कोरोना वायरस: भविष्य में होने वाली यात्राएं कैसी होंगी?

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शम्सुद्दीन पिछले 40 सालों से टूर गाइड का काम कर रहे हैं. उन्होंने इन सालों में क़रीब 40 हस्तियों को आगरा के ताजमहल का दीदार करवाया है.

इनमें ब्रिटेन की मरहूम राजकुमारी डायना भी हैं जिन्हें उन्होंने ताजमहल की सैर करवाई थी. अब चूंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह साफ़ तौर पर कहा है कि हमें कुछ समय तक कोरोना वायरस के साथ ही जीना पड़ेगा तो शम्सुद्दीन का मानना है कि पर्यटन का व्यवसाय पूरी तरह से बदल जाएगा.

उनका कहना है कि आगे लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद भी पर्यटन का तौर तरीक़ा आने वाले महीनों और सालों तक वैसा नहीं रह जाएगा जैसा पहले हुआ करता था. अब समूह की बजाए लोग अकेले या फिर जोड़ियों में घूमेंगे.

वो कहते हैं, "कल्पना कीजिए कि आने वाले वक़्त में आप ताजमहल के सामने मास्क पहनकर अपनी तस्वीर खिंचवा रहे हैं."

बहुत हद तक गुंजाइश है कि सभी पर्यटक स्थलों और ऐतिहासिक स्थलों पर मास्क पहनकर जाने का प्रोटोकॉल लागू हो. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य कर दिया जाए इससे फिर पर्यटन स्थलों पर सीमित संख्या में लोग पहुँचेंगे.

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हवाई यात्रा

हवाई यात्रा मामलों के विशेषज्ञ अश्विनी फडनीस कहते हैं कि इंटरनेशनल एयर ट्रांस्पोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) प्रस्तावित प्रोटोकॉल 'बायोसिक्योरिटी फॉर एयर ट्रांस्पोर्ट: ए रोडमैप फॉर रिस्टार्टिंग एविएशन' रिलीज़ कर चुका है.

इसमें अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने वाले सवारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है. ऐसे ही एक प्रोटोकॉल पर भारत का नागरिक उड्डयन मंत्रालय भी काम कर रहा है.

जैसे विदेशों में हवाई अड्डों पर सवारियों की स्क्रीनिंग के लिए कम्प्यूटर लगे हुए हैं वैसी ही भारत में भी लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है ताकि हवाई अड्डे के अधिकारियों को यात्रियों के नज़दीक जाने से बचाया जा सके.

प्रोटोकॉल के मुताबिक वेब-चेक इन तो अनिवार्य होगा ही साथ में सवारियों को प्रिंटेड बोर्डिंग पास भी रखना होगा. इसके अलावा अपने सामान की चेक-इन भी ख़ुद से करनी होगी.

अश्विनी फडनीस कहते हैं, "कुछ फ्लाइट्स में सवारी अब एयर होस्टेस के मुस्कुराते हुए चेहरे नहीं देख पाएंगे क्योंकि कुछ एयर लाइन्स कंपनियां अपने क्रू मेंबर के लिए पीपीई अनिवार्य करने पर विचार कर रही हैं.''

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लेकिन इसी दौरान हम फ़्लाइट्स में बीच वाली सीट पर सवारी बैठने के फ़ैसले को भी देख रहे हैं. पहले यह तय हुआ था कि बीच वाली सीट खाली रहेगी. कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस नियम का पालन किया जा रहा है. इसमें अमीरात और एयर क़तर शामिल हैं.

अश्विनी कहते हैं कि लेकिन फ़्लाइट प्रोटोकॉल में लगातार तब्दीली हो रही है और आने वाले कुछ हफ़्तों और महीनों में हम नया प्रोटोकॉल देख सकते हैं.

घरेलू उड़ानों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तुलना में कहीं बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि अलग-अलग राज्यों का अपना प्रोटोकॉल होगा.

मसलन अगर दिल्ली से कोई सवारी ऐसे राज्य में जाती है जहाँ कोरोना का संक्रमण उतना नहीं है तो फिर उसके लिए नियम सख़्त होंगे. हो सकता है कि 14 दिनों का क्वारंटीन लॉकडाउन ख़त्म होने के महीनों बाद भी जारी रहे.

आईएटीए के निर्देशों के मुताबिक़, आने वाले महीनों में हवाई जहाज़ के अंदर सभी सवारियों के लिए चेहरा ढंककर रखना अनिवार्य होने वाला है. केबिन और कैटरिंग सर्विस में भी हम कटौती देख सकते हैं ताकि सवारी और क्रू मेंबर कम से कम संपर्क में आए.

फडनीस कहते हैं कि एयरलाइन कंपनियों को अल्ट्रा-वॉयलेट तकनीक की मदद से उड़ान से पहले एयरक्राफ्ट्स को सैनिटाइज़ करने संबंधी निर्देश जारी करने पर विचार किया जा रहा है.

मंत्रालय के कुछ सूत्रों का कहना है कि वे सवारियों और क्रू मेंबर्स के लिए अनिवार्य तौर पर चेहरा ढंक के रखने के निर्देश पर विचार कर रहे हैं.

रेल यात्रा

ट्रेन में सफ़र करना आने वाले दिनों में बहुत मुश्किल हो सकता है. रेल मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भविष्य में एक डिब्बे में और फिर साथ ही साथ प्लेटफ़ॉर्म पर भी सीमित संख्या में सवारियों की इजाज़त होगी ताकि पर्याप्त रूप से फिज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके.

ज़्यादातर ट्रेनों से जिनमें थ्री टीयर वाले स्लीपर्स होते हैं इसलिए बीच वाली सीट हटाई जा रही है ताकि यात्रियों के बीच पर्याप्त दूरी बरती जा सके.

डिब्बों की अंदरूनी बनावट में इस तरह की तब्दीली लाई जा रही है कि सवारियों को यह पता चल जाए कि शौचालय खाली है कि नहीं और उन्हें लाइन में ना लगना पड़े.

वीडियो कैप्शन, आने वाले वक़्त में आप कैसे करेंगे यात्राएं

हालांकि अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि पैंट्री कार जहाँ खाना पकता है, उसकी सेवा जारी रहेगी या नहीं. अगर वो ऐसा करना जारी रखते हैं तो संभव है कि सिर्फ़ पानी और पैकिंग में उपलब्ध खाने ही देना जारी रखेंगे. हम उस पुराने वक़्त में वापस पहुँच सकते हैं जब यात्री घर से ख़ुद के तकिए और चादर लेकर चला करते थे.

फडनीस बताते हैं, ''रेलवे स्टेशन अब एयरपोर्ट की तरह हो जाएंगे. एयरपोर्ट की तरह स्टेशन पर भी उस प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जिसके तहत ट्रेन खुलने से चार घंटे पहले आपको स्टेशन पहुँचकर रिपोर्ट करना होगा. स्क्रीनिंग की उन तमाम प्रक्रियाओं से गुज़रना होगा जैसा एयरपोर्ट पर होता है.''

हालांकि, रेलवे शौचालय के बाद सैनिटाइज़र उपलब्ध करवाएगी लेकिन आपको अपने साथ लेकर चलना भी अनिवार्य होगा.

ट्रेन का परिचालन लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह से ठप रहा है. लेकिन अब धीरे-धीरे कुछ ट्रेनें चलनी शुरू हुई हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जब ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से शुरू हो जाएगा तो फिर नए नियम प्रभाव में आ सकते हैं.

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दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

राजमार्ग

राष्ट्रीय राजमार्गों की भारत में कोने-कोने तक सामान की सप्लाई पहुंचाने और अंतर-राजीय आवागमन में अहम भूमिका है.

इन राजमार्गों के किनारे बने ढाबों का कभी बहुत क्रेज़ हुआ करता था. यहां तक कि महानगरों में रहने वाले लोगों में भी इसे लेकर ज़बरदस्त क्रेज़ होता था. इन राजमार्गों से रोमांस का एहसास भी जुड़ा हुआ है. लेकिन आने वाला वक़्त बिल्कुल अलग होने वाला है.

रोड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के सदस्य राजीव आरोड़ा का कहना है कि "आने वाले दिनों में लोग ढाबे के बाहर खाट लगाकर मस्ती से वक़्त गुज़ारने के बारे में नहीं सोच पाएंगे."

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सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से कई तरह की पाबंदियों को बरक़रार रखना होगा और कोशिश करनी होगी कि कम से कम लोग आपस में संपर्क में आएं.

राजीव बताते हैं, "हो सकता है कि आपने एक कप चाय का ऑर्डर दिया और किसी वेटर के पहुँचाने के बजाए एक लंबे लकड़ी के सहारे आपको चाय सर्व किया जाए. राजमार्गों पर ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रहने वाली है.''

वो आगे बताते हैं कि ढाबा मालिकों को ट्रक ड्राइवरों और स्टाफ़ के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी अलग से कुछ बंदोबस्त करने पड़ेंगे.

चूंकि राजमार्ग कई राज्यों से होकर गुज़रते हैं, तो यह स्पष्ट है कि सभी राज्यों की ओर से ढाबा के लिए अलग-अलग तरह के निर्देश जारी किए जाएंगे.

महानगरों की ज़िंदगी

अनुज दयाल दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रवक्ता हैं. मेट्रो सेवा फिर से बहाल होने की स्थिति में किस तरह से काम करेगी, इसकी योजना पर वो काम कर रहे हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक सीट छोड़कर बैठने के लिए कहा जाएगा और कुछ लोगों को खड़े-खड़े सफ़र करने को कहा जाएगा.

इसका यह मतलब होगा कि मेट्रो के अधिकारियों को दफ़्तर जाने वाले वक़्त में भीड़ से निपटना होगा. मेट्रो के प्रेवश में भी उसी तरह के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जैसे एयरपोर्ट पर करना होता है. अंदर जाते वक़्त फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा. थर्मल स्क्रिनिंग और एक्स-रे बैगेज स्क्रीनिंग जारी रहेंगी.

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हालांकि इन नए बदलावों की वजह से मेट्रों में डिब्बों की संख्या और उनकी आवाजाही की निरंतरता बढ़ानी होगी. हर कोच के बाहर प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षा गार्ड इस बात को देखने के लिए होंगे कि कोच में ज़्यादा भीड़ तो नहीं हो रही है.

मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि राजीव चौक जैस भीड़-भाड़ वाले मेट्रो स्टेशन पर यह एक बड़ी चुनौती होगी. इसे कैसे किया जाए इसे लेकर कॉरपोरेशन विचार कर रहा है.

यात्रा बीमा

दुबई के इंश्योरेंस बिज़नेस ग्रुप के महासचिव आफ़ताब हसन बताते हैं कि यात्रा बीमा आने वाले वक़्त में यात्राओं का एक हिस्सा होंगी.

वो कहते हैं, ''कोरोना के बाद की दुनिया बहुत बदली हुई होगी. आम तौर पर पैसे बचाने के लिए टिकट खरीदते वक्त लोग यात्रा बीमा के विकल्प का चयन नहीं करते हैं. लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं. अब यह किसी भी यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने जा रही है फिर चाहे आप काम के सिलसिले में कहीं जा रहे हों या फिर छुट्टियां मनाने.''

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आमतौर पर यात्रा बीमा के अंतर्गत महामारियों को कवर नहीं किया जाता है. इसके लिए आपको अतिरिक्त शुल्क देना होगा. लेकिन हसन कहते हैं कि जल्दी ही महामारी का कवरेज भविष्य में होने वाले यात्रा बीमाओं का अनिवार्य हिस्सा हो जाएंगी.

शम्सुद्दीन कहते हैं कि जिस भविष्य का हम सामना करने जा रहे हैं उसके बारे में कभी किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी.

वो कहते हैं, "अगर समय पर वैक्सीन नहीं मिली तो यात्रियों के लिए हर चीज़ बदल जाएंगी. लेकिन अगर वैक्सीन खोज लिया गया तो फिर जल्दी ही हमारी ज़िंदगी पहले की तरह हो जाएगी."

स्टोरी- सलमान रावी, संपादन- निकिता मंधानी, इलस्ट्रेशन - निकिता देशपांडे

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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