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शनिवार, 03 फ़रवरी, 2007 को 15:04 GMT तक के समाचार
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...जो मैं कभी नहीं भूल सकता

ईडन गार्डन
ईडन गार्डन पर मैच देखने का अपना ही आनंद होता है
भारतीय क्रिकेट टीम के मैचों की रिपोर्टिंग करना एक अजीब तरह का अनुभव होता है इसलिए नहीं कि भारतीय टीम में इतने अच्छे क्रिकेटर हैं बल्कि इसलिए क्योंकि भारतीय टीम को जिस तरह का समर्थन मिलता है वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी टीम को नहीं मिलता.

मुझे वर्ष 1955 में भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे को देखने का सौभाग्य हासिल है. महान ऑल राउंडर वीनू मनकड की कप्तानी में भारतीय टीम पाकिस्तान पहुँची थी.

सिरीज़ ड्रॉ हुई थी लेकिन मैच में रोमांच इतना था कि पूछिए मत. उस समय मैं एक छात्र था. भारत और भारतीय क्रिकेट के प्रति मेरा प्रेम उस समय शुरू हुआ जब मैं 1979 में पाकिस्तान दौरे को कवर करने भारत गया.

उस समय पाकिस्तानी टीम की कप्तानी कर रहे थे आसिफ़ इक़बाल. भारत दौरा मेरे लिए इसलिए भी और रोमांचक था क्योंकि विभाजन के बाद मैं पहली बार भारत जा रहा था.

मैं मूल रूप से बिहार के छपरा ज़िले का रहने वाला हूँ और विभाजन के बाद मेरा परिवार कराची आ गया. मैं उस समय स्कूल में पढ़ता था.

एक अलग अनुभव

कानपुर टेस्ट के बाद पाकिस्तान की टीम बांग्लादेश चली गई लेकिन मैंने छपरा और बलिया ज़िले में अपने रिश्तेदारों से मिलने का फ़ैसला किया. मुझे डॉक्टर हरिनाथ सरन के परिवार से भी मिलने की इच्छा थी, जिन्होंने विभाजन से पहले दंगों के दौरान हमारी ज़िंदगी बचाई थी.

सचिन तेंदुलकर का पहला मैच देखने का भी अनुभव

इन लोगों से मिलने का अनुभव ऐसा है, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता. ख़ैर, वो एक अलग कहानी है. भारत दौरे के कारण मुझे भारत के लोगों और वहाँ के क्रिकेट को गहराई से समझने का मौक़ा मिला.

वर्ष 1970 से ऐसा कभी नहीं हुआ जब मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच को कवर ना किया हो. वो चाहे पाकिस्तान में खेले गए या फिर भारत में.

इसके अलावा मैंने भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और न्यूज़ीलैंड का भी दौरा किया है.

मैंने कई मौक़े पर भारतीय खिलाड़ियों को रिकॉर्ड बनाते और रिकॉर्ड तोड़ते देखा है. मुझे सुनील गावसकर, कपिल देव, दिलीप वेंगसरकर, रवि शास्त्री, मोहिंदर अमरनाथ, लाला अमरनाथ, मोहम्मद अज़हरुद्दीन, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले और कई अन्य भारतीय क्रिकेटरों से मिलने, बात करने और उनसे दोस्ती करने का अवसर मिला है.

यादें कई हैं. वर्ष 1978 में मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक रोमांचक सिरीज़ को कवर करने का मौक़ा मिला है. एक ऐसी सिरीज़ जो 18 वर्षों के बाद खेली गई थी क्योंकि तनाव और युद्ध के कारण वर्षों तक दोनों देश नहीं खेल पाए थे.

भारत की टीम की कप्तानी कर रहे थे बिशन सिंह बेदी. हालाँकि भारत वह सिरीज़ हार गया, लेकिन पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों को बिशन सिंह बेदी, सुनील गावसकर, कपिल देव, दिलीप वेंगसकर, मोहिंदर अमरनाथ, विश्वनाथ, चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकटराघवन जैसे महान खिलाड़ियों का खेल देखने का मौक़ा मिला.

भारतीय भी कभी वो सिरीज़ नहीं भूल सकते. क्योंकि इस सिरीज़ में ज़हीर अब्बास ने अपने बल्ले का कमाल दिखाया था. एक साल बाद पाकिस्तान ने भारत का दौरा किया और सिरीज़ हार गया.

उत्साह

लेकिन भारत में पाकिस्तानी खिलाड़ियों का जिस तरह स्वागत हुआ, वो वे कभी नहीं भूल सकते. मैदान हमेशा खचाखच भरे रहते हैं और लोगों का उत्साह का अंदाज़ा तो सिर्फ़ देखकर ही लगाया जा सकता था.

भारत के मैचों में अलग तरह का उत्साह होता है

मैं वो दिन भी नहीं भूल पाता जब सुनील गावसकर टेस्ट मैचों में 10 हज़ार रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने थे. वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच था. अहमदाबाद में हुए वर्ष 1987 के उस मैच में गावसकर ने अपने 10 हज़ार रन पूरे किए थे.

इसी सिरीज़ के बंगलौर टेस्ट में गावसकर ने 92 रनों की शानदार पारी खेली थी हालाँकि पाकिस्तान वह मैच 16 रन से जीत गया था. लेकिन मैं इस पारी को गावसकर की सर्वश्रेष्ठ पारी मानता हूँ.

मुझे वर्ष 2000 में भारत और पाकिस्तान का वह मैच भी कवर करने का सौभाग्य हासिल है, जब अनिल कुंबले ने एक पारी में सभी 10 विकेट हासिल कर लिए.

इन सबके बीच 1983 के विश्व कप का फ़ाइनल कौन भूल सकता है. लॉर्ड्स के मैदान पर हुए इस ऐतिहासिक मैच को कवर करने का भी मुझे सौभाग्य हासिल है.

भारतीय उपमहाद्वीप के लिए वह दिन इतना बड़ा था, जिसे कौन भूल सकता है. वर्ष 1990 में लॉर्ड्स पर ही मोहम्मद अज़हरुद्दीन की 121 रनों की पारी भी भूले नहीं भूलती.

और ओल्ड ट्रैफ़र्ड में संदीप पाटिल का एक ओवर में लगाए गए छह चौके भी यादों में बसे हुए हैं. मुझे कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरभ गांगुली का पहला टेस्ट मैच भी देखने का मौक़ा मिला.

देश-विदेशों के कई स्टेडियमों से अलग कोलकाता के ईडेन गार्डेन में मैच देखना एक अलग तरह का अनुभव होता है. ईडेन गार्डन के माहौल का मुक़ाबला कोई भी मैदान नहीं कर सकता.

और जहाँ तक समर्थकों की बात है, मैं पहले भी कह चुका हूँ भारतीय समर्थकों की तुलना किसी से भी नहीं हो सकती है. यही कारण है भारत में इस खेल को देखना काफ़ी रोमांचक होता है.

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