कोरोना वायरसः वो शहर जिसने दुनिया को क्वारंटीन का रास्ता दिखाया

सेंट हेलेना का क्वारंटीन द्वीप

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प्राचीन काल से ही संक्रामक बीमारियों के रोगियों को स्वस्थ व्यक्तियों से दूर रखने की कोशिशें होती रही हैं, ओल्ड टेस्टामेंट में भी सेल्फ-आइसोलेशन का उल्लेख है.

दुनिया भर में कोविड -19 के फैलने के बाद से यही सलाह दी जा रही है कि अगर आप कहीं विदेश से आए हैं या ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में आए हैं जिसे कोविड-19 हुआ हो तो सेल्फ-क्वारंटीन में रहें.

आज की इस महामारी के समय में सेल्फ-क्वारंटीन का महत्व समझने के लिए 'क्वारंटीन' शब्द का इतिहास जानना दिलचस्प रहेगा. इस शब्द का मूल छिपा है मध्यकालीन यूरोप में.

"क्वारंटीन" शब्द इटैलियन भाषा के 'क्वारंतीनो' शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है चालीस दिन की अवधि.

14वीं शताब्दी में यूरोप में फैले प्लेग से वेनिस जैसे तटीय शहरों को बचाने के लिए संक्रमित बन्दरगाहों से वहाँ पहुँचने वाले हर जहाज को शहर की धरती छूने से पहले 40 दिन तक पानी में ही लंगर डालकर खड़े रहना पड़ता था यानी उन्हें अपनी यात्रा 40 दिन तक रोकनी पड़ती थी (क्वारंता- जौर्नी: क्वारंता यानी चालीस और जौर्नी यानी यात्रा).

धीरे-धीरे इस परिपाटी को क्वारंटीन कहा जाने लगा.

क्वारंटीन मरीन हॉस्पिटल

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साल 1377 में एक नया कानून

वर्ष 1374 में वेनिस ने एक आदेश निकाला कि जब तक वेनिस की विशेष स्वास्थ्य परिषद, जहाजों और उसके यात्रियों को शहर में आने की अनुमति न दे दे, उन्हें पास के सेन लैजारो द्वीप में ही रहना होगा.

लेकिन जैसा कि "लैजरेटो इन ड्यूब्रोन्विक : द बिगनिंग ऑफ द क्वारंटीन रेग्युलेशन इन यूरोप" के सह-लेखक एंटे मिलोसेविच, पीएचडी लिखते हैं, "इसके कारण वेनिस में कुछ विशेष देशों के जहाजों और यात्रियों के साथ भेदभाव तथा अन्य गड़बड़ियाँ शुरू हो गईं."

उधर, एड्रीयाटिक सागर के पार रागुजा (आधुनिक ड्यूब्रोन्विक) की महापरिषद ने महामारी को फैलने से रोकने के लिए 1377 में एक नया कानून बनाया जिसके मुताबिक रागुजा आने वाले हर जहाज और व्यापारियों के काफिले को 30 दिन तक आइसोलेशन में रहना था.

इस कानून में कहा गया था कि हानिकारक इलाकों से आने वाले हर व्यक्ति को मुख्य शहर में प्रवेश करने से पहले खुद को संक्रमणमुक्त बनाने के लिए नजदीकी सेवतट कस्बे या म्र्कान द्वीप में 30 दिन बिताने होंगे.

इस प्रकार, जैसा कि मिलोसेविच कहते हैं, "ड्यूब्रोन्विक ने सबसे पहले एक ऐसा तरीका लागू किया जो न केवल पक्षपातरहित और न्यायोचित था, बल्कि बेहद समझदारी भरा और सफल भी साबित हुआ. इसे पूरी दुनिया ने अपनाया."

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दो ज़रूरी बातें- आइसोलेशन और अनुशासन

किताब की सह-लेखिका एना बाकीजा-कोंसुआ, एमडी-पीएचडी कहती हैं, "ड्यूब्रोन्विक, संक्रमित इलाकों से जलमार्ग और थलमार्ग, दोनों के रास्ते आने वाले लोगों, पशुओं और सामान को स्वस्थ आबादी से अलग रखने वाला मध्य सागर का पहला बन्दरगाह था."

"जबकि वेनिस ने सभी जहाजों और व्यापार पर रोक लगा दी जिससे वहाँ का जीवन थम-सा गया. रागुजा गणतन्त्र ने 30 दिन के इस क्वारंटीन कानून (जिसे ड्यूब्रोन्विक के 27 जुलाई 1377 के एक दस्तावेज़ में ट्रेंटीन कहा गया है) का उल्लंघन करने पर कठोर दंड दिए और जुर्माने लगाए. शुरू में आइसोलेशन की अवधि 30 दिन ही थी, लेकिन फिर इसे 40 दिन का कर दिया गया."

ऐसा करने की सही-सही वजह कोई नहीं जानता. कुछ लोग मानते हैं कि 30 दिन की अवधि नाकाफी समझी गयी क्योंकि बीमारी के इंक्यूबेशन अवधि की सही जानकारी नहीं थी; तो कुछ इसे ईस्टर से पहले के 40 दिनों के व्रत (लेंट सीज़न) से जोड़ते हैं.

वहीं कुछ का मानना है 40 दिन की अवधि बाइबिल की महत्वपूर्ण घटनाओं जैसे महाप्रलय के चालीस दिन, हजरत मूसा के माउंट सिनाय पर बिताए चालीस दिन आदि पर आधारित है. वेनिस की सीनेट ने 1448 में अपने बन्दरगाह में प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए क्वारंटीन की अवधि आधिकारिक रूप से 30 दिन से बढ़ाकर 40 दिन कर दी.

जर्मनी में कॉलेरा काल का क्वारंटीन

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यूरोप का पहला अस्थायी प्लेग अस्पताल

लेजरेटो ऑफ ड्यूब्रोन्विक में बाकीजा-कोंसुआ लिखती हैं, "ड्यूब्रोन्विक प्रशासन को क्वारंटीन का विचार कुष्ठ रोग फैलने से रोकने के लिए कुष्ठ रोगियों को दूसरों से अलग रखने के उनके अनुभव से आया था."

ड्यूब्रोन्विक के इतिहास में कई रोगों ने तबाही मचाई थी, जिसमें कुष्ठ रोग और प्लेग जन-स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हुए.

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार 'क्वारंटीन' की अवधारणा ड्यूब्रोन्विक की ही देन है. 1272 के 'स्टेच्युट ऑफ ड्यूब्रोन्विक' में पहली बार कुष्ठ रोगियों को आइसोलेशन में रखे जाने का उल्लेख है. यह स्टेच्युट क्रोएशिया के प्राचीनतम कानूनी दस्तावेजों में से एक है.

बाकीजा-कोंसुआ यह भी बताती हैं कि बाइबिल में कुष्ठ रोग से पीड़ित 'लैजरस' को कुष्ठ रोगियों का संरक्षक संत माना गया है और उन्हीं के नाम पर कुष्ठ रोगियों के लिए बने आवासों को लैजरेटो कहा गया.

रागुजा प्रशासन द्वारा म्ल्जेत में यूरोप का पहला अस्थायी प्लेग अस्पताल बनाए जाने के बाद यूरोप भर में क्वारंटीन केन्द्रों को लैजरेटो कहा जाने लगा.

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दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

क्वारंटीन परिसर की स्थापना

बाकीजा-कोंसुआ बताती हैं, "रागुजा के 1377 के आइसोलेशन कानून के बाद ड्यूब्रोन्विक के दक्षिण-पश्चिम में स्थित छोटे से कस्बे सेवतट और आस-पास के द्वीपों (सुपेतर, म्र्कान और बोबारा) में सबसे पहले क्वारंटीन लागू किया गया. शुरुआत में क्वारंटीन की व्यवस्था झोंपड़ियों, तंबुओं और कई बार खुले में की गयी. झोपड़ियों के साथ अच्छी बात यह थी कि उन्हें आसानी से जलाकर पूरे इलाके को विसंक्रमित किया जा सकता था."

1397 में म्ल्जेत द्वीप पर बेनेडिक्टन मठ में एक क्वारंटीन परिसर स्थापित करने का निर्णय लिया गया. डांस बीच के लैजरेटो वर्ष 1430 में बनाए गए और बाद में लोकरम द्वीप पर एक बड़े और ज़्यादा आधुनिक लैजरेटो का निर्माण किया गया.

12 फरवरी 1590 को ड्यूब्रोन्विक की सीनेट ने पुराने शहर के पूर्वी प्रवेश द्वार पर प्लोस में अंतिम लैजरेटो बनाने का आदेश दिया. इसका निर्माण 1647 में पूरा हुआ; 1724 में सीनेट ने इसे शहर की बाहरी दीवार का एक अभिन्न हिस्सा घोषित कर दिया.

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पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र

लैज़रेटो परिसरों का क्वारंटीन केंद्र के रूप में इस्तेमाल ड्यूब्रोन्विक गणतन्त्र के पतन के बाद भी जारी रहा. स्वास्थ्य केंद्र के रूप में इसका इस्तेमाल कब बंद हुआ, हम कह नहीं कह सकते. बाकीजा-कोंसुओ बताती हैं कि ड्यूब्रोन्विक के राष्ट्रीय अभिलेखों के अनुसार 1872 के आस-पास ऐसा हुआ होगा.

वे कहती हैं, "पत्थरों से निर्मित यह शानदार इमारत स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना तो है ही, ड्यूब्रोन्विक की अनूठी चिकित्सीय विरासत की भी साक्षी है."

आज ड्यूब्रोन्विक के ये क्वारंटीन परिसर यानी लैजरेटो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं और आजकल यहाँ कॉन्सर्ट और लिंदो जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों का आयोजन किया जाता है. ये परिसर इस बात के गवाह हैं कि इस शहर ने सदियों पहले संक्रामक रोगों से लड़ने में कितनी दूरदर्शिता दिखाई थी.

ड्यूब्रोन्विक शहर में पले-बढ़े ऐतिहासिक टूर गाइड इवान वुकोविच वुका बताते हैं कि वे गर्मी की रातों में इन परिसरों में होने वाले आयोजनों में सिर्फ इसलिए जाते थे ताकि ठंडी हवा का आनंद उठा सकें. लैज़रेटो पुराने शहर की दीवारों से 300 मीटर बाहर की तरफ हैं.

वे कहते हैं, "शहर की दीवारों के अंदर किसी भी तरह की बीमारी बहुत आसानी से फ़ैल सकती है, इसीलिए लैजरेटो परिसर बहुत बड़ा और खुला-खुला है. यह क्षेत्र 10 बहुमंज़िला इमारतों में बंटा है, इसलिए काफी हवादार है."

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आज हैं खाली सड़कें

लैजरेटो परिसर में 10 क्वारंटीन भवन, पाँच आँगन और दो गार्ड हाउस हैं. भवनों में छोटे-छोटे टेरेस भी हैं जहां क्वारंटीन यात्री ताजी हवा ले सकते थे.

लैजरेटो इन ड्यूब्रोन्विक की सह-लेखिका वेसना मिलोसेविच बताती हैं, "वे लैजरेटो परिसर के ऊपरी हिस्से में टहल सकते थे, लेकिन ऐसे किसी भी व्यक्ति से नहीं मिल सकते थे जिसका क्वारंटीन पूरा हो गया हो या जो लैजरेटो परिसर से बाहर रहता हो."

आज कोविड-19 के कारण तमाम दुनिया की तरह ड्यूब्रोन्विक शहर भी क्वारंटीन है. क्रोएशियाई अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा और ड्यूब्रोन्विक की आय का एक प्रमुख स्रोत पर्यटन थम गया है. सागर में क्रूज शिप खड़े हैं और मार्च 2020 में वायरस को फैलने से रोकने के लिए क्रोएशिया में सीमा पार आने-जाने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

वुकोविच वुका कहते हैं, "सभी सीमाएं बंद हैं- आज क्रोएशिया में आप एक शहर से दूसरे शहर भी नहीं जा सकते. अमरीकन एयरलाइन्स ने पिछ्ले ही साल एक नए मार्ग से उड़ान शुरू की थी और दोनों देशों के बीच 28 साल के बाद कोई सीधी उड़ान शुरू हुई थी. लेकिन अब यह उड़ान इस पूरे वर्ष यानि 2020 के लिए रद्द कर दी गयी है; अन्य यूरोपीय अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी जून 2020 तक बंद हैं."

वुका कहते हैं, "90 के दशक के युद्धकाल में भी ड्यूब्रोन्विक इस कदर खाली नहीं होता था. आप खामोशी की आवाज़ सुन सकते हैं."

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एक-दूसरे से जुड़े दो बन्दरगाह

लेकिन गनीमत यह है कि शहर के मध्यकालीन क्वारंटीन कानून के उलट अब लोगों के पास अपने घर पर ही सेल्फ-क्वारंटीन रहने की सुविधा है. बस, जैसा कि वुका कहते हैं, "क्रोएशियाई बड़े समुदायों में अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी के साथ रहने के आदी हैं, ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए थोड़ा-ज़्यादा ध्यान रखना ज़रूरी है."

लेकिन इस के अलावा क्वारंटीन के प्रोटोकॉल में आज भी ज़्यादा बदलाव नहीं आया है. ड्यूब्रोन्विक ने सदियों पहले जिस मंत्र को अपनाया था वह आज भी सही है और पूरी दुनिया को उसका पालन करना चाहिए कि -"आइसोलेशन और अनुशासन दो बेहद ज़रूरी बातें हैं".

वेनिस की ही तरह ड्यूब्रोन्विक (पहले रागुजा के नाम से मशहूर) भी दुनिया भर के यात्रियों में लोकप्रिय रहा है; आज दोनों ही शहर यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल हैं. मध्य युग में वेनिस और रागुजा बड़े व्यापारिक पत्तन थे जिनका इतिहास एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है.

सन 1205 से 1385 तक रागुजा ने वेनिस का आधिपत्य स्वीकार किया, लेकिन ज़्यादातर मामलों में अपनी स्वतन्त्रता बनाए रखी. वर्ष 1420 में जब डलमेशिया (एड्रीयाटिक सागर से लगा तटीय क्षेत्र, जिसका अधिकांश हिस्सा अब क्रोएशिया में है) वेनिस को बेच दिया गया, तब भी ड्यूब्रोन्विक की स्वतंत्र सत्ता बनी रही, वह सिर्फ नाममात्र को ही वेनिस के अधीन था.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

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