कोरोना संकट के सामने भारत का स्वास्थ्य ढांचा चरमराया, मीडिया उठा रहा सवाल

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    • Author, विजदान मोहम्मद कवूसा
    • पदनाम, डेटा जर्नलिस्ट, बीबीसी

भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने राजधानी दिल्ली समेत दूसरे प्रमुख शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दयनीय बना दी है.

यहां 27 अप्रैल को संक्रमण के 3,62,757 मामले सामने आए. वहीं 3,285 लोगों की मौत हो गई. महामारी के दौरान पहली बार मौत के आधिकारिक आंकड़े ने तीन हज़ार का आंकड़ा छू लिया है.

शुक्रवार को तो कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,86,452 हो गए और 3498 लोगों की मौत हुई. इस तरह पिछले नौ दिनों से लगातार संक्रमितों की संख्या रोज़ाना तीन लाख से अधिक हो रही है. और विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि मई के पहले हफ़्ते में यह संख्या बढ़कर पाँच लाख भी हो सकती है.

तेज़ी से बढ़ता संक्रमण

28 अप्रैल तक देश में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 30 लाख के क़रीब हो गई. ये अब तक का सबसे बड़ा आंक़ड़ा है. पहली लहर के दौरान केवल पाँच दिनों के लिए सक्रिय मामलों की संख्या 10 लाख के पार गई थी.

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हालांकि संक्रमण के सभी मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती. देश की वित्तीय राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाले मुंबई के नगर निगम ने बताया कि 27 अप्रैल तक शहर के 70 हज़ार सक्रिय मामलों में से चार फ़ीसद मरीज़ों को आईसीयू में एडमिट कराना पड़ा.

वहीं 14 फ़ीसद रोगियों को ऑक्सीजन वाले बेड पर रखना पड़ा. उधर राजधानी दिल्ली में 4.8 फ़ीसद रोगियों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा है.

अब यदि हम चार फ़ीसद का आंकड़ा लेकर पूरे देश का हाल समझना चाहें तो इस समय 1.2 लाख मरीज़ों को आईसीयू की ज़रूरत है. वहीं 10 से 15 फ़ीसद के लिहाज़ से अंदाज़ा लगाएं तो ऑक्सीजन की ज़रूरत वाले मरीज़ों की संख्या 3,00,000 से 4,50,000 तक पहुँच गई है.

मरीज़ों से भर गए हैं अस्पताल

सक्रिय मामलों की तेज़ी से बढ़ती संख्या के चलते भारत में अभी आईसीयू और ऑक्सीजन वाले बेडों की ज़रूरत लगातार बढ़ रही है. देश के दूसरे प्रमुख शहरों से भी पिछले दो सप्ताह में ऐसी ज़रूरतों के सामने आने की ख़बरें लगातार मीडिया में आ रही हैं. इन शहरों ख़ासकर दिल्ली में ऑक्सीजन और बेड की कमी की ख़बरों ने सुर्ख़ियां बटोरी हैं.

28 अप्रैल को मुंबई और बेंगलुरु में लगभग 20 फ़ीसद बेड ख़ाली थे, जबकि दिल्ली में महज़ आठ फ़ीसदी बेड ख़ाली थे. यह तब है जब सभी राज्य सरकारों ने कोविड-19 अस्पतालों की क्षमता में धीरे-धीरे वृद्धि की है. अब कई अस्पतालों को केवल कोरोना पीड़ित रोगियों के इलाज के लिए समर्पित कर दिया गया है.

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दिल्ली में, अब से महीना भर पहले कोविड-19 बिस्तरों की संख्या 5,765 थी. उनमें से केवल एक चौथाई बिस्तर पर मरीज़ थे. लेकिन 27 अप्रैल को ऐसे बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 20,635 कर दी गई है. इसके बाद भी इनमें से 91 फ़ीसद बिस्तर भरे हुए थे. मरीज़ों की भारी तादाद से अस्पताल में मौजूद सुविधाओं पर भारी दबाव बन गया है.

अस्पतालों की दयनीय दशा

अस्पतालों पर अचानक आए इस दबाव के कई गंभीर नतीजे देखने को मिल रहे हैं.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण बीते एक सप्ताह में दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मामले रहे हैं.

मीडिया में इसकी ख़ूब चर्चा हुई. कई अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी होने पर इमरजेंसी अपील भी की.

ऐसी कई रिपोर्टें मीडिया में देखने को मिलीं कि अमुक अस्पताल में केवल कुछ घंटों की ऑक्सीजन ही बची है और इससे कई मरीज़ों की ज़िंदगी दाव पर लगी हुई है. हालांकि, 27 अप्रैल को एक रिपोर्ट में बताया गया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति के सुधरने के संकेत मिले हैं.

नया सिलेंडर या ख़ाली सिलेंडर को भरवाने के लिए लोग छोटे ऑक्सीजन प्लांटों के सामने लाइनों में खड़े दिखे.

एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 22 अप्रैल को दिल्ली के एक बड़े अस्पताल सर गंगाराम हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी के चलते कम से कम 25 कोरोना मरीज़ों की मौत हो गई.

इस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा में 25 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी से आठ लोगों की मौत हो गई. एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि ऑक्सीजन की कमी से उत्तर प्रदेश के आगरा के एक अस्पताल में आठ लोगों मर गए.

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इस बारे में कई रिपोर्ट देखने को मिली कि पिछले एक सप्ताह में दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती के लिए गंभीर रूप से बीमार मरीज़ क़तारों में लगे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली में ख़ाली दिखाए गए कुछ आईसीयू बेडों के लिए रोगियों की लाइन लगी हुई थी. लेकिन मजबूर अस्पताल प्रबंधन को गंभीर रूप से बीमार रोगियों को भी एडमिट करने से इनकार करना पड़ा. मरीज़ और उनके रिश्तेदार एक अदद बेड के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं.

इस रिपोर्ट में दिल्ली के होली फ़ैमिली हॉस्पिटल के डॉ. सुमित रे के हवाले से कहा कि हमें मंगलवार को आपातकालीन सेवा को बंद करना पड़ा.

वहां बैठने की भी जगह नहीं है. वहीं एक डॉक्टर ने अख़बार को बताया, ''वार्ड खचाखच भरे हैं. लोगों को एनेस्थेसिया मशीनों से हवा दी जा रही है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर सर्जरी में किया जाता है. हर जगह मरीज़ ही मरीज़ हैं. स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और यहां तक कि फ़र्श पर भी मरीज़ बैठे हैं. हम मरीज़ों को चुन रहे हैं और उन्हीं मरीज़ों को भर्ती कर रहे हैं जिनके बचने की उम्मीद है.

मीडिया की राय में सरकार नहीं थी तैयार

देश के अख़बारों ने पिछले हफ़्ते की संपादकीय टिप्पणियों में कहा कि सरकार दूसरी लहर से निपटने के लिए तैयार नहीं थी.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ज़रूरतमंदों को सिविल सोसाइटी से मिल रही मदद पर 25 अप्रैल को अपनी टिप्पणी की. अख़बार ने लिखा, ''निजी मदद की ये कहानियां सरकार की क्षमताओं की विफलता की गवाही दे रही हैं.''

एक अन्य संपादकीय लेख में, इसी अख़बार ने लिखा, ''जब महामारी की समीक्षा की जाएगी तब राज्य और केंद्र सरकारों को महामारी के दौरान भी हेल्थ सेक्टर की क्षमता बढ़ाने के लिए पब्लिक हेल्थ पर कम ख़र्च करने के लिए जवाब देना होगा.''

वहीं एक दूसरी संपादकीय टिप्पणी में लिखा गया, ''दूसरी लहर को रोकने में शासन नाकाम रहा है और इसके लिए वह अपनी ज़िम्मेदारी से भाग नहीं सकता. भले आज हमारे पास करने को बहुत काम हैं, लेकिन कल हमें चूक करने वालों की पहचान करनी होगी और उनको पकड़ना होगा.''

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इमेज कैप्शन, कोरोना की दूसरी लहर ने हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को उजागर कर दिया.

इंडियन एक्सप्रेस के एक संपादकीय में कहा गया, ''इस महामारी से लड़ने का ज़िम्मा जिन्हें मिला था, वो या तो सो रहे थे या फिर आती महामारी को देख लड़खड़ा गए.''

एक दूसरे संपादकीय में कहा गया कि दूसरी लहर ने हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को उजागर कर दिया.

इसके अनुसार, ''साल भर पहले कोविड-19 से लड़ने के लिए सशक्त समूहों ने जिन बुनियादी ज़रूरतों के बारे में बताया था, उनमें से चाहे दवा, बिस्तर, ऑक्सीजन या जांच सुविधा हो, सभी की कम हो गईं.''

हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा कि सरकारों ने ऑक्सीजन सप्लाई की अनदेखी की. ''मौजूदा सरकार ने भी अपनी आंखें हटा लीं, जिसकी क़ीमत अब लोग चुका रहे हैं.''

द हिंदू ने अपने संपादकीय में लिखा कि भारत 2020 में कोरोना की पहली लहर से बहुत कुछ सीख चुका है. इसके बाद भी दूसरी लहर की मांगों को पूरा करने के लिए सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ा क़ीमती समय गंवा दिया गया.

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