जी-20 में मोदी और बाइडन की मुलाक़ात, क्या मीडिया को सवाल पूछने का मिलेगा मौक़ा?

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जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के राष्ट्राध्यक्षों का भारत आना शुरू हो गया है.
नई दिल्ली में नौ और 10 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में जी-20 समिट होने जा रहा है.
शुक्रवार शाम अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन दिल्ली पहुँच रहे हैं.
राष्ट्रपति बाइडन के लिए पीएम मोदी शुक्रवार की रात प्राइवेट डिनर होस्ट कर रहे हैं. इसी दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी होगी.
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने इस बारे में गुरुवार को कहा था, ''ये मुलाक़ात प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर होगी. इस लिहाज़ से ये भारत की सामान्य द्विपक्षीय यात्रा नहीं हैं जहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक होती है और सारा कार्यक्रम होता है.''
क्या मुलाक़ात की तस्वीरें भी जारी होंगी?
इस बारे में पूछ जाने पर सुलिवन कहते हैं- बिल्कुल.
अमेरिका में ये परंपरा रही है कि जब राष्ट्रपति किसी नेता को होस्ट करते हैं तो तस्वीरें खिंचवाई जाती हैं.
अमेरिका में इसे पूल स्प्रे कहते हैं.
मोदी और बाइडन की मुलाक़ात की तस्वीरें तो जारी होंगी, लेकिन मुलाक़ात के बाद क्या दोनों नेता पत्रकारों के सवालों का सामना करेंगे?
इसकी काफ़ी कम संभावना है.
अमेरिकी की प्रमुख मीडिया संस्था सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ने जी-20 सम्मेलन में पत्रकारों के सवाल पूछे जाने की कई गुजारिशों को मानने से इनकार कर दिया है.
मीडिया के बारे में अमेरिकी प्रशासन ने क्या कहा

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व्हॉइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी करीन ज्यां-पियरे ने गुरुवार को अपनी ब्रीफ़िंग में कहा, ''जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने गए राष्ट्रपति तक मीडिया की पहुँच के लिए प्रशासन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहा है.''
सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुलिवन, कम्युनिकेशन डायरेक्टर बेन लाबोल्ट, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फ़िनर समेत कई अधिकारियों ने भारत में अपने समकक्षों से इस बारे में बात की.
लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी.
करीन ज्यां-पियरे बोलीं, ''हमने भारत सरकार से संपर्क किया. कई बार गुज़ारिशें कीं और कई मोर्चों से पूछा गया ताकि इस दौरे पर सिर्फ़ राष्ट्रपति ही न जाएँ बल्कि आप मीडिया के लोग भी जाएँ. लोगों ने इस बारे में काफ़ी मेहनत की.''
वो बोलीं, ''हम अपनी तरफ़ से प्रयास कर रहे हैं, अब इस बारे में क्या जवाब देना है, ये भारत सरकार पर है.''
करीन ज्यां-पियरे ने कहा, ''देखिए राष्ट्रपति के आदेश पर हम सब अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिशें कर रहे हैं ताकि मीडिया को अनुमति दी जा सके और हम इस दिशा में काम करते रहेंगे.''
भारत नहीं वियतनाम में सवालों का जवाब देंगे बाइडन

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दिल्ली में जी-20 सम्मेलन के बाद रिपोर्टर्स के सवाल लेने की बजाय बाइडन वियतनाम में ऐसा करेंगे.
बाइडन भारत के बाद वियतनाम के दौरे पर जा रहे हैं.
व्हॉइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति वहाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और वहाँ रिपोर्टर्स से सवाल लेना आसान रहेगा.
अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से बताया गया, ''वियतनाम में प्रेस कॉन्फ्रेंस करना ज़्यादा आसान रहेगा और इससे कुछ बदलेगा नहीं क्योंकि तब सिर्फ राष्ट्रपति अकेले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों का जवाब दे रहे होंगे.''
जेक सुलिवन ने बताया कि मोदी से मुलाक़ात के बाद इस बात की संभावनाएं कम ही हैं कि बाइडन किसी और राष्ट्रप्रमुख से औपचारिक तौर पर मिलेंगे.
सुलिवन ने कहा, "मैं किसी तरह की द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि नहीं कर सकता. ईमानदारी से कहूँ तो ऐसा नहीं होगा. क्योंकि शेड्यूल इस तरह से बनाया गया है कि इसकी संभावनाएँ कम ही हैं.
सुलिवन बताते हैं, ''मुझे लगता है कि दिल्ली में 48 घंटों के दौरान बाइडन जिन नेताओं से मिलेंगे, वो अनौपचारिक मुलाक़ात ही होगी. मेरे पास द्विपक्षीय वार्ता को लेकर आज कोई सूचना नहीं है.''
पीएम मोदी और मीडिया के सवाल

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इसी साल जब पीएम मोदी बाइडन के निमंत्रण पर अमेरिका गए थे, तो वहाँ उन्होंने सिर्फ़ अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया था.
पीएम मोदी ने जवाब दिया था, ''मैं सवाल से हैरान हूँ. लोकतंत्र हमारे डीएनए में है. भारत में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है.''
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्टर सबरीना सिद्दीक़ी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने के बाद ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय की ओर से इस बारे में पूछे जाने पर कहा गया था, ''हमें उत्पीड़न की जानकारी है. यह अस्वीकार्य है. हम पत्रकारों के उत्पीड़न की निंदा करते हैं. ये पत्रकार चाहे कहीं के भी हों या किसी भी स्थिति में हों. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है. यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के भी ख़िलाफ़ है.''
मीडिया के सवाल ना लिए जाने पर पीएम मोदी अक्सर चर्चा में रहते हैं.
प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी ने भारत में एक भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की है. इसे लेकर विपक्षी दल भी पीएम मोदी को घेरते रहे हैं.
मई 2022 में पीएम मोदी यूरोप के दौरे पर गए थे. इस दौरे पर पीएम मोदी के सवाल ना लेने की चर्चा भी मीडिया रिपोर्ट्स में हुई थी.
फ़्रांस 24 की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने द्विपक्षीय समझौतों के बाद जर्मनी के चांसलर से प्रेस को सवाल करने का मौक़ा नहीं दिया.
रिपोर्ट में ये भी लिखा गया था कि साल 2014 में पीएम बनने के बाद मोदी ने भारत में एक भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की है और जर्मनी में भी पत्रकारों के सवाल न लेने का फ़ैसला भारतीय प्रतिनिधिमंडल के आग्रह पर ही लिया गया.
फ़्रांस 24 ने जर्मन अधिकारियों के हवाले से ये दावा किया था.
दावे की पुष्टि के लिए वेबसाइट ने जर्मन ब्रॉडकास्टर डायचे वेले से चीफ़ इंटरनेशनल एडिटर के उस ट्वीट का भी ज़िक्र किया है, जिसमें उन्होंने बताया था कि भारत और जर्मनी के नेता प्रेस को सिर्फ़ 14 समझौतों के बारे में बताएँगे और भारत के आग्रह पर पत्रकारों को सवाल नहीं करने दिया जाएगा.
भारत निकलने से पहले बाइडन ने क्या कहा?

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राष्ट्रपति बाइडन भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और शुक्रवार शाम दिल्ली पहुँच जाएँगे.
नई दिल्ली रवाना होने से पहले बाइडन ने कहा, ''मैं जी-20 में शामिल होने के लिए निकल रहा हूँ. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए बना ये समूह अमेरिकी नागरिकों के हितों, विकासशील देशों की मदद पर केंद्रित है.''
बाइडन ने कहा, ''जी-20 का ये मंच बताता है कि वो समाधान दे सकता है और हम उसके लिए प्रतिबद्ध हैं.''
कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता जब होगी तो उसमें हाल के दिनों में जियो पॉलिटिक्स पर भी बात होगी.
दोनों नेताओं की मुलाक़ात से पहले भारत के औपचारिक तौर पर MQ9B ड्रोन ख़रीदने की गुज़ारिश अमेरिकी सरकार से कर दी है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, दोनों देशों के बीच में साल के आख़िर तक समझौता हो सकता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से कुछ दिन पहले रिपोर्ट किया था कि रक्षा मंत्रालय की ओर से 'हंटर किलर' कहे जाने वाले 31 एयरक्राफ्ट सिस्टम को ख़रीदने की चिट्ठी भेजी है.
इस चिट्ठी में मोबाइल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम और दूसरे उपकरणों को भी मंगाने की बात कही गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अगले एक-दो महीने में क़ीमत के साथ भारत को जवाब दे सकता है.
बाइडन मोदी मुलाकात की अमेरिकी मीडिया में चर्चा

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पीएम मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच द्विपक्षीय वार्ता को लेकर अमेरिकी मीडिया में भी चर्चा है.
वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 2021 के बाद से बाइडन और मोदी एक दर्जन से ज़्यादा बार आमने-सामने और वर्चुअली मिल चुके चुकी हैं. दोनों देशों की कुछ साझी चिंताएँ हैं, इसलिए दोनों की क़रीबी लगातार बढ़ रही है.
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, ''चीन की बढ़ती आक्रामकता, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक सप्लाई चेन पर दोनों नेताओं की बात हो सकती है. पीएम मोदी ने इस समिट में अपनी जमकर ब्रैंडिंग की है. दिल्ली में मोदी की हाईवे से लेकर एयरपोर्ट तक बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हैं. बाइडन एक सेंटर-लेफ्ट डेमोक्रेट हैं और मोदी एक रूढ़िवादी हिन्दू राष्ट्रवादी नेता हैं. दोनों नेताओं में वैचारिक समानता शायद ही है. लेकिन इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती आक्रामकता के कारण दोनों नेताओं के बीच सहयोग बढ़ा है.''
भारत में होने वाले जी-20 सम्मेलन में मोदी की बाइडन से मुलाक़ात से पहले एक और संभावित मुलाक़ात चर्चा में रही थी.
ये मुलाक़ात शी जिनपिंग और बाइडन के बीच होनी थी.
लेकिन जब जिनपिंग ने भारत नहीं आने का फ़ैसला किया तो ये मुलाक़ात खटाई में पड़ गई. बाइडन ने जिनपिंग के भारत ना आने को निराशाजनक बताया था.
हालाँकि बाइडन ने कहा था कि वो जल्द जिनपिंग से मुलाक़ात करेंगे.
ये मुलाक़ात कब और कहाँ होगी, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
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