अपराध से निपटने का अल साल्वाडोर का तरीक़ा क्या उसके पड़ोसी देश भी अपनाएंगे?- दुनिया जहान

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इस साल फ़रवरी में अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नाइब बुकेली ने 85 फीसद वोट प्राप्त करके दोबारा जीत हासिल की.
अपराध से निपटने के लिए अपराधी गैंग के हज़ारों सदस्यों को जेल में बंद करने की उनकी विवादास्पद निति को आम जनता ने पसंद किया है.
अब उसके पड़ोसी देश, मिसाल के तौर पर चिली भी उसका अनुसरण करने के बारे में सोच रहा है.
कुछ लोग कहते हैं कि बुकेली क्षेत्र के सबसे अधिक लोकप्रिय नेता हैं. मगर उनके आलोचकों का कहना है कि उनसे पूरे लातिन अमेरिका में लोकतंत्र को ख़तरा पैदा हो रहा है क्योंकि उन्होंने थोड़े समय के भीतर ही सारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को तबाह कर दिया है और उनकी ताक़त पर अंकुश नहीं है.
इस सप्ताह हम दुनिया जहान में यही जानने की कोशिश करेंगे कि क्या अपराध से निपटने का अल साल्वाडोर का तरीका उसके पड़ोसी देश भी अपनाएंगे?
राष्ट्रपति नाइब बुकेली

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अल साल्वाडोर के एक ऑनलाइन अख़बार 'अल फ़ारो' के निदेशक कार्लोस डाडा कहते हैं कि 1990 के दशक में अल साल्वाडोर में 13 सालों तक चले गृहयुद्ध के बाद दो पार्टियां उभरीं और बूकेली पहली बार 2019 में सत्ता में आए.
''1992 में हमारे देश में लोकतंत्र आया. लेकिन तभी से देश में दो बिलकुल अतिवादी विचारधारा की पार्टियों का शासन रहा है. अति दक्षिणपंथी एरीना पार्टी और अति वामपंथी और पूर्व गुरिल्ला चरमपंथियों की एफ़एमएलएन ( FMLN) पार्टी. इन दोनों ही दलों की सरकारों के दौरान व्यापक भ्रष्टाचार रहा है जिससे लोग तंग आ गए थे.''
बुकेली ने जनता की परेशानी को सुलझाने का वादा किया.
कार्लोस डाडा कहते हैं, ''जब वो राजनीतिक मंच पर आए तो उन्होंने लोगों से वादा किया कि मैं आपकी ओर से बदला लूंगा. जिन लोगों ने आपको लूटा है अन्याय किया है उन्हें सज़ा दूंगा. सब लोग इस युवा राजनेता की ओर आकर्षित होने लगे क्योंकि उनकी भाषा पुराने नेताओं से बिलकुल अलग थी. लोगों को उन पर भरोसा हुआ. नाइब बुकेली एडवरटाइज़िंग और मार्केटिंग में काम कर चुके थे. इसलिए उन्हें अपने संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना बख़ूबी आता है. उन्होंने पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने से पहले वहां अपनी एक सेल्फ़ी लेकर कहा था कि यह सेल्फ़ी किसी भी अन्य नेता की तस्वीर से ज़्यादा शेयर की जाएगी.''
बुकेली इस प्रकार की दिलेरी अपने शक्तिशाली पड़ोसी देशों के सामने दिखाने से भी नहीं कतराते हैं.
कार्लोस डाडा की राय है, ''बुकेली लातिन अमेरिका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति हैं. जब वो लोकतांत्रिक संस्थाओं को तोड़ रहे थे तो अमेरिका उनसे नाराज़ हो गया था. उस समय उन्होंने बेझिझक कहा कि वो दुनिया के 'कूलेस्ट डिक्टेटर' यानि सबसे बेहतरीन तानाशाह हैं. अब हमारा पूरा सार्वजानिक जीवन एक व्यक्ति के नियंत्रण में आ गया है. सार्वजानिक जीवन में क्या हो या क्या नहीं हो इस पर विचारों का खुला आदान-प्रदान ज़रूरी है, लेकिन यहां सब कुछ राषट्र्पति के विचारों के अनुसार चल रहा है.''
संसद में बुकेली के पास भारी बहुमत है. न्याय पालिका में उन्होंने अपने समर्थकों को भर दिया है. कार्लोस डाडा जैसे पत्रकार मानते हैं कि इस वजह से अल साल्वाडोर में लोकतंत्र ख़तरे में आ गया है.
''उन्होंने धीरे धीरे लोकतंत्र के ढांचे को तबाह कर दिया है. इसकी एक मिसाल यह है कि हमारे संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति दोबारा राष्ट्रपति पद पर नियुक्त नहीं हो सकता लेकिन इसके बावजूद वो दोबारा चुन लिए गए. धीरे-धीरे अल साल्वाडोर एक दलीय देश में तब्दील होता जा रहा है.''
अपराध के ख़िलाफ़ बुकेली की मुहीम

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साल 2019 में पहली बार राष्ट्रपति बनने के बाद से बुकेली ने देश से अपराध को उखाड़ फेंकने की मुहीम शुरू कर दी थी. उन्होंने अपराधी गैंग्स के हज़ारों लोगों को जेल में बंद करना शुरू कर दिया था. लंदन यूनिवर्सिटी की इंस्टिट्यूट ऑफ़ अमेरिकाज़ में लेक्चरर कैथरीन सौंडर्स हेस्टिंग्ज़ कहती हैं कि अल साल्वाडोर में हज़ारों लोगों को महीनों तक बिना मुकदमे के जेल में बंद कर दिया जाता है.
''अल साल्वाडोर में युद्ध के बाद से हमेशा ही सड़कों पर मौजूद अपराधी गैंग्स की वजह से हत्याओं की दर काफ़ी अधिक रही है. 2016 में अल साल्वाडोर में हत्याओं की दर प्रति एक लाख की जनसंख्या में 106 तक रही है. यानि अल साल्वाडोर की हत्या दर दुनिया में सबसे अधिक थी.''
कैथरीन सौंडर्स हेस्टिंग्ज़ के अनुसार इस प्रकार कि हिंसा का मुख्य कारण शहरी इलाकों में नियंत्रण के लिए अपराधी गुटों या गैंग्स के बीच आपसी लड़ाई है. इससे अल सल्वाडोर के शहरों के ग़रीब इलाकों में किसी भी समय गोलीबारी की घटनाएं होती हैं और लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. यही नहीं बल्कि यह गैंग अपने इलाके के आम लोगों से, ख़ासतौर पर छोटे व्यापारी और दुकानदारों से जबरन पैसे वसूल करते हैं. जिनके पास अच्छी नौकरियां हैं उनसे टैक्स वसूला जाता है. जो लोग पैसे देने से इनकार करते हैं उन्हें सज़ा दी जाती है.
राष्ट्रपति बुकेली ने लोगों को इस संकट से मुक्त करने के वादे पर चुनाव जीता था. मगर इसके लिए उन्हें सेना को अधिक हथियार देने और मज़बूत बनाने के लिए ज़्यादा बजट की ज़रूरत थी. यह हासिल करने के लिए उन्होंने 2020 में एक शक्ति प्रदर्शन भी किया.
कैथरीन सौंडर्स हेस्टिंग्ज़ ने बीबीसी को बताया, ''9 फ़रवरी 2020 के आसपास उन्होंने हथियारबंद सैनिकों के साथ शहर में मार्च किया और फिर संसद में प्रवेश किया. इसका उद्देश्य सांसदों को धमका कर सेना के लिए अधिक धन की मंज़ूरी प्राप्त करना था. यहां से एक ओर बुकेली की अपराध के ख़िलाफ़ मुहीम ने बल पकड़ा वहीं दूसरी ओर उनकी नीतियों के विरोध को राष्ट्र विरोधी करार दिया जाने लगा.''
सेना के आधुनिकीकरण और उसे नए हथियार और धन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद देश के अधिकांश इलाकों में गैंग्स का दबदबा बरकरार रहा. एक अनुमान के अनुसार साठ लाख की आबादी में से चालीस हज़ार लोग अपराधी गैंग्स के सदस्य थे. 2022 के मार्च में स्थिति हद से बाहर हो गई.
कैथरीन सौंडर्स हेस्टिंग्ज़ ने कहा कि शुक्रवार 25 मार्च से रविवार 27 मार्च के बीच 84 लोगों की हत्या हुई. इसके बाद बुकेली ने आपातकाल की घोषणा कर दी. इसके तहत संविधान के कई प्रावधान और कई तरह की निजी स्वतंत्रता के अधिकार स्थगित हो जाते हैं. इसके तहत 12 साल की उम्र के बच्चों को भी सज़ा दी जा सकती है और लोगों को बिना मुकदमे के लंबे समय तक जेल में बंद किया जा सकता है.
नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने संदेह के बल पर हज़ारों लोगों को ग़िरफ़्तार कर लिया.
कैथरीन सौंडर्स हेस्टिंग्ज़ ने कहा, ''हमें लगता है कि दिसंबर 2023 तक अल साल्वाडोर की जेलों में बंद लोगों की संख्या एक लाख से अधिक थी यानि देश की कुल आबादी का 1.7 फीसद हिस्सा जेल की सलाखों के पीछे था. गैंग्स के इन कथित सदस्यों को जेल में क्या अधिकार उपलब्ध कराए जाते हैं, इसके बारे में कोई जानकारी मीडिया को नहीं मिल रही है. हालांकि हम यह ज़रूर जानते हैं कि पिछले साल जुलाई में एक सामूहिक मुकदमें के दौरान लगभग 900 लोगों के ख़िलाफ़ एक साथ मुकदमा चलाया गया था.''
इन बंदियों में से कई लोगों को एक सुपरमैक्स जेल में बंद किया गया है जिसका निर्माण बुकेली ने राजधानी से 75 किलोमीटर दूर के एक भीतरी इलाके में करवाया था.
कैथरीन सौंडर्स हेस्टिंग्ज़ ने कहा कि इस सूपरमैक्स जेल को अल साल्वाडोर में आतंकवादियों का बंदीगृह भी कहा जाता है.
जनवरी 2023 में इस जेल में कैदियों को लाना शुरू किया गया जिसकी काफ़ी व्यापक पब्लिसिटी की गई. ऐसे वीडियो जनता तक पहुंचाए गए जिसमें गैंग के कथित सदस्यों के सिर मुंडा कर, ज़ंजीरों में जकड़ कर उन्हें अधनंगी स्थिति में मार्च कराते हुए या ठंडी फ़र्श पर बैठा दिखाया गया. इसे गैंग्स के ख़िलाफ़ सरकार के प्रतिशोध की क्षमता के रूप में प्रचारित किया गया.
राष्ट्रपति बुकेली की नीतियों की आलोचना की जा सकती है लेकिन गैंग्स की हिंसा से तंग आ चुके लोग इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए सत्ता के दुरुपयोग को बर्दाश्त करने को तैयार लगते हैं.
लातिन अमेरिका के अन्य देशों में बुकेली का प्रभाव

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न्यू यॉर्क स्थित संस्था काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में लातिन अमेरिकी अध्ययन के वरिष्ठ शोधकर्ता विल फ़्रीमैन कहते हैं कि लातिन अमेरिका के अन्य देशों के नेता बुकेली के तरीकों से काफ़ी प्रभावित हैं. क्षेत्र में वो बहुत ही लोकप्रिय हैं. अन्य लातिन अमेरिकी देशों के नेताओं को बुकेली की लोकप्रियता से ईर्ष्या होती है. वह भी वैसी ही लोकप्रियता चाहते हैं. मिसाल के तौर पर चिली में बुकेली देश के अन्य नेताओं से कहीं अधिक लोकप्रिय हैं. वैसी ही बात इक्वाडोर में भी दिखाई देती है.
होंडूरास के राष्ट्रपति भी कहते हैं कि वो बुकेली की नीतियों से प्रभावित हैं. पेरू के लीमा शहर के मेयर भी बुकेली की नीतियों का अनुसरण करना चाहते हैं. बुकेली की लोकप्रियता पूरे क्षेत्र में दिखाई देती है.
लेकिन पड़ोसी देशों की जनता की क्या सोच है, क्या वो भी अपने देश में बुकेली जैसा नेता चाहती है?
विल फ़्रीमैन ने कहा, ''बिलकुल. मैंने हाल में लातिन अमेरिका के कई देशों का दौरा किया. मैंने ग्वाटेमाला, कोलंबिया और इक्वाडोर में पाया कि वहां भी जनता सुरक्षा चाहती है. कई समस्याओं के बावजूद अल साल्वाडोर अब मध्य लातिन अमेरिका का एक सबसे सुरक्षित देश बन गया है.''
इसका एक कारण यह है कि अल साल्वाडोर के पड़ोसी देशों में भी हिंसा बढ़ रही है.
विल फ़्रीमैन इक्वाडोर की मिसाल देते हुए कहते हैं कि पांच साल पहले वहां प्रति एक लाख की आबादी में पांच लोगों की हत्या होती थी, यह हत्या दर अब बढ़ कर प्रति एक लाख की आबादी में 45 तक पहुंच गई है.
मैक्सिको और कोलंबिया में प्रति एक लाख की आबादी में 25 हत्याएं होती हैं. इन दोनों देशों में हिंसा का मुख्य कारण ड्रग्स का कारोबार है.
वहां ड्रग माफ़िया बंदरगाहों और शहरों पर नियंत्रण के लिए आपस में लड़ रहे हैं. तो क्या यह देश भी अपराध से निपटने के लिए बुकेली का तरीका अपना सकते हैं?
विल फ़्रीमैन ऐसा नहीं मानते. वो कहते हैं, ''मुझे नहीं लगता ऐसा संभव होगा क्योंकि कई कारण हैं, जिसके चलते अल साल्वाडोर की स्थिति बिलकुल अलग है. अल साल्वाडोर के गैंग्स के पास दूसरे पड़ोसी देशों के गैंग्स जितने हथियार और पैसे नहीं हैं क्योंकि अल साल्वाडोर ड्रग की तस्करी का प्रमुख मार्ग नहीं रहा है, इसलिए वहां के गैंग्स के पास उतने पैसे नहीं हैं.''
''दूसरी बात यह कि अल साल्वाडोर का पुलिस प्रशासन अन्य देशों के मुकाबले अधिक प्रभावी रहा है. मैक्सिको और कोलंबिया जैसे देशों में भ्रष्टाचार ज़्यादा है और वहां हिंसा गैंग्स की वजह से नहीं बल्कि ताकतवर ड्र्ग माफ़िया या कार्टेल की वजह से हो रही है. जब तक अमेरिका और एशिया में ड्रग की मांग बरकरार रहेगी तब तक उनकी ताकत भी बरकरार रहेगी.''
विल फ़्रीमैन यह भी कहते हैं कि लातिन अमेरिका के दूसरे देशों की जनता ने आज़ादी के लिए काफ़ी संघर्ष किया है और हिंसा पर काबू पाने के लिए वह लोकतंत्र को दांव पर लगाने को तैयार नहीं होगी जैसा कि अल साल्वाडोर में हो रहा है, जहां बुकेली जनता से लोकतांत्रिक अधिकार छीन रहे हैं.
वहीं इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल कर हिंसा की समस्या का समाधान हो पाएगा.
बुकेली का भविष्य

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फ़िलहाल तो अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नाइब बुकेली की लोकप्रियता चरम पर है. लेकिन क्या वो आगे भी बरकरार रह सकती है? कोलंबिया के बोगोटा शहर की यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऐंडिज़ में राजनीति शास्त्र की प्रोफ़ेसर मोनिका पचोन का मानना है कि ऐसा होना मुश्किल है.
''फ़िलहाल वो अपनी नीतियों पर इसलिए अमल कर पा रहे हैं क्योंकि संसद में उनके पास भारी बहुमत है. भविष्य में यह स्थिति बदल सकती है. मानवाधिकार उल्लंघन बड़े पैमाने पर हो रहा है जिससे हालात बदल सकते हैं और उन्हें रणनिति बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है. हमने यह बात कोलंबिया में देखी जहां शांति समझौते के बाद स्थितियां बदल गईं. ऐसा ही पेरू में भी हुआ. अगर बुकेली सत्ता में बने रहना चाहते हैं तो उन्हें सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करके नई रणनीतियों के बारे में सोचना होगा.''
मोनिका पचोन यह भी कहती हैं कि गैंग्स की हिंसा के साथ साथ बुकेली ने अल सल्वाडोर में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का वादा भी किया था. उन्हें अब भ्रष्टाचार समाप्त करने के बारे में कदम उठाने चाहिए.
पचोन ने कहा, ''जब कोई राष्ट्रपति इतना लोकप्रिय हो तो उस पर अंकुश लगाना मुश्किल हो जाता है. वहां मीडिया की स्वतंत्रता भी सीमित है इसलिए पता नहीं चलता कि पर्दे के पीछे क्या सौदेबाज़ी या भ्रष्टाचार हो रहा है.''
जहां तक बुकेली के भविष्य का प्रश्न है मोनिका पचोन का कहना है कि बुकेली को एक तानाशाह बनने के बजाय एक अच्छे राष्ट्रपति बनने की कोशिश करनी चाहिए मगर फ़िलहाल नहीं लगता कि उन्हें लोकतांत्रिक प्रकियाओं की परवाह है. लेकिन लातिन अमेरिका की जनता इस बारे में क्या सोचती है?
मोनिका पचोन कहती हैं, ''लातिन अमेरिका में अधिकांश लोग इस बात को अधिक महत्व देते हैं कि उनका राष्ट्रपति देश में व्यवस्था को सुचारू तरीके से चलाए लेकिन चुनाव कैसे होते हैं लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन कितनी ईमानदारी से होता है इस पर लोग ख़ास ज़ोर नहीं देते. कई लोगों के लिए सुरक्षा का मुद्दा लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक महत्व रखता है. हालांकि इसका यह अर्थ नहीं कि उन्हें लोकतंत्र की परवाह नहीं है.''
तो अब लौटते हैं अपने मुख्य प्रश्न की ओर कि क्या अपराध से निपटने का अल साल्वाडोर का तरीका उसके पड़ोसी देश भी अपनाएंगे?
जवाब है कि ऐसा संभव ज़रूर है, लेकिन अन्य देशों की परिस्थितियां अल साल्वाडोर से अलग हैं, इसलिए हो सकता है अल साल्वाडोर का रास्ता अपना कर भी उन्हें वैसे नतीजे ना मिलें जैसे अल साल्वाडोर में देखे गए क्योंकि दूसरे देशों में अपराधी गैंग्स या कार्टेल के पास अधिक हथियार और संसाधन हैं.
अगर वहां कि सरकारों ने उनसे निपटने के लिए बुकेली का रास्ता अपनाया तो हो सकता है कि हिंसा भी काबू में ना आए और देश को लोकतंत्र से भी हाथ धोना पड़े. हिंसा से निपटने की यह कीमत बहुत भारी साबित हो सकती है.
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