उत्तर प्रदेश: मायावती की बीएसपी का वोट क्या बीजेपी को शिफ़्ट हुआ?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, वात्सल्य राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मायावती की बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी 'लूज़र' कही जा रही है.
मायावती की पार्टी का लगभग सफाया हो गया है. बीएसपी को सिर्फ़ एक सीट मिली है. बलिया ज़िले के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार उमाशंकर सिंह ने जीत हासिल की है. बीएसपी अपना दल, निषाद पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल तक से पिछड़ गई.
साल 2017 के विधानसभा चुनाव के मुक़ाबले बीएसपी को करीब 10 फ़ीसदी वोट कम मिले हैं.
2017 में बीएसपी को 22 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट मिले थे और 19 सीटें हासिल हुई थीं. 2012 में उसके खाते में 80 और 2007 में 206 सीटें आईं थीं.
हालांकि, कई विश्लेषक जो चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा में रहे ट्रेंड पर नज़र बनाए हुए थे, उन्हें नतीजों ने ज़्यादा हैरान नहीं किया है.

इमेज स्रोत, Getty Images
बीजेपी को मिली बीएसपी से मदद?
कई विश्लेषकों की राय में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच जो अंतर रहा, उसकी एक वजह 'बीएसपी से शिफ़्ट हुआ वोट' बना.
कई विश्लेषकों की राय में ये वोटर बीएसपी का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ चले गए.
राजनीति विश्लेषक पूर्णिमा जोशी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "ये पार्टी (बीजेपी) जीतने के लिए लड़ती है. सपा का 8-10 फ़ीसदी वोट बढ़ा है. लेकिन आप देखिए बसपा को जो वोट घटा वो लगता है कि बीजेपी में चला गया. उसके कई कारण हो सकते हैं."
कई लोगों की राय है कि वोट शिफ़्ट होने का एक कारण बीएसपी समर्थकों और वोटरों के बीच बनी भ्रम की स्थिति भी रही.
वायरल वीडियो का सच
इसकी एक बानगी उस वायरल वीडियो में देखी जा रही है जो फरवरी के पहले हफ़्ते में सोशल मीडिया में वायरल हुआ था.
ये वीडियो हो सकता है आप तक भी पहुंचा हो. इसमें बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के एक बयान का एक हिस्सा था.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप पर शेयर किए जा रहे 30 सेकेंड के वीडियो के जरिए दावा किया गया कि मायावती ने 'अपने समर्थकों को संदेश दिया है कि समाजवादी पार्टी को हराने के लिए बीएसपी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को भी वोट दे सकती है.'
उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को था. इस तारीख के ठीक पहले ही ये क्लिप वायरल हुई. पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 58 सीटों पर वोट डाले गए.
पहले चरण में उन्हीं सीटों पर वोट डाले गए जिसे कभी मायावती और बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माना जाता था लेकिन साल 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी ने 53 सीटें हासिल की थीं और बीएसपी को सिर्फ़ दो सीटें मिली थीं.
कई मीडिया संस्थानों ने उसी वक़्त स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा मायावती का बयान और वीडियो पुराना है.
ये भी बताया गया कि वीडियो में मायावती का पूरा बयान नहीं है, उसका एक हिस्सा भर है. मायावती के जिस बयान के वीडियो की क्लिप वायरल की गई, वो बयान उन्होंने अक्टूबर 2020 में यूपी विधान परिषद चुनाव के पहले दिया था.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
मीडिया संस्थानों की ओर से बताया गया सच ज़मीन पर वोटरों और बीएसपी सपोर्टरों के बीच कितना पहुंचा, कहना मुश्किल है.
इस बयान के बाद जो भ्रम की स्थिति बनी, चुनाव के दौरान उसे दूर करने की कोशिश न तो बहुजन समाज पार्टी की ओर से हुई और न ही भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा करने में कोई दिलचस्पी दिखाई.

इमेज स्रोत, AFP/GETTY IMAGES
अमित शाह का वो चर्चित बयान
बल्कि, चुनाव प्रचार के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बहुजन समाज पार्टी के बारे में दिए गए एक बयान से कन्फ्यूजन और गहरा हो गया.
उत्तर प्रदेश चुनाव के तीन चरण पूरे होने के बाद एक चैनल ने अमित शाह का एक इंटरव्यू प्रसारित किया.
इसमें अमित शाह से उत्तर प्रदेश में बीएसपी की प्रासंगिकता के बारे में पूछा गया.
इस पर अमित शाह ने कहा, "बीएसपी ने अपनी रेलिवेंसी बनाई हुई है. मैं मानता हूँ कि उनको वोट आएंगे. सीट में कितना कन्वर्ट होगा, वो मालूम नहीं, लेकिन वोट आएंगे. मुसलमान भी काफ़ी बड़ी मात्रा में जुड़ेंगे. काफ़ी सीटों पर जुड़ेंगे."
चुनाव नतीजों से साफ़ हुआ कि मायावती की पार्टी बीएसपी को मुसलमानों के वोट तो ज़्यादा नहीं मिले लेकिन अमित शाह के इस बयान के बाद कई विश्लेषकों और राजनीतिक विरोधियों ने 'बीएसपी को बीजेपी की बी टीम' बताना शुरू कर दिया.

इमेज स्रोत, THE INDIA TODAY GROUP
मायावती की पार्टी का रुझान किधर?
मायावती की बहुजन समाज पार्टी बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों के साथ गठजोड़ कर चुकी है. लेकिन बीते ढाई दशकों से बीएसपी का बीजेपी के प्रति ज़्यादा रुझान देखा गया है.
मायावती तीन बार बीजेपी के सहयोग से यूपी की मुख्यमंत्री भी बन चुकी हैं.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की कोशिश से एसपी-बीएसपी का गठजोड़ हुआ.
इस गठबंधन से ज़्यादा फ़ायदा बीएसपी को हुआ. 2014 में लोकसभा की कोई सीट नहीं जीत सकी बीएसपी ने 2019 में 10 सीटों पर जीत हासिल की.

इमेज स्रोत, UDAIVEER@TWITTER
अखिलेश यादव को झटका
समाजवादी पार्टी गठजोड़ के बाद भी यूपी में सिर्फ़ पांच ही सीट जीत सकीं. अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव तक को कन्नौज सीट पर हार का सामना करना पड़ा.
तब कई विश्लेषकों ने दावा किया कि मायावती के 'सार्वजनिक तौर पर पैर छूने का भी उन्हें कोई लाभ नहीं मिला.'
बल्कि चुनाव में मिली हार के बाद मायावती ने गठजोड़ से अलग होने का एलान करते हुए समाजवादी पार्टी को एक और झटका दे दिया.
मौजूदा विधानसभा चुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने किसी दल के साथ गठजोड़ नहीं किया था.
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि अकेले मैदान में उतरकर भी बीएसपी बीजेपी के लिए मददगार साबित हुई. बहुजन समाज पार्टी का वोट शेयर घटने से बीजेपी को सीधा फ़ायदा हुआ.
एक तरफ बीजेपी के नेता आगरा देहात सीट से मैदान में उतरीं पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को मायावती के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ बीएसपी के वोट शेयर में सेंध लगाने की कोशिश में जुटे थे.
वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "बीजेपी की रणनीति ने भी काम किया. बीएसपी को दबा के रखना कि बहुजन समाज पार्टी चुनाव में एक्टिव न हो और दलित वोट ट्रांसफ़र हों, ये नीति काम आई. काफी हद तक दलित वोट ट्रांसफर हुए."
मौजूदा चुनाव में बीजेपी की सीटें 2017 के मुक़ाबले कम हुई हैं लेकिन वोट शेयर बढ़ा है.
साल 2017 में बीजेपी को 39 फ़ीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार करीब 42 फ़ीसदी वोट हासिल हुए हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
'अब मिशन 2024'
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह भी बीजेपी की रणनीति के कामयाब होने की बात करते हैं.
प्रदीप सिंह ने बीबीसी से कहा, "बीजेपी कई फ्रंट पर काम कर रही है. वो सिंगल इश्यू पार्टी नहीं है. वो सोशल इंजीनियरिंग का भी काम करती है. इसीलिए उसे लगातार जीत मिल रही है. "
बीएसपी के ज़रिए बीजेपी को मिले अप्रत्यक्ष लाभ की ओर इशारा करते हुए प्रदीप सिंह कहते हैं, "बहुजन समाज पार्टी का इतना गिर जाना, ये बीजेपी के लिए अच्छा संकेत था और समाजवादी पार्टी के लिए अच्छा नहीं है. अगले चुनाव में 2024 में भी और 2027 में भी जाटव जो कोर वोटर है बीएसपी का उसमें और ज्यादा स्पिलिट होगा. वो बीजेपी की तरफ जाएगा."
राजनीतिक विश्लेषकों की राय में ये रणनीति आगे भी काम कर सकती है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)




















