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शनिवार, 16 जून, 2007 को 02:34 GMT तक के समाचार
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सलमान रुश्दी को 'नाइटहुड'
पद्मा लक्ष्मी के साथ सलमान रुश्दी
सलमान रुश्दी अपनी किताबों की तरह अपने प्रेम के कारण भी चर्चित हुए
भारतीय मूल के चर्चित और विवादित अंग्रेज़ी लेखक सलमान रुश्दी को ब्रिटेन की महारानी ने 'नाइटहुड' के ख़िताब से सम्मानित किया है.

इस ख़िताब के बाद सलमान रुश्दी को सर सलमान रुश्दी के नाम से जाना जाएगा.

उनकी किताब 'सैनेटिक वर्सेस' से दुनिया भर के मुसलमान नाराज़ हो गए थे और 1989 में ईरान के आध्यात्मिक नेता आयतुल्ला ख़ुमैनी ने उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था.

इसके बाद 1999 तक वे सार्वजनिक जीवन से दूर रहे. दस साल बाद उनका अज्ञातवास हालांकि ख़त्म हो गया लेकिन उनसे जुड़े विवाद कभी ख़त्म नहीं हुए.

कट्टर धर्मनिरपेक्ष सलमान रुश्दी ने ब्रितानी सांसद जैक स्ट्रॉ का उस समय समर्थन किया था जब उन्होंने कहा मुसलमान महिलाओं के बुर्क़ा पहनने पर टिप्पणी की थी.

सलमान रुश्दी ने तब इस्लाम के 'संपूर्णतावाद' के ख़िलाफ़ चेतावनी भी दी थी.

बुकर अवार्ड

मुंबई के एक सफल व्यावसायी के बेटे सलमान रुश्दी का जन्म 1947 को मुंबई में एक मुस्लिम परिवार में हुआ.

रुश्दी के उपन्यास का विरोध
अभी भी रुश्दी के लेखन का विरोध होता रहता है

उनकी शिक्षा इंग्लैंड के रग्बी स्कूल में हुई और फिर उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की.

विज्ञापन की दुनिया से अपना करियर शुरु करने वाले रुश्दी बाद में पूर्णकालिक लेखक हो गए.

उनका पहला उपन्यास 'ग्रिमस' 1975 में आया था लेकिन साहित्यिक दुनिया और पाठकों ने इसका कोई नोटिस नहीं लिया.

लेकिन उनके दूसरे उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' ने उन्हें साहित्य जगत में ख्याति दिलवाई और 1981 में उन्हें बुकर सम्मान दिया गया.

1993 में उन्हें विशेष सम्मान 'बुकर ऑफ़ बुकर्स' दिया गया क्योंकि उनके उपन्यास को 25 बरसों में बुकर सम्मान से सम्मानित किताबों में सबसे अच्छा माना गया.

19 जून को 60 साल के होने जा रहे सलमान रुश्दी को उनके उन्मुक्त बयानों के लिए जाना जाता है.

लेखन

सलमान रुश्दी इतिहास को अपने लेखन का विषय बनाते हैं और फिर अपनी अद्भुत कल्पनाशीलता के साथ इसके इर्दगिर्द कहानी बुनते हैं.

उनकी कहानियाँ भारत और पाकिस्तान की ज़मीन पर बुनी जाती हैं.

उनकी चौथी किताब 'सैनेटिक वर्सेस' में कल्पनाशीलता, दर्शन और विडंबनाओं के साथ ख़ुदा और शैतान के बीच लड़ाई को चित्रित किया गया है.

इस किताब की इस्लामिक समाज में तीखी प्रक्रिया हुई और इसे ईशनिंदा क़रार दिया गया. आरोप है कि रुश्दी ने पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया.

'सैनेटिक वर्सेस' को कई मुस्लिम देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया और ईरान के धार्मिक-आध्यात्मिक नेता ख़ुमैनी ने रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया.

दस साल के अज्ञातवास में सलमान रुश्दी पुलिस की सुरक्षा में रहे लेकिन उनका लिखना जारी रहा और उन्होंने कई उपन्यास और निबंध लिखे.

नाइटहुड दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सलमान रुश्दी ने कहा, "यह एक बड़ा सम्मान है और मै आभारी हूँ कि मेरे लेखन को इस तरह पहचान दी गई."

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