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इस्लाम में सुधार ज़रूरीः रुश्दी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विवादों में रहे भारत में जन्मे मुस्लिम उपन्यासकार सलमान रुश्दी ने कहा है कि इस्लाम को आधुनिक बनाने के लिए उसमें सुधार की ज़रूरत है. सलमान रुश्दी ने ब्रिटेन से प्रकाशित होनेवाले समाचारपत्र द टाइम्स में अपने एक लेख में कहा है कि कुरान की एक व्यापक व्याख्या से संबंध सुधरेंगे और मुस्लिम अलग-थलग नहीं पड़ेंगे. रुश्दी ने कहा कि इन सुधारों से जिहाद की विचारधारा चलानेवाली उन ताक़तों का भी सामना करने में मदद मिलेगी जिनके कारण सात जुलाई को लंदन में हमले हुए. सलमान रुश्दी पिछले कई वर्षों से भूमिगत जीवन बिता रहे हैं क्योंकि उनके उपन्यास द सैटनिक वर्सेज़ में लिखी कुछ बातों के कारण फ़रवरी 1989 में ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला ख़ुमैनी ने उनके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया था. लेख टाइम्स में अपने लेख में सलमान रुश्दी ने लिखा है कि ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में मुसलमान अन्य समुदायों से अलग जीवन बिता रहे हैं. रुश्दी कहते हैं,"ज़रूरत इस बात की है कि परंपरा से अलग हटकर बढ़ा जाए. इसके लिए एक सुधार आंदोलन चलाना होगा जिससे इस्लाम की मूल भावनाओं को आधुनिक दौर में लाया जा सके". रुश्दी ने ये भी तर्क दिया है कि पवित्र ग्रंथ कुरान को एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ की तरह पढ़ाया जाना चाहिए ना कि किसी ऐसी पुस्तक के तौर पर जिसपर कोई सवाल ना उठाया जा सके. रुश्दी कहते हैं,"यदि कुरान को एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के तौर पर देखा जाए तो इससे ये संभव हो सकेगा कि उसकी व्याख्या नए दौर के हिसाब से की जा सके". वे आगे लिखते हैं,"अगर सुधार हुए तो सातवीं शताब्दी में बनाए गए क़ानून 21वीं सदी की ज़रूरतों को अपना मार्ग बनाने दे पाएँगे". सलमान रुश्दी की आनेवाली किताब एक ऐसे मुस्लिम लड़के की कहानी है जिसे एक मौलवी आतंकवादी बना देता है. इस किताब का नाम शालीमार द क्लाउन है. |
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