अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं पर हिंसा का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा के लिए?

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ख़ातिरा अफ़ग़ानिस्तान में एक महिला पुलिस अधिकारी हैं, लेकिन अपने देश की रक्षा करने की ख़्वाहिश की उन्हें बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी और ये सब बिल्कुल अचानक हो गया.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहती हैं, "एक पैदल चलता आदमी अचानक चिल्लाया. उसे गोली मार दो. मैं उसे नहीं जानती थी, उन्होंने मेरे घर के पास मुझपर हमला किया."
ख़ातिरा मुंह के बल ज़मीन पर गिर गईं, इसके बाद भी वो उन्हें मारता रहा. वो बेहोश हो गईं. जब आँख खुली, तो वो अस्पताल में थीं. उन्हें आँखों पर गहरी चोट लगी थी.
"मैं बहुत दर्द में थी, मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. डॉक्टरों ने बताया कि मेरी आँखों में बहुत चोट लगी है इसलिए मैं उन्हें नहीं खोल पा रही हूँ."
एक महीने बाद उन्हें जाँच के लिए फिर से बुलाया गया, तब उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने अपनी आँखें हमेशा के लिए खो दी हैं.
'प्रोपेगैंडा वॉर'

ये दर्दनाक घटना चार महीने पहली हुई थी, लेकिन सरकार ने अब इसे गंभीरता से लेना शुरू किया है. अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मसूद अंदराबी 6 अक्तूबर को ख़ातिरा से मिले और उन्हें बेहतर इलाज और एक हेल्पर देने का आश्वासन दिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि हमला तालिबान ने करवाया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "तालिबान ताक़त का इस्तेमाल कर इस देश को तोड़ नहीं सकता."
हालाँकि तालिबान ने इन आरोपों से इनकार किया है.
बीबीसी अफग़ान सेवा की संपादक मीना बक्तश बताती हैं, "एक ऐसे देश में, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच फँसा है, वहाँ ये विवाद सिर्फ़ राजनीति से जुड़ा नहीं है."
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"अफ़ग़ानिस्तान सरकार तालिबान पर इल्ज़ाम लगाती है और तालिबान इनकार करता है. इन सबके बीच जिन पर हमला हुआ, उनकी फ़िक्र किसी को नहीं है. ग़रीबी, पिछड़ेपन, परंपरा और महिलाओं के अधिकारों की बात कोई नहीं करता."
बक्तश कहती हैं कि ख़ातिरा जैसे लोगों की कहानियों का इस्तेमाल सरकार और तालिबान के बीच "प्रोपेगैंडा वॉर की तरह किया जा रहा है."

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जब ख़ातिरा पर हमला हुआ था, तब ये ख़बर मीडिया में नहीं आई थी. जब बीबीसी ने उनका इंटरव्यू किया और इससे जुड़े सवाल सरकार के आंतरिक विभाग से पूछे, तभी उन्होंने इस ओर ध्यान देना शुरू किया.
बक्तश के मुताबिक़, "हर दिन दर्जनों लड़कियाँ हिंसा का शिकार होती हैं. उनके नाक, कान काट दिए जाते हैं. उन्हें मारा जाता है और प्रताड़ित किया जाता है. कितनी ही लड़कियाँ ऐसी हैं, जिनके हाथों और पैरों पर जलते सिगरेट के निशान हैं, लेकिन ये ख़बरें नहीं आतीं."
महिलाओं के लिए ख़तरनाक जगह

ऑक्सफ़ैम के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में से एक है और वहाँ महिला पुलिस अधिकारियों को, जो ईमानदारी से अपना काम रही हैं, परेशान किया जाता है.
ग़ज़नी, कुंदूज़ और काबुल में महिला अफ़सरों पर हमले पिछले कुछ समय में काफ़ी बढ़ गए हैं. बक्तश के मुताबिक़ जब तक ऐसी ख़बरें मीडिया में नहीं आतीं, इन पर कोई ध्यान नहीं देता.
इस मामले में ख़ातिरा के पिता को गिरफ़्तार किया गया है. ख़ातिरा का कहना कि उनका काम करना उनके पिता को पसंद नहीं था, इसलिए दोनों अलग रह रहे थे.
आंतरिक मामलों के मंत्री ने मसूद अंदराबी ने आरोप लगाया है कि उनके पिता तालिबान से जुड़े हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस ऐसा नहीं मानती.

काबुल में इलाज के बाद ख़ातिरा ग़ज़नी वापस लौट आई हैं. ज़ख़्मों के बावजूद वो अपने काम पर वापस लौटना चाहती हैं.
वो कहती हैं, "उन्होंने कहा कि तुम देख नहीं सकती, अब काम नहीं कर पाओगी. तुम्हें रिटायर हो जाना चाहिए. मैंने कहा कि नहीं, मैं रिटायरमेंट नहीं लूँगी"
वो वापस काम पर जाना चाहती हैं, वो चाहती हैं कि उन्हें इलाज मिले और वो ठीक हो जाएँ.
"अपने काम पर वापस जाना ही मेरा सबसे पड़ा सपना है, ख़ुद को साबित करने के लिए, कुछ पाने के लिए और अपने देश की सेवा करने के लिए."
अफ़ग़ान सेवा की आलिया फ़रज़ान की रिपोर्टिंग और हसीब अम्मार की अतिरिक्त रिपोर्टिंग की मदद से
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