मुंबई कोरोना संक्रमण: कैसे एक ग़लती से 18 लोगों का परिवार वायरस की चपेट में आ गया?

पवार परिवार

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    • Author, जाह्नवी मुले
    • पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता

"एक के बाद एक परिवार के लोग बीमार पड़ने लगे थे. कोई खांस रहा था तो किसी को छींक आ रही थी. पूरे माहौल में डर पसरा हुआ था."

नेहाली पवार बताती हैं कि कैसे कोरोना वायरस संक्रमण कहर बन कर उनके परिवार पर टूटा. 18 सदस्यों का उनका संयुक्त परिवार मुंबई में वडाला के नज़दीक रहता है.

हालांकि ये इलाक़ा झुग्गी झोपड़ियों और तंग गलियों से पटा पड़ा है लेकिन नेहाली के घर में नौ कमरे हैं.

कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के दौरान देश के दूसरे परिवारों की तरह उनका परिवार भी अपने घर पर ही सिमट गया.

परिवार के सदस्य अलग-अलग तरह के पकवान बनाने, मिल कर गीत गाने, ताश के पत्ते खेलने और पूरी-पूरी रात जाग कर खेलने में बिताने लगे थे.

लेकिन महीने भर के भीतर ये खुशी उस वक्त ख़त्म हो गई जब परिवार के सामने कोरोना वायरस का संकट आया.

लेकिन वडाला के इस पवार परिवार ने इस बीमारी के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई जीत ली है.

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'एक ग़लती से पूरा परिवार संक्रमित हुआ'

नेहाली कहती हैं कि सभी सदस्य घर के भीतर ही थे और सभी ज़रूरी एहतियात का ध्यान भी रख रहे थे.

वो कहती हैं, "कोरोना को लेकर सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो नियम बताए थे हम उस सभी नियमों का पालन कर रहे थे. हम बार-बार अपने हाथ धो रहे थे, बाहर से घर के भीतर आने वाले सभी सामान को पहले धो रहे थे, सब्ज़ियां धो रहे थे, घर में साफ़ सफ़ाई रख रहे थे, सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे थे, गाड़ी भी साफ़ रख रहे थे."

"परिवार के सदस्य घर से बाहर जाए तो आने पर उसके कपड़े गर्म पानी से धो रहे थे. और तो और हम चाय में लौंग और दालचीनी डाल कर पी रहे थे, गर्म पानी भी पी रहे थे. आप कह सकते हैं कि हम सभी सावधानियां बरत रहे थे."

नेहाली एक कंपनी में काम करती हैं और लॉकडाउन के बाद वो घर से ही काम कर रही थीं.

लेकिन परिवार के कुछ सदस्यों को काम के लिए घर से बाहर जाना पड़ रहा था और नेहाली को इस बात से चिंता हो रही थी.

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सामान्य दिनों की तरह ही...

नेहाली के पति अमित विजय पवार एक निजी अस्पताल में काम करते हैं जो आवश्यक सेवाओं के तहत आता है.

ऐसे में वो कई बार दो-तीन दिन तक काम के सिलसिले में घर से बाहर रहे.

उनके देवर एक सिक्योरिटी एजेंसी में काम करते हैं और वो अमित के साथ ही काम पर निकला करते थे. नेहाली के ससुर इलाक़े के एक जानेमाने सोशल वर्कर हैं.

नेहाली कहती हैं, "हमने केवल एक ग़लती की. परिवार का जो सदस्य घर से बाहर जाएं उससे सभी को दूरी बना कर रखनी चाहिए ताकि अगर वो संक्रमित होता भी है तो उससे दूसरों में संक्रमण न फैले. लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. हम इमोशनल लोग हैं तो ऐसे में जब सभी सदस्य एक साथ थे तो हमें किसी एक को दूर रखना ग़लत लगा. मेरे पति को परिवार के दूसरे लोगों से दूर रहना चहिए था. शायद उन्हें कई दिनों तक घर से दूर ही रहना चाहिए था. लेकिन जब भी वो काम से वापस लौटते हम सामान्य दिनों की तरह ही उनसे मिलते जुलते थे."

कैसे पता चला कि अमित को कोरोना संक्रमण है?

21 अप्रैल को जब अमित पवार काम से लौटे तो उन्हें बुख़ार आ गया. दो दिन बाद उनका बुख़ार उतर गया.

नेहाली कहती हैं, "हम सोचते हैं कि जिस व्यक्ति को कोरोना संक्रमण होगा वो खांसेगा और छींकेगा. लकिन अमित में इस तरह के लक्षण नहीं थे. इसलिए हमने उनके बुख़ार को गंभीरता से नहीं लिया. हम सोच रहे थे कि शायद ठंडे पानी में नहाने के कारण या कलर में अधिक देर बैठने के कारण उन्हें बुख़ार हुआ है."

अप्रैल 25 को इस इलाक़े में कोरोना टेस्टिंग के लिए ख़ास शिविर लगाया गया.

पवार परिवार ने तय किया कि वो पांच सदस्य जो नियमित तौर पर काम के सिलसिले में घर से बाहर जाते रहे हैं उनका टेस्ट कराया जाए. शिविर में जब डॉक्टरों को पता चला कि अमित को बुख़ार था तो उन्होंने उनका स्वैब टेस्ट करने का फ़ैसला किया.

चार दिन बाद 28 अप्रैल को अमित काम पर लौट गए. इस दौरान पीपीई किट पहने कई लोग उनके घर के बाहर डिसइन्फेक्टेंट स्प्रे करने लगे. पूछने पर उन्होंने कहा कि अमित विजय पवार कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं, अब परिवार को कोई सदस्य घर से बाहर न निकले, बीएमसी के कर्मचारी उनसे संपर्क करेंगे.

अगले दिन एक एंबुलेन्स आई और अमित को वडाला में मौजूद एक अस्पताल ले गई.

निहाली कहती हैं, "मुझे नहीं पता कि क्या करना है. मैं पूरी तरह से टूट गई. मेरे मन में सवाल उठा कि क्या मैं अपने पति को फिर देख सकूंगी, मेरे परिवार के और कितने लोगों कोरोना संक्रमित होंगे? परिवार से सभी सदस्य मिल कर रात के 3.30 तक ताश के पत्ते खेल रहे थे, क्या हम नई सुबह देख पाएंगे?"

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

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टेस्टिंग के बाद चुनौतियां

पवार परिवार का घर बड़ा था और उसमें एक से अधिक बाथरूम थे. ऐसे में उन्हें घर पर ही क्वारंटीन किये जाने की इजाज़त दे दी गई.

लेकिन परिवार को ये नहीं पता था कि सभी सदस्यों का टेस्ट कब और कैसे होगा और इस बीच अगर कोई बीमार पड़ गया तो क्या होगा, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.

इसके बाद अगले कुछ दिनों में एक के बाद एक कई सदस्य बीमार पड़ते चले गए.

नेहाली कहती हैं, "हम रोज़ाना बीएमसी को फ़ोन करते और हमें बताया जाता कि फिलहाल उनके पास टेस्टिंग के लिए किट नहीं हैं. इसी तरह तीन दिन बीत गए. उस वक्त निजी अस्पतालों में कोरोना के टेस्ट नहीं हो रहे थे. हमारे हाथों में क्वारटीन का स्टांप लगाया गया था और हगम कहीं बाहर नहीं जा सकते थे. न ह कोई हमारे घर आकर टेस्ट कर रहे थे."

नेहाली के एक देवर आर्टिस्ट हैं. उन्होंने फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए अपनी कहानी दुनिया को बताने का फ़ैसला किया. इसके बाद सोशल मीडिया और एक स्थानीय टीवी चैनल पर उनकी कहानी प्रसरित की गई.

इसके बाद 2 मई को बीएमसी की एक टीम ने उनके परिवार के सात लोगों का टेस्ट किया जिनमें बीमारी के लक्षण दिख रहे थे. सातों के नतीजे पॉज़िटिव आए और उन्हें परिवार से दूर अस्पताल में ले जाया गया.

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क्वारंटीन का समय

18 लोगों के इस परिवार के आठ सदस्यों को अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में रखा गया जबकि दस लोगों को क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया.

इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे. इनमें चार और 15 साल के दो बच्चे और 12 साल की एक बच्ची शामिल थी.

नेहाली बताती हैं कि उनके चार साल के भतीजे को उनके माता-पिता से दूर कर दिया गया जो उसके लिए सदमे की तरह था.

वो कहती हैं, "उस मासूम के लिए ये बड़ा सदमा था. वो उन लोगों से दूर था जो उसके साथ खेलते थे और उसका ख़याल रखते थे. उसने देखा कि कोई उसे गोद में नहीं ले रहा, उसका सामान भी औरों के सामान से अलग रखा गया था. आज भी वो मुझसे पूछता है कि 'छोटी मम्मा, क्या मैं आपके पास आ सकता हूं? क्या मैं आपके गले लग सकता हूं?' "

परिवार के बड़े बूढ़ों के लिए भी ये मुश्किल दौर था.

वो कहती हैं, "मेरे ससुर सेवेन हिल्स अस्पताल में थे. वो 62 साल के हैं और उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया था. परिवार के दूसरे बुज़ुर्ग जो 60 साल के हैं उनके दिल में चार जगह ब्लॉकेज है, उन्हें भी आईसीयू वार्ड में रखा गया था. दोनों को डायबिटीज़ भी है."

दक्षिण और पूर्वी एशिया में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सबसे अधिक हैं. . .

नेहाली में कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे. शुरूआत में दो दिन उन्हें क्वारंटीन में रख गया बाद में आईसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया.

वो कहती हैं, "डॉक्टर केवल रात को ही क्वारंटीन सेंटर में आते थे. दिन में जो कुछ हमारे साथ हुआ हमें वो सब उन्हें एक बार रात को बताना होता था. आईसोलेशन वार्ड में चौबीसों घंटे नर्सें होती थीं."

वो कहती हैं के वैसे तो आईसोलेशन वार्ड में कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन वहां किसी भी व्यक्ति में कोई भी लक्षण दिखता तो लोगों डर लगता.

वो कहती हैं, "कोविड 19 के इलाज के लिए कोई ख़ास दवा तो है नहीं ऐसे में हमें विटामिन और एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती थीं. जहां तक खाने की बात है, वहां अच्छी साफ़ सफ़ाई थी, लेकिन खाने का स्वाद... इसके बारे में कुछ कहना मुश्किल है क्योंकि हमें खाने का स्वाद पता नहीं चल पा रहा था. हमें ये समझ ही नहीं आ रहा था कि हम क्या खा रहे हैं."

"सेवेन हिल्स अस्पताल में मरीज़ों को घर से खाना लाने की इजाज़त थी. पनवेल में रहने वाली मेरी मौसी मेरे ससुर के लिए टिफिन में खाना भेजती थीं. दादर में मेरी मां के घर के पास रहने वाली एक महिला ने भी हमारी बहुत मदद की. मुझे इस बात की खुशी है कि इस लड़ाई में हम हर कदम पर अच्छे लोगों के संपर्क में आते रहे."

कोविड ने क्या सिखाया?

मई 7 को बुद्ध पूर्णिमा के दिन हमें ख़बर मिली की अमित के कोरोना टेस्ट का नतीजा नेगेटिव आया है.

इसके बाद अगले दस बारह दिनों में एक के बाद एक परिवार के सभी सदसय घर लौट आए.

हमने तालियों से सभी सदस्यों का स्वागत किया लेकिन हम सभी को इस बात का अहसास हो गया था कि अब ज़िदगी पहले जैसी नहीं होगी.

नेहाली कहती हैं कि घर के भीतर भी सभी सदस्यों को सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन करते रहना था.

वो कहती हैं, "जो भी सदस्य घर के बाहर जाते हैं उनसे घर के दूसरे सदस्य दूरी बनाए रखते हैं. घर के भीतर हम सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं और सभी सदस्य अपना सामान एक दूसरे से अलग रखते हैं. हम जितना हो सकते अपना काम अब खुद ही करते हैं."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

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    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

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  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

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    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

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    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

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    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
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    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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