कोरोना वायरस: मास्क पहनना चाहिए या नहीं?

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कोरोना वायरस संक्रमण दुनिया के 188 देशों में पहुंच चुका है. दुनिया भर में एक करोड़ 33 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और अब तक पांच लाख 79 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
भारत में कोविड-19 के मामले नौ लाख 36 हज़ार से अधिक हो चुके हैं. साथ ही इसके कारण अब तक 24 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
कई देशों ने कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए लोगों को सलाह दी गई थी. लोगों से कहा गया था कि वो अपने-अपने घरों में ही रहे और आपात स्थिति में ही घर से बाहर निकलें. इसके चलते ही भारत सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन के घोषणा कर दी.
भारत समेत कई और देशों में भी धीरे-धीरे लॉकडाउन खोलना शुरू किया है और लोगों से सावधानी बरतने को कहा है. लोगों से कहा गया है कि वे सफ़ाई का ध्यान रखें, हाथों को नियमित तौर पर साफ़ करते रहें, मास्क पहनें और एक-दूसरे के संपर्क में कम आएं यानी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें.

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लेकिन इन सबके बीच एक सवाल ये भी पूछा जा रहा है कि क्या मास्क पहनने से बचाव संभव है? या क्या मास्क पहनना सुरक्षित है?
लेकिन जितना आसान आप इस सवाल का जवाब सोच रहे हैं ये उतना है नहीं.
बहुत से देश जैसे की ब्रिटेन, अमरीका और सिंगापुर में लोगों को सलाह दी गई है कि अगर वो बीमार नहीं है तो मास्क ना ही पहनें.
यह सलाह विश्व स्वास्थ्य संगठन के आधार पर जारी की गई है और संभवत: यही कारण है कि आपने इन देशों की सड़कों पर बहुत कम लोगों को मास्क पहने हुए देखा होगा.
लेकिन बहुत से देशों में मसलन चीन, हांगकांग, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान में मास्क पहनना एक सोशल कल्चर बन गया है और अगर आप ग़ौर करेंगे तो पाएंगे कि ज़्यादातर लोगों ने मास्क पहन रखा है.
जो लोग मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं उनका तर्क है कि यह पहनना बहुत ज़रूरी है. उनका कहना है कि हो सकता है कि जो लोग स्वस्थ लग रहे हों उनमें भी वायरस हो. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि जो लोग स्वस्थ हैं फिर भी मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं उनकी वजह से उन लोगों को मास्क की कमी से जूझना पड़ रहा है जिन्हें वाकई इसकी ज़रूरत है.

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हालांकि मास्क पहनना है या नहीं पहनना है ये एक विवादास्पद मुद्दा है. वहीं ऐसे बहुत से मामले हैं जिसमें लोग मास्क पहन रहे लोगों पर हमले भी हए हैं, क्योंकि ज़्यादातर देशों में मास्क पहनने का चलन बिल्कुल नहीं रहा है.
इस बीच चीन और दक्षिण कोरिया में मास्क नहीं पहनने वालों को ग़लत माना जा रहा है और कई इमारतों में तो बिना मास्क पहने लोगों के प्रवेश को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस संबंध में अपनी नई गाइडलाइंस जारी की हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मास्क संबंधी नई गाइडलाइंस
- जहां संक्रमण ज़्यादा है, वहां लोगों को हर हाल में मास्क पहनना चाहिए. भीड़भाड़ वाली जगहों में भी मास्क पहनना बेहद ज़रूरी है.
- सभी स्वस्थ लोगों को तीन परतों वाला फैब्रिक मास्क पहनना चाहिए. जो लोग बीमार हैं, वो मेडिकल ग्रेड का मास्क पहने.
- जिन जगहों पर संक्रमण का स्तर बहुत ज़्यादा है, वहां सभी लोगों को मेडिकल-ग्रेड का मास्क इस्तेमाल करना चाहिए.
- अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ ही मरीजों और वहां मौजूद सभी लोगों को मेडिकल- ग्रेड का मास्क पहनना चाहिए.
इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि सभी लोगों को मास्क पहनने की ज़रूरत नहीं है. डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि उन्हें ही मास्क पहनना चाहिए जिन्हें संक्रमण हो या उसका ख़तरा हो.
कैसे पहनें और इस्तेमाल करें मास्क
मास्क पहनने से पहले अपने हाथों को ज़रूर साफ़ कर लें. एल्कोहॉल बेस्ड सेनेटाइज़र या सोप से हाथों को अच्छी तरह साफ़ करें.
मास्क ऐसे पहने की मुंह और नाक पूरी तरह ढकें और कोशिश करें कि आपके मास्क और मुंह के बीच कोई गैप ना रहे.
मास्क पहनते समय मास्क को ना छुएं. मास्क की बेल्ट से ही उसे पहनें.
मास्क को जितनी जल्दी-जल्दी हो सके बदलते रहें और कोशिश करें कि सिंगल-यूज़ मास्क को री-यूज़ करने से बचें.
जब आप मास्क उतार रहे हों तो उसे पीछे की ओर से उतारें. सामने की तरफ़ से उसे हाथ ना लगाएं. मास्क को उतारने के तुरंत बाद उसे डिस्कार्ड कर दें. इस्तेमाल किये गए मास्क को ढक्कन वाले कूड़ेदान में ही डालें.

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