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'मुस्लिम पानी, हिंदू पानी'

ज़ुबैर अहमदज़ुबैर अहमद|शुक्रवार, 01 फरवरी 2013, 20:09 IST

देश की स्वतंत्रा से पहले रेलवे स्टेशनों पर 'हिंदू पानी, मुस्लिम पानी' की आवाज़ गूंजती रहती थी.

मुसलमान मुसाफिरों के लिए पीने का पानी अलग था और हिंदू यात्रियों के लिए अलग.

आज़ादी के बाद रेलवे स्टेशनों पर ये आवाज़ तो बंद हो गई लेकिन अब ये आवाज़ मुंबई के रिहाईशी इलाकों में सुनाई देने लगी है.

मुस्लिम पानी हिंदू पानी की जगह 'मुस्लिम घर, हिंदू घर' की ये आवाज़ खूले तौर पर तो सुनाई नहीं देती, लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है.

मैंने लगभग दो साल पहले मुंबई में किराए का घर ढूंढ़ते समय अपनी दिक्कतों को एक ब्लॉग में बयान किया था.

कहा जाता है कि मुंबई में खुला ज़ेहन रखने वाले बांद्रा उपनगर में आबाद हैं जहां मुस्लिम और कैथोलिक समुदायों की अकसरियत है.

लेकिन दो साल पहले दस में से छह हिंदू मालिक मकान ने मुझे अपना घर किराए पर देने से ये कहकर 
इनकार कर दिया था कि वो किसी मुसलमान को अपना घर किराए पर नहीं देंगे.

इस बार मुझे दुख इस बात को देख कर हुआ कि मुस्लिम मकान मालिक बदले पर उतारू हो गए हैं और
अपने घरों को किराए पर चढ़ाने से पहले ब्रोकरों को सलाह देते हैं कि किरायेदार केवल मुस्लिम लाओ.

एक मुसलमान ब्रोकर ने जोश में मुझसे कहा, 'सर अब हम बदला ले रहे हैं. हिंदू मालिक मकान मुसलमानों को अपना मकान किराये पर नहीं देते तो हम भी अब हिंदुओं को किराये पर घर नहीं देते.'

मैंने पूछा किया ये फैसला मुस्लिम ब्रोकरों का है तो उसने कहा, 'नहीं ये हिदायत हमें मुस्लिम मकान मालिकों से मिली है.'

मुझे उसकी बात का यकीन उस समय हो गया जब मुझे कई हिंदू मकान मालिकों ने घर देने से इनकार
कर दिया.

मजबूरन मुझे एक मुसलमान मकान मालिक का घर किराए पर लेना पड़ा हालांकि जो घर हमें पसंद था उसका मालिक हिंदू था.

वो तैयार ज़रूर था लेकिन जब उसने बिल्डिंग सोसाइटी से इजाज़त मांगी तो सोसाइटी ने कहा 'मुसलमान है तो इनकार कर दो.'

आज़ादी के 66 साल बाद क्या हम एक बार फिर 'मुस्लिम पानी, हिंदू पानी' के दौर की तरफ लौट रहे हैं?

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 23:44 IST, 02 फरवरी 2013 Mohammad Tajuddin:

    गाँवों में ये चीजें कम नहीं हैं लेकिन शहर में हिंदू पानी और मुस्लिम पानी हर जगह है.

  • 2. 02:08 IST, 03 फरवरी 2013 Sumit Kumar, Faculty of Law, BHU, Varanasi:

    जुबैर अहमद साहब.... शायद ये बहुत ही कडवा सच है कि आज हिन्दू-मुसलमान वाली मानसिकता लोगो के दिमाग में घर कर गयी है.. और छोडिये अब तो हमने आतंकवाद को भी हिन्दू आतंकवाद और मुस्लिम आतंकवाद में बाँट दिया है..जब मै छोटा था तो मुझे लगता था कि धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव की बात सिर्फ कम पड़े-लिखे या गाँव के लोग ही करते है, लेकिन आज मुझे लगता है कि तब मै कितना गलत सोचता था... धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले लोग जब स्वयं को सभ्य नागरिक होने का तमगा देते है तो मुझे अजीब सी घुटन होती है..... धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय है ना कि किसी से बैर या मनमुटाव रखने का साधन. आज क्यों हम इतने कमजोर हो गए है कि हमें बात बात पर दूसरे धर्मं से खतरा नजर आने लगा है... नब्बे के दशक के सांप्रदायिक दौर से देश आज भी बाहर निकल नहीं पाया है.,, हार्दिक कष्ट तो तब होता है जब किसी छोटे बच्चे के मुँह से जाति और मजहब की बेढंगी बाते सुनता हूँ....

  • 3. 12:59 IST, 03 फरवरी 2013 Jai Sinha:

    सर, मैं आपकी इज्जत करता हूँ.

  • 4. 14:28 IST, 03 फरवरी 2013 harwansh rajwade:

    हमें सर्व-धर्म की भावना रखनी चाहिए.

  • 5. 16:11 IST, 03 फरवरी 2013 manveer singh chundawat:

    सर आप की बात में दम है कि देश फिर हिन्दू पानी और मुस्लिम पानी की रवायत वाले दौर की और लौट रहा है, लेकिन इस समस्या को सब जानते है .आज के दौर में जरुरत इस बात की है कि इस समस्या की जड़ में जाया जाए .जाना जाए की वो दौर फिर लौट कर क्यों आ रहा है ..आप की कलम यदि समाधान के लिए चले तो बात है ..वैसे रहन सहन का नात्र भी शायद इस सोच की जड़ में है ..धर्मो और रस्मो रिवाजो का आदर नहीं करने वालो को कोण अपने घर में जगह देगा ..बात क्यों की घर की हो रही है ..मकानों में तो आज भी सभी के लिए जगह है

  • 6. 16:43 IST, 03 फरवरी 2013 Mahe Alam:

    ये अच्छा नहीं है. हमारा पहला धर्म इंसानियत है.

  • 7. 18:43 IST, 03 फरवरी 2013 Anup Adhyaksha:

    हिन्दू और मुस्लिम शब्द वोटों के काम आते हैं, नयी पहचान है- आतंकवादी , गैर आतंकवादी.
    मुंबई के लोगों की सोच में जिस बदलाव की बात आपने लिखी है, जानने के लिए तह में जाएं. सच्चाई ये है की मुंबई हमले के बाद और उससे पहले भी कई आतंकी वारदात हुए जिनसे स्थानीय लोग दहशत में आ गए. बात बिना लाग लपेट के कहूं तो अरब, अफ़्रीकी और मध्य पूर्व में जो सुसाइड बॉम्बर बनने की होड़ लगी है वे सारे कौन है ये जगजाहिर है. उस आतंक की आग का असर पड़ोसी देशों में भी वहां के मासूम जन जीवन को झुलसा रही है। ऐसे में कोई भला जान बूझ कर क्यूँ अपने घर में लोगों को पनाह दे जो सीमा पार से ऐसी मानसिकता वाले लोगों को ला कर सुसाइड बॉम्बर की फैक्ट्री बनाए और हमारे देश को भी आतंकी आग में झुलसाए। उनको अपनी हिंसक सोच में बदलाव लाना चाहिए। लोग ही न रहें तो मज़हब किस के लिए?

  • 8. 19:08 IST, 03 फरवरी 2013 vijay:

    जुबैर जी, आपने बहुत अच्छा लिखा है. हो सकता है कि आपकी बात सही हो लेकिन अफसोस की इस प्रकार की समस्या पढ़े-लिखे शहरी तबके में ज्यादा है. गाँव, देहात में ऐसा देखने को नहीं मिलता.

  • 9. 07:34 IST, 04 फरवरी 2013 Sam:

    इन्हें भारत से बाहर फेंक देना चाहिए.

  • 10. 12:23 IST, 04 फरवरी 2013 sukhdev:

    यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. लोग तो आपस में कुछ समझ ही नही रहे हैं कि इस देश के राजनेता ऐसी ऐसी योजनाए बना रहे हैं जिससे ना कि हिन्दू -मुस्लिम, बल्कि स्त्री-पुरुष, अमीर-गरीब, एक ही धर्म में सब जातियों के बीच की खाई भी बढ़ रही है. पता नही पूरा देश किस तरफ जा रहा है और ये नेता और सरकार किस तरफ ले जा रही है?

  • 11. 13:55 IST, 04 फरवरी 2013 BHEEMAL Dildarnagar:

    एक पढ़ा लिखा और बुद्धिजीवी होने के नाते आपसे उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार की नकारात्मक विषयों पर अपना वक्त बरबाद नहीं करें.

  • 12. 18:48 IST, 04 फरवरी 2013 M.SHAHID GUDDU:

    परिंदों में फिरकापरस्ती नहीं देखी
    कभी मंदिर पे जा बैठे कभी मस्जिद पे जा बैठे
    पता नहीं कब इंसान इस मजहबी नफरत से ऊपर उठकर दुनिया को इंसानियत के नज़रिए से देखना शुरू करेगा. आज के दौर को देखकर तो ये सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या हम वाकई इंसान कहलाने के हकदार हैं ????

  • 13. 08:02 IST, 05 फरवरी 2013 Achint:

    ये शर्म की बात है कि आजादी के 66 साल बाद भी हम धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं. देश से बाहर रहने वाले भारतीयों को हम किस तरह का संदेश दे रहे हैं. शर्मनाक.

  • 14. 12:22 IST, 05 फरवरी 2013 E.A.Khan, Jamshedpur:

    जुबेर साहब दुःख और चिंता तो इसी बात की शिद्दत से महसूस की जा रही है जो आपने ने महसूस किया है और झेला है. यह खाई किस तरह पटेगी?

  • 15. 17:17 IST, 05 फरवरी 2013 Rakesh Dwivedi:

    आपने तो लिखा है की मुसलमान अपने घर हिन्दुओ को बदले की भावना से किराये पे नहीं देते पर आप कभी “पूरी ईमानदारी” से ये भी लिखिए की हिन्दू अपना घर मुसलमानो को किराये पे क्यो नही देते?? क्या इसके लिये वो हिन्दू ही दोषी हैं?? या फिर मुसंलमानो मे ही शायद कोई कमी है??

  • 16. 17:38 IST, 05 फरवरी 2013 ashok jat:

    आग तो दोनो तरफ लगी है महोदय, कया हिन्दू क्या मुसलमान? लेकिन लोगो ने जब सब कुछ बना दिया ही तो भुगतऩा भी है. वैसे मेरे ख्याल से दोनो अलग रहें तो ही अच्छा है, वरना रोजाना साँम्प्रदायिक दंगो की खबर आएगी बात-बात पर.

  • 17. 18:35 IST, 05 फरवरी 2013 ANIL YADAV:

    तथाकथित सेक्युलर पार्टियाँ भारत को नया पाकिस्तान बना देंगे.

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