भारत में रूसी राजदूत ने अपने विदेश मंत्री पर ऐसा क्या कहा कि बोलना पड़ा, सॉरी

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भारत में रूस के राजदूत डेनिस एलिपोफ़ ने रविवार को रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ को लेकर दिए अपने बयान पर खेद जताया है.
रूसी राजदूत ने कहा है कि उनकी टिप्पणी का संबंध रूसी विदेश मंत्री लावरोफ़ की लोकप्रियता से था.
शुक्रवार को एक पत्रकार ने एलिपोफ़ से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के जी-20 समिट में नई दिल्ली नहीं आने और रूसी महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को लेकर सवाल पूछा था. पत्रकार ने कहा था कि अगर पुतिन भारत आते तो अच्छा रहता.
इस सवाल के जवाब में एलिपोफ़ ने कहा, ''हालाँकि लावरोफ़ विवाहित हैं. लेकिन वह भारत जी-20 समिट में आ रहे हैं. लेकिन वह वुमनाइजर हैं.'' रूसी राजूदत ने यह टिप्पणी फॉरन कॉरसपॉन्डेंट क्लब ऑफ साउथ एशिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की थी.
रविवार को इस टिप्पणी के लिए रूसी राजदूत ने ट्विटर पर माफ़ी मांगते हुए कहा, ''मुझे खेद है कि मेरे शब्द कुछ लोगों को अपमानजनक लगे होंगे. मेरा कहने का मतलब बस इतना था कि लावरोफ़ महिलाओं और पुरुषों दोनों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं. रूस विदेश मंत्री अपनी समझ, करिश्मा और बौद्धिकता के लिए सराहे जाते हैं.''
इस हफ़्ते नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह जी-20 का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समिट में शामिल होने नहीं आ रहे हैं. पुतिन पिछले साल इंडोनेशिया के बाली में आयोजित जी-20 समिट में भी शामिल नहीं हुए थे.
कहा जा रहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत नहीं आ रहे हैं. हालांकि शी जिनपिंग पिछले महीने ही ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दक्षिण अफ़्रीका गए थे.
भारत में जी-20 समिट
भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को होने जा रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान समेत दुनिया के शीर्ष नेता शामिल होंगे.
लेकिन इस समय विश्व राजनीति का केंद्र बने हुए और दुनिया के विवादित नेताओं में शुमार व्लादिमीर पुतिन दिल्ली नहीं आएंगे.
पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोफ़ ने रूस के मीडिया से बात करते हुए कहा है कि पुतिन दिल्ली नहीं जा रहे हैं.
पेस्कोफ़ ने कहा, “पुतिन दिल्ली में होने जा रहे जी-20 सम्मेलन में जाने की योजना नहीं बना रहे हैं. अभी यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान ही सबसे अहम है.”
हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब पुतिन जी-20 शिखर सम्मेलन से नदारद होंगे. साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में जी-20 सम्मेलन में पुतिन को नहीं बुलाया गया था.
यूक्रेन युद्ध के बाद से पुतिन ने अपने विदेशी दौरे सीमित किए हैं. हालांकि जून 2022 में उन्होंने ताजीकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान का दौरा किया था.
इसके अलावा पिछले साल पुतिन एससीओ समिट में उज़्बेकिस्तान गए थे और वहां उनकी मुलाक़ात पीएम मोदी से भी हुई थी. इसी मुलाक़ात में पीएम मोदी ने पुतिन से कहा था कि यह युद्ध का दौर नहीं है.
पुतिन क्यों नहीं आ रहे हैं?

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इसी साल 17 मार्च को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने पुतिन के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वॉरंट जारी किया था. ये वॉरंट अवैध रूप से यूक्रेन के बच्चों को रूस लाने के आरोप में जारी किया गया था.
पुतिन के अलावा रूस के बाल अधिकार आयुक्त एलेक्सीयेवना लवोवा बेलोवा के ख़िलाफ़ भी जारी हुआ था.
हालांकि यूक्रेन और रूस दोनों ही अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) का हिस्सा नहीं हैं लेकिन 2015 में यूक्रेन अपनी भूमि पर घटित अपराधों के लिए आईसीसी का अधिकार क्षेत्र स्वीकार कर लिया था.
मार्च 2022 में अभियोजक करीम ख़ान ने मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों, कथित नरसंहार के आरोपों की जांच शुरू कर दी थी.
दक्षिण अफ़्रीका आईसीसी का सदस्य है, ऐसे में पुतिन अगर जोहानिसबर्ग जाते तो दक्षिण अफ़्रीका को उनकी गिरफ़्तारी के प्रयासों में सहयोग करना पड़ सकता था.
दरअसल, जो 123 देश आईसीसी के सदस्य हैं, वो गिरफ़्तारी वॉरंट को लागू कराने में सहयोग करने के लिए बाध्य हैं.
लेकिन जहाँ तक भारत की बात है, भारत आईसीसी के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य नहीं है. भारत आईसीसी का सदस्य नहीं है.
उदाहरण के तौर पर सूडान के पूर्व राष्ट्र प्रमुख ओमर हसन अल बशीर ने साल 2015 में भारत-अफ़्रीका फ़ोरम में हिस्सा लेने के लिए भारत की यात्रा की थी. तब आईसीसी ने भारत से उनकी गिरफ़्तारी में सहयोग करने के लिए कहा था लेकिन भारत ने जवाब नहीं दिया था.
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले ये आशंका ज़ाहिर की गई थी कि अगर पुतिन दक्षिण अफ़्रीका जाएंगे तो उनकी गिरफ़्तारी की मांग उठ सकती है. लेकिन भारत ऐसा करने के लिए ना बाध्य है और ना ही उस पर कोई दबाव था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुतिन भारत क्यों नहीं आ रहे हैं?
पुतिन के प्रवक्ता ने कहा है कि ‘वो यूक्रेन में सैन्य ऑपरेशन पर ध्यान दे रहे हैं.’
रूस और पुतिन इस समय वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं. पश्चिमी देशों से रूस के संबंध बहुत मुश्किल हालात में हैं. पश्चिम ने रूस के ख़िलाफ़ कड़े से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं.

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दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में मध्य एशिया और रूसी मामलों के प्रोफ़ेसर संजय पांडे मानते हैं कि पुतिन वैश्वक स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं और उन्हें आशंका रही होगी कि वैश्विक नेताओं के बीच मंच पर वो अलग-थलग पड़ सकते हैं, इसी वजह से भी वो नहीं आ रहे होंगे.
प्रोफ़ेसर पांडे कहते हैं, “रूस वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है. पुतिन को आशंका है कि इस सम्मेलन में कोई उनकी बात नहीं सुनेगा और उनकी आलोचना होगी. वो पश्चिमी नेताओं का सामना करना नहीं चाहते हैं. यही उनके ना आने की मुख्य वजह है.”
आईसीसी के गिरफ़्तारी वॉरंट के सवाल पर प्रोफ़ेसर पांडे कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि पुतिन को भारत में गिरफ़्तारी का डर रहा होगा. भारत में ऐसा होने की कोई आशंका भी नहीं है.”हालांकि ऐसा भी माना जा रहा है कि भारत में यूक्रेन युद्ध पर चर्चा से बचने के लिए भी पुतिन इस सम्मेलन से अनुपस्थित हो रहे हैं.
भारत ने हालांकि यूक्रेन को भी इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया है.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को एक टिप्पणी में कहा है कि वो भारत में जी-20 सम्मेलन में यूक्रेन को ना बुलाये जाने को लेकर नाख़ुश हैं.
यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर ज़ेलेंस्की से बात करते हुए ट्रुडो ने कहा, “मैं निराश हूं कि आप वहाँ नहीं होंगे.”
ज़ेलेंस्की ने ट्रुडो के साथ फ़ोन पर बातचीत की एक क्लिप टेलीग्राम पर साझा भी की है.
इस वार्ता में ट्रूडो ने ज़ेलेंस्की से कहा कि वो सुनिश्चित करेंगे कि जी-20 सम्मेलन में यूक्रेन की आवाज़ सुनी जाए.
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