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क्रिकेट और भारत का मेल ऐसा है जिस पर ना जाने कितने शोध हुए हैं. भारतीय संस्कृति में रच-बस गया क्रिकेट अब जन-जन का खेल बन गया है. भारतीय समाज में अब इसकी अंदर तक पैठ है. भारत में क्रिकेट के विकास और भारतीय समाज के साथ इसका मेल का बेबाक आकलन. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्रिकेट पत्रकार क़मर अहमद विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे. लेकिन उनका क्रिकेट प्रेम उन्हें भारत खींच ले गया. उनका अनुभव कुछ अलग है. | भारत ने जब 1983 में विश्व कप जीता तो किसी को अपेक्षा नहीं थी. विश्व कप जीत ने भारत में क्रिकेट को एक नई दिशा दी. मोहिंदर अमरनाथ की कलम से. | क्या क्रिकेट ना होता, तो बँटवारा ना होता या दोनों मुल्कों में जंग नहीं होती. क्या क्रिकेट की वो भूमिका है जो हम लोग अक्सर मानने को तैयार हो जाते हैं? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||