मीरा रोड पर बुलडोज़र कार्रवाई के बाद लोग कर रहे सवाल- क्या हम भारतीय नहीं? :ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, दीपाली जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
मुंबई के मीरा रोड पर पड़ने वाले नया नगर इलाक़े में उस दिन अजीब-सी शांति थी. वहां के रहने वाले लोग अपने-अपने घरों से निकलने से भी डर रहे थे.
न तो लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजा और न ही महिलाएं बाज़ार जाने के लिए तैयार थीं.
देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई से क़रीब 27 किलोमीटर यानी लगभग डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित मीरा रोड इलाक़े में 21 और 22 जनवरी को स्थिति तनावपूर्ण थी.
22 जनवरी से एक दिन पहले यहां दो धार्मिक समुदायों की बीच बहस और उसके बाद मची भगदड़ से आसपास के इलाक़े में स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल 18 शिकायतें दर्ज की हैं और 19 लोगों को गिरफ़्तार किया है.
अभी हालात पूरी तरह से नियंत्रण में आए भी नहीं थे कि 23 जनवरी को मीरा भयंदर नगर निगम ने नया नगर में 15 अनधिकृत दुकानों पर बुलडोज़र चला दिया.
इनमें से कुछ दुकानें पूरी तरह ढहा दी गईं और अन्य पर कार्रवाई की गईं.

'हमें नोटिस तक नहीं दिया'
बीबीसी मराठी की टीम जब नया नगर के हैदर चौक पर पहुंची तो वहां एक लाइन में आठ दुकानों का मलबा सड़क पर बिखरा पड़ा दिखा.
कल तक ग्राहकों से खचाखच भरा रहने वाला ये बाज़ार इंटों, टूटी छतों और दीवारों के मलबे से पटा हुआ था.
एक तरफ़ प्याज़ की टोकरियां बिखरी पड़ी थीं तो दूसरी तरफ गैराज का सामान बिखरा था. लकड़ी की अलमारियां, पंखे, दुकान का दूसरा सामान भी मलबे का हिस्सा था.
यहां हमारी मुलाक़ात मोहम्मद अबुल हसन शेख़ से हुई. इस कार्रवाई में कार-जीप मरम्मत का उनका गैराज तोड़ दिया गया था.
उन्होंने बताया कि वो 22 सालों से वहां गैराज चला रहे थे और दुकान की बिजली का बिल भी भर रहे थे.
उन्होंने कहा, "उन लोगों ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे दुकान से बाहर खींच लिया और गैराज पर बुलडोज़र चला दिया. न तो उन्होंने हमारी बात सुनी और न ही हमें ऐसा कोई नोटिस दिया कि हमारा गैराज ग़ैर-क़ानूनी था. बुलडोज़र चलाने से पहले कुछ कार्रवाई तो करनी चाहिए थी. इसे क्यों तोड़ा गया इसकी मुझे अब तक कोई जानकारी नहीं है."
बात करते-करते वो रो पड़े. बोले, "मैं इस गैराज को बीते 22 सालों से चला रहा था. इतने सालों से ऐसी कार्रवाई कभी नहीं की गई. यहां 5-6 लोग काम करते थे. इस कार्रवाई के बाद अब उनके परिवार पर क्या असर पड़ेगा?"
प्रशासन की इस कार्रवाई से कुछ घंटे पहले तक इलाके़ में तनाव था. इस कार्रवाई से यहां यह चर्चा भी शुरू हो गई कि ये दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं.
एक स्थानीय दुकानदार ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा, "झगड़ा और बहसबाज़ी हमारे इस क्षेत्र में नहीं हुई थी. हम में किसी का नाता उस घटना से नहीं है फिर भी हमें नहीं पता कि हमारी दुकानें क्यों तोड़ दी गईं."
लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके़ में बड़ी संख्या में पुलिसबल की तैनाती की गई थी. यहां सीआरपीएफ़, रैपिड एक्शन फ़ोर्स और स्थानीय पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया.

'क्या हम भारतीय नहीं हैं?'
मोहम्मद अबुल हसन शेख़ की दुकान से कुछ क़दमों की दूरी पर हम स्कॉर्फ़ और हिजाब की एक दुकान में पहुंचे. एक ऊंची इमारत में मौजूद इस दुकान में हमारी मुलाक़ात अलीशा सैयद से हुई.
एमबीए की छात्रा अलीशा ने एक बड़ी कंपनी में नौकरी करने के बाद अब ख़ुद का बिजनेस शुरू किया है. उन्होंने डिज़ाइनर स्कार्फ़ और हिजाब बेचने की दुकान शुरू की है.
वे बताती हैं, "ये दुकान एक ऊंची बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर है, तो ऊपर से कभी-कभी कूड़ा भी गिरता है. इससे हमारा सामान ख़राब हो जाता है. इस कारण हमने दुकान पर एक छत डाल दी थी. लेकिन इस छत की वजह से दुकान का नाम गलियों से नहीं दिखता था. तो हमने बाहर एक दरवाज़ा और बोर्ड लगा दिया था. ये हिस्सा बुलडोज़र से तोड़ दिया गया है."

अलीशा कहती हैं, "इस कार्रवाई से 24 घंटे पहले ही मैं सोशल मीडिया पर कमेंट्स पढ़ रही थी. वहां मीरा रोड पर बुलडोज़र चलाने को लेकर हज़ारों कमेंट्स आ रहे थे. ऐसा लग रहा था कि कुछ हुआ होगा, लेकिन ये नहीं सोचा था कि वो सच में ऐसे बुलडोज़र चला देंगे. मुझे लगा था कि हमारे बारे में सोचा जाएगा."
अलीशा ने भी इस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "आख़िर ये कार्रवाई उसी दिन क्यों की गई? कुछ दिन पहले या बाद में किया होता. हमने तो कुछ नहीं किया. क्या हम भारतीय नहीं हैं? क्या हमें बुरा नहीं लगेगा?"
अलीशा कहती हैं कि उनके दुकान पर की गई कार्रवाई से उन्हें 50 हज़ार रुपये का नुक़सान हुआ है. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें पहले कभी ऐसा अनुभव नहीं हुआ.
वो कहती हैं, "मुझे पहले कभी यहां के लोगों या पुलिस से कोई परेशानी नहीं हुई. मीरा रोड में कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ. मेरे दोस्तों में 90 फ़ीसदी हिंदू हैं. ये ख़बर सुन कर वो भी हैरान हो गए. मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों किया गया. उन्होंने मेरी दुकान का बाहरी हिस्सा तोड़ दिया. पार्टिशन टूट गया. हमें नहीं पता कि उनका इरादा क्या था."

प्रशासन का क्या है कहना?
मीरा रोड पर की गई कार्रवाई के बारे में बीबीसी ने मीरा-भयंदर नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर मारुति गायकवाड़ से बात की.
उन्होंने कहा, "हमने अनधिकृत दुकानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. नगर निगम अधिनियम के अनुसार, अगर सड़क या फ़ुटपाथ पर कोई अनधिकृत दुकान है और वो दुकानें हमारे डीपी रोड या नालों पर हैं, तो नोटिस देने की कोई आवश्यकता ही नहीं है. ये हमारा रोज़ का काम है और ये उसका हिस्सा था. कौन किस बात पर क्या रुख़ अपनाता है, ये उनका विषय है."
इस कार्रवाई के बाद शाम को इसी इलाके़ के पास कुछ राजनीतिक भाषण हुए. इसके बाद इस इलाक़े के सेक्टर-3 के पास फिर कुछ कारों पर हमला हुआ.
पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. उनका कहना है कि इस हमले में अब्दुल हक चौधरी नाम के एक व्यक्ति का टेम्पो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.
वो कहते हैं कि उनके ड्राइवर को पीटा भी गया है. उन्होंने कहा, "जब हम भयंदर से लौट रहे थे, उस वक्त कारों पर अचानक हमला शुरू हुआ. हम टेम्पो में थे. हमला कर रहे लोगों ने हमसे पूछा कि हम हिंदू हैं या मुस्लिम. फिर उन्होंने हमारे टेम्पो पर हमला कर दिया. अगर हम वहां से नहीं भागते तो वो हमें मार डालते. उनके हाथों में तलवारें थीं और वो जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे. उन्होंने आसपास की दूसरी कारों और रिक्शा पर भी हमला किया."
तनावपूर्ण स्थिति के कारण नया नगर और आसपास के इलाकों में अभी भी डर का माहौल है.
हम यहां नाज़िया सैयद से मिले जो नया नगर की एक इमारत में रहती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को पांच दिनों से स्कूल नहीं भेजा है.
उन्होंने कहा, "हमारे परिवार में एक शादी है और हम उसके लिए ख़रीदारी करना चाहते थे. लेकिन हम बाज़ार नहीं जा सके. बाहर का माहौल ऐसा है कि दिल में अब भी डर है. हम लंबे समय के बाद बहुत सारा सामान ख़रीद रहे हैं."
नाज़िया 15 साल पहले शादी करके यहां आई थीं. उन्होंने कहा कि इतने सालों में उन्होंने ऐसा तनाव यहां कभी नहीं देखा.

'बाहरी लोगों का काम'
मीरा रोड में 21 जनवरी को एक रैली का आयोजन किया गया.
बाद में यह बात सामने आई कि इस रैली के बाद ही दो गुटों के बीच विवाद हुआ था.
इस बारे में रैली के आयोजक विक्रम प्रताप सिंह ने कहा, "हमारी रैली में सभी जाति और धर्म के लोग शामिल हुए. इसमें ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग भी थे. लगभग 500 लोग मुस्लिम समुदाय से थे. कुल मिलाकर लगभग 10 हज़ार लोग शामिल हुए. रैली शाम 5 बजे ख़त्म हुई."
वे कहते हैं, "मीरा भयंदर में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. नया नगर इलाके़ के लोग भी हमारा सहयोग कर रहे हैं. यह बाहरी लोगों का काम है. पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए."
'बिना नोटिस दिए कार्रवाई करना ग़लत'

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24 जनवरी को मीरा रोड में मुस्लिम-बहुल हैदर चौक पर बुलडोज़र चलाने की कार्रवाई के एक दिन बाद, दक्षिण मुंबई में मोहम्मद अली रोड पर लगभग 35 दुकानों, फेरीवालों और स्टाल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई.
मोहम्मद अली रोड को मुंबई का पॉश इलाक़ा माना जाता है. पूरे मुंबई शहर और आसपास के इलाक़ों से लोग यहां ख़रीदारी करने आते हैं. यहां खाने-पीने की कई दुकानें हैं जिसे खाउ गली भी कहा जाता है.
मुंबई नगर निगम की कार्रवाई के बाद जब हम इस इलाके़ में गए तो बाज़ार में आम दिनों की तुलना में कम भीड़ दिखी.
हम उन दुकानों पर गए जहां बीएमसी ने कार्रवाई की थी. इसमें 'सुलेमान मिठाईवाला' नाम की दुकान भी शामिल है. दुकान के मालिक चांद मोहम्मद कहते हैं कि ये दुकान यहां 1936 से चलाई जा रही है.
चांद मोहम्मद का कहना था कि नगर पालिका का बिना नोटिस दिए कार्रवाई करना ग़लत है.
उन्होंने कहा, "सुबह-सुबह कार्रवाई की गई. कई दुकानें बंद थीं. उन्होंने बिना किसी सूचना के सीधे कार्रवाई की. अगर नोटिस देते तो हम अपना सामान बचा लेते. नगर पालिका के लोग समय-समय पर आते रहते हैं. उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी. वे अपना काम करते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने बिना कोई नोटिस दिए इन्हें तोड़ दिया. ये कुछ ज़्यादा है. मुझे 2 लाख रुपये का नुक़सान हुआ है."

इस मिठाई की दुकान के बगल में 'नूरानी मिल्क सेंटर' नाम की एक अन्य दुकान है जिसके मालिक का कहना है कि ये दुकान यहां 88 साल से है.
लोगों का कहना है कि नगर पालिका ने दुकान के बाहर रखा सामान और दुकान के ऊपर की छत तोड़ दिया.
एक अन्य दुकानदार हुसैन नूरानी कहते हैं, "सुबह साढ़े तीन बजे अचानक लोग आए. कई दुकानें खुली ही नहीं थीं. बिना कोई सूचना दिए उन्होंने तोड़फोड़ शुरू कर दी. हमारी मिठाई की दुकान है. उन्होंने ऊपर की छत तोड़ दी. कुछ चुनिंदा लोगों के ख़िलाफ़ ही कार्रवाई हो रही थी. क्या वजह है नहीं मालूम. यह कार्रवाई मीरा रोड के बाद की गई तो इसका मतलब है कि यह उससे संबंधित मामला हो सकता है. लेकिन इतने सालों में यहां पहले ऐसा कभी नहीं हुआ."
क़ानून क्या कहता है?

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इस संबंध में हमने नगर पालिका के एक उच्च पदाधिकारी से बात की, उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर हमें ये बताया, "जब इस इलाके़ में हम गहन सफ़ाई अभियान के लिए गए तो सड़क पर, फ़ुटपाथ पर लगे फेरीवालों, स्टाल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की."
"दुकानों और किसी ढांचे को नहीं तोड़ा गया. हां, दुकानों की छतों को तोड़ा गया क्योंकि वो बग़ैर अनुमति लिए बनाए गए थे. उनसे ट्रैफ़िक में बाधा हो रही थी. ये कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के लिए की गई."
वो कहते हैं, "अस्थायी छत तोड़ने या फ़ुटपाथ के सामान के लिए नोटिस देने की कोई आवश्यकता नहीं है. 33-35 जगहों पर कार्रवाई की गई है. जिन जगहों पर निगम की अनुमति के बग़ैर दुकानें लगाई गई थीं वो हमारे रिकॉर्ड में नहीं हैं तो हम उन्हें नोटिस कैसे दे सकते हैं."
मोहम्मद अली रोड पर की गई कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा, "इस कार्रवाई का मीरा रोड से कोई लेना-देना नहीं है. हमने 18 जनवरी को रेलवे के काम में बाधा बन रहे शिव मंदिर को तोड़ दिया था. फिर नियमानुसार कार्रवाई चल रही है."
नगर निगम सीमा में अनधिकृत निर्माण या रेहड़ी-पटरी वालों के ख़िलाफ़ नगर निगम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है. नगर निगम के कुछ अधिकारियों का कहना है कि सड़क, नाली या फ़ुटपाथ पर सामान रखने पर कार्रवाई के लिए नोटिस की ज़रूरत नहीं है.
बीएमसी में काम कर चुके सेवानिवृत्त अधिकारी गोविंद खैरनार ने बीबीसी को बताया कि भले ही नगर निगम के अधिकारी ऐसा कहते हों, लेकिन बिना नोटिस दिए तोड़फोड़ का काम नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा, "फ़ुटपाथ पर बने आवासीय और व्यावसायिक निर्माण को भी बिना नोटिस के नहीं हटाया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वे सड़क पर नए ढांचे के बारे में सार्वजनिक स्थानों पर नोटिस लगा सकते हैं. लेकिन 2-4 महीने बाद हर किसी को नोटिस देना ज़रूरी है."
खैरनार कहते हैं, "क़ानून के मुताबिक 351 का नोटिस सात दिन के लिए देना होता है. उसके बाद सात दिन का समय देकर जवाब की अपेक्षा की जाती है. उस दौरान कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए."
"किसी भी ढांचे को बिजली देने का मतलब है कि इसे किसी तरह से रिकॉर्ड किया गया है. उचित नोटिस देकर कार्रवाई की जाती है. नगर निगम आयुक्तों के पास भी इसमें विशेष अधिकारी नहीं हैं. जाति-धर्म का विचार किए बिना क़ानून के अनुसार कार्रवाई की जानी है."
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