जी20: तनावपूर्ण माहौल में हो रहे इस सम्मेलन से क्या हैं उम्मीदें?

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों समेत दुनिया के कई नेता इंडोनेशिया के बाली शहर में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए इकट्ठा हो रहे हैं.
दुनिया की बीस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्षों का ये सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व रूस-यूक्रेन युद्ध, खाद्यान्न संकट और उर्जा संकट समेत कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है.
यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों की कठोर आलोचना का सामना कर रहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस सम्मेलन में शिरकत नहीं करेंगे. उनकी जगह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ सम्मेलन में शामिल होंगे.
जी20 क्या है?

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जी20 या ग्रुप ऑफ़ ट्वेंटी दुनिया की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है जिसके नेता जी20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने से जुड़ी योजना बनाने के लिए जुटते हैं.
सालाना तौर पर होने वाला जी20 शिखर सम्मेलन 2008 की आर्थिक मंदी के बाद शुरू हुआ था. ये सम्मेलन आर्थिक मामलों में सहयोग का प्रमुख वैश्विक फोरम भी है.
दुनिया का 85 फ़ीसदी आर्थिक उत्पादन और 75 फ़ीसदी कारोबार जी20 समूह के देशों में ही होता है.
यही नहीं दुनिया की दो तिहाई आबादी भी जी20 देशों में ही रहती है.
इस समूह में यूरोपीय संघ समेत 19 राष्ट्र शामिल हैं. ये हैं- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ़्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका. स्पेन को भी मेहमान के रूप में सम्मेलन में बुलाया गया है.
जी20 का ही एक छोटा समूह है जिसे जी7 कहते हैं. इसमें दुनिया के सबसे विकसित राष्ट्र सदस्य के तौर पर शामिल हैं.
हर साल एक अलग जी20 सदस्य राष्ट्र सम्मेलन का अध्यक्ष होता है और वही इसका एजेंडा भी तय करता है.
इस साल सम्मेलन का अध्यक्ष राष्ट्र इंडोनेशिया है जो चाहता है कि बाली सम्मेलन में महामारी के बाद स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक समाधानों और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने पर चर्चा हो. इंडोनेशिया अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना भी चाहता है.
इस सम्मेलन के दौरान दुनियाभर के नेता आपस में मुलाक़ाते करते हैं और आपसी सहयोग से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा भी करते हैं.
चुनौतिपूर्ण माहौल में हो रहा है सम्मेलन

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इस साल फ़रवरी में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद पहली बार जी20 देशों के सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया के सामने कई नई आर्थिक चुनौतियां हैं. ऐसे में, माना जा रहा है कि इस सम्मेलन के दौरान यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दे हावी रह सकते हैं.
इसके अलावा चर्चा के लिए इस समय और भी कई मुद्दे हैं. जैसे, रूस- यूक्रेन युद्ध, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रहा तनाव, लगातार बढ़ रही महंगाई, दुनिया के सामने बढ़ रहा मंदी का ख़तरा, उत्तर कोरिया की परमाणु धमकियां और जलवायु परिवर्तन के कारण आ रही आपदाएं.
इंडोनेशिया का बाली यूं तो एक शांत शहर है, लेकिन इस बार जी20 शिखर सम्मेलन बेहद तनावपूर्ण माहौल में हो रहा है.
सम्मेलन में कौन-कौन हो रहा शामिल?

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इस साल के जी20 सम्मेलन पर देशों के बीच का राजनीतिक तनाव हावी हो सकता है.
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने मांग की है कि रूस को इस सम्मेलन से निलंबित कर दिया जाए. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की इसमें वर्चुअली शामिल होंगे.
वहीं इंडोनेशिया की सरकार ने कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन व्यक्तिगत रूप से सम्मेलन में शामिल नहीं हो रहे हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से स्पष्ट किया है कि पुतिन अपने शेड्यूल के कारण इस सम्मेलन में शामिल नहीं हो सकेंगे. रूसी सरकार की तरफ से पुतिन की जगह विदेश मंत्री सर्गेई लैवरॉफ़ शिरकत करेंगे.
सम्मेलन में बाक़ी सभी सदस्य राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों के बाली पहुंचने की उम्मीद है.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14-16 नवंबर के बीच बाली में ही रहेंगे.
राष्ट्रपति जो बाइडन एशियान सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद बाली पहुंचेगे. वो अमेरिका से एशिया के लिए निकल चुके हैं.
ये भी माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं.
राष्ट्रपति बाइडन ने सऊदी अरब पर युद्ध में रूस की मदद करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि रूस और सऊदी अरब कच्चे तेल के दाम महंगे रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं.
मेज़बान इंडोनेशिया के सामने चुनौतियां

इस सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सीधी मुलाक़ात भी होगी.
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में मतदान के बाद जो बाइडन ने संवाददाताओं से कहा था कि वो इस सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात करेंगे.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ता है तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संघर्ष का ख़तरा पैदा हो जाएगा. दोनों के बीच तनाव कम करने को लेकर बाचीत हो सकती है.
करिश्मा वासवानी से बात करते हुए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने कहा, "बातचीत के बिना शांति नहीं हो सकती है. अगर राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति जो बाइडन की मुलाक़ात होती है तो ये दुनिया के लिए बहुत अच्छा होगा, ख़ासकर अगर वो इस बात पर सहमत हो जाते हैं कि संकट से उबरने में दुनिया की कैसे मदद की जाए."
एशिया के कई अन्य देशों की तरह इंडोनेशिया ने भी दशकों से चले आ रहे अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार और बहुपक्षीय रिश्तों का फ़ायदा उठाया है. अमेरिका हमेशा से ही वैश्विक और रणनीतिक तौर पर इंडोनेशिया का अहम सहयोगी रहा है. लेकिन पिछले दशक में चीन ने इंडोनेशिया में भारी निवेश किया है और इस समय चीन वहां के शीर्ष दो विदेशी निवेशकों में शामिल है.
ऐसे में, इंडोनेशिया के लिए दुनिया के दो शक्तिशाली देशों अमेरिका और चीन से रिश्ते बनाए रखना, जटिल हो गया है.
एक ऐसा दौर जिसमें अमेरिका और चीन एक दूसरे के सहयोगी होने के बजाए विरोधी हों, इंडोनेशिया और अन्य एशियाई देशों के लिए बहुत अच्छा संकेत नहीं है.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ता है तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संघर्ष का ख़तरा पैदा हो जाएगा.
निशाने पर हो सकता है रूस

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भले ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ना ले रहे हैं, रूस पश्चिमी देशों के निशाने पर रह सकता है.
ब्रितानी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बाली के लिए जाने से पहले कहा है कि वो सम्मेलन के दौरान "पुतिन सरकार को निशाने पर लेंगे."
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा है, "इस साल का सम्मेलन सामान्य नहीं होगा. हम पुतिन की सत्ता को ज़िम्मेदार ठहराएंगे."
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से दुनियाभर में महंगाई बढ़ी है और अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं. रूस जी20 का अहम सदस्य देश है.
ऐसे में ये माना जा रहा है कि विश्व के नेता, ख़ासकर पश्चिमी देशों के राष्ट्राध्यक्ष रूस को निशाने पर रख सकते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी किस-किस से मिलेंगे ?

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से द्वपक्षीय मुलाक़ातें भी कर सकते हैं.
ब्रितानी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से मोदी मुलाक़ात करेंगे. हालांकि ये अभी स्पष्ट नहीं है कि बाइडन के साथ मोदी की द्विपक्षीय मुलाक़ात होगी या नहीं.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन में पहुंच रहे हैं. मोदी या जिनपिंग की मुलाक़ात के बारे में भी अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.
इससे पहले एससीओ के सम्मेलन के दौरान दोनों नेता समरकंद में एकदूसरे से नहीं मिले थे.
सितंबर में हुए इस सम्मेलन से पहले मोदी और जिनपिंग की मुलाक़ात के कयास लगाए गए थे, लेकिन दोनों की मुलाक़ात नहीं हुई थी.
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