कोरोना वायरस शरीर को यूं करता है तबाह

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- Author, जेम्स गैलघर
- पदनाम, स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
बीते साल दिसंबर में सबसे पहले चीन में कोरोना वायरस कोविड 19 के मामले सामने आए.
इसके बाद ये तेज़ी से दुनिया भर के देशों में फैला और विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसे महामारी घोषित करना पड़ा.
दुनियाभर में कोरोना वायरस के अब तक 69 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 3 लाख 99 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
कोरोना वायरस, इंसानों में कोविड 19 नाम की एक बीमारी देता है.
हालांकि इसके शुरुआती लक्षण बेहद मामूली होते हैं लेकिन इससे लोगों की जान भी जा सकती है.
ये वायरस किस तरह शरीर पर हमला करता है? इसका इलाज किस तरह किया जाता है और क्यों कई ऐसे लोगों की इससे मौत हुई जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा था?

वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड
आधिकारिक तौर पर पैन्डेमिक कोरोना वायरस का नाम सार्स सीओवी-2 है (Sars-CoV-2). इन्क्यूबेशन पीरियड संक्रमण और लक्षण दिखने के बीच का वक़्त होता है.
ये वो वक़्त होता है जब वायरस इंसान के शरीर में जम जाता है.
शरीर के भीतर जाने के बाद ये वायरस इंसान के लिए सांस लेने में तकलीफ़ पैदा कर सकता है. इसका पहला हमला आपके गले के आसपास की कोशिकाओं पर होता है.
इसके बाद सांस की नली और फेफड़ों पर हमला करता है. यहां ये एक तरह की "कोरोना वायरस फैक्ट्रियां" बनाता है. यानी यहां अपनी संख्या बढ़ाता है.
नए कोरोना वायरस बाक़ी कोशिकाओं पर हमले में लग जाते हैं. शुरुआती दौर में आप बीमार महसूस नहीं करते. हालांकि कुछ लोगों में संक्रमण के शुरुआती वक़्त से ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड भी लोगों में अलग-अलग हो सकता है. औसतन ये पाँच दिन का होता है.


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मामूली बीमारी
अधिकतर लोगों में जो लक्षण दिखाई देते हैं वो मामूली होते हैं. कहा जा सकता है कि संक्रमित लोगों में से दस में से आठ में ये लक्षण बेहद मामूली होते हैं, और ये लक्षण बुखार और खांसी होते हैं. बदन दर्द, गले में खराश और सिर दर्द भी हो सकता है.
आपके शरीर का इम्युन सिस्टम वायरस से लड़ने की कोशिश करता है.
आपका शरीर वायरस को एक विदेशी हमलावर की तरह देखता है और पूरे शरीर को संकेत देता है कि शरीर पर हमला हुआ है. इसके बाद वो वायरस को ख़त्म करने के लिए साइटोकाइन नाम का केमिकल छोड़ना शुरू करता है.
शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति पूरे ज़ोर से हमले का जवाब देने में जुट जाती है और इस कारण आपको बदन दर्द और बुखार भी हो सकता है.
कोरोना वायरस के कारण होने वाली खांसी अमूमन सूखी खांसी होती है जिसमें बलगम नहीं आता. लेकिन कभी-कभी ये मामला खराश तक भी सीमित हो सकता है.
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रोग प्रतिरोध वायरस
कुछ लोगों को खांसी में बलगम भी आ सकता है. ऐसे मामलों में बलगम में फेफड़ों की वो मृत कोशिशाएं भी होती हैं जो वायरस के कारण नष्ट हो जाती हैं.
इस लक्षणों में अक्सर डॉक्टर आपको आराम करने, ख़ूब सारा पानी पीने और पैरासिटामॉल लेने के लिए कहते हैं. इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती.
ये स्थिति क़रीब एक सप्ताह तक रहती है. जिन लोगों का इम्युन सिस्टम वायरस से लड़ने में कामयाब होता है, उनका स्वास्थ्य एक सप्ताह के भीतर सुधरने लगता है.
लेकिन कुछ मामलों में व्यक्ति का स्वास्थ्य और बिगड़ता है. कोविड 19 के गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं.
अब तक कोविड 19 के बारे में जो जानकारी सामने आई है, उससे अब तक ये पता चला है.
लेकिन हाल में कुछ अध्ययन सामने आए हैं जिनका कहना है कि इस बीमारे में नाक बहने जैसे सर्दी ज़ुकाम के लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं.

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कोविड 19 के गंभीर लक्षण
अगर बीमारी बढ़ जाए तो इसके कई कारण होते हैं. पहला यह कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को ख़त्म करने के लिए ज़रूरत से अधिक काम करती है.
इस दौरान जो केमिकल बनते हैं वो पूरे शरीर को संकेत देते हैं जिससे शरीर सूजने लगता है. कभी-कभी इस सूजन के कारण शरीर को गंभीर क्षति पहुंचती है.
किंग्स कॉलेज लंदन की डॉक्टर नैटली मैक्डरमॉट कहती हैं, "वायरस के कारण रोग प्रतिरोधक तंत्र का संतुलन बिगड़ता है और सूजन दिखनी शुरू हो जाती है. हम अब तक ये नहीं जान पाए कि वायरस कैसे ये काम करता है."
फेफड़ों की इसी सूजन को निमोनिया कहते हैं. अगर ये वायरस आपके मुंह से होते हुए आपकी सांस की नली में प्रवेश करता है और फिर आपके फेफड़ों तक पहुंचता है तो आपके फेफड़ों को छोटे-छोटे एयरसैक बना देता है.
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इंसान के फेफड़े शरीर में वो जगह हैं जहां से ऑक्सीजन शरीर में पहुंचना शुरू होता है जबकि कार्बन डाई ऑक्साइड शरीर के बाहर निकलता है.
लेकिन कोरोना के बनाए छोटे-छोटे एयरसैक में पानी जमने लगता है और इस कारण आपको सांस लेने में तकलीफ़ होती है और आप लंबी सांस नहीं ले पाते.
ऐसे स्टेज में मरीज़ को वेन्टिलेटर की ज़रूरत पड़ती है.
चीन में 56,000 संक्रमित लोगों के बारे में एकत्र की गई जानकारी पर आधारित विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अध्ययन बताता है कि 14 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के इस तरह के गंभीर लक्षण देखे गए.
बेहद गंभीर स्थिति
बताया जाता है कि छह फ़ीसदी लोग इस वायरस के कारण बेहद गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं.
इस स्टेज में इंसान का शरीर वायरस के सामने हार जाता है और गंभीर रूप से बीमार पड़ जता है.
इस स्टेज पर फेफड़े का फेल होना, सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम तक हो सकता है.
इस स्तर पर रोग प्रतिरोधक शक्ति काबू से बाहर हो जाती है और शरीर को गंभीर क्षति पहुंचाती है.
फेफड़ों में सूजन के कारण शरीर को ज़रूरत के मुताबिक़ ऑक्सिजन नहीं मिल पाता.
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इसका सीधा असर किडनी पर पड़ सकता है जो ख़ून साफ़ करने का काम करती है, वो काम करना बंद कर सकते हैं. साथ ही आपकी अंतड़ियां भी प्रभावित हो सकती हैं.
डॉक्टर भारत पनखानिया कहते हैं, "वायरस के कारण शरीर की सूजन इतनी बढ़ जाती है शरीर के कई ऑर्गन फेल हो जाते हैं जिससे इंसान मर सकता है."
इस स्टेज पर इलाज के लिए ईसीएमओ यानी एक्स्ट्रा कॉर्पोरल मेम्ब्रेन ऑक्सिजनेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसमें एक तरह के कृत्रिम फेफड़ों का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के भीतर का ख़ून बाहर निकाल कर उसे ऑक्सिजनेट कर के वापिस शरीर में डाल देते हैं.
लेकिन पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि ये इलाज कारगर ही होगा.

मौत के मामले
कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों के मामले में डॉक्टरों ने बताया है कि कैसे उनकी पूरी कोशिशों के बावजूद मरीज़ को बचाया नहीं जा सका.
लैन्सेट मेडिकल जर्नल में छपे एक अध्ययन के अनुसार चीन के वुहान के ज़िनयिनतान अस्पताल में कोरोना वायरस के कारण हुई दो मौतों में मरीज़ों के फेफड़े स्वस्थ पाए गए थे.
हालांकि अध्ययन में ये भी कहा गया है कि ये दोनों लंबे वक़्त से धूम्रपान करते थे. इस कारण हो सकता है कि उनके फेफड़े कमज़ोर हो सकते हैं.
मरने वाले पहले व्यक्ति 61 साल के एक पुरुष थे. जब वो अस्पताल पहुंचे उन्हें गंभीर निमोनिया था.

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उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी थी और उन्हें वेन्टिलेटर पर रखा गया था.
लेकिन उनके फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया. धड़कन भी थम गई थी. अस्पताल में आने के 11 दिन बाद उनकी मौत हो गई.
दूसरे मरीज़ 69 साल के एक व्यक्ति थे जिन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी.
उन्हें ईसीएमओ मशीन से जोड़ा गया था लेकिन वो बच नहीं सके. उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था और उन्हें निमोनिया था.

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