अमिताभ कांत कौन हैं और उनकी टीम की क्यों हो रही है तारीफ़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमिताभ कांत

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी होने के बाद जी-20 में भारत के शेरपा अमिताभ कांत को बधाई दी.

नई दिल्ली में संपन्न जी-20 सम्मेलन को वैश्विक राजनीति और कूटनीति में भारत की कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है.

सम्मेलन से पहले अंतिम समय तक कहा जा रहा था कि यूक्रेन युद्ध जैसे जटिल मुद्दे की वजह से सभी देशों में साझा बयान पर सहमति बनना मुश्किल है.

लेकिन सम्मेलन के पहले ही दिन भारतीय प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी किया जिसमें यूक्रेन युद्ध के मुद्दे को शामिल किया गया और सभी सदस्य देशों ने इस पर सहमति दी.

भारतीय कूटनीति की इस कामयाबी का हीरो अमिताभ कांत को बताया जा रहा है.

अमिताभ कांत ने सम्मेलन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, “समूचे जी-20 सम्मेलन का सबसे जटिल काम था भू-राजनैतिक (यूक्रेन-रूस) हिस्से पर आम सहमति बनाना. लगातार 200 घंटे चली वार्ता, 300 द्विपक्षीय बैठकों और 15 मसौदों के बाद ऐसा संभव हो सका. इसमें दो शानदार अधिकारियों ने मेरी मदद की ये हैं नागराज नायडू काकानूर और ईनम गंभीर.”

यूक्रेन युद्ध एक जटिल मुद्दा है. इस विषय पर दुनिया विभाजित है. अमेरिका, ब्रिटेन और फ़्रांस सहित पश्चिमी देश खुले तौर पर यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं जबकि रूस, चीन और उनके कुछ समर्थक देश एक तरफ़ हैं. भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर तटस्थ रवैया अपनाया है.

पिछले साल बाली में हुए जी-20 के घोषणा पत्र में यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की आलोचना की गई थी. रूस और चीन इससे नाराज़ हो गए थे.

ऐसे में भारत के सामने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना और इस आर्थिक फोरम के एजेंडे पर यूक्रेन युद्ध के मुद्दों को हावी ना होने देने की चुनौती थी.

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जी-20 में भारत के शेरपा अमिताभ कांत और उनकी टीम ने इस जटिल मुद्दे को कुछ इस तरह सुलझाया है कि जी-20 के सभी देश इससे ख़ुश हैं. सम्मेलन के घोषणा पत्र में जहां रूस का नाम नहीं है वहीं युद्ध प्रभावित यूक्रेन के मानवीय संकट का ज़िक्र है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणा पत्र का श्रेय अमिताभ कांत की टीम को देते हुए कहा था, “हमारी टीम की मेहनत की वजह से नई दिल्ली जी-20 लीडर्स समिट में आम सहमति बन गई है.”

मोदी ने कहा, “मैं अपने शेरपा और मंत्रियों को मुबारकबाद देता हूं जिन्होंने बहुत मेहनत की और इस काम को संभव किया.”

वहीं रविवार को एक प्रेस वार्ता में अमिताभ कांत ने कहा, “जब हमने अध्यक्षता शुरू की थी तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत की अध्यक्षता समावेशी, निर्णायक और कार्य आधारित होनी चाहिए. नई दिल्ली घोषणा पत्र में 81 पैराग्राफ़ हैं, सभी पैराग्राफ़ पर सभी देशों की सौ प्रतिशत सहमति है.”

सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं बल्कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी शेरपा अमिताभ कांत की तारीफ़ की है.

शशि थरूर ने एक पोस्ट में कहा, “अमिताभ कांत, शाबाश. ऐसा लगता है कि जब आपने आईएएस चुना तब आईएफ़एस ने एक शानदार राजनयिक गंवा दिया. रूस और चीन के साथ वार्ता पिछली रात जाकर ही पूरी हुई.”

थरूर ने कहा, “सब की सहमति से दिल्ली घोषणा पत्र जारी हुआ. ये जी-20 में भारत के लिए गर्व का पल है.”

कौन हैं अमिताभ कांत?

मैक्रों के साथ अमिताभ कांत

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उत्तर प्रदेश के बनारस में पैदा हुए अमिताभ कांत 1980 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आएईएस) अधिकारी हैं.

वो केरल के कोझीकोड के ज़िलाधिकारी रहे हैं. इसके अलावा केरल सरकार के पर्यटन विभाग के सचिव भी रहे हैं.

अमिताभ कांत भारत सरकार के पर्यटन विभाग के संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के वो भारत में ग्रामीण पर्यटन के नेशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी रह चुके हैं.

जून 2022 तक वो वो नीति आयोग के चेयरमैन थे. छह साल नीति आयोग का चेयरमैन रहने के बाद उन्हें जी-20 में भारत का शेरपा नियुक्त किया गया था.

अमिताभ कांत ने भारत सरकार के कार्यक्रमों स्टार्ट-अप इंडिया, मेक इन इंडिया, इंक्रेडिबिल इंडिया में भी अहम भूमिका निभाई है.

अमिताभ कांत ने 'ब्रांडिंग इंडिया- एन इनक्रिडिबल स्टोरी' और ‘मेड इन इंडिया’ समेत ने कई किताबें भी लिखी हैं. इन किताबों ने उन्हें चर्चा में ला दिया था.

भारत के जी-20 की अध्यक्षता मिलने के बाद अमिताभ कांत को भारत की तरफ़ से शेरपा नियुक्त किया गया था. अमिताभ कांत से पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जी-20 में भारत के शेरपा थे.

जी-20 में शेरपा की अहम ज़िम्मेदारी होती है. इनका सबसे अहम काम जी-20 सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करना और बातचीत करना होता है.

शेरपा ही सदस्य देशों के साथ बैठकें करते हैं, जी-20 के काम की जानकारी साझा करते हैं और आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनवाते हैं.

अमिताभ कांत की टीम

अमिताभ कांत ने ये फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है

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जी-20 के सफल आयोजन और नई दिल्ली घोषणा पत्र का श्रेय अमिताभ कांत और उनकी टीम को दिया जा रहा है.

भारतीय मीडिया में इन चार अधिकारियों की ख़ासतौर पर चर्चा हो रही है.

नागराज नायडू काकनूर

1998 बैच के आईएएफ़एस अधिकारी नागराज नायडू काकनूर भारत के जी-20 सचिवालय में संयुक्त सचिव हैं.

चार बार चीन में तैनात रहे काकनूर धाराप्रवाह चीनी भाषा बोलते हैं. इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र में भी काम किया है.

काकनूर के पास अमेरिका के फ्लेचर इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिप्लोमैसी से क़ानून और कूटनीति में मास्टर डिग्री ली है.

जी-20 में वो भारत की तरफ़ से एंटी-करप्शन, संस्कृति, विकास, डिजीटल इकोनॉमी, शिक्षा और पर्यटक पर कार्यकारी समूह का हिस्सा थे.

ईनम गंभीर

भारतीय विदेश सेवा की साल 2005 की अधिकारी ईनम गंभीर धाराप्रवाह स्पेनिश भाषा बोलती हैं. वो भारत के जी-20 सचिवालय में संयुक्त सचिव हैं.

ईनम गंभीर भारत की तरफ़ से कई देशों में काम कर चुकी हैं. वो पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान से जुड़े मुद्दों की विशेषज्ञ हैं.

उनके पास इंटरनेशनल सिक्योरिटी और गणित में मास्टर्स की डिग्री है. ईनम गंभीर अंग्रेज़ी, हिंदी और स्पेनिश भाषा में कवितायें भी लिखती हैं.

आशीष कुमार सिन्हा

जी-20 सचिवालय में संयुक्त सचिव आशीष कुमार सिन्हा 2005 के आईएफ़एस अधिकारी हैं. वो नैरोबी में भारतीय दूतावास में तैनात रहे हैं.

सिन्हा संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में भी तैनात रहे हैं और पाकिस्तान के मुद्दों पर काम करने के विशेषज्ञ हैं. सिन्हा स्पैनिश भाषा भी बोलते हैं. सिन्हा भारत की शेरपा टीम के अहम सदस्य हैं.

अभय ठाकुर

1992 बैच के आईएफ़एस अधिकारी अभय ठाकुर, अमिताभ कांत के सहायक सचिव हैं. इंजीनियरिंग पढ़ाई करने के बाद राजनयिक बने अभय ठाकुर अमिताभ कांत की टीम में हर वार्ता का हिस्सा रहे हैं.

ठाकुर मॉस्को, लंदन, हो ची मिन सिटी में भारतीय दूतावासों में तैनात रहे हैं. वो नाइजीरिया और मॉरीशस में भारत के हाई कमिश्नर भी रहे हैं.

शेरपा शब्द कहां से आया?

हिमालय

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इमेज कैप्शन, शेरपा पर्वतारोहियों को हिमालय पर्वत के शिखर तक ले जाने के लिए भी जाने जाते हैं.

दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के संगठन जी-20 में सभी सदस्य देश अपनी तरफ़ से एक शेरपा नियुक्त करते हैं जिसका काम संगठन की बैठकों और वार्ताओं में हिस्सा लेना होता है.

ये शेरपा जी-20 की बैठकों में अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं. शेरपा सम्मेलन में अपने देश के नेताओं की मदद करते हैं और जी-20 में अपने देश के एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं.

शेरपा का काम अपने देश के नीतिगत फ़ैसलों से बाक़ी देशों को अवगत कराना भी होता है.

ये तो हुई जी-20 के शेरपा की बात लेकिन ये शब्द आया है नेपाल और तिब्बत की पहाड़ियों में रहने वाले एक समुदाय के नाम से.

शेरपा समुदाय के लोगों को उनकी जीवटता और मुश्किल स्थिति में साहस के लिए जाना जाता है.

हिमालय के दुर्गम इलाक़ों में रहने वाले इस समुदाय को इसकी बहादुरी और जीवटता के लिए भी जाया जाता है.

शेरपा पहाड़ पर चढ़ने के अपने कौशल और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वालों की मदद करने के लिए भी जाने जाते हैं.

शेरपा पर्वतारोहियों को शिखर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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