में नए प्रशासनिक और राजनीतिक नक़्शे के फ़ैसले का समर्थन किया गया है और कहा गया है कि यह भारत के कारण है क्योंकि उसने अपने नक़्शे में सुधार नहीं किया है.

नेपाल ने अपने नक़्शे में कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया है.

रिपोर्ट में ज्ञावली की टिप्पणी भी है जिसमें वो कहते हैं कि वो इस बात को लेकर उन्हें विश्वास है कि बाहरी सीमाओं के मुद्दे को रचनात्मक संवाद और 'ऐतिहासिक संधि, सुबूतों और तथ्यों' के ज़रिए सुलझा लिया जाएगा.

ज्ञावली इस महीने अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ संयुक्त आयोग की छठी बैठक के लिए भारत आने वाले हैं.

ओएनजीसी

इमेज स्रोत, Budrul Chukrut/SOPA Images/LightRocket via Getty

सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से पीएम केयर्स फ़ंड में 155 करोड़ गए

कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फ़ंड के 2,400 करोड़ रुपयों के अलावा 100 से अधिक सरकारी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की तनख़्वाह में से पीएम केयर्स फ़ंड में 155 करोड़ रुपये दिए थे.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने आटीआई के ज़रिए बताया है कि ओएनजीसी ने अपने कर्मचारियों की तनख़्वाह में से 29.06 करोड़ रुपये दिए. वहीं, बीएसएनएल ने 11.43 करोड़ रुपये दिए.

आरटीआई के ज़रिए अख़बार को पता चला है कि 24 सरकारी कंपनियों ने 1 करोड़ से अधिक का फ़ंड स्टाफ़ की सैलरी में से पीएम केयर्स फ़ंड में दिया है.

इस फ़ंड का प्रबंधन करने वाला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) एक आरटीआई के जवाब में कह चुका है कि पीएम केयर्स फ़ंड आरटीआई एक्ट के तहत आने वाला सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है और इससे जुड़ी जानकारी को इसकी वेबसाइट पर देखा जा सकता है.

ग़ौरतलब है कि कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी घोषणा की थी जिसके बाद इस साल 28 मार्च को इसकी शुरुआत की गई. 31 मार्च तक इसमें 3,076.62 करोड़ आ गए थे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबर फ़ॉलो भी कर सकतेहैं.)