हैदराबाद की बिरयानी और कोलकाता के रसगुल्ले दिल्ली पहुँचा रहा है ज़ोमैटो

बिरयानी

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    • Author, ज़ोया मतीन और मेरिल सेबेस्टियन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली से

''बिरयानी के लिए किसी इंसान की बेताबी, कोई सीमा नहीं जानती.''

यही वजह है कि देश की राजधानी दिल्ली के रहने वाले अनिरुद्ध सुरेशन ने हज़ारों किलोमीटर दूर देश के दक्षिणी शहर हैदराबाद से बिरयानी मंगाने का ऑर्डर दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने लखनऊ के लजीज 'टुंडे कबाब' और कोलकाता के मशहूर 'रसगुल्ले' का भी ऑर्डर दिया.

हालांकि इन व्यंजनों को लेकर उनका अनुभव उतना बेहतर नहीं रहा.

सुरेशन ने बीबीसी को बताया, ''बिरयानी बहुत ख़राब थी. उसमें वो बात नहीं थी, जो बिरयानी को बिरयानी बनाती है.''

वो कहते हैं कि टुंडे कबाब को चाहे जितना भी गर्म कर लो, उसमें पहले जैसा स्वाद नहीं आ सकता. वहीं दिल्ली की किसी भी मिठाई दुकान में कोलकाता से बढ़िया मिठाई मिल सकती है.

अनिरुद्ध सुरेशन भारत के उन हज़ारों लोगों में शामिल हैं, जो फूड डिलीवरी ऐप 'ज़ोमैटो' की 'इंटरसिटी लीजेंड्स' सेवा आजमाने के लिए अपने-अपने ऑर्डर दे रहे हैं.

इस योजना के तहत खाने पीने के शौक़ीन देश के चुने हुए शहरों से अपनी पसंद के व्यंजन मंगा सकते हैं.

ज़ोमैटो ने भारत के सबसे लजीज व्यंजनों का देश में कहीं भी लुत्फ़ उठाने के लिए 10 शहरों के 120 प्रसिद्ध रेस्टोरेंट से करार किया है. कंपनी का कहना है कि 24 घंटों के भीतर दिए गए ऑर्डर ग्राहकों को मिल जाएंगे.

ज़ोमैटो में इस सेवा की कर्ताधर्ता कामायनी साधवानी बताती हैं कि भारत की विविधता को एक थाली में व्यंजन के रूप में परोसने के लिए यह सेवा शुरू की गई है.

मिठाई

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दिल्ली से शुरू हुआ था ये सफ़र

ज़ोमैटो ने पिछले साल अगस्त में दक्षिण दिल्ली और गुरुग्राम के निवासियों के लिए प्रयोग के तौर पर इस सेवा की शुरुआत की थी.

उसके बाद से इस सेवा का विस्तार देश के छह शहरों तक हो गया है. इन शहरों में मुंबई और बेंगलुरू भी है. हालांकि कंपनी की योजना है कि जैसे-जैसे मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस सेवा को पूरे देश में फैलाया जाएगा.

कामायनी साधवानी बताती हैं कि यह सेवा 'बीते जमाने की यादों' और 'तलाश' की चाह पूरा करने के लिए शुरू की गई है.

वो कहती हैं, ''हमारा लक्ष्य ग्राहकों की जरूरतों को दो तरीकों से पूरा करना है. पहला, ये कि लोगों को उनके शहरों के स्वाद मुहैया करा कर उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ा जाए. दूसरा, ये कि उनके पास देश के विभिन्न व्यंजनों की तलाश करके उनका लुत्फ़ उठाने का मौक़ा है.''

बीबीसी ने सुरेशन के जैसे नौ और ग्राहकों से इस बारे में बात की. हालांकि इनका अनुभव अभी तक उतना बेहतर नहीं रहा है.

लेकिन साधवानी का दावा है कि ग्राहकों का रिस्पॉन्स हमारी उम्मीदों से काफ़ी बेहतर रहा है. हालांकि उनकी यह सेवा अभी कितने का कारोबार कर रही है, ये बताने से उन्होंने मना कर दिया.

ज़ोमैटो ग्लोबल ग्रोथ के वाइस प्रेसिडेंट सिद्धार्थ झावर ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, "पिछले साल जब हमने शुरुआत की थी, तो सोचा था कि यह महंगी और लग्जरी सेवा होगी." 

ज़ोमैटो ने डिलिवरी के बाज़ार में प्रयोग किए हैं. इनमें चंद मिनटों में ग्रोसरी की डिलिवरी से लेकर, डिस्काउंट तक शामिल हैं. साल 2008 में लॉन्च हुई ये कंपनी भारत की भीड़ भरे फ़ूड डिलिवरी बाज़ार में टिकी हुई है.

जानकार कहते हैं कि कंपनी को कोविड महामारी के दौरान फ़ायदा हुआ, क्योंकि उस वक्त सारे रेस्तरां बंद थे और लोग ऑनलाइन ही फ़ूड ऑर्डर कर रहे थे.

मंचूरियन

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ज़ोमैटो और अन्य फ़ूड डिलिवरी कंपनियों को इससे काफ़ी लाभ हुआ.

भारतीय खान-पान पर किताब लिख चुकीं सोनल वेद कहती हैं, "लॉकडाउन के दौरान रेस्तरां बंद हो गए थे. इनमें कुछ ऐसी जगहें भी थीं, जो पहले घर पर खाना नहीं भेजती थीं. लेकिन बदले हालात में वे भी पैकेज बनाकर खाना घर भेजने लगे. ज़ोमैटो इंटरसिटी शायद उसी का एक्सटेंशन है."

लेकिन हज़ारों मील दूर बिरयानी पहुंचाना कोई मज़ाक नहीं है. ज़ोमैटो का कहना है कि वो खाने की इस लंबी यात्रा के दौरान उसकी सेफ़्टी का पूरा ख़्याल रखता है.

कंपनी कहती है कि इन्हें मोबाइल फ़्रिज मैं पैक किया जाता है ताकि भोजन डिलीवरी के वक़्त ताज़ा रहे. इसके अलावा बहुत सारे रेस्तरां पहले से ही कूरियर सर्विस के ज़रिए इंटर सिटी डिलिवरी करते हैं.

कोलकाता के मशहूर बलराम मल्लिक और राधारमण मल्लिक स्वीट्स के निदेशक सुदीप मल्लिक कहते हैं, "ज़ोमैटो इंटरसिटी ने ख़ूब धूम मचाई और हमारे उत्पाद मशहूर हो गए. अब सारे देश से हमें ऑर्डर आ रहे हैं."

सुदीप मल्लिक की मशहूर मिठाई की दुकान पर कुछ ख़ास पकवान बनते हैं. ये मिठाइयां हैं- बेक किए हुए रसगुल्ले और संदेश.

ख़ास डिब्बों में पैक करके सारे देश भर में इनकी डिलीवरी की जाती है.

सुदीप मल्लिक कहते हैं, "एक ऐसा वक्त भी आया जब हम सारे ऑर्डर नहीं भेज पा रहे थे."

मिठाई

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ग्राहकों से मिल रही हैं ख़ूब तारीफ़

कई और रेस्तरां मालिकों ने भी बताया कि उन्हें ग्राहकों से ख़ूब तारीफ़ मिल रही है.

हैदराबाद के पिस्ता हाउस के मैनेजिंग डाइरेक्टर शोएब मोहम्मद बताते हैं, "ये कमाल की चीज़ है."

पिस्ता हाउस भारत में हलीम की शायद सबसे मशहूर दुकान है. पिस्ता हाउस वीकेंड पर हर दिन 100 के क़रीब हलीम दिल्ली या मुबंई में डिलिवर करता है.

मोहम्मद कहते हैं कि हाल ही में उन्होंने एक दिन में 800 डिब्बे पैक कर के कूरियर किए थे. पिस्ता हाउस बीते साल सितंबर में उस समय ख़बरों में आया था कि गुरुग्राम के एक नाराज़ ग्राहक ने सोशल मीडिया पर शिकायत की थी.

ग्राहक ने लिखा था कि उन्हें बिरयानी के बजाय सिर्फ़ सालन और शोरबा ही मिला है. मोहम्मद कहते हैं कि ज़ोमैटो ने ग्राहक की खोई हुई बिरयानी पहुँचा दी थी.

शोएब मोहम्मद कहते हैं, "दरअसल वो सारी घटना एक ढंग से हमारे लिए अच्छा विज्ञापन बन गई."

लेकिन जानकार इस स्कीम को चलते रहने पर शक़ जता रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, बैंबू बिरयानी का ज़ायका

पत्रकार सोहिनी मित्तर कहती हैं, "पेपर पर ये ज़बरदस्त आइडिया है, क्योंकि हम भारतीयों को खाने से मोहब्बत है, लेकिन इतने दूर डिलिवरी करना आसान काम नहीं. ज़ोमैटो के लिए ये बहुत मुश्किल काम है, क्योंकि कोल्ड चैन इंफ़्रास्ट्रक्चर पहले से ही काफ़ी दबाव में है."

कई ग्राहक नामचीन रेस्तरां के भीतर बैठकर खाने के अनुभव को घर पर महसूस कर पाने पर भी शक़ जताते हैं.

मित्तर कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि रेस्तरां में बैठकर खाने के जादुई अनुभव की तुलना प्लास्टिक के कंटेनर में आए खाने से की जा सकती है. ये खाना बेशक खाने लायक़ होता है, पर उसका स्वाद और रंग वो नहीं होता, जो रेस्तरां में बैठकर मिलता है."

अनिरुद्ध सुरेशन भी इससे सहमत हैं, "हैदराबाद के होटल शादाब तक टहलते हुए जाने में जो मज़ा है, वो कहां मिलेगा. रेस्तरां पर पहुँचने से सौ क़दम पहले ही मसालों और गोश्त की महक आपको आनंदित कर देती है."

"आप एक शोर-शराबे से भरे रेस्तरां में बैठे हैं और आपके टेबल पर गर्मागर्म बिरयानी आती है. इसका हर कोर ज़ायके से सराबोर है. और आपको जितना सालन या रायता चाहिए, वेटर देने को तैयार खड़ा है. "

लेखिका सोनल वेद कहती हैं कि वो भी रेस्तरां में जाकर ही बिरयानी खाना चाहती हैं पर अगर आप अपने पसंदीदा रेस्तरां से दूर हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से खाना मंगवा सकते हैं तो इसमें हर्ज ही क्या है?

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