नमाज़ पढ़ते लोगों को पुलिसकर्मी के लात मारने के बाद क्या-क्या हुआ: ग्राउंड रिपोर्ट

नमाज़ी को लात मारता पुलिसकर्मी

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इमेज कैप्शन, जब नमाज़ी सजदे में थे, पुलिसकर्मी ने लात मारकर उन्हें हटाने की कोशिश की
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली का इंद्रलोक इलाक़ा. शाम के क़रीब छह बजे हैं. जगह-जगह दिल्ली पुलिस के जवान तैनात है, अभी आकर खड़ी हुई बसों से केंद्रीय पुलिस बल के जवान उतर रहे हैं और सड़कों पर पॉजिशन ले रहे हैं.

मेट्रो स्टेशन से मक्की मस्जिद की तरफ़ जाती चौड़ी सड़क पर युवाओं का एक हुजूम नारेबाज़ी करते हुए आगे बढ़ रहा है. इसमें अधिकतर बच्चे और जवान है, इक्का-दुक्का बुज़ुर्ग भी हैं.

रह-रह कर 'अल्लाह हू अकबर' का नारा गूंज रहा है. साथ में पुलिसकर्मी घेरा बनाते हुए चल रहे हैं.

ये प्रदर्शन कुछ देर बाद ही ख़त्म हो गया. हालांकि मस्जिद के पास भीड़ बनीं रही.

इंद्रलोक की मक्की मस्जिद के बाहर सड़क पर नमाज़ पढ़ रहे लोगों को पुलिसकर्मी के लात मारने का वीडियो वायरल होने के कुछ मिनट बाद ही इंद्रलोक में लोग इकट्ठा होने लगे थे.

पुलिस चौकी की घेराबंदी कर रही भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग भी किया.

सजदे में झुके नमाज़ी को लात मारे जाने का वीडियो जैसे-जैसे लोगों तक पहुंचा, आक्रोश बढ़ता गया. हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस घटना का तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया.

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, “इस घटना को गंभीरता से लिया गया है, इलाक़े में पुलिस बल तैनात करने के अलावा सभी ज़रूरी क़दम उठाये जा रहे हैं. घटना में शामिल पुलिसकर्मी पर बिना देरी किए एक्शन ले लिया गया है.”

मनोज कुमार मीणा

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पुलिसकर्मी को पद से हटा दिए जाने के बावजूद प्रदर्शन में शामिल लोगों का आक्रोश बरक़रार था.

अपने आप को भीम आर्मी से जुड़ा हुआ बताने वाले एक युवक ने कहा, “इस घटना से देश के हर मुसलमान के दिल को ठेस पहुंची है. हमें ये अहसास कराया जा रहा है कि हम दोयम दर्जे के शहरी हैं. हम दिखा देंगे कि ऐसा नहीं है.”

निलंबन के बाद माहौल हुआ शांत

इंद्रलोक की मक्की जामा मस्जिद
इमेज कैप्शन, इंद्रलोक की मक्की जामा मस्जिद में आमतौर पर जुमे की नमाज़ के दौरन भीड़ अधिक होती है.

घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने इलाक़े के लोगों और धर्म गुरुओं के साथ वार्ता भी की और शांति व्यवस्था क़ायम रखने का भरोसा दिया.

शाम होते-होते माहौल शांत हो गया और अधिकतर लोग अपन घरों को चले गए. हालांकि सुरक्षा के लिहाज से केंद्रीय पुलिस बल और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात रहे.

सर पर टोपी लगाए एक लंबी दाढ़ी वाले व्यक्ति ने बताया, “मौलानाओं की पुलिस कमिश्नर से बात हुई है और सभी से घर जाने के लिए कह दिया गया है.”

यहीं एक बुज़ुर्ग कहते हैं, “दिल्ली पुलिस ने नमाज़ियों पर डंडे बरसाकर बहुत बुरा किया है, उसी के ख़िलाफ़ हम सड़कों पर उतरे हैं. सिर्फ़ निलंबित करना काफ़ी नहीं है, ऐसे लोगों को पुलिस बल से हमेशा के लिए हटाया जाए.”

क़रीब 60 साल की उम्र के ये बुज़ुर्ग कहते हैं, “इंद्रलोक में कभी ऐसा नहीं हुआ है.”

जुमे के दिन मस्जिदों में हो जाती है भीड़

मक्की मस्जिद
इमेज कैप्शन, इंद्रलोक की मक्की जामा मस्जिद जहां शुक्रवार को घटना हुई

इंद्रलोक उत्तरी दिल्ली का एक मुस्लिम बहुल इलाक़ा है. यहां क़रीब पंद्रह हज़ार मुसलमान रहते हैं.

इंद्रलोक की मक्की मस्जिद एक बड़ी मस्जिद है. इसमें कई हज़ार लोग एक साथ नमाज़ पढ़ सकते हैं. यहां से क़रीब तीन सौ मीटर दूर एक और बड़ी मस्जिद है जिसे मोहम्मदी मस्जिद कहा जाता है.

हालांकि, दो बड़ी मस्जिदें होने के बावजूद जुमे के दिन नमाज़ पढ़ने आने वाले लोगों की तादाद मस्जिद की क्षमता से अधिक हो जाती है.

मोहम्मदी मस्जिद के पास इत्र की दुकान चलाने वाले मोहम्मद फ़य्याद कहते हैं, “मैं 1976 से यहां रह रहा हूं. इंद्रलोक बसे हुए 48 साल हो गए हैं. आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ है, ये इस तरह की पहली वारदात है"

वीडियो कैप्शन, दिल्ली: नमाज़ियों को लात मारने का मामला, अब तक क्या-क्या हुआ...

फ़य्याद कहते हैं, "यहां कभी धारा 144 भी नहीं लगती है, सभी धर्मों के लोग यहां मिलकर रहते हैं. हम हैरान हैं कि इंद्रलोक में इस तरह की घटना हो गई.”

मोहम्मद फ़य्याद ने अपनी ज़िंदगी का लंबा अरसा यहीं गुज़ारा है. वो यहीं मस्जिद में नमाज़ पढ़ते रहे हैं.

फ़य्याद कहते हैं, “आबादी बढ़ने के साथ मस्जिद की क्षमता काफ़ी नहीं है, जुमे के दिन भीड़ अधिक हो जाने की वजह से दो बार जमात में नमाज़ पढ़ाई जाती है.”

फ़य्याद के मुताबिक़ अकसर नमाज़ मस्जिद परिसर के भीतर ही हो जाती है लेकिन कभी-कभी बाहरी नमाज़ियों की तादाद होने की वजह से लोग सड़क पर भी नमाज़ पढ़ लेते हैं.

उन्हें दुख है कि सजदे में झुके नमाज़ी को लात से मारा गया.

मोहम्मद फ़य्याद

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'चुनाव से पहले माहौल ख़राब ना हो'

इंद्रलोक की मस्जिद समिति से जुड़े लोगों ने इस घटना पर बात करने से इनकार कर दिया.

हालांकि यहां मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता नफ़ीस अहमद कहते हैं कि चुनाव के वक़्त ऐसी घटना का इस्तेमाल सांप्रदायिकता फैलाने के लिए किया जा सकता है इसलिए चुप रहना ही ज़्यादा बेहतर है.

नफ़ीस कहते हैं, “चुनाव आने वाले हैं. नफ़रत की राजनीति करने वाले लोग ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल सांप्रदायिकता फैलाने के लिए कर लेते हैं. बेहतर यही है कि ख़ामोश रहा जाए.”

नफ़ीस कहते हैं, “फिलहाल तो पुलिस ने एक्शन लिया है लेकिन अगर आगे ऐसा कुछ होता है तो अदालत भी जाया जा सकता है.”

इंद्रलोक में एक चाय की दुकान पर बैठकर समूह में चर्चा कर रहे कुछ बुज़ुर्ग कहते हैं कि मुसलमानों को सब्र से काम लेना चाहिए. ऐसी घटनाओं के बाद अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखना चाहिए.

एक बुज़ुर्ग कहते हैं, “जो भी हुआ है, बहुत बुरा हुआ लेकिन ये भी समझना चाहिए कि इसके पीछे कोई इरादा तो नहीं था. चुनाव आने वाले हैं, कुछ भी सकता है. लोगों को सब्र और समझदारी से काम लेना चाहिए.”

युवा मुसलमानों में आक्रोश

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इमेज कैप्शन, घटना के बाद इंद्रलोक में बड़ी तादाद में लोग जुटे, हालांकि पुलिस के आश्वासन के बाद लोग वापस चले गए
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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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हालांकि, कुछ युवा इस घटना को लेकर बेहत आक्रोशित भी थे. ये युवा इस घटना को अपनी धार्मिक पहचान से जोड़कर देख रहे थे.

क़रीब बीस साल की उम्र का एक युवा कहता है, “इस हद की बदसलूकी सिर्फ़ एक मुसलमान के साथ ही की जा सकती है. एक तरफ़ प्रशासन कांवड़ निकाल रहे लोगों पर फूल बरसाता है और दूसरी तरफ़ सजदा कर रहे नमाज़ी को लात मारता है. आप ही बताइये इससे क्या समझ आता है.”

इंद्रलोक एक शांतिपूर्ण इलाक़ा रहा है. साल 2020 में सीएए के ख़िलाफ़ यहां भी प्रदर्शन हुए थे. हालांकि यहां कभी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई है.

दिल्ली पुलिस के एक कर्मी जो इंद्रलोक पुलिस चौकी पर भी तैनात रहे हैं, नाम ना ज़ाहिर करते हुए कहते हैं, “यहां कभी इस तरह के हालात नहीं बने हैं. जब मैं यहां तैनात था तब हमने मस्जिद समिति से जुमे के दिन एक से अधिक बार में नमाज़ पढ़ाने की गुज़ारिश की थी और उसे मान लिया गया था.”

ये पुलिसकर्मी बताते हैं, “आमतौर पर ये इलाक़ा शांतिपूर्ण रहा है, आज की घटना के बाद लोगों में आक्रोश था लेकिन शाम होते-होते सभी लोग अपने घर लौट गए. अब देखिए, सब शांतिपूर्ण है.”

भारत के मुसलमान इस घटना को लगातार बढ़ रही नफ़रत और भेदभाव के नतीजे के रूप में भी देख रहे हैं.

युवा राजनेता और 'वॉलंटियर अगेंस्ट हेट' के संयोजक डॉ. मेराज कहते हैं, “जिस तरह से देश में नफरत भरी जा रही है ये उसी का नतीजा है. एक आदमी नमाज़ पढ़ रहा है, उसे मारना घृणा का वीभत्स उदाहरण है."

वे कहते हैं, "मीडिया और सोशल मीडिया ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक माहौल तैयार किया है, ये उसी का नतीजा है. संविधान देश के सभी नागरिकों को बराबर के हक़ देता है, एक तरफ़ कांवड़ियों पर फूल बरसाये जाते हैं और दूसरी तरफ़ सजदा कर रहे मुसलमान को लात मारी जा रही है, मुसलमान देश में जिस भेदभाव का हर दिन सामना करते हैं, ये उसी का उदाहरण है.”

'वर्दी पर बदनुमा धब्बा है ये घटना'

दिल्ली पुलिस की गाड़ी
इमेज कैप्शन, घटना के बाद आसपास के ज़िलों की पुलिस को इंद्रलोक में तैनात किया गया था

पुलिस एक धर्मनिरपेक्ष बल है. ऐसे में नमाज़ पढ़ रहे व्यक्ति को लात मारने की इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे हैं.

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का मानना है कि ये एक अत्यंत आपत्तिजनक घटना है.

विक्रम सिंह कहते हैं, “ये असंवेदनशीलता के साथ-साथ प्रशिक्षण और समुचित मार्गदर्शन का अभाव भी दर्शाता है.”

विक्रम सिंह कहते हैं, “इस घटना ने वर्दी को दागदार किया है, ये बदनुमा धब्बा आसानी से जाने वाला नहीं है. देखने को ये घटना कुछ सेकंड की है लेकिन इसकी गूंज और नकारात्मकता वर्षों-वर्षों तक रहेगी.”

दिल्ली पुलिस ने घटना के कुछ घंटों के भीतर ही संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया था और उसके ख़िलाफ़ विभागीय जांच भी शुरू कर दी थी.

विक्रम सिंह

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हालांकि विक्रम सिंह का मानना है कि निलंबन पर्याप्त नहीं है बल्कि मुक़दमा भी दर्ज किया जाना चाहिए था.

विक्रम सिंह कहते हैं, “केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है इसके ख़िलाफ़ मुक़दमा भी दर्ज होना चाहिए और उन्हें सेवामुक्त किया जाना चाहिए.”

हालांकि विक्रम सिंह का ये भी मानना है कि इस घटना में शामिल पुलिसकर्मी को पुलिस के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

विक्रम सिंह कहते हैं, “पुलिस एक धर्मनिरपेक्ष संगठन हैं. मानवता और संवेदनशीलता के साथ ऐसी परिस्थिति से निपटा जा सकता है. पुलिस को किसी को अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के नज़रिए से नहीं देखना चाहिए."

वे कहते हैं, "पुलिस का काम ना फूल बरसाना है और ना ही किसी नमाज़ पढ़ते हुए व्यक्ति को लात मारना. पुलिस को सभी को बराबरी से देखने का प्रशिक्षण दिया जाता है. सिर्फ़ एक व्यक्ति की वजह से समूची पुलिस फ़ोर्स पर भी सवाल नहीं उठाये जा सकते हैं.”

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