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रविवार, 09 सितंबर, 2007 को 04:17 GMT तक के समाचार
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सुब्रत रॉय सहारा के साथ 'एक मुलाक़ात'

सुब्रत रॉय
सुब्रत रॉय ने वर्ष 1978 में सहारा समूह की नींव डाली थी
बीबीसी एक मुलाक़ात में इस बार हमारे साथ हैं एक बहुत ही ख़ास शख़्सियत जो बिल्कुल ज़मीन से उठकर ऊपर तक पहुँचे. उत्तर प्रदेश के एक बहुत ही छोटे शहर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले ये शख़्स बहुत से लोगों के लिए रोल मॉडल भी हैं.

आज उनके साथ लगभग आठ-दस लाख लोग सीधे काम करते हैं जो भारत और दक्षिण एशिया की किसी भी कंपनी के लिए सबसे अधिक है. रंगीन मिजाज़ और हमेशा ख़बरों में बने रहने वाले सहारा समूह के अध्यक्ष 'सहारा श्री' सुब्रत रॉय सहारा हमारे साथ हैं.

मैने आपके लिए इतनी सारी बातें कहीं. इतने सारे विशेषण जोड़े. आपको सबसे अधिक कौन सी बात सबसे अधिक पसंद आई?

जब आप ने मुझे 'सहारा श्री' कहा.

आपको कौन सी बात ग़लत लगी. क्या आप ज़मीन से उठकर इतने ऊपर तक नहीं पहुँचे और ज़ीरो से हीरो बनने की बात को चरितार्थ नहीं किया है?

मनुष्य तो निमित्त मात्र है. उसे ऊपर वाले का आशीर्वाद मिलता है और वो उसी रास्ते पर चल पड़ता है. मैं भी चलता गया और कारवाँ बनता गया.

तो मेरी बात ग़लत कैसे हुई, और रंगीन मिजाज़ तो आप हैं ही.

मैं समझ नहीं पाया कि आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?

देखिए आपने अभी भी लाल रंग की कमीज़ पहन रखी है. और दूसरी बात जितनी चर्चा आपके काम की होती है उतनी ही चर्चा इस बात की भी होती है कि सहारा श्री क्या गजब की आलीशान और राजसी ज़िंदगी जीते हैं. ख़ुद भी ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीते हैं और ऐसे ही लोगों को अपने साथ रखते हैं?

ये बात सही है. मुझे उन लोगों के साथ उठना-बैठना बहुत अच्छा लगता है जिन्होंने ज़िंदगी में अपनी मेहनत से बहुत कुछ पाया है और ऊपर तक पहुँचे हैं.

मैं तो सिर्फ़ नामचीन लोगों की बात कर रहा था लेकिन आपने इसमें उपलब्धि हासिल करने वालों की बात भी जोड़ दी. मैं आपकी इस बात को सही भी मानता हूँ. आपके साथ सिर्फ़ नामी-गिरामी और चमक-दमक वाले लोग ही नहीं होते बल्कि ऐसे कई लोग भी होते हैं जो कम नामचीन हैं लेकिन जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में मेहनत से बहुत कुछ पाया. जैसे मैंने आपके साथ कई बार धनराज पिल्लै को देखा है जो बहुत ग्लैमर वाले आदमी के रूप में नहीं जाने जाते. अपनी मेहनत से बड़ी शख़्सियत बनने वालों के साथ उठने-बैठने का शौक आपको कब से है?

शुरू से. देखिए ग्लैमर से कोई इनकार नहीं कर सकता. मैं भी नहीं कर सकता. लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करके आगे बढ़ने वालों से मिलकर बहुत कुछ सीखने और जानने को मिलता है. इनका जोश और बड़प्पन देखकर प्रेरणा मिली और नज़दीकी बढ़ती गई.

 देखिए मैं वर्तमान में जीने वाला आदमी हूँ. कोशिश करता हूँ कि वर्तमान में जो कुछ भी कर रहा हूँ उसमें कोई भूल न हो. वर्तमान अगर सही रहेगा तो आने वाला भविष्य भी अच्छा होगा. आज यहाँ से पीछे के बारे में सोचूँ तो कहूँगा कि जब 1978 में काम शुरू किया था तो कभी नहीं सोचा था कि यहाँ तक पहुँच सकूँगा.

अब आपकी पसंद का एक गाना..

फ़िल्म 'याराना' का एक गाना है छूकर मेरे मन को, किया तूने क्या इशारा…

जब आपने गोरखपुर से अपनी यात्रा शुरू की तो क्या कुछ अंदाज़ था कि इतना बड़ा काम खड़ा हो जाएगा?

देखिए मैं वर्तमान में जीने वाला आदमी हूँ. कोशिश करता हूँ कि वर्तमान में जो कुछ भी कर रहा हूँ उसमें कोई भूल न हो. वर्तमान अगर सही रहेगा तो आने वाला भविष्य भी अच्छा होगा. आज यहाँ से पीछे के बारे में सोचूँ तो कहूँगा कि जब 1978 में काम शुरू किया था तो कभी नहीं सोचा था कि यहाँ तक पहुँच सकूँगा.

कहते हैं मात्र दो हज़ार रुपए की पूँजी से शुरू किया काम आज हज़ारों करोड़ का हो गया है. क्या यह सच है?

हाँ, मैंने दो हज़ार रुपए से अपना काम शुरू किया था. आज हम लोगों की संपत्ति क़रीब 50 हज़ार करोड़ रूपए से अधिक की है.

आप जब कभी सपने दखते थे तो क्या आपको विश्वास था कि आप यह सब कर पाएंगे?

मैं फिर कहना चाहूँगा मैं कभी सपने देखने वाला नहीं था. हमेशा वर्तमान में जीता था. अगर आप मुझसे आज के बारे में पूछिए तो मैं सब कुछ बता दूँगा कि हम लोग क्या कर रहे हैं लेकिन आप अगर 10 साल बाद की योजना पूछेंगे तो मैं कुछ नहीं बता पाउँगा. ऐसी बातें मैं नहीं सोचता.

आपकी पसंद का एक और गाना..

फ़िल्म 'कश्मीर की कली' का एक गाना है दीवाना हुआ बादल...

आप सपने नहीं देखते बल्कि योजना बनाते हैं. यह कितनी सही बात है कि आप इस देश के सबसे प्रभावशाली लोगों में से हैं?

यह मैं कैसे बताऊँ. यह तो आप लोग ही बताएँगे.

हमारे हिसाब से तो आप प्रभावशाली हैं. आपकी पसंद का एक गाना बताएँ.

तस्वीर तेरी दिल में जिस दिन से उतारी है...

आप बहुत रोमांटिक हैं.

वो तो मैं हूँ. जो भी व्यक्ति भावुक होगा वो रोमांटिक भी होगा. आप अपने काम को लेकर भी रोमांटिक हो सकते हैं. रोमांटिक होना किसी एक क्षेत्र से जुड़ी चीज़ नहीं है. जीवन बहुत अच्छा हो जाता है और आप बहुत आशावादी हो जाते हैं. हर पल बहुत ख़ूबसूरत लगता है.

हम लोगों ने रोमांटिक होने की बहुत बढ़िया व्याख्या की. लेकिन अगर पारंपरिक रूप में रोमांटिक होना जिस तरह से जाना जाता है उसके अनुसार आजकल आप किसके साथ रोमांस कर रहे हैं. या कहें आपको आज कल कौन अच्छा लग रहा है. ज़रूरी नहीं है कि सच में ऐसा हो. जैसे मैं बताऊँ एक बार मेरा दिल मनीषा कोइराला पर आ गया था. मैं उनका दीवाना हो गया था. मैं अकेले ही उनसे रोमांस करता रहता था. वैसे ही सहारा श्री आजकल किसके दीवाने हैं.

वैसे मुझे वहीदा रहमान बहुत अच्छी लगती थीं. उनका बहुत असर मेरे ऊपर था. लेकिन मैं उनसे तब मिला जब उनके सारे बाल सफ़ेद हो चुके थे. मैंने अपनी भावना उनको बताई.

 वो तो मैं हूँ. जो भी व्यक्ति भावुक होगा वो रोमांटिक भी होगा. आप अपने काम को लेकर भी रोमांटिक हो सकते हैं. रोमांटिक होना किसी एक क्षेत्र से जुड़ी चीज़ नहीं है. जीवन बहुत अच्छा हो जाता है और आप बहुत आशावादी हो जाते हैं. हर पल बहुत ख़ूबसूरत लगता है.

आपकी पसंद का एक और गाना..

फ़िल्म 'गाइड' का गाना है तेरे मेरे सपने, सब एक रंग के...इसमें भी वहीदा जी थीं.

आपके अब तक के जीवन का सफ़र कैसा रहा?

बहुत सुंदर. हर पल बहुत अच्छा गुजरा. जीवन में बहुत आनंद लिया है. आपने किस्मत की बात कही. अगर ऐसा कुछ होता है तो मैं बहुत किस्मत वाला हूँ. ईश्वर का बहुत आशीर्वाद रहा है. जीवन अगर समझ में आ जाए तो यह बहुत सुंदर है. लोग समझ नहीं पाते.

शायद आपकी सफलता का राज़ भी यही है कि आप जीवन का आनंद लेते हुए आगे बढ़ते हैं. आज जो उभरता हुआ भारतीय है जो आगे बढ़ने और बड़ा आदमी बनने के सपने देख रहा है, उसके लिए आपका क्या कहेंगे?

देखिए दो चीज़ें होती हैं. एक पाने की तमन्ना और दूसरा देने की चाहत. जो सिर्फ़ पाने की तमन्ना लिए आगे बढ़ता है वो बहुत आगे नहीं जा पाता. जीवन में देने की चाहत होनी चाहिए. मैं आपको कुछ देना चाहता हूँ यह मेरे हाथ में है. मैं आपसे कुछ पाना चाहता हूँ यह मेरे हाथ में नहीं है.

व्यक्ति में महत्वाकांक्षा होनी चाहिए. महत्वाकांक्षा का मतलब होता है महत्वपूर्ण आकांक्षाएँ, जिसमें सिर्फ़ एक का नहीं बल्कि अनेक लोगों का हित हो. जब आप दूसरे के बारे में सोचेंगे तो ऊपर वाला आपके बारे में सोचेगा.

कई लोगों का ऐसा मानना है कि आप व्यावहारिक तौर पर ऐसे हैं. लोगों की दिल खोलकर मदद करते हैं. आज बच्चन परिवार से आपके बहुत अच्छे संबंध हैं. बहुत से लोग ऐसा कहते हैं कि आप उनकी ज़िंदगी में उस वक़्त आए जब वह बुरे समय से गुजर रहे थे. आपने उनको सहारा दिया.

बच्चन साहब इतनी बड़ी शख़्सियत हैं कि उनके बारे में सहारा देने जैसी बातें नहीं करनी चाहिए. मैं तो कहूँगा कि अगर उन्हें सहारा देने का मौक़ा भी मिला तो यह भी ख़ुशनसीबी की बात है. ये सच है कि मैं जब बच्चन साहब से मिला उस समय उनका ख़राब समय चल रहा था. मुझे इस बात की बहुत संतुष्टि है कि मैंने उनके सुख-दुख और परेशानियों को बाँटा. मैंने अपनी तरफ से उन्हें तकलीफ़ों से उबरने में पूरी सहायता पहुँचाई. लेकिन मैंने सहारा दिया ऐसा कहना ठीक नहीं होगा.

लेकिन यह तो मन में रहता ही होगा कि ये अमिताभ बच्चन हैं भाई?

बिल्कुल. तभी तो मैंने कहा कि मुझे संतुष्टि मिलती है जब अमिताभ बच्चन के सुख-दुख का मैं साथी बनता हूँ.

उन्होंने भी आपको पूरा सम्मान दिया.

बहुत सम्मान दिया.

आप के लिए कह जाता है कि सहारा श्री ज़रूरत के समय दोस्तों के काम आते हैं. क्या ऐसा हमेशा होता है?

हाँ, पिता जी से यही शिक्षा मिली है. वो कहते थे कि सुख में साथी न भी बनो दुख में ज़रूर साथी बनना. इसमें बहुत संतुष्टि मिलती है. मैं अपनी संतुष्टि के लिए ऐसा करता हूँ.

लेकिन कुछ लोग ऐसा कहते हैं कि सहारा श्री सिर्फ़ अमिताभ बच्चन जैसों का सहारा बनते हैं?

ऐसा इसलिए है क्योंकि दिखते वही हैं. मैं आपको बताऊँ मेरे स्कूल और कॉलेज़ के क़रीब सौ दोस्त मेरे साथ काम करते हैं. मैंने चुन-चुनकर, खोज-खोजकर उन्हें इकट्ठा किया है.

 बच्चन साहब इतनी बड़ी शख़्सियत हैं कि उनके बारे में सहारा देने जैसी बातें नहीं करनी चाहिए. मैं तो कहूँगा कि अगर उन्हें सहारा देने का मौक़ा भी मिला तो यह भी ख़ुशनसीबी की बात है. ये सच है कि मैं जब बच्चन साहब से मिला उस समय उनका ख़राब समय चल रहा था. मुझे इस बात की बहुत संतुष्टि है कि मैंने उनके सुख-दुख और परेशानियों को बाँटा.

आपकी पसंद का एक और गाना.

फ़िल्म 'चके दे इंडिया' का गाना सुना. ये मुझे बहुत अच्छी लगी. ये फ़िल्म थामकर रखती है. ये फ़िल्म दिखाती है कि आप जो भी ठान लेते हैं, जिसके लिए मेहनत करते हैं वो आपको मिलता ज़रूर है.

आपके व्यक्तित्व का एक पहलू यह भी है कि आप राष्ट्रीयता को बहुत बढ़ावा देते हैं. भारत पर्व का आयोजन करते हैं. आज 15 अगस्त को जैसे आप बधाई-पत्र भेजते हैं वैसे कितने लोग भेजते होंगे. आपके व्यक्तित्व के इस पहलू को फ़िल्म ने बहुत प्रभावित किया होगा. ये फ़िल्म देशभक्ति जगाती है.

बिल्कुल जगाती है और अंत तक जगाती है.

मैं आपके व्यक्तित्व में बाकी सब कुछ ढूँढ सकता हूँ लेकिन यह देशभक्ति वाला पहलू मुझे समझ नहीं आता. क्या आपने इसे अपना कारोबार बढ़ाने और अपने व्यक्तित्व को थोड़ा वजन देने के लिए इस्तेमाल किया?

ऐसा नहीं है. मैं सेना में जाना चाहता था. मैं भर्ती में भी चला गया था. मैं एनसीसी में रहा हूँ. विद्यार्थी जीवन में मैं पढ़ाई से अधिक एनसीसी से जुड़ा रहा. मुझे एक भावनात्मक लगाव सा हो गया था. शायद इसी का असर रहा मेरे ऊपर.

अपनी पसंद का एक और गाना बताएँ.

जादू है नशा है...'जिस्म' फ़िल्म का गाना है.

आप भगवान को मानते हैं, उनसे डरते हैं.

मैं भगवान को मानता हूँ. डरता नहीं हूँ. उनते प्रति श्रद्धा है. भगवान को एक बुजुर्ग दोस्त की तरह समझता हूँ. अपने कर्तव्य को निभाना ही धर्म है.

अभी आपने 'चक दे इंडिया' की बात की. आप भारतीय क्रिकेट टीम को प्रायोजित करते हैं.

हॉकी टीम को भी प्रायोजित करते हैं.

हम उसी सिलसिले में बात कर रहे थे. धनराज पिल्लै आपके पास आए थे जब उनको टीम में कप्तानी नहीं मिली थी.

उन्हें तो ओलंपिक टीम में भी जगह नहीं मिल रही थी लेकिन कुछ कोशिशों के बाद उनको जगह मिल गई थी. मैंने वहाँ स्टैंड लिया था. वो टीम में आए और ओलंपिक में अच्छा भी खेले.

और सौरभ गांगुली के मामले में कुछ किया?

वहाँ ज़रूरत ही नहीं पड़ी. हाँ जब वो अलग पड़ गए तो मैंने अपनी तरफ से लोगों को कह दिया था कि भाई इस तरह उन्हें अलग न करें और एक बार मौका दें.

आपको 'चक दे इंडिया' की टीम कैसे लगी. आपकी पसंदीदा खिलाड़ी कौन थी?

बहुत अच्छी टीम थी. बिल्कुल असली टीम की तरह लग रही थी. तीन खिलाड़ी मुझे बहुत पसंद आए. एक, सेंटर फ़ॉरवर्ड खिलाड़ी, दूसरी, वो छोटी सी लड़की जो भैंस की पूँछ जैसा कुछ बोलती है और तीसरी खिलाड़ी थी गोलकीपर विद्या शर्मा.

और शाहरुख़ ख़ान?

बहुत बेहतरीन अदाकारी की. जितनी भी बड़ाई की जाए कम है.

और कौन से अभिनेता पसंद हैं?

मुझे सबसे अधिक पसंद हैं देवानंद. मैं उनकी एक-एक फ़िल्म कई-कई बार देखता था. गाइड मैंने 10-11 बार देखी थी.

मैंने एक बार आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आप अपनी पत्नी के लिए दोने में समोसे ले गए थे. मुझे लगा कि आपने ख़ुद को राजेश खन्ना और पत्नी को शर्मीला टैगोर बना दिया.

नहीं ऐसा नहीं था. वो मेरा स्टाइल था.

बात यही है कि सहारा श्री बहुत रोमांटिक हैं.

वो तो है. रूहानी संलग्नता बहुत ज़रूरी है. इससे ऊर्जा मिलती है.

मीडिया आप पर भी किसी अभिनेता और नेता की तरह बहुत ध्यान देता है. अभी आपकी तबियत ख़राब हुई तो मीडिया ने बहुत तूल दिया. यह आपको अच्छा लगता है?

बिल्कुल नहीं. अभी आप बात कर रहे थे मेरी बीमारी के बारे में. मैंने तो उम्मीद भी नहीं की थी कि ऐसी बातें हो सकती हैं. मैं तो अपनी लाइफ़ स्टाइल को बदल रहा था. लखनऊ में बैठकर अपने संस्थागत ढाँचे में बदलाव ला रहा था. कहीं जा नहीं रहा था क्योंकि एक जगह जाने पर अन्य जगहों पर भी जाना पड़ता है.

मैं काम में मशगूल था इसलिए शुरू में पता भी नहीं चला कि ऐसी बातें हो रही हैं. मैं अपनी ज़िंदगी में बहुत सो नहीं पाया था. कई सालों तक सिर्फ़ चार-पाँच घंटे ही सोया था. डॉक्टरों ने कहा कि अब उम्र हो रही है थोड़ा-सा लाइफ़ स्टाइल ठीक-ठाक करो. मैंने अपने खाने-पीने, सोने के समय में बदलाव किया. बस इन सबके बीच ही बातें होने लगीं.

लाइफ़ स्टाइल बदलने का ही नतीजा है कि आप बहुत अच्छे दिख रहे हैं.

शुक्रिया.

आपकी पसंद का एक और गाना.

फ़िल्म 'कभी अलविदा न कहना' का गोरा-गोरा मुखड़ा...

आपको नहीं लगता कि इसमें एक विरोधाभास है. आदमी पहले दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करता है. जब पहचान बन जाती है और मीडिया पीछे पड़ जाता है तो दिक्कत होने लगती है?

नहीं. हर इंसान को धन, सम्मान और प्यार चाहिए. सम्मान पाना अलग बात है और मीडिया में ग़लत बातों को लेकर चर्चा में होना दूसरी बात.

आपकी लव मैरिज़ है या अरेंज मैरिज़?

लव मैरिज़.

 मुझे याद है कि मैंने उन्हें घर की छत पर प्रोपोज़ किया था. दोनों खड़े थे. मैं कई दिनों से परेशान था. उन्हें देखकर मैं और परेशान हो जाता क्योंकि उनके रवैये से कुछ अहसास ही नहीं होता था कि उन्हें भी प्यार है कि नहीं. लेकिन अपनी बात बताना और उसकी बात निकालना बहुत अधिक ज़रूरी था. मैंने उसका हाथ पकड़ कर बोलना शुरू किया.

कहाँ ढूँढा अपनी सपनों की रानी को?

हैदराबाद से. घूमते टहलते पहुँच गए. वहीं एक परिवार में उनसे मुलाक़ात हुई. हमारा प्रेम-प्रसंग छह साल तक चला.

वैसे तो सहारा श्री बहुत तेज़ चलते हैं?

हो सकता है वो उतना तेज़ न चल पाईं हो. दरअसल उनकी पढ़ाई चल रही थी. पढ़ने में होशियार थीं. विश्वविद्यालय की टॉपर थीं. मैं तो पढ़ने-लिखने में बहुत कमज़ोर था.

पत्नी को प्रोपोज़ कैसे किया?

मुझे याद है कि मैंने उन्हें घर की छत पर प्रपोज़ किया था. दोनों खड़े थे. मैं कई दिनों से परेशान था. उन्हें देखकर मैं और परेशान हो जाता क्योंकि उनके रवैये से कुछ अहसास ही नहीं होता था कि उन्हें भी प्यार है कि नहीं. लेकिन अपनी बात बताना और उसकी बात निकालना बहुत अधिक ज़रूरी था. मैंने उसका हाथ पकड़ कर बोलना शुरू किया.

क्या बोले आप?

मैंने कहा कि मैं आपको पसंद करता हूँ और शादी करना चाहता हूँ.

उन्होंने क्या फ़िल्मी अंदाज़ में कहा कि जाकर पिता जी से बात कीजिए.

वो बहुत शालीन रही हैं. उस समय भी चुप रहीं.

उनकी मौन में ही स्वीकृति मिल गई. आपकी शादी छह साल बाद हुई. हमने सुना है कि इन छह सालों में उन्होंने आपको अंग्रेजी भी सिखाई?

हाँ मेरी अंग्रेज़ी बहुत कमज़ोर थी. मेरी भाषा ही कमज़ोर थी. वो अंग्रेज़ी में पत्र लिखती थीं. मुझे ख़राब लगता था और मैं भी अंग्रेजी में लंबे-लंबे पत्र लिखने लगा. फिर शादी के बाद एक दिन मैं घर पहुँचा तो देखा कि उन्होंने बिस्तर पर सभी पत्र फैला दिए हैं. मैंने सोचा कि कोई रोमांटिक बात सामने आने वाली है. लेकिन उन्हें बताया कि वो मेरे लिखे पत्रों में भाषा का सुधार कर रही थीं.

आपकी पत्नी ने आपको यहाँ तक पहुँचने में बहुत मदद की. आपको उन्हें भी क्रेडिट देना चाहिए?

बिल्कुल. उनकी वजह से मुझे काम करने की पूरी छूट मिली.

आपके दोस्त अनिल अंबानी कैसे हैं?

बहुत बढ़िया.

मैं तो उनका इस बात का कायल हूँ कि उन्होंने वजन कैसे कम किया. उनमें गजब का जुनून है. मेरी जब उनसे बात होनी शुरू हुई तो मुझसे पूछा करते थे कि मेरा फ़िटनेस ट्रेनर कौन है. मैं कहता कि मैं तो मोटा हूँ मेरा ट्रेनर कौन होगा. उन्होंने मुझे फ़िट रहने के लिए प्रेरित किया. अच्छा यह बताइए कि उनके बारे में कहा जाता है कि वो पैसे कमाने के मामले में बढ़िया दिमाग लगाते हैं क्या यह सही है?

मेरा उनका कारोबार का संबंध नहीं है. इस मामले में मैं कुछ नहीं कह सकता.

क्या वो भी आपकी तरह रोमांटिक आदमी हैं?

जोश, जुनून ऊर्जा तो बहुत है.

 मुझे ईश्वर के आशीर्वाद से कभी धोखा नहीं मिला. लेकिन कई लोगों को अलग करना पड़ा है. अलग हुए लोगों ने परेशानी पैदा करने की कोशिश की है. इसे मैं जीवन का अंग मानता हूँ. यह सब जीवन में चलता रहता है.

कोई मित्र जिसकी कोई बात आपको बहुत याद आती हो?

एक बुजुर्ग शख़्सियत थीं जिन्हें मैं दोस्त तो नहीं कह सकता लेकिन श्रद्धा बहुत रखता हूँ. वो हैं मदर टेरेसा. पता नहीं क्यों वो मुझे बहुत मानती थीं. दो वाकया बताता हूँ. एक बार मैं कोलकाता गया था. वो बिस्तर पर लेटी थीं. हमेशा की तरह हाथ पकड़ कर गॉड ब्लेस यू माई चाइल्ड कहा. जब वो छूती थीं तो एक अलग तरह की सिहरन होने लगती थी पूरे शरीर में. बहुत सुंदर अनुभूति होती थी. उन्होंने कहा कि उनके बाद हम उनके बच्चों का ध्यान रखें.

आप जैसे आदमी को भी क्या कभी धोखा और चोट मिलता है?

मुझे ईश्वर के आशीर्वाद से कभी धोखा नहीं मिला. लेकिन कई लोगों को अलग करना पड़ा है. अलग हुए लोगों ने परेशानी पैदा करने की कोशिश की है. इसे मैं जीवन का अंग मानता हूँ. यह सब जीवन में चलता रहता है.

एक और गाना.

जहाँ में ऐसा कौन है जिसे गम मिला नहीं... 'हम दोनों' का गाना है.

जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी?

जब मैं पिता को खोया. मैं पागल सा हो गया था. लोगों ने मुझे रोक दिया. पता नहीं क्या-क्या करने वाला था मैं. हर महीने आज भी सपने में वो आते हैं.

जीवन में सबसे सुखद क्षण.

एक तो हो नहीं सकता. बहुत सारे हैं.

पहली गाड़ी.

वो तो मुझे बचपन में ही मिल गई थी.

पहला हवाई जहाज़?

ऐसा नहीं है. मुझे कभी किसी भौतिक चीज़ को पाकर बहुत ख़ुशी नहीं हुई

आने वाले सालों में 'सहारा श्री' को किस रूप में देखेंगे?

बहुत कुछ करना है. अभी तो सभी लोग संस्था को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं. काम आगे बढ़ रहा है. लेकिन मैं बहुत शांति से नहीं मर पाउँगा अगर अच्छी तरीक़े देश के लिए कुछ कर न सकूँ. जेहन में बहुत सी बातें हैं. जो मैं देश के लिए करना चाहता हूँ. कुछ समय के लिए रुका हूँ और इंतजार कर रहा हूँ. पहले संस्था को एक स्तर तक पहुँचा दें. फिर देश के लिए बहुत सक्रिय रूप से कुछ करना चाहता हूँ. लेकिन राजनीतिक रूप से नहीं बस सार्वजनिक जीवन में कुछ करना चाहता हूँ. मैंने आपसे कहा भी उसके बिना मैं चैन से मर नहीं पाउँगा.

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