पाकिस्तान-चीन आर्थिक कॉरिडोर को लेकर विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भारत पर क्या आरोप लगाया - उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते इमरान ख़ान के अफ़ग़ानिस्तान दौरे और विपक्षी महागठबंधन से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में थीं.
लेकिन सबसे पहले बात पाकिस्तान के भारत पर आरोप की.
पाकिस्तान ने कहा है कि भारत सीपेक (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) प्रोजेक्ट को निशाना बनाने की योजना बना रहा है.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है, "भारत राज्य प्रायोजित दहशतगर्दी के ज़रिए सीपेक प्रोजेक्ट को निशाना बना रहा है और भारत ने इस काम के लिए 80 अरब रुपये भी अलग कर रखे हैं. लेकिन पाकिस्तान और चीन मिलकर हर हालत में इस परियोजना की हिफ़ाज़त करेंगे."
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अख़बार के अनुसार क़ुरैशी ने आगे कहा, "चीन भारत की इस साज़िश से अच्छी तरह अवगत है और अब तो चीन की तरफ़ से बयान भी आ गया है कि सीपेक परियोजना को नुक़सान पहुँचाने की साज़िशों को मिलकर नाकाम करेंगे."
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर सीपेक को किसी भी तरह से नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की गई तो पाकिस्तान और चीन भी ख़ामोश नहीं बैठेंगे.
क़ुरैशी ने कहा कि, "ओआईसी (इस्लामी देशों के संगठन) की अगली बैठक में इस बात को उठाया जाएगा. हम दुनिया को बताएंगे कि भारत कितना ख़तरनाक खेल खेलना जा रहा है."
इमरान ख़ान और विपक्ष एक दफ़ा फिर आमने-सामने
विपक्षी महागठबंधन जिसे पाकिस्तान डेमोक्रैटिक मूवमेंट कहा जाता है, उसने 22 नवंबर (रविवार) को पेशावर में रैली करने का फ़ैसला किया है. लेकिन वहां की सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए रैली करने की इजाज़त नहीं दी. विपक्ष कह रहा है कि रैली हर हाल में होगी.
पीडीएम ने सरकार के ख़िलाफ़ अब तक गुजरानवाला, कराची, क्वेटा में बड़ी रैलियां की हैं जिनमें हज़ारों लोग शरीक हुए थे.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पेशावर ज़िला प्रशासन ने रैली के आयोजकों को एक ख़त लिखकर कहा, "पेशावर में इस वक़्त कोरोना की दर 13 फ़ीसद से बढ़ गई है. बड़ी पब्लिक रैली से कोरोना फैलने की आशंका है. इंसान की जान बचाने के लिए रैली की इजाज़त नहीं दी जा सकती."
ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार कामरान बंगश ने कहा कि "अगर विपक्ष ने रैली की तो क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. विपक्ष को जलसा करने से नहीं रोकना चाहते, हमारा मक़सद अवाम को कोरोना से बचाना है."
प्रांत के एक मंत्री शौकत यूसुफ़ज़ई ने कहा, "विपक्ष सिर्फ़ अपने भ्रष्टाचार को बचाने के लिए आम जनता को इस्तेमाल करना चाहता है. हम लोगों की जान से खेलने की इजाज़त नहीं दे सकते."
दूसरी तरफ़ पीडीएम के नेताओं का कहना है कि यह रैली सरकार की छुट्टी का कारण भी बन सकती है.
विपक्ष ने सरकार पर हमला करते हुए कहा, "सरकार ने कोरोना भी दो बना दिए हैं. एक वह जो इमरान ख़ान और उनके मंत्रियों के कार्यक्रम और दूसरे सरकारी आयोजनों में ग़ायब रहता है. और दूसरा वह कोरोना है जो सिर्फ़ पीडीएम के जलसों में फैलता है."
पीडीएम के महासचिव पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने भी कहा है कि जलसा पेशावर में ही और तयशुदा तारीख़ को ही होगा.
पीडीएम के अहम पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो शनिवार को पेशावर पहुँच गए और गठबंधन का एक और अहम घटक मुस्लिम लीग(नवाज़ गुट) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ रविवार को पेशावर पहुँचेंगी.
अख़बार जंग के अनुसार पीडीएम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि सरकार को किसी भी मोर्चे पर चैन से नहीं बैठने देंगे.
पेशावर में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा, "एक ट्रंप चला गया, अब पाकिस्तानी ट्रंप को भी चलता कर देंगे. जब कोई बहाना नहीं मिला तो कह दिया कि कोरोना का ख़तरा है. सरकार ख़ुद एक बड़ा कोरोना वायरस है."
मुस्लिम लीग के राना सनाउल्लाह ने सरकार पर हमला करते हुए कहा, "कोरोना वायरस से दो फ़ीसद और सरकारी कोरोना से 100 फ़ीसद ख़तरा है. सरकारी कोरोना छह महीने रह गया तो भूख से मार देगा."
पीपीपी के एक नेता फ़ैसल करीम ने इमरान ख़ान पर सीधे हमला करते हुए कहा, "पहले कोविड-18 से छुटकारा हासिल करेंगे फिर कोविड-19 से भी निपट लेंगे."
इमरान ख़ान का अफ़ग़ानिस्तान दौरा
इमरान ख़ान ने 19 नवंबर को अफ़ग़ानिस्तान का दौरा किया. प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान ख़ान पहली बार अफ़ग़ानिस्तान गए थे.
उनके इस दौरे से जुड़ी ख़बरें भी पाकिस्तान के सारे अख़बारों में प्रमुखता से छपीं.
अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने और हिंसा को ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान उम्मीद से बढ़कर मदद करेगा.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान इमरान ख़ान ने कहा, "मेरे दौरे का मक़सद यह पैग़ाम देना है कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में शांति चाहता है. पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ जंग से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. अफ़ग़ानिस्तान में शांति से इन क़बायली इलाक़ों को भी फ़ायदा होगा. आर्थिक गतिविधियों से सीमा के दोनों तरफ़ आम जनता की ज़िंदगी बेहतर होगी."

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काबुल दौरे पर संपादकीय
अख़बार दुनिया में इमरान के काबुल दौरे पर संपादकीय छपा है. अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान का दौरा ऐसे समय में हुआ जब अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और तालिबान से बातचीत की प्रक्रिया रुकी हुई है और अफ़ग़ानिस्तान में हिंसक वारदातें बढ़ती जा रही हैं.
संपादकीय के अनुसार इमरान के दौरे की एक दूसरी अहमियत यह थी कि पाकिस्तान की शिकायत अब भी मौजूद है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान की धरती को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रहा है और यहीं से पाकिस्तान विरोधी दहश्तगर्द तत्वों की तारें हिलाईं जातीं हैं. इसलिए इन मामलों को अफ़ग़ानिस्तान सरकार के सामने उठाने का यह बेहतरीन मौक़ा था.
अख़बार लिखता है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में जो कर रहा है उससे सबसे ज़्यादा अफ़ग़ानिस्तान को ही नुक़सान होगा. इसलिए अफ़ग़ानिस्तान को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि वो तबाही के इस दलदल से निकलने की पूरी कोशिश करे. पाकिस्तान की यह ज़िम्मेदारी है कि अफ़ग़ानिस्तान को भारत के इस षडयंत्रकारी चंगुल से आज़ादी दिलाई जाए.
अख़बार लिखता है कि ईरान इस चंगुल में फँसने से बाल-बाल बच गया है और अब अफ़ग़ानिस्तान को यह करना है कि वो अपने दूरगामी हितों, क्षेत्रीय स्थिति और अपने आंतरिक स्थिति को मद्दे-नज़र रखते हुए भारत के विभाजनकारी इरादों और योजनाओं के ख़िलाफ़ दो टूक और स्पष्ट पोज़िशन ले.
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