पाकिस्तान में क्या कर रहा है अफ़ग़ान तालिबान का दल

अफ़ग़ान तालिबान का एक दल पाकिस्तान में

इमेज स्रोत, TWEETER SUHAIL SHAHEEN

    • Author, ख़ुदा-ए-नूर नासिर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

क़तर स्थित अफ़ग़ान तालिबान के राजनीतिक कार्यालय का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पाकिस्तान पहुँचा.

ये प्रतिनिधिमंडल अफ़ग़ानिस्तान में विभिन्न अफ़ग़ान गुटों के बीच शांति प्रक्रिया पर पाकिस्तानी अधिकारियों से बातचीत करेगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सोमवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि उनकी कोशिश है कि अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया में आने वाली पेचीदगियां कम हों और यह बातचीत जल्द शुरू हो.

क़ुरैशी ने कहा कि हालिया चीन के दौरे पर भी उन्होंने चीनी अधिकारियों से अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया के बारे में बातचीत की थी. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए चीन के विशेष दूत जल्द ही पाकिस्तान का दौरा करेंगे.

वहीं अफ़ग़ान तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने उनके प्रतिनिधिनमंडल के पाकिस्तान दौरे का उद्देश्य बताते हुए कहा कि कोरोना महामारी के बाद उन्होंने विदेशी दौरों की शुरुआत पाकिस्तान से की और जल्द ही उनके साथी दूसरे देशों का भी दौरा करेंगे.

शाह महमूद क़ुरैशी

इमेज स्रोत, EPA

पाकिस्तान पर पहले दिन से ही तालिबान के समर्थन का आरोप लगता रहा है. ऐसे में सवाल पैदा होता है कि तालिबान ने अपने दौरों की शुरुआत पाकिस्तान से ही क्यों की?

अफ़ग़ान मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार समी यूसुफ़ज़ई कहते हैं कि तालिबान पर पाकिस्तान का दबाव था कि वो अपने विदेशी दोरौं की शुरुआत पाकिस्तान से ही करें ताकि अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया के लिए बातचीत का रास्ता साफ़ हो.

समी यूसुफ़ज़ई के अनुसार "पाकिस्तान ये चाहता है कि वो अमरीका-तालिबान शांति समझौते की तरह अफ़ग़ानिस्तान के सभी गुटों के बीच बातचीत की शुरुआत करने में अपनी भूमिका निभाए और इसीलिए क़तर स्थित तालिबान के दफ़्तर को वो बार-बार पाकिस्तान दौरे की दावत देते रहे."

समी यूसुफ़ज़ई का कहना है कि तालिबान प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के अधिकारियों से मुलाक़ात के अलावा तालिबान नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे. इस दौरान वो उन छह तालिबान क़ैदियों की रिहाई के बारे में भी बातचीत करेंगे जिन पर फ़्रांस ने चिंता जताई है.

तालिबान के सूत्रों और अफ़ग़ान मीडिया के अनुसार उन क़ैदियों में हिकमत-उल-लाह, सैय्यद रसूल, गुल अली, मोहम्मद दाऊद, अल्लाह मोहम्मद और नक़ीब-उल-लाह शामिल हैं जिन पर फ़्रांस और आॉस्ट्रेलिया के नागरिको की हत्या का आरोप है.

अफ़ग़ान तालिबान

इमेज स्रोत, Reuters

अफ़ग़ान मामलों के एक दूसरे जानकार और पत्रकार ताहिर ख़ान कहते हैं कि हाल में पाकिस्तान ने तालिबान को कई बार पाकिस्तान आने की दावत दी लेकिन वो नहीं आना चाहते थे.

उनके अनुसार मुल्ला बरादर और कई तालिबान नेता नहीं चाहते थे कि अफ़ग़ान गुटों की बातचीत शुरू होने से पहले वो पाकिस्तान जाएं. लेकिन पिछले हफ़्ते जब पाकिस्तान ने तालिबान नेताओं पर पाबंदियां सख़्त करने का ऐलान किया तो अफ़ग़ान तालिबान ने पाकिस्तानी दौरे की शुरुआत की.

अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने तालिबान के पाकिस्तान दौरे का स्वागत करते हुए कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि पाकिस्तान तालिबान पर अपने प्रभाव और पहुँच का सही तौर पर इस्तेमाल करके अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न गुटों के बीच बातचीत शुरू करने के लिए रास्ता साफ़ कर सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान की एक प्रवक्ता नाजिया अनवरी ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, "अफ़ग़ानिस्तान का पड़ोसी मुल्क होने और तालिबान नेताओं के वहां मौजूद होने के कारण पाकिस्तान का अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया पर काफ़ी प्रभाव है."

उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तान के साथ राजनयिक स्तर पर अफ़ग़ान नेताओं की मुलाक़ातों में इस बात पर ज़ोर दिया है कि पाकिस्तान का अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में काफ़ी असर है और पाकिस्तान ने हमेशा इस प्रभाव को सकारात्मक अंदाज़ में इस्तेमाल करने का विश्वास दिलाया है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)