वो भूकंप जिसने मेक्सिको सिटी की सूरत बदल दी थी

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भूकंप ने मेक्सिको को एक बार फिर से झकझोर दिया है. 32 साल पहले इसी दिन मेक्सिको के इतिहास का सबसे बड़ा भूकंप आया था.
वो 19 सितंबर, 1985 की तारीख थी, सुबह के सात बजकर 19 मिनट हो रहे थे. तभी 8.1 तीव्रता वाला एक भूकंप आया और मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी बुरी तरह हिल गई.
शहर का मुख्य इलाका पूरी तरह से तबाह हो गया था. सैंकड़ों इमारतें ढह गईं और हज़ारों लोग मारे गए थे. 32 साल बाद तारीख़ वही थी और मेक्सिको सिटी भूकंप से एक बार फिर कांप गई.
शक्तिशाली भूकंप में 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों इमारतें जमींदोज़ हो गई हैं. राहतकर्मी मलबों में जीवित बचे लोगों की तलाश का अभियान चला रहे हैं और अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.
मेक्सिको सिटी के एक स्कूल के बारे में माना जा रहा है कि वहां बच्चे फंसे हो सकते हैं. बड़े पैमाने पर स्वयंसेवी आपातकालीन सेवाओं के लिए तैनात हैं.
मेक्सिको के राष्ट्रपति ने टीवी पर दिए एक संदेश में कहा कि सेना बुलाई गई है और बचाव और राहत कार्य रात में भी जारी रखा जाएगा.

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तीन दशक पहले
32 साल पहले उस हादसे में कितने लोग मारे गए थे, इसकी पक्की जानकारी आज तक नहीं है.
सरकार कहती है कि 3692 लोग मारे गए जबकि मेक्सिको की रेड क्रॉस संस्था का कहना था कि 10,000 से ज्यादा लोगों की जानें गई थीं.
इस प्राकृतिक आपदा से घायलों और अन्य प्रभावितों के बारे में भी कोई ठोस जानकारी नहीं है. इस हादसे के तीन दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका है.

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नए नियम क़ानून
शहर फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो गया. ज़मीदोज़ हो गई इमारतें फिर से बनाई गईं या उनकी जगह पार्क या कल्चरल सेंटर्स बनाए गए.
सरकार ने इस भूकंप से सबक लेते हुए इमारतें बनाने के लिए नए नियम कानून बनाए.
पीड़ितों की मदद के लिए जो हज़ारों लोग आगे आए थे, वे आगे चलकर सामाजिक आंदोलन के सूत्रधार बने और इससे देश की राजनीतिक तस्वीर भी बदली.

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प्राकृतिक आपदा
नागरिक सुरक्षा की संस्कृति का विकास हुआ और ये केवल भूकंप तक ही सीमित नहीं रहा. बाढ़, आग या चक्रवातीय तूफानों में भी ये देखने को मिला.
स्कूलों, सार्वजनिक इमारतों और कुछ कंपनियों में साल में कम से कम एक बार तो मॉक ड्रिल ज़रूर किया जाता है.
मेक्सिको में क़ानून है कि सरकारी विभागों और प्राइवेट कंपनियों को ऐसे लोग नियुक्त करने होंगे जो प्राकृतिक आपदाओं की सूरत में फौरन सक्रिय हो सकें.

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फर्श हिल रहे थे...
साल 1985 के बाद देश में पैदा हुए चालीस लाख लोगों ने मेक्सिको का वो चेहरा नहीं देखा था. 1985 का भूकंप प्रशांत महासागर में मिकोअकान के पास आया था.
दो मिनट भी नहीं गुजरे होंगे कि भूकंप देश के केंद्र तक पहुंच गया. शहर के लोगों ने महसूस किया कि उनके घरों की दीवारें और फर्श हिल रहे हैं.
बहुत से लोग सो रहे थे, और उन्हें इतना वक्त नहीं मिला कि वे बाहर निकल सकें.

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अलर्ट सिस्टम
साल 1991 में मेक्सिको ने एक व्यवस्था बनाई जिसके तहत धरती के भीतर की हलचलों पर नज़र रखी जा सके.
ये सिस्टम प्रशांत महासागर के ग्वेरेरो तट पर लगाया गया है. मेक्सिको के वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र को इसलिए चुना क्योंकि ये राजधानी मेक्सिको सिटी के पास है.
इस इलाके में 1911 के बाद से 7.5 तीव्रता से ज्यादा का भूकंप नहीं आया है.

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तटवर्ती इलाका
भूकंप का अध्ययन करने वाला ये सिस्टम रिक्टर स्केल पर 5 से ज्यादा तीव्रता वाले भूकंपों की पहचान करता है.
माना जाता है कि शहरी इलाकों में इस स्केल पर ख़तरा बढ़ जाता है. मेक्सिको सिटी में भूकंप आने के 50 सेकंड पहले अलार्म बजना शुरू हो जाता है.
साल 2003 में मेक्सिको ने इस सिस्टम को अपने पूरे तटवर्ती इलाके में चालू कर दिया. मेक्सिको का पश्चिमी इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है.

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पुराने मकान
साल 1985 के भूकंप के बाद लोगों ने ये महसूस किया कि जो इमारतें ढही थीं, उनमें ज्यादातर नई थीं.
पुराने मकान और महल जो औपनिवेशिक दौर की थीं, को कम नुकसान पहुंचा था.
इसके पीछे ये दलील दी गई कि बाद में बनी इमारतों के निर्माण के वक्त मिट्टी की स्थिति का ख्याल नहीं रखा गया था और इसके लिए नियमों की कमी थी.

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आठ तीव्रता वाला भूकंप
ये भी कहा जाता है कि जो नियम कायदे थे भी, बिल्डरों ने उनका ख्याल नहीं रखा था और स्थानीय सरकारों ने इसे लागू करने में कोताही बरती थी.
नतीजा ये हुआ कि 800 से ज़्यादा इमारतें ढह गईं और हजारों घरों को नुकसान पहुंचा.
इस हादसे के बाद नियम कायदे और सख्त किए गए और अब निर्माण कार्य में ये ख्याल रखा जाता है कि 8 तीव्रता वाले भूकंप को ये सह सकें.

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मेक्सिको का चेहरा
ऐसी एजेंसियां बनाई गईं जो प्राकृतिक आपदा की सूरत में राहत और बचाव कार्य के लिए फौरन सक्रिय हो सकें ताकि इससे होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके.
विशेषज्ञ कहते हैं कि 1985 के भूकंप के कुछ और भी बड़े सबक थे जैसे लोगों ने ये सीखा कि प्राकृतिक आपदाओं से कैसे बचाव किया जाए और इन हालात में खुद को कैसे ज़िंदा रखा जाए.
1985 के भूकंप के बाद मेक्सिको ने कई बदलाव देखे, पुरानी इमारतों की जगह पहले से अधिक भव्य और आरामदेह इमारतें बनीं. यही आज के मेक्सिको का चेहरा है.
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