शंभूलाल रैगर के मामले में पांच साल बाद जांच कहां तक पहुंची? - प्रेस रिव्यू

राजसमंद केस

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उदयपुर के दर्ज़ी कन्हैया लाल और अमरावती के उमेश की हत्या के मामले की जांच अब एनआईए कर रही है लेकिन इसी दौरान अब राजसमंद मामले की भी चर्चा हो रही है.

राजसमंद में पांच साल पहले हुई एक जघन्य हत्या के मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

एक मुसलमान मज़दूर की लगभग पांच साल पहले हुई हत्या के मामले में अभी भी कार्रवाई शुरुआती चरण में ही है.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, राजस्थान के इस हत्या मामले में अभी भी मुख्य अभियुक्त शंभूलाल रैगर के बयान ही दर्ज हो रहे हैं.

साल 2017 में राजस्थान के राजसमंद में एक व्यक्ति की हत्या का वीडियो वायरल होने के बाद अभियुक्त शंभूलाल को गिरफ़्तार किया गया था. शंभुलाल ने हत्या के वीडियो के अलावा दो और वीडियो शेयर किए थे जिनमें से एक में वो मंदिर में हैं और हत्या की ज़िम्मेदारी ले रहे हैं जबकि दूसरे वीडियो में वो भगवा ध्वज के सामने बैठे हैं और 'लव जिहाद' और 'इस्लामिक जिहाद' के ख़िलाफ़ भाषण दे रहे हैं.

वहीं मृतक मोहम्मद अफराज़ुल पिछले 12 सालों से शहर में रह रहे थे. वो मूल रूप से बंगाल के रहने वाले थे और राजसमंद में रहकर मज़दूरी करते थे.

हालांकि रैगर फिलहाल जोधपुर की उच्च सुरक्षा वाली सेंट्रल जेल में बंद हैं और विचाराधीन कैदी हैं. उके ख़िलाफ़ राजसमंद के सत्र न्यायालय में मामला चल रहा है.

द हिंदू ने राजसमंद के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के हवाले से लिखा है कि उन पर ट्रायल चल रहा है और अभी यह सुबूतों की रिकॉर्डिंग के चरण में है और गवाहों का परीक्षण हो रहा है.

उमेश कोल्हे
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अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या का किसे बताया जा रहा 'मास्टरमाइंड'

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राजस्थान के उदयपुर और महाराष्ट्र के अमरावती में लगभग एक ही पैटर्न से दो अलग-अलग लोगों की हत्या हुई. 21 जून को अमरावती में एक केमिस्ट उमेश कोल्हे की बीच सड़क पर चाकू से गला काटकर हत्या कर दी गई थी. वहीं उदयपुर मामले में दो अभियुक्तों ने दर्ज़ी कन्हैया लाल की दुकान में घुसकर उनकी चाकू से हमला करके हत्या कर दी.

दोनों हत्याओं में हत्या के पैटर्न के साथ-साथ बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को समर्थन करने का एंगल भी समान है. कन्हैया लाल ने एक सोशल पोस्ट में नूपुर शर्मा का समर्थन किया था और दूसरी ओर केमिस्ट उमेश की हत्या को भी नूपुर शर्मा के समर्थन वाले एक पोस्ट को वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर करने से जोड़कर देखा जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, अब उदयपुर मामले की तरह ही अमरावती मामले की जांच भी एनआईए करेगी.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) उमेश कोल्हे की हत्या की जांच करेगी. द इंडियन एक्सप्रेस ने दो जुलाई को यह ख़बर दी थी कि उमेश कोल्हे की अमरावती तहसील कार्यालय के पास रचनाश्री मॉल में अमित वेटरनरी नामक एक मेडिकल शॉप है.

21 जून की रात वो अपनी मेडिकल शॉप बंद करके घर जा रहे थे. रात करीब साढ़े दस बजे चार-पांच हमलावरों ने उन्हें पकड़ लिया, चाकू से उमेश का गला काट दिया और फरार हो गए. उमेश के बेटे संकेत ने उन्हें पास के एक निजी अस्पताल में पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

उमेश कोल्हे 'ब्लैक फ्रीडम' नाम के एक व्हॉट्सऐप ग्रुप के सक्रिय सदस्य थे. इस ग्रुप में हिन्दू समर्थक पोस्ट शेयर किए जाते थे. कुछ दिन पहले उमेश कोल्हे ने भी नूपुर शर्मा के विवादित बयान के समर्थन में यहां एक पोस्ट किया था.

अमरावती पुलिस को संदेह है कि वही पोस्ट समूह के बाहर वायरल हो गया होगा. ऐसी आशंका है कि उमेश कोल्हे पर इसलिए हमला किया गया था क्योंकि उन्होंने 'ग़लती से' इसे एक मुस्लिम समूह को भेज दिया था.

इरफ़ान नामक युवक को पुलिस ने इस घटना का मास्टरमाइंड बताया है

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इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को पहले गिरफ़्तार कर लिया गया था. इसके बाद शनिवार को पुलिस ने दो और संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है. गिरफ़्तार किए गए एक संदिग्ध का नाम इरफ़ान ख़ान है, जिसे इस मामले का 'मास्टरमाइंड' माना जा रहा है. इरफ़ान एक एनजीओ चलाते हैं और उनके साथी यूसुफ़ ख़ान एक पशु-चिकित्सक हैं.

इरफ़ान को नागपुर से शनिवार देर रात गिरफ़्तार किया गया है और यूसुफ़ को अमरावती से.

अमरावती सिटी की पुलिस कमिश्नर आरती सिंह ने इरफ़ान की गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए उसे 'मास्टरमाइंड' बताया. उन्होंने जानकारी दी है कि इरफ़ान के बैंक खातों की पड़ताल हो रही है.

इरफ़ान पर आरोप है कि उसी ने इस हत्या की सारी योजना बनाई और हर संदिग्ध को एक ख़ास ज़िम्मेदारी सौंपी. उसी ने हथियार और मोटर-साइकिल और दूसरी चीज़ों का भी इंतेज़ाम किया.

अमरावती के डिप्टी पुलिस कमिश्नर विक्रम साली ने बताया कि हत्या के पीछे का मक़सद नूपुर शर्मा के समर्थन में कोल्हे की पोस्ट का बदला लेना था.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रमन्ना

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न्यायपालिका सिर्फ़ संविधान के प्रति जवाबदेह- भारत के चीफ़ जस्टिस रमन्ना

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भारत के चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना ने 'लोकतंत्र में न्यायपालिका' विषय पर अपने एक संबोधन में कहा कि न्यायपालिका सिर्फ़ संविधान के प्रति जवाबदेह है, ना की किसी राजनीतिक दल और विचारधारा के प्रति.

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के अनुसार, भारत के चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना ने अपने संबोधन में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की कोशिश करने वाली 'ताक़तों' पर निशाना साधते हुए यह बात कही.

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी चाहती है कि न्यायपालिका, सरकार के हर क़दम का समर्थन करे जबकि विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि न्यायपालिका अपने पद और कारणों से आगे निकलकर काम करे.

सैन फ्रांसिस्को में एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन-अमेरिकन्स के एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह बात कही.

उन्होंने कहा, "जैसा कि हम इस साल आज़ादी के 75वें वर्ष का जश्न मनाने जा रहे हैं और हमारा गणतंत्र अपने 72 साल देख चुका है, मैं यहां ये ज़रूर जोड़ते हुए कहना चाहता हूं कि हमने अभी तक संविधान के द्वारा हर संस्थान को सौंपी गई उसकी भूमिका और ज़िम्मेदारियों का सम्मान करना नहीं सीखा है."

उन्होंने कहा, "मैं ये बात खेद के साथ कह रहा हूं."

उन्होंने कहा, "सत्ताधारी पार्टी का मानना है कि न्यायपालिका हर सरकारी कार्रवाई का समर्थन करे. विपक्षी दल न्यायपालिका से अपने राजनीतिक पदों और कारणों को आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं."

राहुल गांधी

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राहुल गांधी का 'ग़लत' वीडियो शेयर करने पर राज्यवर्धन सिंह राठौर के ख़िलाफ़ एफ़आईआर

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बीजेपी के सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर और ज़ी-न्यूज़ के एंकर रोहित रंजन के ख़िलाफ़ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक वीडियो को ग़लत तरीके से पेश करने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज हुई है.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, राहुल गांधी फिलहाल अपने निर्वाचन क्षेत्र वायनाड में हैं जहां उन्होंने शुक्रवार को अपने स्थानीय कार्यालय में हुई तोड़फोड़ का जायज़ा लिया. इस दौरान उन्होंने जो बयान दिया उसे न्यूज़ चैनल ने ग़लत तरीक़े से और ग़लत रेफ़रेंस के साथ पेश किया. न्यूज़ चैनल के इसी क्लिप को राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भी शेयर किया, जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

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एक ओर जहां, राहुल गांधी वायनाड के अपने कार्यालय के बारे में बात कर रहे थे तो वहीं न्यूज़ चैनल ने उसे उदयपुर की घटना से जोड़कर पेश किया.

राहुल गांधी ने शुक्रवार को कांग्रेस के वायनाड ऑफ़िस पर हुए हमले को लेकर बयान दिया था. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि बीजेपी और आरएसएस की वजह से आज देश में नफरत का माहौल बन गया है. इसमें उन बच्चों की कोई ग़लती नहीं, जिन्होंने ऐसा काम किया.

उनकी इसी टिप्पणी को उदयपुर हत्याकांड से जोड़कर पेश किया गया था. हालांकि चैनल ने उस वीडियो के लिए माफ़ी मांग ली है.

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