टी-20 वर्ल्ड कप: 'काग़ज़ी शेर' भारतीय क्रिकेट टीम बड़ी प्रतियोगिता में ढेर क्यों हो जाती है?

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- Author, रेयान मसूद
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी बांग्ला सेवा
भारत की क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप का ख़िताब जीतने की बड़ी दावेदार है. वजह है उसकी बल्लेबाज़ी, स्पिन गेंदबाज़ी और टीम का अनुभव.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी की रैंकिंग में भी इस समय भारतीय टीम नंबर वन है.
हालांकि आँकड़ों में आगे रहने के बावजूद पिछले साल यूएई में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई.
अब एक साल बाद भारतीय टीम को ये मौक़ा मिल रहा है कि वो ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर उस याद को भुलाए.
भारतीय क्रिकेट टीम की बैटिंग लाइनअप दुनिया में सबसे अच्छी मानी जाती है.
पिछले साल सबसे ज़्यादा स्कोर करने वाले टॉप 10 खिलाड़ियों में तीन बल्लेबाज़ भारत के हैं- सूर्यकुमार यादव, रोहित शर्मा और केएल राहुल.
भारत की सलामी जोड़ी है रोहित शर्मा और केएल राहुल की और इसके बाद तीसरे नंबर पर आते हैं पूर्व कप्तान विराट कोहली.
ये तीनों खिलाड़ी किसी भी मैच का रुख़ बदलने का माद्दा रखते हैं. इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि रोहित शर्मा की स्ट्राइक रेट 147 है, विराट कोहली की स्ट्राइक रेट 139 और केएल राहुल की 138 है.
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क्या हार से डरती है भारतीय टीम?

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लेकिन कई बार मौक़े पर भारत का टॉप ऑर्डर नाकाम भी रहा है. पेपर पर मज़बूत दिखने वाली भारत की बल्लेबाज़ी कई बार काफ़ी कमज़ोर भी साबित हुई है. 2019 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत की टीम सेमी फ़ाइनल में हार गई.
तो 2021 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ग्रुप स्टेज़ मैच गँवाने के बाद भारत की टीम उबर नहीं पाई, तो इस साल एशिया कप में भारत का यही हाल रहा. पाकिस्तान और श्रीलंका से हारने के बाद भारत की टीम फ़ाइनल में जगह बनाने में विफल रही.
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन का कहना है कि बड़े मौक़े पर भारतीय टीम हार से डरती है. भारत की टीम ने वर्ष 2013 से आईसीसी के किसी टूर्नामेंट में ख़िताबी जीत हासिल नहीं की है.
लेकिन इसकी वजह क्या है जबकि भारत के पास कई चर्चित क्रिकेटर और अच्छे बल्लेबाज़ हैं.
इसी के जवाब में आईसीसी की वेबसाइट से बातचीत में नासिर हुसैन कहते हैं कि भारत की टीम हारने से डरती है और खिलाड़ियों के दिमाग़ में ये बात भी बैठी रहती है कि उनके प्रदर्शन की तारीफ़ हो रही है और लोग उन पर नज़र रखे हुए हैं.
2021 के टी-20 विश्व कप में मिली नाकामी के बाद पूर्व भारतीय कोच रवि शास्त्री ने कहा था कि भारत बहुत ज़्यादा क्रिकेट खेलता है.
आईपीएल को लेकर काफ़ी चर्चा होती है और ये मान लिया जाता है कि भारत की टीम बेहतरीन टी-20 क्रिकेट खेलेगी.
लेकिन शास्त्री ने उस समय कहा था कि खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल खेलते-खेलते काफ़ी थक जाते हैं.
उन्होंने ये भी कहा था कि 2021 के विश्व कप में भारतीय खिलाड़ियों में थकान देखी जा सकती थी.
अब आईपीएल में दो और टीमें जुड़ गई हैं. इसका मतलब ये है कि मैचों की संख्या भी बढ़ गई है.
रवि शास्त्री ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था- भारतीय टीम में स्पार्क की आवश्यकता थी. लेकिन वो टीम में दिख नहीं रही थी.
हालांकि उस समय से भारत के टॉप तीन खिलाड़ियों ने अपनी तकनीक बदली है.
राहुल द्रविड़ के कोच बनने से पहले भारत के शीर्ष तीन खिलाड़ी बिना विकेट गँवाए रन बनाने की कोशिश करते थे, लेकिन अब ये तीनों खिलाड़ी तेज़ गति से रन बनाते हैं.
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सूर्यकुमार यादव

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इस समय भारत के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो रहे हैं सूर्यकुमार यादव.
क्रिकेट कमेंटेटर हर्ष भोगले ने हाल ही में एक ट्वीट में लिखा था- जब सूर्यकुमार बैटिंग करते हैं, वे एक भी गेंद से अपनी नज़र नहीं हटा पाते.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी हाल ही में कहा था कि सूर्यकुमार यादव एबी डीविलियर्स की तरह बैटिंग करते हैं, वे कहीं भी शॉट्स लगा सकते हैं.
इस समय सूर्यकुमार यादव ज़बर्दस्त फ़ॉर्म में हैं. पिछले एक साल में उन्होंने 55 छक्के मारे हैं. इस समय वे सबसे ज़्यादा स्कोर करने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं. जबकि पहले नंबर पर हैं मोहम्मद रिज़वान. हालांकि रिज़वान ने इस अवधि में सिर्फ़ 33 छक्के मारे हैं.
अंतर स्पष्ट है. सूर्यकुमार यादव छक्के मारना पसंद करते हैं. टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सूर्यकुमार यादव औसतन हर साढ़े तीन गेंदों पर चौके मारते हैं.
अभी तक सूर्यकुमार यादव ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 1045 रन बनाए हैं. ये रन उन्होंने सिर्फ़ 591 गेंदें खेलकर बनाई हैं.
हालाँकि भारतीय टीम में शामिल होने के लिए उन्हें लंबा इंतज़ार करना पड़ा. उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच 31 साल की उम्र में खेला. पिछले एक साल में उन्होंने 32 पारियों में एक शतक और नौ अर्धशतक मारे हैं.
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हार्दिक पंड्या पर नज़रें

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सूर्यकुमार यादव के अलावा भारत की नज़र हार्दिक पंड्या पर भी होगी. ऑस्ट्रेलिया में हार्दिक पंड्या बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
तेज़ गेंदबाज़ी पर हार्दिक पंड्या अच्छी बल्लेबाज़ी करते हैं. वर्ष 2018 में चोटिल होने के बाद उनका करियर ग्राफ़ थोड़ा नीचे चला गया था.
लेकिन अब उन्होंने शानदार वापसी की है. इस साल के आईपीएल में हार्दिक पंड्या गुजरात लॉयन्स के कप्तान थे. हार्दिक ने अच्छा प्रदर्शन किया और उनकी टीम ने आईपीएल का ख़िताब भी जीत लिया.
हार्दिक पंड्या ऑस्ट्रेलिया की पिच को देखते हुए भारत के लिए काफ़ी अहम हैं.
भारतीय क्रिकेट टीम में वैसे तो कई अच्छे क्रिकेटर्स हैं. लेकिन कुछ सवाल भी हैं. जैसे दिनेश कार्तिक और ऋषभ पंत का मामला.
दोनों भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज़ हैं. टीम प्रबंधन के लिए ये मुश्किल हो रही है कि किसे या फिर दोनों को प्लेइंग इलेवन में जगह दें और साथ में ये भी कि विपक्षी टीम और विकेट का भी ख़्याल रखा जाए.
रवींद्र जडेजा की अनुपस्थिति भी भारत के लिए परेशानी का सबब है.
रवींद्र जडेजा भारत के बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक माने जाते हैं. अगस्त-सितंबर में उन्हें चोट लगी और फिर एशिया कप के बाद उन्हें वर्ल्ड कप की टीम से अलग होना पड़ा.
हालाँकि भारत के पूर्व कोच रवि शास्त्री का मानना है कि भारत को उन खिलाड़ियों के बारे में नहीं सोचना चाहिए जो उपलब्ध नहीं हैं. उनका मानना है कि भारत की ओर से और भी मैच विनर्स सामने आएँगे.
इसी कड़ी में अक्षर पटेल का भी नाम सामने आ रहा है, जो गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.
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भारत की सबसे बड़ी चिंता

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रवींद्र जडेजा के बाद भारत की चिंता बढ़ाई जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति ने. बुमराह भी चोटिल होने के कारण टीम से अलग हो गए.
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम ज़ाफ़र का कहना है कि बुमराह ऐसे गेंदबाज़ है जिनकी जगह कोई और नहीं ले सकता.
उनका कहना है कि भारत बस उनकी ग़ैर मौजूदगी से हुए नुक़सान की भरपाई की कोशिश भर कर सकता है.
बुमराह की ग़ैर मौजूदगी में भारत ने रिज़र्व खिलाड़ियों के तौर पर मोहम्मद सिराज, मोहम्मद शमी और शार्दुल ठाकुर को जगह दी और आख़िरकार शमी को बुमराह की जगह मिली.
भारत की टीम अच्छी है और अनुभवी भी. इससे शायद ही किसी को इनकार होगा. लेकिन आईसीसी टूर्नामेंट्स की बात करें तो भारत की टीम को बहुत सफल नहीं कहा जा सकता. अब देखना ये है कि इस बार भारत की टीम न सिर्फ़ पेपर पर बल्कि मैदान पर भी बेहतर टीम साबित होती है या नहीं.
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