कोरोना महामारी घोषित, क्या बदल जाएगा?

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित कर दिया है.
अब से पहले डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को महामारी नहीं कहा था.
महामारी उस बीमारी को कहा जाता है जो एक ही समय दुनिया के अलग-अलग देशों में लोगों में फैल रही हो.
डब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष डॉ. टेडरोज़ आध्यनोम गेब्रेयेसोस ने कहा है कि वो अब कोरोना वायरस के लिए महामारी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि वायरस को लेकर निष्क्रियता चिंताजनक है.
क्या होती है महामारी?
ये परिभाषा सिर्फ़ उस संक्रमणकारी बीमारियों के लिए इस्तेमाल की जाती है जो बेहद तेज़ी से कई देशों में एक साथ लोगों के बीच संपर्क से फैलती है.
इससे पहले साल 2009 में स्वाइन फ्लू को महामारी घोषित किया गया था. विशेषज्ञों के मुताबिक स्वाइन फ्लू की वजह से कई लाख लोग मारे गए थे.
महामारी होने की अधिक संभावना तब होती है जब वायरस बिलकुल नया हो, आसानी से लोगों में संक्रमित हो रहा हो और लोगों के बीच संपर्क से प्रभावी और निरंतरता से फैल रहा हो.
कोरोना वायरस इन सभी पैमानों को पूरा करता है.
अभी तक कोरोना वायरस का कोई इलाज या टीका नहीं है. वायरस के विस्तार को रोकना ही सबसे अहम है.
अब कोरोना वायरस को महामारी क्यों कहा जा रहा है?
फ़रवरी के अंत में डॉ. टेडरोज़ ने कहा था कि कोरोना वायरस में महामारी बनने की क्षमता है लेकिन अभी ये महामारी नहीं है क्योंकि हम दुनिया भर में इसका अनियंत्रित विस्तार नहीं देख रहे हैं.
लेकिन अब उन देशों की संख्या बढ़ गई है जिनमें कोरोना के मामले सामने आए हैं. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 114 देशों में अब तक 118000 मामले सामने आए हैं.
लेकिन वायरस के बारे में भाषा या परिभाषा को बदलने से वायरस किस तरह फैल रहा है इस पर कोई असर नहीं होगा.
लेकिन डब्ल्यूएचओ को लगता है कि अब देश इसे लेकर और गंभीर हो जाएंगे.

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डॉ. टेडरोज़ ने कहा, "कुछ देश क्षमता की कमी से जूझ रहे हैं. कुछ संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं. और कुछ देश इच्छाशक्ति की कमी से जूझ रहे हैं."
उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ चाहता है कि सभी देश ये क़दम उठाएं
आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को लागू किया जाए और इसकी क्षमता बढ़ाई जाए
लोगों को इसके ख़तरों और बचाव के बारे में बताया जाए.
कोरोना वायरस संक्रमण के हर मामले को खोजें, टेस्ट करें, इलाज करें और उनके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान करें.

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