गिलगित-बल्तिस्तान पर इमरान ख़ान के फ़ैसले का भारत ने किया कड़ा विरोध

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भारत सरकार ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के गिलगित-बल्तिस्तान को प्रांत का अस्थायी दर्जा देने के फ़ैसले का कड़ा विरोध किया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है कि भारतीय क्षेत्र के हिस्से में ग़ैरक़ानूनी और जबरन भौतिक परिवर्तन लाने की पाकिस्तान सरकार की कोशिश को भारत सरकार अस्वीकार करती है.

उन्होंने कहा, "मैं इस बात को दोहराता हूं कि तथाकथित गिलगित-बल्तिस्तान इलाक़ा क़ानूनी तौर पर और 1947 के विलय के समझौते के मुताबिक़ भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है."

"इन भारतीय क्षेत्रों की स्थिति को बदलने की मांग की बजाय, हम पाकिस्तान से अपने अवैध कब्ज़े के तहत सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने की अपील करते हैं."

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि उनकी सरकार ने गिलगित-बल्तिस्तान को प्रांत का अस्थायी दर्जा देने का निर्णय लिया है.

उनका कहना था कि "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है."

इमरान ख़ान ने रविवार को गिलगित-बल्तिस्तान के 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित आज़ादी परेड समारोह को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया.

उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान सरकार ने आज गिलगित-बल्तिस्तान के लोगों का लंबे समय से अधूरा ख़्वाब पूरा कर दिया. इस क्षेत्र के युवा बहुत वक़्त से यह चाहते थे. उन्हें मुबारक़बाद. इसके साथ ही हमने इस क्षेत्र के विकास के लिए एक आर्थिक पैकेज पर भी विचार किया है."

हालांकि, इमरान ख़ान ने इस पैकेज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और ना ही उन्होंने यह बताया कि गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र को स्थायी रूप से, पाकिस्तान के पाँचवे प्रांत का दर्जा कब तक मिलेगा.

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इमरान ख़ान से साधा मोदी पर निशाना

इस मौक़े पर इमरान ख़ान ने इस क्षेत्र की आज़ादी के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले लोगों को याद किया.

साथ ही इस क्षेत्र में चरमपंथ का मुक़ाबला करने वाले पाकिस्तान के सुरक्षाबलों की भूमिका की भी उन्होंने तारीफ़ की.

इस मौक़े पर भी पीएम इमरान ख़ान मोदी सरकार को निशाना बनाने से नहीं चूके. उन्होंने कहा कि भारत की मोदी सरकार, अब तक की सबसे कट्टर सोच रखने वाली सरकार है.

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इमरान ने कहा, "मोदी सरकार सिर्फ़ हिन्दुत्व के विचार में विश्वास रखती है और उसी विचारधारा के आधार पर निर्दोष कश्मीरी लोगों पर ज़ुल्म किये जाते हैं."

"पाकिस्तान की प्रगति और समृद्धि के लिए मज़बूत क़ानून-व्यवस्था का होना बहुत ज़रूरी है और जो लोग पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान की न्यायपालिका को बदनाम करना चाहते हैं, उन्हें कोई श्रेय नहीं देना चाहते, वो मोदी की भाषा बोल रहे हैं."

इस टिप्पणी के ज़रिये उन्होंने विपक्ष के उन नेताओं पर निशाना साधने की कोशिश की जिन्होंने उनकी सरकार और कुछ संस्थानों की हाल ही में आलोचना की है.

गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र का ज़िक्र करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि "उनकी सरकार देश के सभी पिछड़े इलाक़ों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है."

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इस मौक़े पर गिलगित-बल्तिस्तान के कार्यवाहक मुख्यमंत्री मीर अफ़ज़ल ख़ान भी इमरान ख़ान के साथ मौजूद थे. उन्होंने भी पाकिस्तानी फ़ौज की तारीफ़ की और पाकिस्तान सरकार के इस निर्णय को गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया.

इस अवसर पर गिलगित-बल्तिस्तान के गवर्नर राजा जलाल हुसैन मक़पून ने कहा कि "मौजूदा पाकिस्तान सरकार गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने के गंभीर प्रयास कर रही है जो यहाँ की आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत ज़रूरी हैं."

हालांकि, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार के आलोचकों का कहना है कि यह घोषणा 15 नवंबर को होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर की गई है, यही वजह है कि गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र के लोगों को इससे क्या मिलने वाला है, वह बताया ही नहीं गया.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान का पांचवां प्रांत बनेगा गिलगित बल्तिस्तान?

भारत करता रहा है बदलाव का विरोध

जब सितंबर में पहली बार गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र को लेकर पाकिस्तान से इस तरह की ख़बरें आयी थीं, तो भारत ने उसकी आलोचना की थी.

भारत ने हमेशा ही पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध किया है.

जुलाई में जब पाकिस्तान के कहा था कि वो इस क्षेत्र में चुनाव करायेगा, तब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, "हम पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भारतीय क्षेत्रों में भौतिक परिवर्तन लाने के प्रयासों को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं. पाकिस्तान ने जिन भारतीय क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया है, ये उसे छिपाने की दिखावटी कोशिशों से ज़्यादा कुछ नहीं."

1948 में हुए पहले कश्मीर युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित वास्तविक सीमा रेखा खींची गई थी. उससे पहले गिलगित-बल्तिस्तान जम्मू-कश्मीर की पूर्व रियासत का ही हिस्सा था.

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ख़ास रणनीतिक स्थिति

ऐतिहासिक विवरणों में कहा गया है कि ब्रिटिश सेना के एक अधिकारी, जो 'गिलगित स्काउट्स' नामक एक अर्ध-सैनिक बल के क्षेत्र प्रमुख थे, उन्होंने ही अक्तूबर 1947 में पाकिस्तान को इस क्षेत्र पर नियंत्रण जमाने में मदद की थी.

इस क्षेत्र की आबादी क़रीब 15 लाख है जो कश्मीरियों से जातीय रूप से भिन्न हैं.

ये इलाक़ा बहुत ही ख़ूबसूरत है. बर्फ़ जमी वादियाँ, हरे-भरे पहाड़, बड़ी घाटियाँ और फलों के बहुत सारे बागान इस इलाक़े की ख़ास पहचान बनाते हैं.

लेकिन इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति किसी भी देश के लिए इसे और अधिक वांछनीय बनाती है.

भारत, पाकिस्तान, चीन और तज़ाकिस्तान समेत चार देशों की सीमाएं इस एक क्षेत्र को छूती हैं.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान गिलगित बलतिस्तान में इस प्रोजेक्ट से कितना बड़ा ख़तरा मोल ले रहा है?

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