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जॉनी वॉकर से वॉक आउट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमिताभ बच्चन ने परसेप्ट पिक्चर कंपनी की जॉनी वॉकर में काम करने से मना कर दिया है. कुछ महीनों पहले अमिताभ ने कहा था कि उन्हें रेंज़िल डी सिल्वा की जॉनी वॉकर की कहानी इतनी पसंद आई कि उन्होंने उस फ़िल्म में काम करने की हामी भर दी. अब पता नहीं, कहानी में ऐसा क्या ट्विस्ट आ गया कि उनका हाँ, ना में बदल गया है. अंदर के लोगों का कहना है कि अमिताभ बच्चन को उस कहानी पर फ़िल्म अपने एबी कॉर्प के बैनर तले बनानी थी. लेकिन जब परसेप्ट के लोगों ने उन्हें कहानी देने से मना कर दिया तो बच्चन साहब ने अपनी डेट्स देने से इनकार कर दिया. इसे कहते हैं जॉनी वॉकर से वॉक आउट. *********************************************************** नज़रें अब नेशनल अवार्ड पर प्रीति ज़िंटा की नज़रें अब नेशनल अवार्ड पर है. इसलिए वो ऐसे निर्देशकों के साथ काम कर रही हैं जिनकी फ़िल्में अवार्ड तक पहुँच जाती हैं.
जाहनू बरुआ के साथ एक हिंदी फ़िल्म, शाजी करुण के साथ दूसरी हिंदी फ़िल्म और रितुपर्णो घोष के साथ एक हिंदी-अंग्रेज़ी फ़िल्म. अपने अब तक के करियर में प्रीति ज़िंटा ने इतनी सारी ऑफ़बीट फ़िल्में नहीं की होंगी. जितनी अभी एक साथ कर रही हैं. ये बात अलग है कि उन्हें मेनस्ट्रीम फ़िल्मों में ज़्यादा रोल नहीं मिल रहा है. पर इस बात में भी दम है कि उन्हें नेशनल अवार्ड जीतना है. ************************************************************** फ़ादर के साथ देखी 'गांधी माई फ़ादर' अक्षय खन्ना ने अपनी फ़िल्म 'गांधी माई फ़ादर' अपने फ़ादर यानी पिताजी विनोद खन्ना के साथ देखी.
अक्षय ने दो भाषाओं में बनी इस फ़िल्म का अंग्रेज़ी संस्करण को देख लिया था लेकिन हिंदी संस्करण देखने का मौक़ा उन्हें नहीं मिला था. जब उन्होंने इस फ़िल्म के निर्माता और अपने दोस्त अनिल कपूर से हिंदी संस्करण दिखाने की इच्छा प्रकट की तो अनिल ने झट से उनके लिए एक ट्रॉयल शो रख दिया. अक्षय खन्ना उस ट्रॉयल शो में अपने पिताजी और उनके कुछ दोस्तों के साथ आमंत्रित थे. उन दोस्तों में भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफ़ुल्ल पटेल भी थे. सबको फ़िल्म बहुत पसंद आई और अक्षय का काम भी. ************************************************************** कलाकार बना पत्रकार फ़िल्म पत्रकारों को फ़िल्मों और टेलीविज़न सीरियल के लेखक तो बनते सुना था.
इनमें से कुछ ख़ुशक़िस्मत पत्रकार फ़िल्म निर्देशक भी बन जाते हैं, लेकिन ये कभी नहीं हुआ होगा कि एक फ़िल्म अभिनेता पत्रकार बन जाए. और पत्रकार बनने जा रहे हैं अनुपम खेर. लेकिन वैसे पत्रकार नहीं, जो अभिनेता-अभिनेत्रियों के इंटरव्यू लेते हैं. दरअसल अनुपम खेर ने एक न्यूज़ एजेंसी शुरू की है. बॉलीवुड न्यूज़ सर्विस भारत की हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री की पहली न्यूज़ सर्विस है. टेलीविज़न चैनल, रेडियो स्टेशन और अख़बारों व पत्रिकाओं को ये न्यूज़ एजेंसी बॉलीवुड की ख़बरें, बॉलीवुड की हस्तियों के साथ इंटरव्यू और बॉलीवुड की पार्टियों के बारे में जानकारी देगी. देखते हैं अनुपम खेर अपने सबसे नए रोल में कैसे चमकते हैं. ************************************************************** दत्ता साब को राहत जेपी दत्ता का पिछला साल भले ही भयानक साबित हुआ हो लेकिन इस साल की शुरुआत उनके लिए शुभ साबित हुई है.
आयकर में उनके साढ़े नौ करोड़ रुपए के फ़िल्म एक्सपोर्ट के नफ़े पर 80 प्रतिशत की छूट की मांग को आयकर विभाग ने अस्वीकार कर दिया था. जेपी दत्ता की कंपनी ने इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील की और कुछ समय पहले उनकी 80 प्रतिशत छूट की मांग स्वीकार हो गई है. जेपी दत्ता ने साढ़े नौ करोड़ रुपए में फ़िल्म बॉर्डर और रिफ़्यूजी के लिए ओवरसीज़ के सैटेलाइट राइट्स बेचे थे. भारतीय आयकर क़ानून के हिसाब से वर्ष 2001-02 में फ़िल्म एक्सपोर्ट की कमाई में से 80 प्रतिशत पर आयकर नहीं भरना पड़ता था. लेकिन आयकर अधिकारी ने जेपी दत्ता के मामले में ये छूट नहीं दी थी. उनका तर्क ये था कि जेपी दत्ता ने टेप एक्सपोर्ट नहीं की थी, भारत में ही चैनल को टेप दी थी. लेकिन अपील में जेपी दत्ता की जीत हुई. वैसे इस वक़्त जेपी दत्ता अपने परिवार के साथ लंदन में छुट्टियाँ मना रहे हैं. ************************************************************** महारथियों की टक्कर? मीडिया अमिताभ बच्चन की झूम बराबर झूम और रजनीकांत की तमिल फ़िल्म शिवाजी: द बॉस को लेकर दीवानी हो गई थी. कहा जा रहा था कि इस सप्ताह दो महारथियों की बॉक्स ऑफ़िस पर टक्कर होने वाली थी.
पर ये बात बिल्कुल ग़लत थी. सबसे पहले तो शिवाजी एक तमिल फ़िल्म थी और झूम बराबर झूम एक हिंदी फ़िल्म. तमिलनाडु में हिंदी फ़िल्मों की बहुत कम प्रिंटें लगती हैं. दूसरी ओर तमिलनाडु से बाहर गिनी-चुनीं तमिल फ़िल्में ही लगती हैं. वैसे क्योंकि शिवाजी भारत की सबसे महंगी फ़िल्म (माना जाता है कि इसकी लागत 82 करोड़ रुपए है) है, इसलिए ये फ़िल्म तमिलनाडु के अलावा मुंबई और अन्य सर्किट में भी रिलीज़ हुई है. लेकिन मुंबई जैसे शहर में जहाँ झूम बराबर झूम की 75 प्रिंटें लगी हैं, वहीं शिवाजी की सिर्फ़ 15 प्रिंटें हैं. दूसरी बात ये कि झूम बराबर झूम में अमिताभ बच्चन की विशेष भूमिका है. वो सिर्फ़ एक गाने में ही नज़र आते हैं. लेकिन शिवाजी में रजनीकांत की मुख्य भूमिका है. वैसे मुंबई के ऐडलैब्स मल्टीप्लेक्स ने इन फ़िल्मों की टक्कर के बीच क्या रास्ता निकाला. उन्होंने शिवाजी की हिट रिपोर्ट और झूम की कमज़ोर रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए झूम बराबर झूम के शो कम और शिवाजी के शो बढ़ा दिए. शायद बच्चन कहेंगे- ज़ोर का झटका धीरे से लगे. |
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