19:00 IST
कांग्रेस के नेतृत्ववाले यूपीए के पास चुनाव परिणामों के आखिरी आकड़े आने तक 250 सीटों से ज़्यादा की ताकत हो जाएगी. कुछ ऐसे निर्दलीय भी यूपीए के साथ खड़े दिखेंगे जो पहले भी सरकार के साथ रहे हैं. इस तरह आंकड़ा 260 को पार कर जाएगा. हालांकि अभी भी यह बहुमत के 272 के पाले से पहले ही रुका रहेगा.
लालू प्रसाद भी अपने गिने-चुके सांसदों के साथ यूपीए के समर्थन में खड़े होंगे. आंकड़ा अभी भी 272 से नीचे होगा पर यूपीए के मैनेजरों को यह ज़्यादा विचलित नहीं करेगा. फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी या वाममोर्चे में से किसी से भी समर्थन लेने का मन बना रही है.
कांग्रेस के पास इस नई अल्पमत सरकार के लिए एक उदाहरण भी है और वो है नरसिम्हाराव के कार्यकाल की कांग्रेस सरकार का. यह सरकार अल्पमत में रहते हुए भी अपना कार्यकाल पूरा करके गई थी क्योंकि इस सरकार का पतन सरकार के बाहर बैठे कुछ दलों के लिए लाभप्रद नहीं था.
इस संसद में भी ऐसे दल हैं ही जिनके लिए कांग्रेस की अल्पमत में ही सही, सत्तासीन सरकार का गिरना ठीक नहीं होगा क्योंकि ऐसी स्थिति में उनके लिए कांग्रेस का और प्रभावी होकर सत्ता में लौटने का ख़तरा है.
इन्हीं बातों की पृष्ठभूमि में यूपीए के मैनेजर बिन बुलाए दलों या आगे चलकर कष्टप्रद हो सकने वाली पार्टियों से फिलहाल किनारा किए हुए हैं. फिर चाहे वो वाममोर्चा हो या फिर कोई अन्य क्षेत्रीय दल.
इस चुनाव से एक और संकेत मिल रहा है. मतदाता ने नकारात्मक प्रचार में लगी भाजपा और वाममोर्चे को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने उस कांग्रेस के लिए वोट देना ज़्यादा बेहतर पाया जिसके पास नेतृत्व के लिए 78 वर्ष का मनमोहन सिंह जैसा अनुभवी व्यक्ति भी था और देश के युवावर्ग के लिए भविष्य की तेज़तर्रार, युवा, और आशावादी पीढ़ी के लिए राहुल गांधी जैसा चेहरा भी था.
इस जनादेश ने तमाम चुनाव विश्लेषकों और राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है, यह दिखाकर कि लोगों ने कई जगहों पर जाति, संप्रदाय और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर वोट दिया है और राष्ट्रीय स्तर पर एक लहर यूपीए के लिए तैयार की जबकि अधिकतर विश्लेषक एक बंटे हुए जनादेश की बात कह रहे थे.
13:40 IST
यह जनादेश चार स्पष्ट संकेत दे रहा है.
सबसे पहला यह कि ताज़ा जनादेश मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के पक्ष में जाता नज़र आ रहा है. हालांकि इससे भी बड़ा संकेत यह है कि देश की राजनीति में आगे का चेहरा राहुल गांधी का है.
फिलहाल कांग्रेस 272 के आंकड़े से दूर है पर लंबे अरसे के बाद लोगों को लग रहा है कि कोई पार्टी है जो इसके पास जा सकती है. लोग एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो स्थिरता की ओर ले जाए.
तीसरा यह कि वाममोर्चे के लिए यह चुनाव केरल और पश्चिम बंगाल मे सत्ता से बाहर होने का साफ़ संकेत दे रहा है. साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में इसके खत्म होते महत्व को भी साफ़ सामने ला रहा है.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की बढ़त पार्टी के लिए बहुत सकारात्मक संकेत हैं. अबतक चेन्नई के रास्ते दिल्ली की सत्ता तक आने वाली रेल शायद अगले चुनाव में लखनऊ के रास्ते सत्ता की सीढ़ी चढ़े.
11:20 IST
केरल के बाद अब पश्चिम बंगाल से भी वाम मोर्चे के लिए निराश करनेवाले रुझान आने लगे हैं. तो क्या इसे तीन दशक लंबे वाम वर्चस्व की खात्मे का संकेत माना जाए... शायद.
11:00 IST
गुजरात से जो रुझान आ रहे हैं, भाजपा के लिए वो एक अहम संकेत साबित होंगे. इन रुझानों के आधार पर कहा जा सकता है कि हिंदू हृदय सम्राट और विकासपुरुष की छवि वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अगले लोकसभा चुनाव में पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी हो सकते हैं.
यानी वर्ष 2014 में हम नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी पर आधारित आम चुनाव देख सकते हैं.
10:04 IST
मतगणना का ताज़ा रुझान अब यह संकेत दे रहा है कि भारत के मतदाता ने यूपीए के पक्ष में अपना जनादेश दिया है. जनादेश के ताज़े रुझानों ने कई राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों को ग़लत साबित कर दिया है.
ऐसा लग रहा है कि मतदाता ने क्षेत्र, जाति और संप्रदाय के दायरे से ऊपर उठकर मतदान किया है. हालांकि स्थिति अभी भी बदल सकती है पर अभी तक जितनी सीटों का रुझान मिला है, उनमें यूपीए को 50 प्रतिशत से ज़्यादा पर बढ़त मिलती नज़र आ रही है. यह जनादेश बदलेगा, इसके आसार कम दिख रहे हैं.
09:30 IST
बसपा को मिल रही शुरुआती बढ़त यह संकेत दे रही है कि उनके लिए आंकड़ा 40 का पाला छू सकता है. पर सबसे बड़ी ख़बर अबतक की यह है कि कांग्रेस को दक्षिण भारत में अच्छी बढ़त मिल रही है. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल से ऐसे ही संकेत आ रहे हैं. क्या यह ये संकेत दे रहा है कि इसबार ज़्यादा मज़बूत कांग्रेस के साथ यूपीए दोबारा सत्ता संभालेगा.
दूसरा ध्यान देनेवाला रुझान गुजरात से आ रहा है जहाँ कांग्रेस इतनी बहुत बुरी स्थिति में नहीं दिखती. नरेंद्र मोदी के लिए यह एक तकलीफ़देह ख़बर हो सकती है.
08:52 IST
मतगणना का बहुत शुरुआती रुझान सामने आ रहा है पर केरल से शुरुआती रुझानों में वाम मोर्चे को हो रहा नुकसान कांग्रेस नेतृत्ववाले यूपीए गठबंधन के लिए एक अच्छा संकेत माना जा सकता है. ताज़ा रुझान पश्चिम बंगाल और केरल में वाममोर्च को नुकसान होता दिखा रहे हैं. इसका असर तीसरे मोर्च पर पड़ता नज़र आएगा.
चौंकानेवाला रुझान मिल रहा है तमिलनाडु से जहाँ डीएमके और कांग्रेस गठबंधन को बढ़त मिलती नज़र आ रही है. हालांकि अभी बहुत जल्दी है पर क्या यह कोई संकेत देता नज़र आता है.
08:15 IST
ताज़ा रुझानों और परिणामों की प्रतीक्षा अपने चरम पर है. सबको रुझानों, नतीजों का इंतज़ार है पर इस पूरी स्थिति में जिस एक सवाल पर ज़ोरदार कयास और अटकलों का क्रम जारी है, वो है प्रधानमंत्री पद के नाम को लेकर.
देश के दोनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधन, एनडीए और यूपीए सरकार बनाने की कवायद में आगे आगे चलने की कोशिश करते नज़र आएंगे पर भाजपा और कांग्रेस के संदर्भ में देखें तो राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी इसके लिए इतने बेचैन नहीं होंगे. उनकी मंशा एक स्थाई सरकार बना पाने की होगी. दोनों ही नेता चाहेंगे कि उन्हें सत्ता की भूख में कोई जल्दबाज़ी करते हुए दल के तौर पर न देखा जाए.
कारण उसका साफ़ है. राहुल या मोदी अपनी पार्टी की कमज़ोर सरकार के आने वाले दिनों में भद्द पिटते देखने से ज़्यादा विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे.
विपक्ष में रहते हुए अगर वो अच्छा काम करते हैं तो अगले चुनावों में उन्हें एन्टी-इनकमबैंसी का लाभ मिलता है और वो अपनी पार्टी को चुनावों में विजय दिलवा सीधे प्रधानमंत्री बनते हैं.
इसके ठीक विपरीत अगर इस बार कांग्रेस या भाजपा की सरकार बनती है तो प्रधानमंत्री बनते हैं मनमोहन या आडवाणी और अगले चुनावों में सत्ताधारी पार्टी को सत्ता में रहने का जो नुक़सान होता है वो राहुल या मोदी को उठाना पड़ेगा.
यह अलग बात है कि ऐसी सोच पार्टी में अन्य नेताओं की नहीं होगी. उन्हें तो सत्ता में रहने से मतलब है. प्रधानमंत्री तो वह इस बार बन रहे हैं न कि अगली बार.