दुनिया के 'पहले फ़्यूज़न फ़ूड' के बारे में कितना जानते हैं आप

मकाऊ

इमेज स्रोत, Matthew Keegan

    • Author, मैथ्यू कीगन
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

मकाऊ की पुरानी बस्ती की एक गली में अनजान सा एक रेस्त्रां है.

ये मकाऊ की पहचान बन चुकी चमक-दमक भरी सड़कों, बड़े-बड़े साइनबोर्ड वाले कैसिनो की दुनिया से बिल्कुल ही अलग जगह है.

मकाऊ, चीन के दक्षिणी तट के क़रीब एक छोटा सा शहर है. कभी ये पुर्तगाल का उपनिवेश हुआ करता था. बाद में पुर्तगाल ने इसे चीन को वापस कर दिया.

चीन ने मकाऊ को स्वायत्त रूप से शासन का अधिकार दिया हुआ है.

मकाऊ की तंग गली में स्थित जिस रेस्त्रां की हम बात कर रहे हैं, वो यहां के इतिहास और संस्कृति की जीती-जागती मिसाल है.

ये रेस्त्रां वो जगह है, जहां पर ऐतिहासिक मकाऊ की विरासत को ज़िंदा देख सकते हैं.

मकाऊ

इमेज स्रोत, Matthew Keegan

इमेज कैप्शन, सोनिया पामर और उनकी 103 बरस की मां आइडा डे जीसस

फ्यूज़न फूड

रेस्त्रां चलाने वाली सोनिया पामर कहती हैं, "मैं शर्त लगा सकती हूं कि मकाऊ का खान-पान दुनिया में फ्यूज़न फूड का सबसे पहला नमूना था."

फ़्यूज़न फ़ूड यानी अलग-अलग संस्कृति के पकवानों से बनाए जाने वाले नए किस्म का पकवान.

पास ही उनकी 103 बरस की मां आइडा डे जीसस बैठी हैं. इस रेस्तरां का नाम है रिक्वेक्सो. मां-बेटी मिलकर ये रेस्त्रां पिछले 35 सालों से चला रही हैं.

यहां पर मकाऊ के ओरिजिनल व्यंजन परोसे जाते हैं. ये व्यंजन पुर्तगाली और चीनी खान-पान के मेल से तैयार किए गए हैं. स्वाद की ये विरासत क़रीब 450 साल पुरानी है.

इसकी शुरुआत सोलहवीं सदी में उस वक़्त हुई थी, जब पुर्तगाल ने इस द्वीप को कारोबारी ठिकाना बनाने के लिए ठेके पर लिया था.

मकाऊ के खाने को यूनेस्को ने दुनिया के पहले 'फ्यूज़न फूड' का दर्ज़ा दिया है.

मकाऊ

इमेज स्रोत, Sean Pavone / Alamy Stock Photo

व्यंजनों की गॉड मदर

सोनिया पामर बताती हैं, "मकाऊ का खान-पान मकाऊ के बाशिंदों की तरह ही पुर्तगाली और चीनी संस्कृति के मेल से पैदा हुआ."

"जब चीन की महिलाओं ने पुर्तगालियों से शादी की, तो वो अपने खाविंदों के लिए पुर्तगाली मिज़ाज का खाना पकाने की कोशिश करती थीं."

"तब मकाऊ में तो पुर्तगाल के सभी व्यंजनों को तैयार करने की सामग्री उपलब्ध नहीं थी."

"इसलिए चीनी मूल की महिलाओं ने अपने स्थानीय मसालों और सब्जियों की मदद से पुर्तगाली खाना तैयार करना शुरू किया."

"इस तरह से दुनिया के पहले फ्यूज़न फूड की शुरुआत हुई."

सोनिया कहती हैं कि उनकी मां को मकाऊ के व्यंजनों की गॉड मदर कहा जाता है.

मकाऊ

इमेज स्रोत, Matthew Keegan

रेस्त्रां की दीवारों पर...

सोनिया बताती हैं, "जब मेरी मां ने रिक्वेक्सो रेस्त्रां की शुरुआत की थी, तो ये मकाऊ के व्यंजन परोसने वाला पहला ठिकाना था."

"इससे पहले मकाऊ के व्यंजन लोगों के घरों में ही पकाए जाते थे."

रेस्त्रां की दीवारों पर गुज़रे दौर की तस्वीरें लगी हैं. ये पारिवारिक रेस्त्रां लोगों को पुरानी यादों की दुनिया में ले जाता है.

यहां आने वाले क़सम खाकर ये कहते हैं कि मकाऊ का असली स्वाद यहीं मिलता है और यहां परोसी जाने वाली व्यंजनों की क़ीमत भी वाजिब है.

पुर्तगाली, मकाऊवासी और चीनी समुदाय के लोग अक्सर सोनिया के रेस्त्रां में आते हैं. कई लोग तो ऐसे हैं जो यहां रोज़ाना खाने आते हैं.

मकाऊ

इमेज स्रोत, Matthew Keegan

इंटरनेट की मदद से...

कभी-कभार बाहर से आने वाले सैलानी भी सोनिया के रेस्त्रां में परोसे जाने वाले फ्यूज़न फूड का लुत्फ़ लेने आ जाते हैं. हालांकि विदेशी सैलानी यहां कम ही आते हैं.

क्योंकि, सोनिया का रेस्तरां पुरानी बस्ती की एक गली में है. कुछ सैलानियों ने इंटरनेट की मदद से रिक्वेक्सो का पता लगाया और यहां खाने आए.

रिक्वेक्सो केवल मकाऊ के खान-पान की विरासत को नहीं संजो रहा, बल्कि वो तेज़ी से गुम हो रही मकाऊ की फ्यूज़न संस्कृति को भी बचाने में जुटा है.

जब 1999 में पुर्तगाल ने मकाऊ का शासन चीन को सौंप दिया था तब बहुत से लोग यहां से चले गए थे. इस वक़्त मकाऊ की आबादी 6 लाख 63 हज़ार 400 है.

इनमें से 90 फ़ीसद चीन के लोग हैं. यानी मकाऊ के बाशिंदे बस गिनती के बचे हैं.

मकाऊ

इमेज स्रोत, Matthew Keegan

मकाऊवासियों की तादाद

सोनिया कहती हैं, "बदक़िस्मती से मकाऊ के बाशिंदे अब यहां नहीं रहते. असली मकाऊवासियों की तादाद तो महज़ 1000 ही होगी."

"जब से चीन को मकाऊ सौंपा गया है, तब से यहां पर पुर्तगालियों की तादाद इतनी नहीं है कि उनसे शादी के मौक़े हों."

"इसी वजह से मकाऊ की फ्यूज़न आबादी बढ़ नहीं रही."

मकाऊ के समुदाय की अपनी अलग ही भाषा है, पाटुआ. ये पुर्तगाली क्रिओल ज़बान सोलहवीं सदी में उस वक़्त विकसित हुई थी, जब मकाऊ पुर्तगालियों के कब्ज़े में आया था.

साल 2000 में यूनेस्को ने पाया था कि अब ये भाषा बोलने वालों की तादाद 50 से ज़्यादा नहीं है. यानी इस भाषा के विलुप्त होने का ख़तरा सिर पर है.

अब मकाऊ में रहने वाले यहां के मिक्स समुदाय के लोग बस ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि ज़बान जैसा हाल उनके फ्यूज़न फूड का न हो.

मकाऊ की साझा संस्कृति

इसीलिए सोनिया पामर और उनकी मां अपने व्यंजनों की रेसिपी को खुलकर बांटती हैं. उन्हें उम्मीद है कि नई पीढ़ी के शेफ मकाऊ समुदाय की विरासत को आगे बढ़ाएंगे.

सोनिया बताती हैं, "मकाऊ में एक रेस्त्रां ऐसा है, जहां फ्यूज़न फूड बनाना सिखाया जाता है. मैंने अपनी बहुत सी रेसिपी इस रेस्त्रां से शेयर की है."

"हमसे जो भी व्यंजन बनाने की विधि पूछता है, हम उसे बता देते हैं."

सोनिया के रेस्त्रां की सबसे लोकप्रिय डिश है-पोर्को बफासा. ये उबले हुए आलुओं और सुअर के मांस को हल्दी के शोरबे में पकाकर तैयार की जाती है.

इसी तरह एक और डिश टाचो में सुअर के मां और पत्ता गोभी को चीन के मशहूर सॉस के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है.

सोनिया को खाना बनाने सीखने वाले युवाओं के उत्साह को देखकर उम्मीद है कि मकाऊ की साझा संस्कृति की विरासत को नई पीढ़ी अच्छे से संभालेगी.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

कुछ और रेस्त्रां...

आज, उनसे प्रेरित होकर कुछ और रेस्त्रां खुले हैं, जो फ्यूज़न फूड परोसते हैं.

सोनिया की ऐसी ही दोस्त हैं फ्लोरिटा एल्वेस. फ्लोरिटा की कोशिश है कि वो सोनिया और उनकी मां की मुहिम को आगे बढ़ाएं.

वो अपने पारिवारिक रेस्त्रां ला फैमिलिगा में मकाऊ के फ्यूज़न फूड को बनाकर परोसती हैं. ये मकाऊ के मध्य के टाइपा विलेज इलाक़े में है.

यहां पर मकाऊ चिकेन जैसे स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं. फ्लोरिटा एल्वेस कहती हैं कि वो खान-पान के ज़रिए अपनी संस्कृति को सहेजना चाहती हैं.

फ्लोरिटा बताती हैं, "मैंने अपने रेस्त्रां में सिग्नेचर डिश जैसे मिंची परोसने से इसकी शुरुआत की है. बाद में मेरा इरादा और भी मौसमी डिश पेश करने का है."

"क़दम दर क़दम मेरी कोशिश लोगों की दिलचस्पी मकाऊ के खान-पान में जगाने की है."

पुर्तगाली खाने से अलग

आज की दुनिया में हर जगह का खाना हर जगह मिल जाता है. लेकिन आप को मकाऊ का लोकल व्यंजन शायद ही कहीं मिले. इससे पहले तो ये घरों में ही पकाया जाता था.

अब कुछ रेस्तरां मकाऊ की डिश परोसने लगे हैं. फ्लोरिटा कहती हैं, "ये ऐसे व्यंजन हैं, जिनकी खोज दुनिया को अभी करनी बाक़ी है."

"खान-पान के शौक़ीनों, कुछ नया आज़माने को बेक़रार लोगों के लिए मकाऊ के व्यंजन ज़रूर चखने चाहिए.'

फ्लोरिटा के मुताबिक़, लोग अभी भी मकाऊ के खाने को पुर्तगाली समझ लेते हैं, जो ग़लत है, मकाऊ के व्यंजन और इन्हें बनाने का तरीक़ा, दोनों ही पुर्तगाली खाने से अलग हैं.

फ्लोरिटा बताती हैं, "हम ये व्यंजन बनाने में लहसुन, प्याज़, नमक और मिर्च जैसे पुर्तगाली चीज़ें इस्तेमाल करते हैं."

"साथ ही हम इन व्यंजनों में चीनी और दक्षिणी-पूर्वी एशियाई सामग्री भी मिलाते हैं. जैसे कि हल्दी, इमली और सोया सॉस."

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

पहचान बचाने के लिए पूरी ताक़त

इसी वजह से मकाऊ के खाने में एक साथ कई तरह के स्वाद मिलते हैं. फ्लोरिटा की सबसे पसंदीदा डिश है ओ डायब्लो.

ये मकाऊ का ख़ास तरह का कैसरोल होता है, जो त्योहारी सीज़न के बाद बनता है. इस में अलग-अलग तरह के मांस और अचार भर कर पकाया जाता है.

ये डिश खट्टी, मीठी, तीखी और नमकीन होती है. सारे स्वाद एक ही पोटली में मिल जाते हैं.

फ्लोरिटा कहती हैं, "अगर आप अल्पसंख्यक हैं, तो आप को अपनी पहचान बचाने के लिए पूरी ताक़त लगानी होती है. वरना आप गुम हो जाते हैं."

"खाना हमारी अलग पहचान है. वरना तो हम मकाऊ के शोर और चमक-दमक में गुम हो जाएंगे."

आने वाली पीढ़ी के लिए

उनका मानना है कि मकाऊ के समुदाय के बीच खान-पान बहुत अहम रिवाज है. जब भी लोग इकट्ठे होते हैं, तो एक-दूसरे से अपना खाना शेयर करते हैं.

यही वजह है कि मकाऊ के लोगों को उम्मीद है कि उनका फ्यूज़न फूड और उनकी संस्कृति आने वाली पीढ़ी के लिए बची रहेगी.

फ्लोरिटा कहती हैं, "खाना हमारी बुनियादी ज़रूरत है. हर किसी को रोज़ खाना चाहिए होता है."

"इसीलिए मुझे यक़ीन है कि हम अपने व्यंजनों की मदद से ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच सकते हैं. अपनी संस्कृति को ज़िंदा रख सकते हैं."

छोड़िए YouTube पोस्ट, 3
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 3

(बीबीसी ट्रैवल पर मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. बीबीसी ट्रैवल को आप इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)