एक घंटा ज़्यादा सोकर क्या हासिल कर सकते हैं

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- Author, ब्रायन लुफ़किन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
हम सब ऐसा करते हैं. हम जिम जाने के लिए सुबह उठ जाते हैं और ऑफिस के ईमेल का जवाब देने के लिए रात में देर तक जगे रहते हैं.
ऐसा भी होता है कि जब हमारा सोने का वक़्त हो उस समय हम बिस्तर पर लेटकर नेटफ्लिक्स देख रहे हों.
वजह जो भी, अक्सर हम सोने के समय में कटौती कर देते हैं. नये साल में अगर आप स्वस्थ शुरुआत करना चाहते हैं तो आपको सोने के लिए ज्यादा वक़्त निकालना होगा.
नींद के लिए अगर आप एक घंटा भी अतिरिक्त निकाल लेते हैं तो निश्चित तौर पर आप तरोताज़ा दिखेंगे, बेहतर महसूस करेंगे और अपना काम अच्छे से करेंगे.
विशेषज्ञों का कहना है कि एक अतिरिक्त घंटा तो बस शुरुआत है. नींद का असल फ़ायदा तब मिलेगा जब आप ज़्यादा सोने का रूटीन बनाएं और चाहे जो भी हो जाए उस पर कायम रहें.
नींद में कटौती न करें
भरपूर नींद के कई फ़ायदे हैं. अमरीका में जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की एसोसिएटेड प्रोफेसर रैचेल सलास नींद संबंधी विकारों की विशेषज्ञ हैं.
वह कहती हैं, "भरपूर नींद के बाद आप अच्छा महसूस करेंगे, आपको ज्यादा ऊर्जा मिलेगी, आपको अच्छे विचार आएंगे और आप अपनी टीम और संगठन में बेहतर तरीके से योगदान कर पाएंगे."
"आपका मूड अच्छा होगा. आप लोगों से जुड़ेंगे और नये आइडिया शेयर करेंगे."
नींद का शरीर पर भी असर पड़ता है. नींद में कटौती करने से आपका वजन बढ़ सकता है, आंखों के नीचे झुर्रियां पड़ सकती हैं और आप थके-थके दिख सकते हैं.
2013 में बीबीसी ने सरे यूनिवर्सिटी के "स्लीप रिसर्च सेंटर फ़ॉर एक्सपेरिमेंट" के साथ मिलकर एक अध्ययन किया था.
इसमें पता चला था कि एक अतिरिक्त घंटे की नींद से कंप्यूटर टेस्ट में प्रतिभागियों की मानसिक दक्षता बढ़ गई.

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कई अध्ययनों से साफ हो गया है कि सिर्फ़ एक घंटा अतिरिक्त सोना काफी नहीं है. नींद महत्वपूर्ण है. सुविधा के हिसाब के इसमें कटौती करना ठीक नहीं है.
पिछले महीने अमरीका में हुए एक अध्ययन से पता चला कि जिन छात्रों ने रात में पूरे 8 घंटे की नींद ली उन्होंने अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया.
मिशिगन यूनिवर्सिटी में अक्टूबर में हुए रिसर्च से पता चला था कि नींद कम होने से याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है और बेकिंग से लेकर सर्जरी तक के क्षेत्रों में दक्षता प्रभावित होती है.
एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि अगर आप दो लगातार रातों में 6 घंटे से कम सो रहे हैं तो यह अगले छह दिनों तक आपको सुस्त बना सकता है.
2018 में स्वीडन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग कम सोते हैं उनकी मृत्युदर ज्यादा होती है, खास तौर पर 65 साल से ऊपर के बुजुर्गों में ऐसा पाया गया.
इस अध्ययन में 40 हजार लोगों को शामिल किया गया था और 13 साल तक उनके आंकड़े रिकॉर्ड किए गए थे.
समझदार लोग जानते हैं कि अच्छी नींद उनके लिए फ़ायदेमंद है. समस्या यह है कि ज़िंदगी की जरूरतें, जैसे- काम, बच्चे, दोस्त और फिटनेस- इसमें आड़े आ जाती है.
चूंकि लोग एक-एक दिन के हिसाब से सोचते हैं और इसी मुताबिक काम करते हैं, इसलिए वे एक अतिरिक्त घंटे की नींद की ताक़त को नज़रअंदाज़ कर देते हैं.
हो सकता है कि आप रात में छह घंटे (ब्रिटेन के औसत से थोड़ा कम) की नींद लें और सोच लें कि आपने काम भर सो लिया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बड़ी गलती है.

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सलास कहती हैं कि कभी-कभी लोगों की बुरी आदतें लंबी खिंच जाती हैं और सेहत की कई समस्याएं इकट्ठा हो जाती हैं. तब लोगों को नींद का इलाज कराने के लिए आना पड़ता है.
नींद की कमी से लंबे समय में जो समस्याएं होती हैं उनमें शामिल हैं वजन बढ़ना, माइग्रेन और थकान.
नींद में कतरब्योंत करने से एक अन्य विकार भी होता है. यह है "स्लीप एप्नी". सलास इसे "माइक्रोस्लीप" भी कहती हैं.
इसमें दिन में जगे रहने पर भी कभी-कभी कुछ सेकेंड के लिए दिमाग काम करना बंद कर देता है.
आंखें खुली रहती हैं, लेकिन दिमाग सो जाता है. गाड़ी चलाने वाले लोगों के लिए यह बहुत ख़तरनाक है.
रूटीन अहम है
बेहतर क्या है- एक घंटे की अतिरिक्त नींद या सोने का नियमित शेड्यूल? सलास का कहना है कि आपको दोनों करने चाहिए.
रूट ग्रुबर मॉन्ट्रियल में मैकगिल यूनिवर्सिटी के स्लीप लैब में मनोचिकित्सा की एसोसिएट प्रोफेसर हैं.
ग्रुबर कहती हैं कि नींद कितनी होनी चाहिए इसका कोई जादुई अंक नहीं है, फिर भी कुछ रास्ते हैं जिससे लोग यह तय कर सकते हैं कि उनको कितनी नींद की जरूरत है.

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अगर आप छुट्टी पर हैं और अगले दिन के लिए आपका कोई कमिटमेंट नहीं है तो समय से सोने चले जाइए और तभी उठिए जब आपकी नींद स्वाभाविक तौर पर खुले.
यह देखिए कि आप कितने घंटे सोये हैं. रात की नींद के लिए उतने घंटे सोना ही आपका लक्ष्य होना चाहिए.
यह भी नोट कीजिए कि आप कब सोये और कब जग गए. ये दोनों समय बहुत महत्वपूर्ण हैं.
ग्रुबर कहती हैं, "जब यह संख्या पता चल जाए तो इतनी नींद जरूर लीजिए, चाहे जो भी हो."
"दूसरी सभी चीजों के शेड्यूल तय कीजिए ताकि आप सोने के लिए समय से बिस्तर पर जा सकें."


जिस समय पर आपकी नींद स्वाभाविक रूप से खुलती है, उस टाइम टेबल का भी पालन करते रहिए.
एक घंटे ज्यादा की नींद तो आप लेंगे ही लेंगे, कई लोगों के लिए हो सकता है कि नींद इससे भी ज्यादा लंबी हो.
विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग पूरी नींद से वंचित हैं और उन्हें इसका पता भी नहीं.
यदि आप रात में 4 घंटे ही सो रहे हैं तो हो सकता है कि अच्छे से काम करने के लिए आपको कई घंटे ज्यादा नींद की जरूरत है.
दिन में आप क्या करते हैं इससे भी रात की नींद प्रभावित होती है.
हद से ज्यादा कॉफ़ी या शराब के सेवन को छोड़कर आप अपने बॉडी क्लॉक को नियमित कर सकते हैं. शरीर की आंतरिक घड़ी आपको बताती है कि आप कब सोएं और कब जग जाएं.
ग्रुबर का कहना है कि शरीर को आराम देने के लिए वयस्कों को हफ्ते में 150 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज़ करने का लक्ष्य बनाना चाहिए.
"इससे संतुलन बनता है. तंदुरुस्त रहने के लिए आपको एक्टिव रहने की जरूरत है."
आप हैरान हो सकते हैं कि आप कितनी देर तक सो सकते हैं, लेकिन अगर आप सो सकते हैं तो आपकी नींद की जरूरत है.

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पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के सेंटर फ़ॉर स्लीप एंज सिरेडियन न्यूरोबायलॉज़ी की प्रोफेसर सिग्रिड वेसी का कहना है कि लोगों को इंस्टाग्राम से समय निकालकर समय से सो लेना चाहिए.
सलास ने इसे खुद आजमाया. "मैं 11 बजे सोने चली गई और सात बजे उठी. वीकेंड्स पर भी मैंने ऐसा ही किया."
"दो सप्ताह तक मैं ऐसा ही करने वाली थी. मुझे याद है कि 5 दिन बाद मुझे बहुत गहरी नींद आई थी. मिडिल स्कूल के बाद मैं इतने अच्छे से कभी नहीं सोयी थी."
शरीर के भीरत की घड़ी
एक बार अगर आपने प्राकृतिक नींद का शेड्यूल तय कर लिया है तो शरीर की आंतरिक घड़ी के साथ तालमेल बिठाकर रहना जरूरी है.
सलास कहती हैं, "भले ही चाहे आप 10 घंटे सो लें, लेकिन अगर वह आपके शरीर की आंतरिक घड़ी के मुताबिक नहीं है तो आपको नींद की कमी लगेगी."
आप एक घंटा ज्यादा सो लें लेकिन जब तक वह आपके प्राकृतिक रूप से सोने और जगने के समय के मुताबिक नहीं है, तब तक वास्तव में आपको आराम नहीं मिलता.
वेसी कहती हैं, "लोग नहीं जानते कि उनको कितना सोना चाहिए." जब तक आप खुद को अतिरिक्त नींद नहीं देते तब तक आपको लगता है कि सब कुछ ठीक चल रहा है.



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पहले से अधिक नींद लेने के बाद भी अगर आप सुस्ती महसूस करते हैं तो विशेषज्ञों का कहना है कि यह दबाव वाली स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत है.
इसके बावजूद नींद का समय बढ़ाकर आप सेहत के लिए एक अच्छा फ़ैसला ले सकते हैं. सलास कहती हैं, "यह इलाज और दवा की सभी सीमाओं से परे है."
आपके शरीर को कितनी नींद की जरूरत है, यह तय करना और उस पर बने रहना आपका सबसे अच्छा निवेश हो सकता है. काम में बहुत तेज़ होना अच्छा है, लेकिन ज़िंदा रहना और भी बेहतर है.
सलास कहती हैं, "नींद की कमी के कारण लोग हादसे के शिकार हो रहे हैं. क्या आप सोच सकते हैं कि कोई ब्रेन सर्जन अच्छी नींद से वंचित हो?"
"यह जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर है."
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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