कोहली और गंभीर के बीच नोक-झोंक का सिलिसिला एक दशक पुराना

विराट कोहली और गौतम गंभीर

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    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

रविवार को बेंगलुरु और लखनऊ का मैच अपने नतीजे से ज़्यादा खिलाड़ियों के बीच नोक-झोंक की वजह से चर्चा में रहा है. इस मैच के दौरान कई ऐसी छोटी-छोटी घटनाएं हुईं जिसने दोनों टीमों का पारा चढ़ा दिया.

असल में एक-दूसरे से क्या कहा-सुना गया इसकी जानकारी तो नहीं आई लेकिन मैच के बाद बेंगलुरु के विराट कोहली और लखनऊ के मेंटॉर गौतम गंभीर के बीच ग़ुस्से में कहा-सुनी होते हुए देखा गया.

दोनों को टीम के दूसरे खिलाड़ियों ने एक दूसरे से अलग किया और उनपर आईपीएल ने फ़ाइन भी लगाया. लेकिन टीवी और डिजिटल पर करोड़ों दर्शकों के सामने ऐसा बर्ताव करने से उनका सम्मान बढ़ा नहीं होगा.

विराट कोहली एक लीजेंड हैं और दुनियाभर के युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. अब वो 20-22 साल के नौजवान भी नहीं रह गए हैं जो बात-बात पर आपा खो जाएं. यही बात हम गौतम गंभीर के बारे में भी कह सकते हैं.

मैच के बाद अनिल कुंबले ने कहा कि मैदान पर गरमा-गरमी आम बात है लेकिन जैसे ही मैच ख़त्म हो खिलाड़ियों को एक दूसरे से हाथ मिलाना चाहिए और कड़वापन भूल कर क्रिकेट के सम्मान में सर झुकाना चाहिए.

दरअसल कोई भी खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों ना हो, क्रिकेट के गेम से छोटा ही है और खेल के सम्मान का ध्यान रखना सभी खिलाड़ियों की बराबर ज़िम्मेदारी है. हालांकि गंभीर और कोहली के बीच नोक-झोंक की कहानी का सिलिसिला एक दशक पुराना है.

विराट कोहली और गौतम गंभीर

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पुराना इतिहास

विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच मैदान में झड़पों का पुराना इतिहास है. दोनों ही दिल्ली के रणजी खिलाड़ी रहे हैं लेकिन आईपीएल में विरोधी टीम के कप्तान और खिलाड़ी के रूप में इन्होंने एक दूसरे का सामना किया है.

बर्ताव में एक दूसरे के लिए तल्ख़ी तो साफ़ झलकती रही है, कभी-कभी ऐसी घटनाओं ने शिष्टाचार की सीमा को भी पार किया है.

इन दोनों खिलाड़ियों के बीच पहली बड़ी झड़प 2013 के आईपीएल में देखने को मिलती है जब कोहली बेंगलुरु के कप्तान थे और गंभीर कोलकाता को लीड कर रहे थे.

दोनों के बीच मैच के दौरान कहा-सुनी हुई और उन्होंने एक दूसरे को धक्का भी दिया. दोनों को टीम के दूसरे खिलाड़ियों ने अलग किया लेकिन टीवी पर करोड़ों दर्शकों ने दो महान खिलाड़ियों को बच्चों की तरह झगड़ा करते हुए देखा.

तीन साल बाद 2016 में कोलकाता ने बेंगलुरु के खिलाफ़ 183 रन बनाए फिर भी 9 विकेट से मैच हार गए. कोहली उस सीज़न ज़बरदस्त फॉर्म में थे और 900 से अधिक रन उन्होंने बनाया था.

उस मैच के 19वें ओवर के दौरान गंभीर इतने निराश हो गए थे कि उन्होनें रन पूरा होने के बाद भी नॉन स्ट्राइकर की तरफ़ गेंद से मारा जिधर विराट कोहली खड़े थे.

दोनों के बीच एक बार फिर कहासुनी हुई. इस पूरे मैच के दौरान दोनों ही टीम के खिलाड़ियों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ काफ़ी स्लेजिंग की थी.

हालांकि गंभीर ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा कि वो विराट कोहली की इज़्ज़त करते हैं और वो जानते हैं कि कोहली उनकी तरह ही मैदान पर काफ़ी कंपीटीटिव रुख़ अपनाते हैं लेकिन उसके बाद अब ये 2023 का मामला सामने आया है जो जताता है कि दोनों के बीच की दूरी अभी भी बनी हई है.

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गरमदिमाग़ कोहली

विज़्डन मैगज़ीन ने 2019 में विराट कोहली को साल के पांच सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर्स में एक चुनते हए लिखा कि कोहली एक भड़कीले और गरम-दिमाग़ खिलाड़ी हैं लेकिन दुनिया में सबसे बेहतर भी हैं.

दरअसल कोहली को हारना पसंद नहीं है, वो जीतना चाहते हैं और जीत के साथ विरोधी पर पूरा वर्चस्व भी स्थापित करना चाहते हैं. उनके इसी स्वभाव ने कभी-कभी अनुशासन और शिष्टाचार के नियमों को तोड़ा भी है.

जब हम कोहली की अभद्र भाषा और अशिष्ट व्यवहार की चर्चा करते हैं तो सबसे पहले 2011 में ऑस्ट्रेलिया की सिरीज़ याद आती है जब सिडनी में कोहली बाउंड्री पर फ़ील्डिंग कर रहे थे और कुछ दर्शकों ने उन्हें बुरा-भला कहा था. जवाब में कोहली ने उनकी ओर मिडिल फ़िंगर से इशारा किया जिसके लिए आईसीसी ने उन्हें फ़ाइन भी किया था.

2011 के वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में जब गेंदबाज़ रूबेल हुसैन ने कोहली को आंख दिखाई तो कोहली गेंदबाज़ की तरफ़ भाग कर गए और दोनों के बीच कुछ बातचीत हुई. बाद में अंपायर ने दोनों को अलग किया.

गौतम गंभीर के साथ तो उनकी 3-4 झड़पें हो ही चुकी हैं. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ के साथ भी उनकी तकरार काफ़ी वायरल हुई थी. बेंगलुरु के टेस्ट मैच में अंपायर के आउट दिए जाने के बाद स्मिथ ने पवेलियन में अपने साथी खिलाड़ियों से डीआरएस लेने के बारे में इशारे से कुछ पूछा.

ये देखकर विराट स्मिथ के पास आए और उनसे कुछ कहा. स्मिथ ने भी कुछ जवाब दिया और साफ़ दिखाई दिया की दोनों ग़ुस्से में हैं और एक बार फिर अंपायर ने ही बीच-बचाव किया.

गौतम गंभीर

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गंभीर का ग़ुस्सा

2007 के कानपुर वनडे में पाकिस्तान के शाहिद आफ़रीदी गेंदबाज़ी कर रहे थे और सामने थे गौतम गंभीर. भारतीय ओपनर ने आफ़रीदी को एक चौका जड़ा और फिर अगली गेंद पर सिंगल लेने दौड़े. इस दौरान दोनों की टक्कर हो गई और फिर गरमा-गरम बहस. बाद में आईसीसी ने गंभीर पर शारीरिक टक्कर के आरोप में फ़ाइन लगाया.

रन लेने के दौरान एक दूसरी घटना में 2008 में गंभीर ने शेन वॉटसन को कोहनी मार दी. वॉटसन ने स्लेजिंग की कोई कसर नहीं छोड़ी और गंभीर ने भी उन्हें कम नहीं सुनाया. लेकिन इस मसले के बाद गंभीर को एक टेस्ट मैच के लिए बैन कर दिया गया था.

वहीं 2014 के एक रणजी मुक़ाबले में गंभील ने शार्दुल ठाकुर को पहले तो कई चौके लगाए लेकिन बाद में उनकी ही गेंद पर वो आउट हो गए. शार्दुल ने क्रीज़ छोड़कर जाते हुए गंभीर को कुछ कहा तो गंभीर बैट लेकर उनकी तरफ़ दौड़ पड़े थे.

इन सभी मामलों में एक बात साफ़ नज़र आती है कि चाहे वो कोहली हो या गंभीर, अधिकतर बार उन्होंने किसी की चुभाने वाली हरकत के जवाब में ऐसा रूप दिखाया है. लेकिन क्रिकेट एक तहज़ीब का खेल है और इसमें पीछे हटने से कोई छोटा नहीं हो जाता. नवीन उल हक़ जैसे युवा खिलाड़ी से उलझने में विराट की ही बदनामी होगी.

हालांकि मैच के बाद विराट कोहली ने सोशल मीडिया पर रोमन सम्राट मार्कस ऑरेलियस के बयान को लिखा जिसमें उन्होंने कहा, "हर चीज़ जो हम सुनते हैं वो किसी की राय है, तथ्य नहीं और हर चीज़ जो हम देखते हैं वो नज़रिया है सच नहीं."

यही बात अगर खिलाड़ी समझ जाएं तो क्रिकेट के मैदान पर कोई विवाद ही ना हो. अगर विराट कोहली भी दूसरे के नज़रिए को समझें तो शायद वो अपने ग़ुस्से पर भी क़ाबू पा जाए.

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