पेशावर में बिहारी कबाब और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में बदायूं के मशहूर पेड़े- ब्लॉग

इमेज स्रोत, Urooj Jafri
- Author, उरूज जाफ़री
- पदनाम, इस्लामाबाद से, बीबीसी हिंदी के लिए
76 सालों में हिंदुस्तान-पाकिस्तान ने एक दूसरे से दोस्ती की कुछ ना कुछ इच्छा तो रखी मगर इस दिशा में ज़्यादा बात ना बन सकी.
कहते हैं मर्द के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है.
ऐसे में क्या ये संभव है कि क्या दोनों देशों की दोस्ती का रास्ता शायद भोजन से होकर जाता हो? मैंने जब इस पर सोचना शुरू किया तो एक के बाद एक परतें खुलती गईं.
पाकिस्तानी खानों पर हिंदुस्तानी मसालों की छाप ना होना ऐसा ही है जैसे एक मां के दो बच्चे एक दूसरे से बिलकुल अलग लगें.
जैसे बहन-भाइयों के चेहरे या उनकी कोई अदा मिलती-जुलती होती है. इस तरह दोनों देशों के पकवान भी कुछ ना कुछ एक सा ज़रूर टेस्ट करते हैं.
कहीं कुछ अलग भी होगा, ज़ाहिर है पानी का भी असर रहता है भोजन पर.

इमेज स्रोत, Urooj Jafri
पख़्तूनख़्वाह में बदायूं के मशहूर पेड़े
बहरहाल अगर मुंबई में रोज़ बिरयानी तैयार होती है तो सरहद पार भी इसकी कई देगें बनती हैं, दिल्ली की निहारी भी दिल्ली में ही नहीं बल्कि कराची और लाहौर में भी खूब बनाई जाती है.
पाकिस्तानी बारबिक्यू के शौकीन हैं. पनीर टिक्का ना सही लेकिन कराची और लाहौर वाले, टिक्के, बोटी और सीक कबाब को ज़रूर पसंद करते हैं.
और इसी बारबिक्यू में मेरठ के कबाब और लखनऊ के गिलौटी कबाब भी शामिल हैं.
वहीं पेशावर को जाती जीटी रोड पर वाह के छोटे से शहर में बिहारी कबाब का भी बोर्ड नज़र आता है और उम्दा बिहारी कबाब खाए जा सकते हैं.
क्या पता अहमद शाह अब्दाली की फ़ौज से कोई बिहारी बावर्ची जीटी रोड पर भटक गया हो!
यही नहीं ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के शहर मर्दान में बदायूं के मशहूर पेड़े भी बरसों से बन रहे हैं. और लोग इनके दीवाने हैं.
ये सभी नाम और इनका खाना पाकिस्तानियों में खूब जाना माना जाता है.
पाकिस्तान की मशहूर फूड स्ट्रीटस में 'दिल्ली निहारी, बंबई वाला के नमकीन' आज भी मशहूर दुकानों में गिने जाते हैं.

इमेज स्रोत, Urooj Jafri
पाकिस्तान में हिंदुस्तानी तहज़ीब
पाकिस्तानी मांसाहारी होने के नाते शाकाहारी भोजन से बहुत ज़्यादा तो नहीं जुड़े हैं लेकिन थाली ज़रूर सभी देशी फूड रेस्टोरेंट्स पर मेन्यू में ख़ास शामिल होती है.
कराची का राजधानी रेस्टोरेंट शुद्ध शाकाहारी खाना भी परोसता है और वो भी स्टील की चमकती कटोरियों भरी थालियों में.
यही नहीं उनके वेटर भी राजस्थानी कॉस्ट्यूम्स में ख़ास बंधानी वाली पगड़ी बांधे, आपको खाना परोसते हैं. यह रेस्टोरेंट एक हिंदू का है, जिनका ताल्लुक सिंध से है.
इनके पास आपको गुजराती थाली, छाछ, डोसा, ढोकला और मजेदार पनीर डिश भी मिल जाती हैं और जैसलमेर के काले चने की चाट भी. यही नहीं भेलपुरी, गोल गप्पे और कचौरियां भी शाम चार से पांच के बीच चाय के साथ सर्व की जाती हैं.
मांसाहारी पाकिस्तान कस्टमर जो चिकन या मटन बिरयानी के फ़ैन हैं उनके लिए राजधानी के मालिक का कहना था कि वे जल्द अपने मेन्यू में बिरयानी का तोड़ ढूंढ़ निकालेंगे.
राजधानी पर दिवाली भी मनाई जाती है. लेकिन ज़रा धीमें अंदाज़ में. वजह यही कि पाकिस्तान सिक्योरिटी स्टेट है और हिंदू अल्पसंख्यक में गिने जाते हैं इसलिए थोड़ा संभल के ही रहना सुरक्षित माना जाता है.
इन रेस्टोरेंट के ग्राहकों की मानें तो वे शौक से या ज़ायक़ा बदलने के लिए थाली इनज्वाय करते हैं.

इमेज स्रोत, Urooj Jafri
पाकिस्तानी मटन कढ़ी और हिंदुस्तानी ढोकला
इस्लामाबाद में बीस सालों से चल रहे रेस्टोरेंट टेबल टॉक के मालिक बताते हैं, "हमारे देशी विदेशी कस्टमर ज़रूर थाली ऑर्डर करते हैं लेकिन ये मानना कि हमारे खानों पर हिंदुस्तानी छाप होती है, ऐसा नहीं है."
"हम अपने स्वाद पर गर्व करते हैं, जैसे चपली कबाब और मटन कढ़ी हमारी सौगात हैं तो उसी तरह ढोकला, डोसा शुद्ध हिंदुस्तानी पकवान."
इन सभी रेस्टोरेंट्स पर पाकिस्तानी थाली एक ट्विस्ट के साथ भी सर्व की जाती है यानी शुद्ध शाकाहारी नहीं होती बल्कि उसके साथ चिकन का भी विकल्प मिल जाता है.
लेकिन जो दिल्ली, मुंबई या जयपुर की याद ताज़ा करना चाहते हैं वो शाकाहारी थाली ही ऑर्डर करते हैं.
इस लिहाज़ से देखें तो अब शाकाहारी खानों का रूझान पाकिस्तान में भी बढ़ा है.
इस्लामाबाद में कई सालों से चल रहे टेबल टॉक और सारंग सिंधी फूड रेस्टोरेंट्स की महिला प्रमोटरों का कहना है कि उनकी वेज थालियां पिछले दस सालों से ख़ूब अच्छा बिज़नेस कर रही हैं.

इमेज स्रोत, Urooj Jafri
सिंधी थाली और भारतीय थाली
इन दोनों ही रेस्टोरेंट्स पर रोज़ाना ही आपको सिंधी थाली और भारतीय थाली मिल जाएगी.
इसमें मौसम की सब्जियां, दाल चावल, सरसों का साग, चना मसाला, पकौड़े और सब्जी वाली कढ़ी, गरम पूरियां, चपाती, हलवा, गुड़ वाले चावल और खीर परोसे जाते हैं.
यही थाली रेस्टोरेंट्स उन डिप्लोमेट्स के लिए भी एक राहत हैं जो सिर्फ़ ख़ास शाकाहारी भोजन ही लेना चाहते हैं. फिर उनके लिए ख़ासतौर पर हर चीज़ शाकाहारी अंदाज़ में बनती है.
मजे की बात ये है कि इन सभी थाली रेस्टोरेंट के मालिकान पाकिस्तान के सूबे सिंध के रहने वाले हैं.
क्योंकि सिंध की सरहद गुजरात और राजस्थान से मिलती है और सरहद पार खानों का स्वाद भी एक दूसरे के कज़िन होने जैसा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















