कोरोना वायरस: क्या दिल्ली के अस्पताल मरीज़ों से भर चुके हैं और लोग भटक रहे हैं?
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Author, सिन्धुवासिनी
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
“मेरे दिल्लीवासियों, अगर आपको कोरोना हो जाए तो घबराना मत. आप में से ज्यादातर लोगों का इलाजहोम आइसोलेशनमें ही हो सकता है. लेकिन अगर आपको अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत हो तो हमारी उसके लिए भी पूरी तैयारी है.”
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले काफ़ी वक़्त से इस तरह के ट्वीट कर रहे हैं. हर प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भी वो यही कहते हैं कि संक्रमण के मामले भले बढ़ रहे हों, हालात काबू में हैं.
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क्या वाक़ई दिल्ली में हालात काबू में हैं?
ये पूछने पर हैदर अली रुंआसे हो जाते हैं. उन्होंने कुछ दिनों पहले ही अपनी पत्नी को खो दिया है और उनके चार बच्चों ने अपनी प्यारी मां को.
अस्पतालों में बेड नहीं, भर्ती से करते रहे इनकार
बटला हाउस में रहने वाले हैदर अली की 58 वर्षीय पत्नी अब इस दुनिया में नहीं हैं. कोरोना वायरस संक्रमण ने उनकी जान ले ली. उन्हें बचाने के लिए हैदर अली ने कई अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन वो बच न सकीं.
होली फ़ैमिली, फ़ोर्टिस, अपोलो, बत्रा और गंगाराम जैसे अस्पतालों ने बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर उन्हें भर्ती कराने में अपनी असमर्थता जताई.
हैदर अली बताते हैं, “इतने अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद किसी तरह मजीदिया अस्पताल में जगह मिली लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा कि मरीज़ की हालत नाज़ुक है, उन्होंने हमें किसी सरकारी अस्पताल में जाने को कहा. उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी वेंटिलेटर नहीं है. हम किसी और अस्पताल में जाते उससे पहले ही मेरी पत्नी चल बसीं.”
सरकार से हैदर अली की एक ही गुज़ारिश है. वो कहते हैं, “जो दावे आप करते हैं, उसे लागू कीजिए. सिर्फ़ बातें मत कीजिए. ज़मीन पर व्यवस्था बदलिए.”
दिल्ली के सादिक़ नगर में रहने वाले विनय गुप्ता भी दिल्ली सरकार के दावों और आश्वासनों से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.
विनय के 59 वर्षीय पिता और 32 वर्षीय भाई, दोनों कोरोना पॉज़िटिव हैं. उनके पिता फ़िलहाल राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी (आरजीएसएस) हॉस्पिटल में भर्ती हैं और भाई घर पर ही आइसोलेसन में हैं.
अपने पिता को अस्पताल में भर्ती कराने और भाई को संभालने में विनय ने जो मुश्किलें झेली हैं, वो डराने वाली हैं.
वो बताते हैं, “25 मई को पहले भाई को बुख़ार आया. उसने 28 तारीख़ को कोविड-19 का टेस्ट कराया. इसके बाद 29 मई की रात पापा को तेज़ बुख़ार आया. बुख़ार इतनी तेज़ था कि हमें रात में ही उन्हें लेकर अस्पताल भागे. पहले हम ईएसआई हॉस्पिटल में गए जहां उन्होंने हमें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रेफ़र कर दिया. वहां उनका कोरोना संक्रमण का टेस्ट हुआ. डॉक्टरों ने कहा कि टेस्ट की रिपोर्ट पांच दिन बाद आएगी इसलिए उन्हें घर ले जाया जाए.”
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
इसके बाद पांच दिनों तक के लिए विनय अपने पिता को घर ले आए और इस दौरान तबीयत ख़राब होने पर उन्हें बीच-बीच में ड्रिप चढ़वाने के लिए अस्पताल लेकर जाते रहे.
रिपोर्ट आई तो विनय के पिता कोरोना पॉज़िटिव थे. दोपहर दो बजे के क़रीब आरएमएल अस्पताल से फ़ोन करके उनके कोरोना पॉज़िटिव होने की जानकारी दी गई. हालांकि इसके बाद क्या होगा, कोई टीम मरीज़ को घर लेने आएगी या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
विनय का कहना है कि अस्पताल पहले तो अलग-अलग फ़ोन नंबर डायल करने को कहता रहा और फिर आख़िर में कहा कि आप ख़ुद मरीज़ को लेकर अस्पताल आ जाएं.
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'हेल्पलाइन से कोई मदद नहीं मिली'
उन्होंने बताया, “पापा को लगातार बुख़ार था. मैं उन्हें ऐसे कैसे लेकर चला जाता? और वो पॉज़िटिव थे, उनके साथ जाने पर क्या मुझे संक्रमण का ख़तरा नहीं होता?”
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विनय को इस दौरान ये डर भी सता रहा था कि अगर उनके परिवार से संक्रमण पूरे मोहल्ले में फैल गया तो सब लोग उन्हें दोष देंगे.
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आख़िरकार अस्पताल से कोई मदद न मिलती देख विनय ने दिल्ली सरकार का हेल्पलाइन नंबर डायल किया लेकिन वो लगातार व्यस्त था.
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वो बताते हैं, “मैंने कम से कम 20-30 बार फ़ोन किया लेकिन हर बार नंबर बिज़ी था. इधर पापा की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी. उन्हें ब्लड प्रेशर की तकलीफ़ है और उम्र भी तकरीबन 60 हो चली है. इसलिए फिर मैंने घबराकर ट्वीट किया. मैंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन समेत कई लोगों को टैग करते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए.”
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विनय के ट्वीट्स के बाद आख़िरकार आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय ने उनसे संपर्क किया. तब जाकर उनके पिता आरजीएसएस हॉस्पिटल में भर्ती हो पाए.
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विनय के पिता तो भर्ती हो गए लेकिन भाई अब भी होम आइसोलेशन में हैं. भाई को भर्ती कराने के लिए विनय ने बीएल कपूर और बत्रा हॉस्पिटल का रुख़ किया लेकिन वहां से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा.
उन्होंने बताया, “मैंने दिल्ली सरकार के कोरोना डेल्ही ऐप पर चेक किया तो बीएल कपूर में 93 बेड उपलब्ध थे लेकिन अस्पताल जाने पर उन्होंने कहा कि उनके पास कोई बेड ख़ाली नहीं है. ऐप मे बत्रा हॉस्पिटल में भी 10 बेड ख़ाली दिखा रहे थे लेकिन उन्होंने भी सभी बेड भरे हुए कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया.”
विनय ने बताया कि घर में दो-दो कोविड-19 मरीज़ होने के बावजूद अब तक कोई टीम उनका घर सैनिटाइज़ करने नहीं आई है और इस वजह पूरा परिवार ख़ौफ़ में जी रहा है.
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दिल्ली सरकार के ऐप में गड़बड़ी
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘डेल्ही कोरोना’ ऐप लॉन्च किया था जिसका मक़सद अस्पतालों में उपलब्ध बेड और वेंटिलेटर की जानकारी मुहैया कराना था. लेकिन ऐसा पता चला है कि ऐप से मिलने वाली जानकारी और अस्पतालों की असल स्थिति काफ़ी अलग है.
फ़ेसबुक और ट्विटर पर लोग लगातार लिख रहे हैं कि कैसे उनके कोरोना पॉज़िटिव परिजनों को पर्याप्त बेड और वेंटिलेटर न होने की वजह से अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जा रहा है.
ऐप से मिलने वाली जानकारी कितनी सही है, ये समझने के लिए हमने भी दिल्ली के कुछ अस्पतालों में फ़ोन किया.
फ़ोन करने पर जो हुआ, वो कुछ इस तरह है:
लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) की वेबसाइट पर दिए नंबर पर कॉल करने पर किसी ने फ़ोन रिसीव नहीं किया. ऐप के अनुसार यहां 968 बेड और 48 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं.
फ़ोर्टिस हॉस्पिटल में कॉल करने पर बेड उपलब्ध न होने की बात कही गई जबकि ऐप में 32 बेड उपलब्ध होने की सूचना है.
आरएमएल हॉस्पिटल में फ़ोन करने पर किसी ने जवाब नहीं दिया. ऐप के अनुसार यहां 23 बेड और चार वेंटिलेटर उपलब्ध होने की जानकारी है.
बत्रा हॉस्पिटल में भी सभी बेड भरे होने की बात कही गई. हालांकि ये भी कहा गया कि मरीज़ की डिटेल्स देने पर नाम वेटिंग लिस्ट में डाल दिया जाएगा और जैसे ही बेड खाली होगा, जानकारी दे दी जाएगी. ऐप के अनुसार बत्रा में 80 बेड उपलब्ध हैं.
बीएलके हॉस्पिटल में कॉल करने पर फ़ोन रिसीव किया गया लेकिन उपलब्ध बेड के बारे में पूछे जाने पर कॉल दूसरे एक्सेंटशन पर फ़ॉरवर्ड की गई, जहां से कोई जवाब नहीं मिला.
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इन गड़बड़ियों के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य महासचिव डॉक्टर नूतन मुंडेजा ने कहा कि चूंकि ऐप अभी कुछ दिनों पहले ही लॉन्च हुआ है इसलिए सही जानकारी अपडेट होने में देर हो रही है.
उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में ये समस्याएं दूर कर ली जाएंगी. मुंडेजा ने ये भी कहा कि बहुत से लोग डर और घबराहट की वजह से अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं लेकिन कोरोना के 80 फ़ीसदी मरीज़ होम आइसोलेशन में रहकर ही ठीक हो जाते हैं.
वहीं, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को टीवी चैनलों से कहा कि बेड की कमी वाली ख़बरें भ्रामक हैं.
उन्होंने कहा, "कुछ प्राइवेट अस्पताल मरीज़ों को भर्ती करने से इनकार कर रहे हैं इसलिए ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में बेड की कमी है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. हमारे पास अब भी 5000 बेड उपलब्ध हैं. जल्दी ही इनका लाइव डेटा साझा किया जाएगा."
(नोट: मरीज़ों और उनके परिजनों के नाम भारत सरकार के दिशानिर्देशों के तहत बदल दिए गए हैं.)
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.