अफ़ग़ानिस्तान: हेरोइन से मेथ की ओर बढ़ता नशे का कारोबार

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, सिकंदर किरमानी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
काबुल में एक व्यस्त पुल के नीचे कचरे के ढेर और गंदे पानी के बहाव के बीच ड्रग्स की लत से जूझ रहे बेघर लोगों की आबादी रहती है.
48 साल के खुदादाद कहते हैं, "यह किसी इंसान के रहने की जगह नहीं है. यहां तक कि यह जगह किसी कुत्ते के रहने लायक भी नहीं है."
खुदादाद को हेरोइन और मेथांफेटामाइन, जिसे क्रिस्टल मेथ भी कहा जाता है, की लत है. वे पिछले 5 साल से इसका सेवन कर रहे हैं.
हेरोइन काबुल में लंबे वक्त से एक समस्या रही है, लेकिन अब मेथ ने इसकी जगह ले ली है. यह सस्ती है, लेकिन उतनी ही खतरनाक ड्रग है.
खुदादाद कहते हैं, "जब मैंने शुरुआत में इसे लेना शुरू किया था, तब यह कोई आम नशा नहीं था. लेकिन, गुजरे कुछ सालों में काफी ज्यादा लोग इसका सेवन करने लगे हैं."
हाल में जारी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अफगानिस्तान मेथांफेटामाइऩ का एक बड़ा वैश्विक उत्पादक बनता जा रहा है.
देश में अफीम के खेत पहले से ही दुनिया की ज्यादातर हेरोइन का जरिया बने हुए हैं.


क्रिस्टल मेथ का कारोबार
यूरोपियन मॉनिटरिंग सेंटर फॉर ड्रग्स एंड ड्रग एडिक्शन (ईएमसीडीडीए) की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अब क्रिस्टल मेथ का कारोबार एक इंडस्ट्री जितना बड़ा आकार ले सकता है.
इसके सेवन में इजाफा ड्रग ट्रैफिकर्स की एक खोज का नतीजा है. इस खोज में पता लगाया गया कि अफगानिस्तान के जंगली इलाकों में एक पौधा आमतौर पर पैदा होता है.
इसका नाम एफेड्रा है. इसका इस्तेमाल मेथ के अहम कंपोनेंटः एफीड्राइन को बनाने में किया जा सकता है.
अफगानिस्तान की ड्रग इंडस्ट्री के एक्सपर्ट और इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डेविड मैन्सफील्ड कहते हैं, "पहाड़ों पर उगने वाले एक जंगली पौधे से मेथांफेटामाइन बनाया जा सकता है, यह खोज एक गेमचेंजर साबित हुई है."
डॉक्टर मेन्सफील्ड कहते हैं कि पहले ड्रग ट्रैफिकर्स एफीड्राइन को कहीं महंगी आयातित दवाइयों से निकालते थे, लेकिन अब वे इसे बेहद सस्ते पड़ने वाले विकल्प और थोड़ी की केमिस्ट्री की मदद से निकाल लेते हैं.
एफेड्रा का पौधा दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी क्रिस्टल मेथ तैयार करने में इस्तेमाल होता है, लेकिन अफगानिस्तान जितने बड़े पैमाने पर यह कहीं भी नहीं पाया गया है.



अफगानिस्तान के ड्रग उत्पादक
सैटेलाइट तस्वीरों और अफगानिस्तान के ड्रग उत्पादकों के साथ बातचीत के बाद डॉक्टर मैन्सफील्ड और शोधार्थियों की एक टीम पश्चिमी अफगानिस्तान के महज एक जिले बाकवा में ही एफीड्राइन की 300 से ज्यादा संदेहजनक लैब्स के बारे में पता लगाने में सफल रही है.
यह इलाका देश में मेथ कारोबार का हब बन गया है, लेकिन, डॉक्टर मैन्सफील्ड ने दूसरे हिस्सों में भी इसकी लैब्स का पता लगाना शुरू कर दिया है.
टीम को पता चला है कि मेथांफेटामाइन का उत्पादन एक दो स्तर वाली प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया के जरिए गरीब परिवारों में भी लोग एफीड्राइन को निकाल सकते हैं.
ये लोग बाद में इसे ज्यादा स्पेशलाइज्ड 'मेथ कुक्स' को बेच देते हैं. शोधार्थी एफीड्राइन लैब की तस्वीरों को पहचानने में सफल रहे.
इन जगहों पर बड़े पैमाने पर बेकार पानी और बची हुई एफेड्रा की सूखी हुई फसल बिल्डिंग्स के बाहर पड़ी दिखाई दी है. इससे इन लैब्स का पता चला है.


ड्रग ट्रैफिकर्स से टैक्स
गुजरे वक्त में अमेरिका ने अफगानिस्तान की कथित ड्रग लैब्स पर हवाई हमले भी किए हैं. मई 2019 में ही केवल एक दिन में ऐसी 68 लैब्स को बमों से उड़ा दिया गया था.
लेकिन, आम नागरिकों की होने वाली मौतों और इन मेकशिफ्ट फैक्ट्रियों को कहीं भी शिफ्ट करने की सहूलियत के चलते इनके खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान बेमानी साबित हुए हैं.
हालांकि, तालिबान इन ड्रग ट्रैफिकर्स से टैक्स वसूली करता है.
ईएमसीडीडीए की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि तालिबान को अकेले बाकवा जिले से ही हर साल करीब 40 लाख डॉलर की कमाई होती है.
यह कमाई एफीड्राइन की मात्रा और पैदा होने वाली मेथांफेटामाइन पर निर्भर होती है.
तालिबान अपने नियंत्रण वाले इलाकों में मौजूद तमाम इंडस्ट्रीज से कर वसूलता है. हालांकि, ये ड्रग्स ट्रेड से किसी भी तरह के लिंक को खारिज करते हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
'हम एक जंग लड़ रहे हैं'
नाम न छापने की शर्त पर एक अफगान स्मगलर ने बीबीसी को बताया कि चरमपंथी एफेड्रा फसल उगाने वाले किसानों से भी टैक्स लेते हैं और इसके बाद ड्रग को बेचने के लिए ले जा रहे शख्स को फिर से इस पर टैक्स देना पड़ता है.
स्मगलर ने बताया, "हर जगह तालिबान के चेकपॉइंट्स हैं. आप इसे उनसे छिपा नहीं सकते हैं."
इस्लामिक सिद्धांतों पर चलने का दावा करने वाले तालिबान ड्रग्स की बिक्री का विरोध क्यों नहीं करते हैं, इस पर स्मगलर ने कहा कि तालिबान का कहना है, "हम एक जंग लड़ रहे हैं, ऐसे में यह ठीक है. लेकिन, जब सही वक्त आएगा, हम इस पर बैन लगा देंगे."
अफगानिस्तान में पैदा होने वाली कुछ मेथ की खपत देश के अंदर ही हो जाती है या यह सीमा पार ईरान चली जाती है. लेकिन, अब ऐसा दिख रहा है कि इसे और आगे भी भेजा जाने लगा है.
इस साल लाखों डॉलर की कीमत वाली सैकड़ों किलो ड्रग्स, जिसके अफगानिस्तान में बनाए गए होने की आशंका है, को कार्गो बोट्स में छिपाकर ले जाते वक्त श्रीलंका की नेवी और अरब सागर में गश्त कर रही अंतरराष्ट्रीय बलों ने तलाशी में पकड़ा है.
अफगानिस्तान और ईरान
इस बात के आसार हैं कि मेथांफेटामाइन को यूरोप में भी पहुंचाया जा रहा है.
यहां तक यह पाकिस्तान और ईरान और इसके बाद पूर्वी अफ्रीका जरिए अपने स्थापित हेरोइन रूट्स से पहुंच रही है.
ईएमसीडीडीए रिपोर्ट के लेखकों में से एक एंड्रयू कनिंघम ने बीबीसी को बताया है कि फिलहाल यूरोप में मेथांफेटामाइन का इस्तेमाल उतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा है.
लेकिन, उन्होंने कहा, "इस बात के बड़े आसार हैं कि क्रिस्टल मेथ की खपत में बढ़ोतरी ही होगी."
ऑस्ट्रेलिया में अधिकारियों ने हाल के वर्षों में अफगानिस्तान और ईरान के लिंक वाली मेथांफेटामाइन की जब्ती में इजाफा देखा है. इनमें अप्रैल में मिनरल वॉटर की बोतलों की क्रेट्स में घुली हुई बड़ी तादाद में ड्रग पकड़ी गई है. इसकी कीमत 5 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा है.
ड्रग्स का फोरेंसिक एनालिसिस
एंड्रयू पार्किंसन ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस की पकड़ी गई ड्रग्स का फोरेंसिक एनालिसिस करने वाली एक टीम की अगुवाई करते हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि नतीजों से पता चलता है कि इन ड्रग्स को "एफीड्राइन के नैचुरल रूप से बनाया गया है, इससे संकेत मिलता है कि यह एफेड्रा पौधे से बनाई गई है."
हालांकि, हो सकता है कि अफगानिस्तान की मेथ पूरी दुनिया में भेजी जा रही हो, लेकिन काबुल की गलियों में इसका पहला असर दिखाई देता है.
उस पुल की तरफ लौटते हैं जिसके नीचे ड्रग्स के लती लोगों का ठिकाना है. एक शख्स ने हमें बताया कि उसने मेथ का सेवन करने वाले अपने छोटे भाई को ढूंढने में महीनों खपाए हैं. उसने कहा, "हमारी मां इसी चिंता में गुजर गई."
देश में लगातार जारी अस्थिरता, बड़े पैमाने पर मेथांफेटामाइन के उत्पादन और इसके चलते तबाह हो रही जिंदगियों को देखकर लगता है कि ये हालात और ज्यादा खराब होंगे.
हंसते हुए एक स्मगलर ने कहा, "हमारा कारोबार इतना बढ़िया कभी नहीं रहा."
(सामी यूसुफजई और महफूज जुबैद की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)




















