भारत की बढ़ती जनसंख्या क्या चुनौतियाँ पेश करेगी?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता

- भारत में जनसंख्या दर घट रही है लेकिन आबादी का बढ़ना लगातार जारी है.
- साल के मध्य तक भारत की आबादी 142 करोड़ 86 लाख पहुंच जाएगी जो चीन की आबादी से 29 लाख ज़्यादा होगी.
- बढ़ती आबादी के साथ ही देश के संसाधनों पर दबाव भी बढ़ जाएगा, लिहाजा नीति-निर्माण को लेकर चुनौतियां बढ़ेंगीं.
- दबाव घटाने के लिए आवास, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षण सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार करना होगा.
- बढ़ती जनसंख्या की वजह से ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है.
- भारत की बुज़ुर्ग होती आबादी (65 साल से ऊपर) कुल आबादी का महज़ 7 फ़ीसदी है.
- बुजुर्ग आबादी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.

संयुक्त राष्ट्र के हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत इस साल के मध्य तक चीन को पीछे छोड़ दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा.
साल के मध्य तक भारत की आबादी 142 करोड़ 86 लाख पहुंचने की उम्मीद है जो चीन की 142 करोड़ 57 लाख की आबादी से 29 लाख ज़्यादा होगी.
साल 2011 के बाद से भारत में जनगणना नहीं हुई है इसलिए इस वक़्त भारत की जनसंख्या क्या है, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
लेकिन साल 2020 में नेशनल कमीशन ऑन पॉपुलेशन ने जनसंख्या के अनुमानों पर एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया कि साल 2011 और 2036 के बीच के 25 सालों में भारत की जनसंख्या 121 करोड़ दस लाख से बढ़कर 152 करोड़ 20 लाख हो जाएगी.
इसका नतीजा ये होगा कि जनसंख्या का घनत्व 368 से बढ़कर 463 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो जाएगा.
लेकिन जानकारों का कहना है कि भारत में ज़्यादा लोग पहले के मुक़ाबले लम्बी उम्र तक जी रहे हैं और देश में कम बच्चे पैदा हो रहे हैं जिसकी वजह से भारत की जनसंख्या की वृद्धि दर नीचे जा रही है.
वृद्धि दर के घटने के बावजूद भारत की जनसंख्या का बढ़ना जारी है और अगले कई सालों तक जारी रहेगा.
ऐसी स्थिति में देश के सामने जो चुनौतियाँ पेश होंगी, आइये उन पर नज़र डालते हैं.
संसाधनों पर दबाव
लगातार बढ़ती जनसंख्या की वजह से जो सबसे बड़ी चुनौती पैदा होती है वो है प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव.
इन प्राकृतिक संसाधनों में ज़मीन, पानी, जंगल और खनिज शामिल है. जनसंख्या के बढ़ने की वजह से इन संसाधनों का ज़रुरत से ज़्यादा इस्तेमाल होता है.
नतीजतन कृषि उत्पादकता और पानी की कमी के साथ पर्यावरण में गिरावट होने की सम्भावना बढ़ जाती है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव
बढ़ती आबादी के कारण आवास, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षण सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार करने की ज़रूरत भी बढ़ जाती है.
एक बहुत बड़ी आबादी की ज़रूरतों को पूरा करना एक मुश्किल काम बन जाता है और आबादी का एक बड़ा हिस्सा बदहाल हालात में जीने के लिए मजबूर हो सकता है.

इमेज स्रोत, Getty Images
बेरोजगारी
एक बड़ी आबादी की वजह से काम करने की क्षमता रखने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या भी खड़ी हो जाती है. इस बड़ी संख्या को रोज़गार उपलब्ध करवाना एक बड़ी चुनौती के तौर पर उभरता है.
आज की तारीख़ में भी भारत में बेरोज़गारी एक ज्वलंत समस्या है. लगातार बढ़ रही जनसंख्या की वजह से ये समस्या भविष्य में एक विकराल रूप ले सकती है.
रोज़गार की कमी आर्थिक असमानता और ग़रीबी को बढ़ाने का काम काम कर सकते हैं जिससे सामाजिक अशांति फ़ैल सकती है.
शिक्षा और कौशल विकास
एक बड़ी आबादी को शिक्षित और कुशल बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि समय के साथ जितने लोगों को शिक्षित और कुशल बनाने की ज़रूरत होगी उतनी क्षमता शैक्षणिक संस्थानों के पास शायद नहीं होगी.
इसका सीधा परिणाम ये हो सकता है कि बहुत से लोग अच्छी शिक्षा हासिल नहीं कर पाएंगे और बहुत से लोगों के पास जो कौशल होगा वो नौकरी के बाज़ार से मेल नहीं खाएगा.

इमेज स्रोत, RAHUL KOTYAL/BBC
गरीबी और असमानता
बढ़ती जनसंख्या की वजह से ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है. साथ ही आमदनी की असमानता भी बढ़ने का ख़तरा है.
एक बड़ी चुनौती ग़रीबी कम करने की कोशिशों को समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाने की भी होगी.
कुल मिलाकर लोगों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य और शिक्षा तक उनकी पहुँच में गहरी असमानताएं पैदा हो सकती हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ
बढ़ती जनसंख्या का सीधा असर पर्यावरण पर भी पड़ेगा.
वनों की कटाई, वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण पर्यावरण की रक्षा के लिए बड़ी चुनौतियों के तौर पर उभर सकते हैं.
भारत की जनसंख्या दर वृद्धि में कमी लेकिन नीतियों का क्या होगा?
वृद्धि दर के घटने के बावजूद भारत की जनसंख्या का बढ़ना जारी है और अगले कई सालों तक जारी रहेगा.
ऐसे में सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती लोगों के लिए प्रभावी नीतियां और योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना होगा.
भारत के बढ़ती जनसंख्या के मद्देनज़र सरकारों के लिए ऐसी नीतियां और योजनाएं बनाना और मुश्क़िल हो जाएगा जो ये सुनिश्चित करें कि संसाधनों का वितरण बराबरी से हो और सामाजिक और आर्थिक विषमता को दूर किया जा सके.

सामाजिक चुनौतियाँ
बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी एक बड़ी चिंता ये जताई जाती है कि इससे कई क़िस्म की सामाजिक चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं.
एक बड़ी आबादी भीड़भाड़ को तो बढ़ाएगी ही साथ ही शहरीकरण को भी बढ़ावा देगी जिसकी वजह से अपराधों में बढ़ोतरी आ सकती है और क़ानून-व्यवस्था क़ायम रखना मुश्क़िल हो सकता है.

इमेज स्रोत, Getty Images
बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते सवाल
संघमित्रा सिंह पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया में पॉलिसी एंड प्रोग्राम्स लीड के तौर पर कार्यरत हैं.
वो कहती हैं कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एक बड़ी आबादी पर्यावरण और संसाधनों पर दबाव डालती है. यही कारण है कि जनसंख्या संख्या को लेकर इतना चिंताजनक विमर्श हो रहा है.
वो कहती हैं, "हालाँकि इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि भारत लंबे समय से दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा है और भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने ही वाला था. तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है."
भारत की बढ़ती जनसंख्या को लेकर तरह-तरह की चिंताएं जा रही हैं. तो क्या किसी देश के लिए कोई आदर्श जनसंख्या होनी चाहिए?

संघमित्रा सिंह कहती हैं, "किसी भी देश के लिए कोई आदर्श जनसंख्या आकार नहीं है. जब आप जनसंख्या की बात करते हैं तो आप लोगों की बात करते हैं और लोग नंबरों से पहले आते हैं इसलिए संख्या को लोगों से ज़्यादा महत्त्व देना मानवाधिकार आधारित दृष्टिकोण नहीं होगा.''
'' ज़्यादा ज़रूरी यह है कि इस बारे में सवाल पूछे जाएं कि क्या लोगों का स्वास्थ्य अच्छा है, क्या उनके पास सही अवसर हैं, क्या वे पर्याप्त शिक्षित हैं."

इमेज स्रोत, REUTERS/YVES HERMAN
प्रजनन दर में कमी
चर्चा का एक और विषय भारत की प्रजनन दर को लेकर भी है. नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के अनुसार भारत के सभी धार्मिक समूहों में प्रजनन दर कम हो रही है.
संघमित्रा सिंह के मुताबिक़ जनसंख्या को केवल प्रजनन दर से जोड़ने का मतलब ये है कि सारा बोझ महिलाओं पर डाला जा रहा है.
उन्होंने कहा "इससे ये सोच बनती है कि जब जनसंख्या कम हो रही है तो महिलाओं को अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए और जब संख्या बढ़ रही हो तो महिलाओं को कम बच्चे पैदा करने चाहिए. क्या हम एक महिला की पसंद और उसकी शारीरिक स्वायत्तता का सम्मान कर रहे हैं?
''क्या हम इस मुद्दे को संबोधित कर रहे हैं कि भारत जैसे देश में जहां लैंगिक असमानता बनी हुई है और पितृसत्ता आज भी इतनी बड़ी समस्या है, क्या महिलाओं को यह तय करने का अधिकार है कि उनके कितने बच्चे हों? क्या गर्भनिरोधक साधनों तक उनकी पहुंच है?
'' क्या ग्रामीण भारत में वो अपने प्रजनन संबंधी निर्णय स्वयं ले रही हैं? ये ऐसे सवाल हैं जिन्हें पूछे जाने की जरूरत है."

बुज़ुर्ग आबादी को लेकर चिंताएं
भारत में 25 साल से कम उम्र के लोगों की आबादी कुल आबादी का क़रीब 40 फ़ीसदी है. वहीं देश की क़रीब आधी आबादी की उम्र 25 से 64 साल के बीच है. भारत की बुज़ुर्ग होती आबादी (65 साल से ऊपर) कुल आबादी का महज़ 7 फ़ीसदी है.
लेकिन चूंकि भारत की जनसंख्या वृद्धि दर गिर रही है तो इस बात की चिंताएं बढ़ गई हैं कि आने वाले दशकों में भारत की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा बुज़ुर्ग लोगों का होगा.

इमेज स्रोत, Getty Images
संघमित्रा सिंह कहती हैं कि अगर एक औसत भारतीय की उम्र आज 28 वर्ष तो 30 वर्षों में एक औसत भारतीय 58 वर्ष का होगा. "इसीलिए जब बढ़ती जनसंख्या की वजह से बन रहे अवसर की बात करते हैं तो हम कहते हैं कि हमारे पास इस डेमोग्राफिक डिविडेंड या युवा आबादी का लाभ उठाने के लिए 30 वर्ष हैं."
उनके मुताबिक़ इस बात से पूरी तरह नहीं बचा जा सकता कि समय के साथ-साथ किसी भी देश की औसत आबादी बुज़ुर्ग होती जाएगी. वे कहती हैं, "दुनिया के किसी भी हिस्से में आबादी युवा होगी और फिर वह बूढ़ी होगी, कभी घटेगी और कभी ऊपर जाएगी."

उनका कहना है कि आज जो महत्वपूर्ण बात है वह यह है कि हमें 30 साल बाद जो होने वाला है उसके लिए तैयार रहने की जरूरत है.
वो कहती हैं,"हमें सामाजिक सुरक्षा उपायों में निवेश करने की ज़रुरत है. हमें वृद्ध लोगों की चिकित्सा देखभाल में निवेश करने की ज़रुरत है. ऐसे देश में जहां लैंगिक असमानता अभी भी बनी हुई है वहाँ विशेष चुनौतियाँ होंगी जिनका बड़ी उम्र की महिलाओं को सामना करना पड़ेगा.''
'' उन्हें विशेष प्रकार की देखभाल और उन पर ध्यान देने की ज़रुरत होगी. नीतियों को उनकी विशिष्ट ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन करना होगा."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमेंफ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















