गांजा क्या वाकई दुनियाभर में खुलेआम बिकने लगेगा?-दुनिया जहान

गांजे के फूल

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    • Author, मानसी दाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दुनिया के कई देशों में अब गांजे के इस्तेमाल को क़ानूनी रूप दिया जा रहा है. इसी साल अमेरिकी कांग्रेस में गांजे को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने से जुड़ा एक अहम बिल पेश किया गया.

मई 2021 को पेश किए गए मैरियुआना ऑपरच्यूनिटी रीइन्वेस्टमेंट एंड एक्सपंजमेंट ऐक्ट यानी मोर ऐक्ट के तहत संघीय स्तर पर गांजे के इस्तेमाल को अनुमति देने की बात की गई है. इस बिल को सबसे पहले दिसंबर 2020 में पेश किया गया था लेकिन ये सीनेट में पास नहीं हो सका था.

हाल में मेक्सिको ने मनोरंजन के लिए गांजे के इस्तेमाल को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया. उरुग्वे ने 2013, कनाडा ने 2020 और दक्षिण अफ़्रीका की सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसके इस्तेमाल को मंज़ूरी दी.

न्यूज़ीलैंड में इसे लेकर चर्चा जारी है, लेसोथो ने इसकी खेती को मंज़ूरी दी है और मोरक्को ने इसके मेडिकल इस्तेमाल को हां कह दिया है.

गांजे के व्यापार को क़ानूनी बनाने का विरोध करने वाले इसके पीछे नशे की लत को बढ़ावा मिलने और मानसिक स्वास्थ्य पर असर, जैसी ठोस दलील देते हैं. लेकिन दुनिया जहान में इस हफ्ते हम केवल गांजे के व्यवसाय पर चर्चा कर रहे हैं.

और हमारा सवाल है - क्या ज़्यादा से ज़्यादा देश गांजा को अपराध की श्रेणी से बाहर कर रहे हैं, और क्या पूरी दुनिया में गांजा अब आसानी से मिलने लगेगा?

इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमने कुछ विशेषज्ञों से बात की.

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गांजे का पौधा

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गांजा व्यापार पेचीदा मसला है

बीते एक दशक में अमेरिका के 17 राज्यों ने मनोरंजन के लिए और 36 राज्यों ने दवा के तौर पर गांजे के इस्तेमाल को मंज़ूरी दी है. मतलब ये कि इन राज्यों में रहने वाले अब आसानी से खरीद गांजा सकते हैं.

अमेरिका में गांजा बाज़ार के उदारीकरण की कोशिशों के मामले में कैलिफोर्निया सबसे आगे है. 1996 में यहां गांजे के मेडिकल इस्तेमाल को और फिर 2016 में मनोरंजन के लिए इसके इस्तेमाल को हरी झंडी मिली.

वैन बट्सिक अमेरिका के बर्केले कैनबिस रीसर्च सेंटर के सह-समन्वयक हैं. वो कहते हैं कि कैलिफोर्निया में मनोरंजन के लिए गांजे के इस्तेमाल को इजाज़त देने वाले क़ानून में 'वयस्कों के लिए' कहा गया है लेकिन किस तरह का इस्तेमाल हो इसे लेकर स्पष्टता नहीं है.

वो कहते हैं, "इसका अर्थ ये हुआ कि यदि आप 21 साल से अधिक हैं और कैलिफोर्निया में रहते हैं तो आप क़ानूनन घर पर गांजा ले सकते हैं. हालांकि सार्वजनिक जगहों पर इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है. रही बात इसके उत्पादन और बिक्री की तो, इसके लिए राज्य प्रशासन से परमिट लेना ज़रूरी है."

लेकिन परमिट मिलना आसान नहीं. अगर राज्य का कोई शहर नहीं चाहता कि गांजा वहां खुलेआम बिके तो वो परमिट देने और अपने इलाक़े में गांजा की बिक्री पर रोक लगा सकता है.

यानी कहीं पर गांजा आसानी से मिलता है तो कई जगहों पर इसकी बिक्री मना है. ऐसी स्थिति में लोग गांजा कैसे खरीदते हैं. और ग़ैर-क़ानूनी की बजाय क़ानूनी तौर पर गांजा खरीदने से क्या फायदा है?

वैन बट्सिक कहते हैं, "कैलिफोर्निया में गांजा बाज़ार पर नज़र नियामक रखता है. लाइसेंस प्राप्त दुकान से लाइसेंस प्राप्त गांजा खरीदने का मतलब है कि इसकी खेती में उच्च मानकों का ध्यान रखा गया है, शुद्धता और गुणवत्ता के लिए इसकी टेस्टिंग हुई है और इसमें घातक धातु या कीटनाशक के कण मौजूद नहीं है."

उपभोक्ताओं के लिए मामला सरल दिखता है लेकिन उत्पादकों के लिए ये पेचीदा मसला है. चूंकि पूरे देश में गांजे को क़ानूनी स्वीकृति नहीं मिली है, ऐसे में इसके व्यवसाय के लिए बैंक लोन देने से कतराती हैं.

वैन बट्सिक कहते हैं, "कई राज्यों ने गांजे के इस्तेमाल पर मुहर लगाई है और नियमन की प्रक्रिया बनाई है, लेकिन संघीय सरकार ने इसे लेकर अभी कोई फ़ैसला नहीं किया. ऐसे में गांजा उत्पाद के व्यापार में बड़े पैमाने पर निवेश को लेकर बैंकों के लिए संशय की स्थिति बनी हुई है."

व्यापार बढ़ाना भी कंपनियों के लिए भी मुश्किल का सबब है. उनके लिए राज्य के बाहर गांजा उत्पाद बेचना ग़ैर-क़ानूनी है. साथ ही इसे एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना अपराध है, भले ही दूसरे राज्य में वयस्कों के लिए गांजे के इस्तेमाल की अनुमति हो.

वैन बट्सिक कहते हैं, "यानी ओरेगॉन, कैलिफोर्निया का पड़ोसी तो है लेकिन कैलिफोर्निया का गांजा यहां नहीं बिक सकता. ऐसे में उत्पादक और विक्रेता दोनों ही गांजे को केवल राज्य के भीतर बेच सकते हैं. इसका सीधा असर व्यवसाय से होने वाले लाभ और कंपनी की ग्रोथ पर पड़ता है."

साथ ही ये ख़तरा भी रहता है कि कैलिफोर्निया के गांजा उत्पादक अब देश की बजाय दक्षिण में मेक्सिको में बाज़ार तलाशें. मेक्सिको पहला देश था जिसने राष्ट्रीय तौर पर गांजे के इस्तेमाल को क़ानूनी रूप दिया, लेकिन यहां का बाज़ार चुनौतियों भरा है.

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गांजे को क़ानूनी मान्यता देने का समर्थन करने वाले

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बाज़ार पर कब्ज़े की जंग

गुएरमो द्रापर बुसक्वेडा नाम के साप्ताहिक अख़बार ये जुड़े हैं और'मैरियुआना ऑफ़िसियो क्रोनिका डे उन एक्पेरिमेन्तो उरुग्वायो' के लेखक हैं.

वो कहते हैं कि उरुग्वे ने सबसे पहले 1974 में गांजे के निजी इस्तेमाल को मंज़ूरी दी लेकिन इसे न तो घर पर उगाने की अनुमति थी और न ही क़ानूनी तौर पर खरीदने की.

2013 में लातिन अमेरिका में ग़ैर-क़ानूनी नशे के बढ़ते व्यापार को कमज़ोर करने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति खोसे मुचीका ने इसे पूरी तरह क़ानूनी शक्ल देने का फ़ैसला किया.

गुएरमो बताते हैं, "उनका कहना था कि तस्करों से बंदूक के सहारे नहीं बल्कि डॉलर की मदद से मुक़ाबला करना चाहिए, उनके हाथों से बाज़ार छीन कर उसे क़ानूनी जामा पहनाना चाहिए. स्थानीय स्तर पर नशे की तस्करी और उससे जुड़े अपराध कम करने के लिए ऐसा किया गया और लोगों ने इसका समर्थन किया."

एक मुहिम के तहत गांजे का इस्तेमाल करने वालों के लिए क़ानूनी तौर पर बाज़ार बनाया गया ताकि इसका ग़ैर-क़ानूनी बाज़ार ख़त्म हो. इसमें आश्चर्य नहीं कि गांजा बाज़ार पर उरुग्वे सरकार का कड़ा नियंत्रण है.

गुएरमो कहते हैं, "सरकार तय करती है कि गांजे की खेती कौन करेगा, किस प्रकार के गांजे की बिक्री को इजाज़त मिलेगी और गांजा उत्पादों की क़ीमत क्या होगी. यहां तक कि दवा की दुकानों को भी पंजीकरण करना होता है. यहां गांजा का मुक्त बाज़ार नहीं है, बल्कि व्यापार के हर कदम पर सरकार का नियंत्रण है."

गांजे को क़ानूनी मान्यता देने का समर्थन करने वाले

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गांजा उत्पादकों या विक्रेताओं को इसका प्रचार करने की इजाज़त नहीं है. बिक्री के साथ-साथ इसकी खरीद को भी सरकार नियंत्रित करती है.

गुएरमो बताते हैं कि उरुग्वे में क़ानूनी तौर पर गांजा खरीदने के तीन तरीके हैं. आप घर पर गांजे की सिगरेट बनाएं, किसी उत्पादक क्लब के सदस्य बनें या फिर दवा की दुकान से ख़रीदें.

"लेकिन इन सबके लिए सरकार के पास पंजीकरण कराना होता है. आपको मेल ऑफ़िस जाकर अपना फंगरप्रिंट और पहचान पत्र देना होता है. इसके बाद ही आप दवा की दुकान से एक बार में 40 ग्राम तक गांजा खरीद सकते हैं."

इस व्यापार को लेकर उरुग्वे और अमेरिका की बैंकिंग व्यवस्था में एक जैसी समस्याएं हैं, क्योंकि यहां के बैंक, सीधे तौर पर अमेरिकी बैंक व्यवस्था से जुड़े हैं.

उरुग्वे में गांजा क़ानून बनने के बाद शुरूआती दौर में सब ठीक रहा. लेकिन बाद में उरुग्वे के बैंकों ने दवा दुकानों से कहा गांजा बेचना जारी रखा तो उन्हें बैंक की सेवाएं नहीं मिलेंगी. ये अभी भी बड़ी समस्या है.

ऐसे में ये जानना मुश्किल है कि गांजा को क़ानूनी दायरे में लाने से क्या वाकई इसकी मांग पर कोई असर पड़ा है?

गुएरमो कहते हैं, "सरकार द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि गांजा उत्पादों का बाज़ार बढ़ा है. कहा जा सकता है 2012-13 के मुक़ाबले ये बाज़ार अब अधिक पॉपुलर हो रहा है."

बीते कुछ सालों में क़ानूनी तौर पर उपलब्ध गांजे की मांग में लगातार बढ़त दर्ज की गई है. स्टाटिस्टा के अनुसार साल 2014 में ये बाज़ार 3.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था जो साल 2020 तक 20.6 अमेरिकी डॉलर का हो गया. अनुमान है कि 2024 तक ये बाज़ार 42.7 अमेरिकी डॉलर मूल्य का होगा.

उरुग्वे में गांजे के इस्तेमाल को क़ानूनी बनाने के पांच साल बाद कनाडा पहला जी-20 देश बना जिसने मनोरंजन के लिए इसके इस्तेमाल को हामी दी.

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गांजे के फूल

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बढ़ता बाज़ार, पर रुकावटें बरकरार

कनाडा के क़ानूनी गांजा बाज़ार के बारे में कैनपी ग्रोथ कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और चीफ़ प्रोडक्ट ऑफ़िसर राडे कोवाचेविच बताते हैं कि 2018 में जब कनाडा ने वयस्कों में गांजे के इस्तेमाल को क़ानूनी तौर पर मंज़ूरी दी तो प्राथमिकता थी उपभोक्ताओं की सुरक्षा.

वो कहते हैं, "सरकार यहां इसके होलसेल वितरण और ऑनलाइन बिक्री को नियंत्रित करती है. अगर मैं ऑन्टोरियो में हूं और गांजा ख़रीदने के लिए यहां की या किसी और वेबसाइट पर जाता हूं तो मुझे सबसे पहले बताना होता है कि मैं वयस्क हूं और क़ानूनी रूप से गांजे के फूल, शरबत या अन्य उत्पाद खरीद सकता हूं."

गांजा व्यापार के नियंत्रण के काम में सरकार तो शामिल है ही लेकिन इय व्यापार में यहां निजी क्षेत्र के लिए भी पैर पसारने के पर्याप्त मौक़े उपलब्ध हैं.

कोवाचेविच कहते हैं, "आज की तारीख में अलबर्टो जैसे प्रांत में शराब की जितनी दुकानें हैं उतनी ही गांजे की भी दुकानें हैं. इनमें से अधिकतर निजी दुकानें हैं, जो कई प्रकार के उत्पाद बेचते हैं."

गांजे की मात्रा को लेकर कनाडा और उरुग्वे में समान तरह के नियम हैं. कनाडा में क़ानूनी तौर पर एक बार में 30 ग्राम तक गांजा खरीदा जा सकता है.

यहां पूरे देश में गांजे को लेकर एक ही क़ानून है, ऐसे में बैंकों को ये डर नहीं कि इस व्यापार में निवेश करने पर उन्हें कोई ख़तरा हो सकता है. लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं है.

कोवाचेविच बताते हैं, "किसी और बिज़नेस की तरह गांजा व्यापार में निवेश के लिए कनाडाई कंपनियां, बैंक या फ़ॉरेन क्रेडिट कॉर्पोरेशन जैसी सरकारी संस्था से लोन ले सकती हैं, या फिर निजी संस्थानों के पास जा सकती हैं. कंपनियां स्थानीय स्टॉक एक्सचेंज, नैसडैक और यूरोपीय स्टॉक एक्सचेंज में भी लिस्ट कर सकती हैं."

कनाडा में गांजा कंपनियां आम व्यवसाय की तरह फलफूल रही हैं, लेकिन अभी भी उनके लिए सफर आसान नहीं. प्रॉफ़िट की बात तो दूर कैनपी ग्रोथ कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों को अपने खर्च में कटौती तक करनी पड़ रही है.

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गांजे के फूल

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के मिशिगन में 21 साल से अधिक की उम्र वालों के लिए मनोरंजन के लिए गांजे की बिक्री को क़ानूनी मान्यता दीए जाने के बाद एक दुकान पर गांजे के फूलों की बिक्री

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर नज़र

शार्लोट बॉयर हैनवे एसोसिएट्स में हेड ऑफ़ कंसल्टिंग हैं और गांजा कंपनियों को यूरोप में क़ानूनी व्यापार के बारे में सलाह देती हैं.

वो कहती हैं कि 2018 में जब कनाडा ने गांजे के इस्तेमाल को क़ानूनी मान्यता देने का फ़ैसला किया तो उत्पादक और निवेशक दोनों में खासा उत्साह देखने को मिला. नब्बे के डॉक कॉम बूम की तरह गांजा कंपनियों के शेयर तेज़ी से उछले, लेकिन जल्द ही मुश्किलें सामने आने लगीं.

वो कहती हैं कि इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि कई देश गांजे को लेकर नियमों में ढील नहीं देना चाहते. 2020 में संयुक्त राष्ट्र कमिशन ऑन नार्कोटिक ड्रग्स ने गांजे को ख़तरनाक और अत्यधिक नशे की लत वाली सूची से निकाल दिया, लेकिन इसके नॉन-मेडिकल और नॉन-साइंटिफ़ेक इस्तेमाल को अवैध कैटगरी में ही रखा.

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत सदस्य देश गांजे के इस्तेमाल को क़ानूनी मान्यता नहीं दे सकते.

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शार्लोट बताती हैं, "जिन सदस्य देशों ने मनोरंजन के लिए गांजे को क़ानूनी तौर पर इजाज़त दी है वो एक तरह से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं. उनके लिए एक तरह का संकट पैदा हो गया है और उन्हें संगठन से अपनी सदस्यता वापस लेनी पड़ सकती है."

उत्तर और दक्षिण अमेरिका इस मुद्दे का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यूरोप में फिलहाल इसे लेकर बहुत कुछ नहीं किया जा रहा.

नीदरलैंड्स में कॉफी की कुछ दुकानों में क़ानूनी तौर पर गांजा मिलता है, लेकिन ये गांजा उन्हें ब्लैक मार्केट से लाना होता है क्योंकि गांजे की खेती यहां अवैध है. इस तरह के नियम बाज़ार के लिए रुकावटें पैदा करते हैं.

शार्लोट कहती हैं, "ऐसा लगता है कि कंपनियां यूरोपीय बाज़ार में प्रवेश करना चाहती हैं लेकिन यहां अधिकतर देशों में मनोरंजन के लिए गांजे के इस्तेमाल पर मनाही है. कंपनियां चाहती हैं कि उनका बाज़ार तेज़ी से बढ़े लेकिन सख्त नियमों के कारण मुश्किलें ज़्यादा हैं."

तम्बाकू और शराब की कंपनियां गांजे के व्यापार में भी हाथ आज़माना चाहती हैं. उन्हें सरकारी नियमों के दायरे और ऐसे बाज़ारों में काम करने का अनुभव है जो बेहद नियंत्रित हैं. लेकिन ऐसा नहीं कि उनके लिए राह आसान है.

वीडियो कैप्शन, अफगानिस्तान: नशे में डूबता बचपन

काफी कुछ इस पर निर्भर करता है कि क़ानूनी गांजा बाज़ार किस तरह ग़ैर-क़ानूनी बाज़ार के उपभोक्ताओं को खुद तक लाए और नए उपभोक्ताओं तक पहुंचे.

शार्लोट कहती हैं, "उदाहरण के तौर पर आप कनाडा के गांजा बाज़ार को देख सकते हैं. ब्लैक मार्केट के मुक़ाबले यहां का क़ानूनी बाज़ार उपभोक्ताओं के लिए कई नए उत्पाद ले कर आया है. उत्पादक गांजे की गुणवत्ता का ध्यान रखते हैं और इसकी क़ीमत सस्ती रखते हैं. इस कारण यहां ब्लैक मार्केट पर निर्भर करने वाले भी क़ानूनी बाज़ार की तरफ आकर्षित हुए हैं."

ये तो हुई कनाडा की बात लेकिन क्या पूरी दुनिया गांजे के क़ानूनी बाज़ार के लिए तैयार है?

शार्लोट बॉयर कहती हैं कि इस दिशा में कई देश काम कर रहे हैं. नीदरलैंड्स में सरकार कुछ गांजा उत्पादकों के साथ मिलकर ये जानने की कोशिश कर रही है कि क्या गांजे का नियंत्रित क़ानूनी व्यापार संभव है. लक्समबर्ग इसे जल्द क़ानूनी मान्यता देने के क़रीब है. स्विट्ज़रलैंड और इसराइल भी इसे लेकर पायलट योजनाओं पर काम कर रहे हैं.

वहीं दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देश केवल गांजे के मेडिकल इस्तेमाल को अनुमति देते हैं.

शार्लोट कहती हैं, "कई देश इसकी खेती और मेडिकल इस्तेमाल को इजाज़त देते हैं लेकिन मनोरंजन के लिए इसके इस्तेमाल पर पाबंदी लगाते हैं. ये देश अब गांजा उगा कर इसे क़ानूनी तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बेचने के रास्ते तलाश रहे हैं."

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गांजे का पौधा

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तो क्या क़ानूनी तौर पर गांजा व्यापार अब वैश्विक स्तर पर पैर जमा सकता है?

अमेरिका के कई राज्य, मेक्सिको, उरुग्वे और यूरोप के गिने-चुने देश इसे क़ानूनी मान्यता देते हैं. कई देशों में इस व्यापार में निवेश भी बढ़ रहा है.

इसी साल फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने गांजे को क़ानूनी मान्यता देने की इशारा किया था और कहा था, "ड्रग्स के इस्तेमाल के लिए किसी को जेल नहीं भेजा जानी चाहिए. ऐसे मामले में उन्हें ड्रग रीहैबिलिटेशन सेंटर भेजा जाना चाहिए."

लेकिन सभी की निगाहें अमेरिका फिलहाल पर टिकी हैं कि वो आगे क्या कदम लेता है. क्या वो नया क़ानून ला कर देश के सभी राज्यों में गांजे के इस्तेमाल पर क़ानूनी मुहर लगा देगा? अगर ऐसा हुआ तो उसके इस फ़ैसले का बड़ा असर पूरी दुनिया और भविष्य में गांजे के व्यापार पर पड़ेगा.

गांजे का विरोध करने वाले कहते हैं कि ये प्राकृतक तौर पर उपलब्ध है इसलिए इसका व्यापार दीर्घकालिक हो सकता है. उनकी चिंता है कि कहीं ऐसा न हो कि शराब की तरह गांजा नशे की लत का कारण बन जाए.

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