‘बुलडोज़र एक्शन’ पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त रुख़, यूपी सरकार ने भी दिया जवाब

कई राज्यों में अभियुक्तों के घरों पर बुलडोज़र कार्रवाई के मामले देखे गए हैं

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इमेज कैप्शन, कई राज्यों में अभियुक्तों के घरों पर बुलडोज़र चलाने के मामले देखे गए हैं

देश के कई राज्यों में अभियुक्तों की संपत्ति के ख़िलाफ़ कथित तौर पर 'बुलडोज़र एक्शन' की कार्रवाई करने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख़्त टिप्पणी की.

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ ने कहा कि किसी का घर सिर्फ़ इसलिए कैसे ध्वस्त किया जा सकता है क्योंकि वह अभियुक्त है.

बेंच ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश तय करेगा जिसके आधार पर ही जब भी तोड़फोड़ की कार्रवाई की ज़रूरत होगी तो उसी आधार पर वो की जाएगी.

जस्टिस बीआर गवई ने उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, "किसी का घर केवल इसी आधार पर कैसे ढहाया जा सकता है कि वो किसी मामले में अभियुक्त है?”

इसके आगे जस्टिस गवई ने कहा, “कोई व्यक्ति दोषी भी है तो क़ानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उसके घर को ध्वस्त नहीं किया जा सकता."

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यूपी सरकार ने क्या दिया जवाब

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इमेज कैप्शन, यूपी सरकार का कहना है कि कार्रवाई के नोटिस काफ़ी पहले ही भेजे गए थे

राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी इमारत को ढहाने की कार्रवाई इसलिए नहीं की गई है कि वो शख़्स किसी अपराध में अभियुक्त था.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 'हमने एफिडेविट के माध्यम से दिखाया है कि नोटिस काफ़ी पहले ही भेजा गया था.'

उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि ढहाने की प्रक्रिया एक स्वतंत्र मामला है जिसका किसी भी अपराध से कोई संबंध नहीं है.

वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे और सीयू सिंह ने इसके जवाब में कहा कि घर इस कारण ध्वस्त किए गए क्योंकि वो किसी मामले के अभियुक्त हैं.

सुप्रीम कोर्ट बनाएगा दिशानिर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो दिशानिर्देश बनाएगा

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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो दिशानिर्देश बनाएगा

बेंच ने इसी दौरान मौखिक तौर पर कहा कि किसी भी इमारत को ढहाने के लिए क़ानून मौजूद हैं, लेकिन इसका ‘अधिक बार उल्लंघन’ देखा गया है.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ये भी साफ़ कहा है कि, "हम पूरे देश के लिए दिशानिर्देश तय करेंगे, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि किसी भी अनधिकृत निर्माण को संरक्षण देंगे."

बेंच ने दोनों पक्षों से कहा है कि वो इस मामले में दिशानिर्देश तय करने के लिए सुझाव के साथ उसके पास आएं और इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को तय की गई है.

किसने दायर की थी याचिकाएं

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इमेज कैप्शन, दिल्ली के जहांगीरपुरी में सांप्रदायिक हिंसा के बाद चला था बुलडोज़र
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देश के कई राज्यों में प्रशासन द्वारा बुलडोज़र से इमारतों को ढहाने के कई मामले सामने आए हैं

दिल्ली के जहांगीरपुरी में साल 2022 के अप्रैल महीने में तोड़फोड़ की कार्रवाई की योजना के समय कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं.

जहांगीरपुरी में साल 2022 में हनुमान जयंती के दिन शोभायात्रा के मौक़े पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी जिसके बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण के आधार पर इलाक़े के कई घरों को अवैध निर्माण का नोटिस भेजा था और बुलडोज़र कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी.

इस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोक लगी थी लेकिन याचिकाकर्ताओं ने ये घोषित करने की मांग की थी कि अधिकारी दंड के रूप में बुलडोज़र का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.

इनमें से एक याचिकाकर्ता पूर्व राज्यसभा सांसद और सीपीएम नेता बृंदा करात भी थीं जो जहांगीरपुरी में बुलडोज़र कार्रवाई के दौरान घटनास्थल पर पहुंची भी थीं.

सितंबर 2023 में जब इस मामले की सुनवाई हो रही थी उस समय कुछ याचिकाकर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे ने राज्य सरकार द्वारा अभियुक्तों के घरों को ढहाने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई थी.

उन्होंने उस दौरान दलील देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया था कि घर का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का ही एक पहलू है.

उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि ढहाए गए घरों को दोबारा बनाए जाने का आदेश दिया जाए.

क्या बोले राजनेता और वकील

अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के बयान की तारीफ़ की है

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‘बुलडोज़र एक्शन’ के बाद कई राजनेताओं के बयान भी सामने आए हैं.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट किया है.

उन्होंने लिखा है- ‘अन्याय के बुलडोज़र’ से बड़ा होता है, ‘न्याय का तराज़ू’.

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राहुल गांधी ने क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की कार्यवाही पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अपना मत रखा है.

सोशल मीडिया साइट एक्स पर राहुल गांधी ने पोस्ट किया, "भाजपा की असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण ‘बुलडोज़र नीति’ पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी स्वागत योग्य है. बुलडोज़र के नीचे मानवता और इंसाफ को कुचलने वाली भाजपा का संविधान विरोधी चेहरा अब देश के सामने बेनक़ाब हो चुका है."

उन्होंने कहा कि 'त्वरित न्याय’ की आड़ में ‘भय का राज’ स्थापित करने की मंशा से चलाए जा रहे बुलडोज़र के पहियों के नीचे अक्सर बहुजनों और गरीबों की ही घर-गृहस्थी आती है.

राहुल गांधी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस अति संवेदनशील विषय पर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करेगा.

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने भी इस मामले पर अपना बयान दिया है.

उन्होंने कहा कि आरोपी हो या आरोप साबित हो जाए, जब बुलडोज़र की कार्रवाई चल गई तो फिर अदालत और संविधान की ज़रूरत क्या है.

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, “ये बर्बर युग की याद दिलाता है कि देश में तानाशाही है और संविधान है ही नहीं. अदालत के द्वारा ये फ़ैसला लिया जाना चाहिए कि घर गिराया जाना चाहिए या नहीं, जेल जाना है या नहीं, फ़ाइन लगना है या नहीं.”

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“नेताओं या हुकूमत के कहने से अगर अधिकारी लोग ही फ़ैसला करने लगेंगे तो फिर संविधान, अदालत और क़ानून की किताब की क्या ज़रूरत है.”

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले पर टिप्पणी की है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उसने क़ानून के शासन के लिए इस ख़तरे को आख़िरकार समझा है. इंसाफ़ को ढहाने के लिए बुलडोज़र का इस्तेमाल किया जा रहा है.”

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