भारत में जी20 सम्मेलन देख पाकिस्तानी बोले – ‘यहां कहां आ गए हम?’

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- Author, शुमाइला जाफरी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद
भारत प्रशासित कश्मीर में इस साल मई महीने में जी 20 शिखर सम्मेलन के तहत टूरिज़्म के मुद्दे पर बैठक होना पाकिस्तान के सोशल मीडिया से लेकर पारंपरिक मीडिया में चर्चा का विषय बना था.
इस मुद्दे पर सबसे पहली प्रतिक्रियाएं पाकिस्तान सरकार की ओर से आईं. तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की ओर से इस पर पहली प्रतिक्रियाएं आईं.
उन्होंने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पहुंचकर मुज़फ्फराबाद स्थित विधानसभा को संबोधित किया.
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “भारत जी 20 देशों के समूह की अध्यक्षता का दुरुपयोग कर रहा है.”
उन्होंने दुनिया से आग्रह किया कि वह भारत सरकार की ओर से भारत प्रशासित कश्मीर में किए जा रहे घोर मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान दे.
लेकिन इस मौके पर पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत रूप से संयमित थी.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जाहरा बलोच ने अपनी साप्ताहिक न्यूज़ ब्रीफ़िंग में भारत प्रशासित कश्मीर की स्थिति का ज़िक्र किया.
लेकिन उनका अंदाज़ सामान्य से कम आक्रामक था.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “भारत जी 20 देशों के शिखर सम्मेलन का आयोजन करते हुए वैश्विक मंच पर खुद को एक अहम देश के रूप में पेश कर रहा है. ऐसे में उसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और मानवीय क़ानूनों के तहत अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए और आईआईओजेके (कश्मीर) में भीषण मानवाधिकार उल्लंघन बंद करने चाहिए.”
मीडिया कवरेज़ से दूर रहा जी-20 सम्मेलन

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भारत में आयोजित हुआ जी 20 शिखर सम्मेलन पाकिस्तानी मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनने में कामयाब नहीं हुआ.
पाकिस्तानी मीडिया में मुख्यधारा के सभी अंग्रेजी और उर्दू अख़बारों में जी20 से जुड़ी ख़बरें फ्रंट पेज़ पर नज़र नहीं आईं.
वहीं, भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच सुर्खियों में छाया रहा.
दक्षिण पंथी उर्दू अख़बार नवा-ए-वक़्त ने अपने पिछले पन्ने पर जी 20 से जुड़ी एक ख़बर छापी.
लेकिन ये ख़बर शिखर सम्मेलन से जुड़ी गतिविधियों की जगह उन पर कश्मीरी संगठनों के विचारों पर आधारित थी.
डेली डॉन समेत दूसरे प्रकाशकों जैसे एक्सप्रेस ट्रिब्यून और द नेशन ने अपनी वेबसाइट पर अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों की ओर से भेजी गईं ख़बरों को जगह दी.
ये ख़बरें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली नहीं आने, राजघाट और भारत मंडपम में पानी भरने पर आधारित थीं.
पीएम मोदी की मेज पर भारत की नेम प्लेट लगाए जाने से लेकर शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को ढके जाने ने भी सुर्खियां बटोरीं.
कई टीवी चैनलों ने भी इस पर ख़बरें नहीं दिखाईं. और उनका एजेंडा पाकिस्तान के राजनीतिक घटनाक्रमों, आर्थिक चुनौतियां और क़ानून-व्यवस्था से जुड़े मसलों पर टिका रहा.
पाकिस्तान सरकार ने शनिवार को वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक नयी वीज़ा पॉलिसी लॉन्च की है जिसका मकसद खाड़ी देशों से आने वाले निवेश को बढ़ाना था.
ये ख़बर भी टीवी पर छाई रही.
सोशल मीडिया पर बोले लोग

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हालांकि, पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर लोगों के बीच ये मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा.
पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूज़र्स ने भारत और पाकिस्तान के बीच तुलना करते हुए अपनी समझ और नज़रियों के मुताबिक़ अपने देश के हालातों पर निराशा व्यक्त करते हुए बयान दिए जैसे - पाकिस्तान में आख़िर क्या ग़लत हुआ है.
कुछ एक्स यूज़र्स ने सवाल किया कि जब भारत एक के बाद दूसरी वैश्विक बैठक आयोजित कर रहा है तो पाकिस्तानी कहां खड़े हैं.
कुछ लोगों ने ऐतिहासिक विरोधाभासों का ज़िक्र करते हुए अपने देश की दुर्दशा के लिए सेना को ज़िम्मेदार ठहराया.
एक एनालिस्ट उमर अज़हर ने एक्स पर लिखा ‘नवाज़ (शरीफ़) दो बार भारत के साथ सीमाएं खोलना चाहते थे, व्यापार करना चाहते थे, पाकिस्तान को क्षेत्रीय एवं व्यापक व्यापार के लिए ट्रांसपोर्ट हब बनाना चाहते थे. सेना ने दो बार उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. साल 1999 में कारगिल और 2014/15 में इमरान ख़ान की ओर से 'मोदी का यार गद्दार' प्रोपेगेंडा चलाया गया. वहीं, भारतीय लोग तेज गति से आगे बढ़ रहे थे.”
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अमेरिका में तैनात रहे पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने जी 20 शिखर सम्मेलन पर प्रकाशित लेख पर अपने विचार साझा किए.
अपने एक्स अकाउंट पर उन्होंने लिखा – 'भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 20 के आयोजक होते हुए भारत को ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनाना चाहते थे.'
हक़्क़ानी ने लिखा है कि भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा आबादी वाले मुल्क और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के नाते उस विशाल जन समुदाय के हितों को प्रतिबिंबित करना चाहता है जो ग्लोब के उत्तरी औद्योगिक हिस्से में नहीं रहते.
उन्होंने ये भी कहा कि भारत ने बढ़त हासिल करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी जगह मजबूत कर ली है.
पाकिस्तान के इस पूर्व राजदूत ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप को जोड़ने के लिए प्रस्तावित आर्थिक गलियारे का नक्शा शेयर करते हुए पाकिस्तानियों से कहा कि वे अपने अंदर झांककर देखें कि पाकिस्तान इसका हिस्सा क्यों नहीं है और सोचें कि पाकिस्तान अपनी नीतियां कैसे बदल सकता है.
उन्होंने कहा, “भाषण, नारेबाजी और शपथ लेने से काम नहीं बनेगा.”
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पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज इन्फॉरमेशन नामक एक्स यूज़र ने हक़्क़ानी की ओर से शुरू की गई चर्चा को संतुलित करने की कोशिश की.
उनके एकाउंट से हुई एक पोस्ट में कहा गया कि "पाकिस्तान को अब अपने सफर पर ध्यान देना है. हमारे पास भी अच्छे विकल्प हैं जिनमें ईरान को सीधे रास्ते के साथ-साथ ओमान के लिए समुद्री रास्ता है. ग्वादर पोर्ट और इसका काम भी पूरा होने वाला है.”
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आत्ममंथन का वक़्त

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जी20 शिखर सम्मेलन पर राजनीतिक टीकाकार इम्तियाज़ गुल के विचारों पर पाकिस्तानी अवाम ने अधिक ध्यान नहीं दिया क्योंकि वे तो अपने मसलों में उलझे हुए थे.
पाकिस्तान आर्थिक मुसीबतों के अलावा देश के कुछ हिस्सों में आतंकवाद का भी सामना कर रहा है. बहरहाल इम्तियाज़ गुल ने कहा कि ये लम्हा पाकिस्तान के लिए आत्ममंथन करने का है.
उन्होंने कहा, “हम ‘भारत को कुचल डालो’ जैसे नारे सुनते हुए बड़े हुए हैं. हमने उस देश को नीचा दिखाने की कोशिश की और अब देखिए ये देश कहां है और हम कहां हैं.”
“वो पाकिस्तानी जो आत्ममंथन करना चाहते हैं और जो अपने देश को तरक्की करता देखना चाहते हैं वे आज उदास हैं. इसलिए नहीं कि भारत ने एक ग्लोबल समिट होस्ट की है बल्कि इसलिए कि पाकिस्तान अब भी दीर्घकालीन योजनाओं पर काम नहीं कर पा रहा है. उनका मानना है कि विज़न की कमी के कारण आज पाकिस्तान कहीं नहीं खड़ा है.”
रफ़ीउल्लाह और मोहम्मद हुसैन इस्लामाबाद की क़ायदे आज़म यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के छात्र हैं.
उनका साफ़ कहना है कि पाकिस्तान को भारत से बहुत कुछ सीखना है.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि 1990 के दशक में पाकिस्तान एशियन टाइगर बनने के ख्वाब देख रहा था लेकिन जल्दी ही अपनी राह भूल गया.
उनका कहना है कि भारत ने आईटी और अन्य सेक्टरों में काफ़ी रिसर्च की है और अब ये दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
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