ड्रग ओवरडोज़ से मौतों की समस्या का हल क्या कनाडा निकाल पाएगा? - दुनिया जहान

इमेज स्रोत, Getty Images
कनाडा में सिंथेटिक ड्रग और ओपियोइड यानि दर्द निवारक दवाइयों का ग़लत इस्तेमाल और अत्यधिक सेवन या ओवरडोज़ देश के सामने एक भयंकर समस्या बन चुका है.
ऐसे में कनाडा के सबसे बड़े शहर टोरंटो ने दो साल पहले सरकार से मांग की थी कि इस शहर में निजी इस्तेमाल के लिए ड्रग रखने को डिक्रिमिनलाइज़ किया जाए, यानि इसे अपराध ना माना जाए.
मई 2024 में केंद्र सरकार ने इस मांग को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इससे लोगों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है.
राज्य सरकार ने भी इस योजना को ख़तरनाक और दिशाहीन क़रार दिया है.

अगर टोरंटो शहर की मांग स्वीकार कर भी ली जाती तो ऐसा कनाडा में पहली बार नहीं होता क्योंकि टोरंटो से लगभग दो हज़ार मील दूर ब्रिटिश कोलंबिया में प्रयोग के तौर पर ऐसी योजना पहले से लागू है हालांकि उसके दायरे को घटा दिया गया है.
तो इस हफ़्ते दुनिया जहान में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि क्या कनाडा अपनी ड्रग ओवरडोज़ की समस्या का हल निकाल पाएगा?
ओवरडोज़ से मौतों की संख्या में बढ़ोतरी

इमेज स्रोत, Getty Images
ओटावा में कनेडियन सेंटर ऑन सबस्टंस यूज़ एंड एडिक्शन के प्रमुख डॉक्टर अलेक्जेंडर कौडरेला का कहना है कि कनाडा में ओपियोइड ड्रग ओवरडोज़ की समस्या वाक़ई बहुत गंभीर है.
“मौजूदा समस्या बड़े पैमाने पर ओक्सिकोंटीन जैसे सिंथेटिक ओपियोइड की ज़रूरत से ज़्यादा प्रिस्क्रिपशन की वजह से खड़ी हुई है जिसके चलते इनकी मांग बढ़ गयी है.”
सिंथेटिक ओपियोइड एक ऐसा पदार्थ है जिसे लैबोरेटरी में बनाया जाता है मगर इससे वही असर होता है जो हेरोइन जैसे ओपियोइड से होता है.
डॉक्टर कौडरेला बताते हैं कि फ़ैंटानील जैसे सिंथेटिक ओपियोइड का इस्तेमाल दर्द निवारक दवा के तौर पर कैंसर जैसी बीमारी के दर्द को कम करने या ऑपरेशन के दौरान किया जाता है और यह प्राकृतिक ओपियोइड से हज़ारों गुना अधिक तेज़ या ताक़तवर होते हैं.
जैसे जैसे सिंथेटिक ओपियोइड की मांग बढ़ने लगी उनका दवा के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर नियंत्रण लगा दिया गया. लेकिन बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अनियंत्रित या अवैध सप्लायर बाज़ार में आ गए.
डॉक्टर अलेक्जेंडर कौडरेला का कहना है कि फ़ैंटानील जैसे सिंथेटिक ओपियोइड को बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बहुत सस्ती है और आसानी से उपलब्ध है.
लोग बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं इसके आसानी से उपब्ध होने से समस्या बहुत गंभीर हो गयी है.
एक बड़ी समस्या यह भी है कि कई बार हेरोइन और दूसरे ड्रग्स में सिंथेटिक ओपियोइड की मिलावट की जाती है.
डॉक्टर कौडरेला बताते हैं कि यह दिखने में और स्वाद में दूसरे ड्रग्स जैसे ही होते हैं लेकिन इनका असर हज़ारों गुना अधिक होता है और कई बार जो लोग प्राकृतिक ड्रग समझ कर जिसका सेवन कर रहे होते हैं वो दरअस्ल फ़ैंटानील होता है.
पिछले कई सालों से कनाडा में ओवरडोज़ के कारण होने वाली मौतों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है.
पेचीदा समस्या

इमेज स्रोत, Getty Images
डॉक्टर कौडरेला ने कहा कि 2015 से ओवरडोज़ के कारण होने वाली मौतों में बड़ी वद्धि हुई है. “कुछ दशकों पहले ओवरडोज़ से सालाना सौ दौ सौ मौतें असाधारण बात नहीं मानी जाती थी."
लेकिन अब ओवरडोज़ से सालाना आठ से दस हज़ार लोग मर रहे हैं. इसमें महिला, पुरुष और हर उम्र के लोग शामिल हैं.
फ़िलहाल कनाडा में 14 से 65 वर्ष के आयुवर्ग में ड्रग ओवरडोज़ लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है.
इसका आर्थिक पहलू यह है कि ड्रग और नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले नुक़सान की वजह से एक औसत कनाडाई व्यक्ति को सालाना लगभग 1300 डॉलर्स का नुक़सान होता है.
इस समस्या से निपटने में एक बड़ी मुश्किल यह है कि समाज के डर से नशे की लत का शिकार हो चुके लोग सहायता लेने के लिए सामने नहीं आना चाहते. कनाडा की आबादी लगभग चार करोड़ है.
डॉक्टर कौडरेला कहते हैं कि सिंथेटिक ड्रग की लत और ओवरडोज़ की समस्या पूरे देश में है मगर इस समस्या को लेकर ज़्यादा ध्यान बड़े शहरों पर जाता है जबकि ओवरडोज़ के कारण होने वाली मृत्यु दर छोटे शहरों और क़स्बों में अधिक है. और यह एक पेचीदा समस्या है.
पायलट प्रोजेक्ट

इमेज स्रोत, Getty Images
वैंकूवर में साइमन फ़्रेज़र यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के असोसिएट प्रोफ़ेसर केनेडी स्टीवर्ट कहते हैं कि वैंकूवर ब्रिटिश कोलंबिया का सबसे बड़ा शहर है.
इसकी आबादी लगभग साढ़े सात लाख है.
बंदरगाह वाले सभी शहरों की तरह यहां भी ड्रग्स की समस्या हमेशा रही है. यहां विविध समुदाय के लोग हैं. यहां की 30 प्रतिशत आबादी चीनी मूल के लोगों की है.
साथ ही दक्षिण एशियाई और फ़िलीपींस के लोग भी हैं. मगर स्थानीय मूल के लोगों की आबादी यहां तीन प्रतिशत है. यह समुदाय ड्रग्स से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है.
केनेडी स्टीवर्ट पहले वैंकूवर के मेयर रह चुके हैं.
वो कहते हैं कि वैंकूवर में ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए हमेशा ही नयी सोच का इस्तेमाल किया गया है. वो कहते हैं 2003 में ही वहां प्रशासन की निगरानी में ड्रग्स के सेवन के लिए केंद्र बनाए गये थे.
इसलिए ड्रग्स के सेवन को डीक्रीमिनलाइज़ करने के लिए यहां एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ जिसे पुलिस और स्वास्थ्य सेवा संस्थाओं का समर्थन भी मिला था.
कुछ लोगों को आश्चर्य होगा कि पुलिस क्यों ड्रग्स के सेवन और निजी इस्तेमाल के लिए ड्रग्स रखने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की मांग कर रही थी.
केनेडी स्टीवर्ट ने कहा कि, शहर के मुख्य ज़िले में ऐसे कई होटल हैं जहां सिर्फ़ सिंगल रूम किराए पर दिए जाते हैं जिसमें खास सुविधाएं नहीं होतीं और वहां शेयर्ड बाथरूम होते हैं. ड्रग्स का सेवन करने वाले कई लोग यहां रहते हैं.
"यहां ड्रग्स के ओवरडोज़ के मामले अक्सर सामने आते थे. उस समय वैंकूवर के पुलिस प्रमुख एक प्रगतिशील सोच के व्यक्ति थे."
"उन्होंने अनौपिचारिक तौर पर पुलिसकर्मियों से कहा था कि वो ड्रग्स का सेवन कर रहे लोगों को गिरफ़्तार ना करें."
"उन्होंने देश के दूसरे शहरों के पुलिस प्रमुखों के साथ मिलकर ड्रग्स के इस्तेमाल को डिक्रिमिनलाइज़ करने के प्रयास किये."
"दरअसल हम ड्रग्स के सेवन को अपराध नहीं बल्कि स्वास्थ्य समस्या की तरह देखते हैं. जब मैं 2018 से 2022 के बीच वैंकूवर का मेयर था तो मैंने ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़े लोगों की बात ध्यान से सुनी और ड्रग्स के सेवन को डिक्रिमिनलाइज़ करने का फ़ैसला किया.”
2016 में कनाडा के राज्य ब्रिटिश कोलंबिया ने ड्रग ओवरडोज़ से मृत्युदर में आयी बड़ी वृद्धि के चलते राज्य में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया था.
केनेडी स्टीवर्ट ने कहा कि, "जब मैं 2018 में वैंकूवर का मेयर चुना गया उस समय वहां ड्रग्स के इस्तेमाल के कारण प्रतिदिन एक व्यक्ति की मौत होती थी. लेकिन 2020 में कोविड महामारी के बाद शहर में ड्रग्स संबंधित मौतों में भारी वृद्धि हो गयी क्योंकि सड़कों पर मिलने वाली 95 प्रतिशत हेरोइन और कोकीन में फ़ैंटानील जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की मिलावट होने लगी."
"लोग समझते थे कि वो कोकीन या हेरोइन का सेवन कर रहे हैं लेकिन असल में वो उससे कहीं ज़्यादा तेज़ ड्रग्स का सेवन कर रहे थे जिस वजह से ओवरडोज़ की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया था. इसलिए हमने ड्रग्स संबंधी नीतियों में सुधार करने का सोचा. मुझे यह ग़लतफ़हमी नहीं थी कि इससे एकदम से ड्रग्स के ओवरडोज़ की समस्या समाप्त हो जाएगी. हम जानते थे कि नीति में सुधार एक छोटा क़दम है. हमारा उद्देश्य गिरफ़्तारियां और मृत्युदर को कम करना था.”
केनेडी स्टीवर्ट कहते हैं कि वैंकूवर शहर और ब्रिटिश कोलंबिया राज्य सरकार ने ड्रग्स संबंधि केंद्रीय सरकार के क़ानून से ख़ुद को बाहर रखने के लिए आवेदन दिया था जिसे 2022 में मंज़ूर कर दिया गया और 2023 से ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ करने की नीति लागू हो गयी.
ब्रिटिश कोलंबिया की आबादी पचास लाख है. इस नीति के तहत तीन साल के लिए शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के अनुसार राज्य में रहने वाले वयस्क कानूनी तौर पर 2.5 ग्राम कोकीन, हेरोइन या फ़ैंटानील रख सकते हैं. लेकिन ड्रग्स की तस्करी करने वालों और बेचने वालों को गिरफ़्तार किया जा सकता है.
उरुग्वे के बाद 2018 में कनाडा कैनेबीज़ को क़ानूनी मान्यता देने वाला दूसरा देश बन गया. लेकिन यह डिक्रिमिनलाइज़ेशन नहीं था.
केनेडी स्टीवर्ट कहते हैं कि ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ करने का मतलब है कि शराब की तरह आप उसका सेवन तो कर सकते हैं लेकिन हेरोइन और फ़ैंटानील जैसे ड्रग्स का उत्पादन तब भी अपराध ही रहेगा.
इस पायलट प्रोजेक्ट के विरोधियों ने इसे एक ग़ैर ज़िम्मेदाराना प्रयोग करार देते हुए कहा कि इससे सार्वजानिक स्वास्थ्य और जीवन को ख़तरा पैदा हो जाएगा.
इस साल अप्रैल में ब्रिटिश कोलंबिया राज्य ने इस नीति में परिवर्तन करके तय किया कि केवल निजी स्थानों पर ही लोग ड्रग्स का सेवन कर सकते हैं या उसे साथ रख सकते हैं. सार्वजनिक जगहों पर इसका सेवन और इसे रखना अपराध माना जाएगा.
ब्रिटिश कोलंबिया का यह पायलट प्रोजेक्ट जनवरी 2026 तक चलेगा. मगर ऐसा प्रयोग करने वाली यह पहली सरकार नहीं है. यूरोप में एस्टोनिया ने लगभग बीस सालों से ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ कर रखा है.
दूसरा उपाय

इमेज स्रोत, Getty Images
एस्टोनिया की सेंटर फ़ॉर हेल्थ प्रमोशन की प्रमुख एलियोना कूर्बाटोवा कहती हैं कि एस्टोनिया सिंथेटिक ओपियोइड के दुरुपयोग और ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए अमेरिका और कनाडा के साथ सहयोग कर रहा है.
“एस्टोनिया में पिछले लगभग पच्चीस सालों से ड्रग्स की समस्या रही है. काफ़ी हद तक इसका संबंध देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति से भी रहा है.”
1991 में एस्टोनिया सोवियत संघ से अलग हो गया और उसने नए सिरे से अपनी अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण शुरू किया.
एलियोना कूर्बाटोवा ने कहा कि उससे पहले एस्टोनिया के सभी उद्योग सोवियत संघ की ज़रूरतों के अनुसार काम करते थे. देश में बेरोज़गारी थी. साथ ही देश में ड्रग्स की तस्करी होने लगी थी.
नब्बे के दशक के अंत में एस्टोनिया में ज़्यादातर हेरोइन और अफ़ीम पहुंचती थी लेकिन जल्द ही ओपियोइड्स ने इस बाज़ार में अपनी जगह बना ली.
उसी समय के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने अफीम की खेती पर रोक लगा दी. अफ़ग़ानिस्तान अफ़ीम का एक सबसे बड़ा उत्पादक रहा है.
अफ़ीम से ही हेरोइन बनायी जाती है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में हेरोइन की किल्लत पैदा हो गयी. इसकी जगह जल्द ही फ़ैंटानील ने ले ली.
मगर 2017 में एस्टोनिया ने देश में छापे मार कर फ़ैंटानील बनाने वाली दो बड़ी लेबोरेटरियों को बंद कर दिया.
एलियोना कूर्बाटोवा कहती हैं कि इसी के साथ एस्टोनिया सरकार ने लोगों में ओपियोइड की लत पर रोक लगाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किये जिससे ड्रग ओवरडोज़ से मौत के मामले काफ़ी कम हो गए. लेकिन जल्द ही नए ओपियोइड बाज़ार में आने लगे और 2021 के बाद से ओवरडोज़ से मौतों में वृद्धि होने लगी. एस्टोनिया ने लगभग बीस साल पहले ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ कर दिया था. इसका क्या मतलब है?
एलियोना कूर्बाटोवा ने जवाब दिया कि, “एस्टोनिया में अवैध ड्रग्स के इस्तेमाल पर पाबंदी है. ड्रग्स के इस्तेमाल को पूरी तरह डिक्रिमिनलाइज़ नहीं किया गया है. अगर लोग निजी सेवन के लिए छोटी मात्रा में ड्रग्स रखते हैं तो उन्हें जेल नहीं होती बल्कि जुर्माना भरना पड़ता है. चूंकि ड्रग्स संबंधी क़ानून तोड़ने वालों को जेल नहीं होती इसलिए वो सहायता के लिए खुद सामने आते हैं. उन्हें सज़ा देना समस्या का समाधान नहीं है. इसलिए हम उनकी लत छुड़वाने के लिए उनकी काउंसलिंग करते हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं.”
ड्रग टेस्ट

इमेज स्रोत, Getty Images
उधर कनाडा को अभी तय करना है कि ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए उसे कौन सा रास्ता अपनाना चाहिए. न्यू फ़ाउंडलैंड की मेमोरियल यूनिवर्सिटी में जन स्वास्थ्य की सहायक प्रोफ़ेसर जिलियन कोला कहती हैं कि कनाडा में ड्रग्स संबंधी नीति को लेकर असमंजस है.
“मुझे लगता है कि इन क़ानूनों को समान तरीके से लागू नहीं किया जाता. रईस श्वेत लोगों को गिरफ़्तार नहीं किया जाता. पुलिस कार्यवाही का निशाना ज़्यादातर ग़रीब और बेघर लोग होते हैं.”
ब्रिटिश कोलंबिया सरकार के ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ करने की नीति में बदलाव के फ़ैसले से कई लोग निराश हैं. नई नीति के अनुसार सार्वाजानिक स्थानों पर ड्रग्स रखना या उसका सेवन करना अपराध है.
जिलियन कोला ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “एक तरह से सरकार की नीति यह कहती है कि आप ड्रग्स का सेवन छिपकर करें. यह बड़ी समस्या है क्योंकि छिपाकर ड्रग्स का सेवन ओवरडोज़ का एक बड़ा कारण है. मिसाल के तौर पर ओटारियो में ओवरडोज़ से मरने वाले 75 प्रतिशत लोग अकेले अपने घर में मरते हैं. हमें नीतियां बनाते समय स्पष्ट तरीके़ से सोचना चाहिए. क्या ड्रग डिक्रिमिनाइजे़शन का अर्थ यह है कि हम पुलिस को ड्रग इस्तेमाल करने वालों के जीवन से बाहर रखें या इसका उद्देश्य ड्रग ओवरडोज़ से होने वाली मौतों को रोकना है. क्योंकि कोई अकेले अपने घर में ओवरडोज़ का शिकार हो जाए तो वहां उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होगा.”
जिलियन कोला यह भी कहती हैं कि सार्वजानिक स्थानों पर ड्रग्स का सेवन रोकने का समर्थन करने वालों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि कनाडा के जिन राज्यों में ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ नहीं किया गया वहां भी सार्वजनिक स्थानों पर ड्रग्स के सेवन के मामले बढ़े हैं. इस दौरान बाज़ार में नए तेज़ और शक्तिशाली अवैध ओपियोइड की भरमार जारी है.
जिलियन कोला ने कहा कि नीटिज़ीन और साइलेज़ीन जैसे नए ड्रग्स बाज़ार में आ रहे हैं. “हमें अपनी नीतियों के बारे में दोबारा सोचना चाहिए क्योंकि लोगों को गिरफ़्तार करने से तो समस्या का समाधान नहीं हो रहा. उलटे यह तस्करों को ऐसे सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी के लिए प्रोत्साहित कर रहा है जो इतने शक्तिशाली होते हैं कि बहुत छोटी मात्रा में सेवन करने पर भी भारी नशा देते हैं. इन सिंथेटिक ड्रग्स को आसानी से छोटी मात्रा में लाया ले जाया जा सकता है.”
तो क्या कनाडा अपनी ड्रग ओवरडोज़ की समस्या का हल निकाल पाएगा?
ड्रग्स के सेवन और लत के कई कारण होते हैं और यह एक पेचीदा समस्या है.
एक उपाय जो एक जगह कारगर हो वो ज़रूरी नहीं की दूसरी जगह भी सफल होगा. ड्रग्स को डिक्रिमिनलाइज़ करना एक छोटा विकल्प है लेकिन इसके साथ कई और उपायों के बारे में सोचने की ज़रूरत है.
ड्रग्स की समस्या का शिकार लोगों की ज़रूरतों को समझ कर उन्हें आवश्यक सहायता पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है.
ड्रग्स की लत को अपराध के बजाय एक स्वास्थ्य संबंधी समस्या के रूप में देखना और उसके आधार पर नीतियां बनाना भी काफ़ी मददगार हो सकता है.
साथ साथ नयी सोच पर आधारित नीतियां बनाते समय लोगों को यह समझाना भी ज़रूरी है कि सफलता की अपेक्षा को यथार्थ के दायरे में रखना होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















