पाकिस्तान और भारत में सबकी पसंद मसूर की दाल, पकाने के अंदाज़ के साथ बदल जाता है स्वाद

मसूर की दाल

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    • Author, चारूकेसी रामादुरै
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

सरसों के तेल में थोड़ी सी कलौंजी का तड़का और उस पर नींबू का रस साधारण सी मसूर दाल के स्वाद को कहां से कहां पहुंचा देता है.

भारत और पाकिस्तान के अक्सर घरों में मसूर की दाल हर दिन के खाने की डिश में शामिल है. यह जहां पौष्टिकता से भरपूर है वहीं हर घर का ज़ायक़ा भी है.

पकवानों पर किताब लिखने वाली अर्चना पिदाथला कहती हैं कि मसूर की दाल उनके लिए खाने की सबसे प्रिय चीज है.

"मैं हर दिन दाल खाती हूं. जब मैं थकी हूं या जब मेरा दिन ख़राब चल रहा हो तो चावल के साथ दाल मेरे मूड को जितना बेहतर करती है कोई और चीज़ नहीं करती, यहां तक कि कॉफ़ी या चॉकलेट भी नहीं."

यह दिल की ऐसी बात है जिसका इज़हार भारत और पाकिस्तान में बहुत से लोग करते हैं और यह एक तरह से दोनों जगह पाई जाने वाली बात है.

ऐसे लोगों के लिए दाल केवल रोज़मर्रा की एक खाद्य वस्तु नहीं बल्कि मन को शांति देने वाले अनाज के साथ-साथ प्रोटीन का भी एक आसान स्रोत है.

दाल पूरे भारत में पकाई जाती है लेकिन दाल पकाने का सबसे आम तरीक़ा यह है कि दाल को उस समय तक पकाएं जब तक कि वह लगभग गल न जाए.

इसके बाद इसमें सरसों के बीज, ज़ीरा और कई कटी हुई हरी मिर्च डालें और फिर गाढ़ी दाल पर धनिया की पत्तियों को काटकर उसे पेश करें.

जैसा कि पिदाथला का कहना है, "आप अलग-अलग तरह के दाल के पकवान बनाने के लिए एक बुनियादी सामग्री इस्तेमाल कर सकते हैं. खट्टे स्वाद के लिए गोंगूरा के पत्ते (लाल डंठल वाली हरी सोरल) या फिर लौकी डालकर उसे और स्वादिष्ट बनाएं."

वास्तव में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि दाल पकाने की इतनी ही विधियां हैं जितनी कि उनको पकाने वाले.

अपनी किताब के लिए पिदाथला ने हज़ारों किलोमीटर की यात्राएं की हैं.

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इमेज कैप्शन, अपनी किताब के लिए अर्चना पिदाथला ने हज़ारों किलोमीटर की यात्राएं की हैं.

दाल पकाने के नब्बे तरीके

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मसूर की दाल बनाने की विधि पिदाथला की सन 2022 में प्रकाशित हुई 'कुक बुक' में शामिल है.

इस पुस्तक में देशभर से दाल पकाने की पीढ़ी दर पीढ़ी चली आने वाली नब्बे विधियां शामिल हैं जो विभिन्न महिलाओं ने उनके साथ शेयर की हैं.

ये विधियां साझा करने वाली महिलाएं कोई पेशेवर कुक नहीं हैं लेकिन एक बात जो उनमें समान है वह यह है कि वह खाना पकाने को एक स्वस्थ काम के रूप में देखती हैं. अपने लिए भी और अपने साथ जुड़े उन लोगों के लिए भी जिन्हें वह खाना बनाकर खिलाती हैं.

उदाहरण के लिए अदाकारा अरुंधति नाग अपने शुरुआती दिनों में कभी भी अपने पति के परिवार वालों के लिए खाना नहीं पकाती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि इसका मतलब उनकी अपनी पहचान का नुक़सान है. लेकिन पति की मौत के बाद वह उन्हें याद करने के लिए पूरी तैयारी से अपने पति के परिवार के लिए खाना बनाती हैं.

श्री मीरजी के लिए, जिन्हें पिदाथला एक स्वतंत्र विचारों वाली और आत्मनिर्भर व्यक्ति बताती हैं, खाना पकाना अपनी देखभाल करने जैसा है.

इसी तरह विशालाक्षी पद्मनाभन हैं, जिन्होंने न केवल ऑर्गेनिक खेती शुरू की है बल्कि 'बफ़ेलो ब्लैक कलेक्टिव' के नाम से किसानों का एक सहकारिता संगठन भी बनाया है जो फ़सल उगाने और बेचने का काम करता है.

उन्होंने बेंगलुरू के पास रागिहल्ली में गांव की महिलाओं को आजीविका के लिए अपनी कुकीज़ पकाने और बेचने की ट्रेनिंग भी दी है.

खाना बनाने की विधि

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नीबू का रस बढ़ाता है स्वाद

अर्चना पिदाथला ने इन महिलाओं से बात करने और उन्हें खाना पकाते देखने और उनकी विधियां जानने के लिए पूरे देश में 11, 265 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की है.

वह कहती हैं कि उनकी किताब का शीर्षक 'व्हाई कुक' घरेलू बावर्चियों के सम्मान में है जो उस पारिवारिक स्वाद को बरक़रार रखे हुए हैं जिनकी विधियां पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं.

उन्होंने कहा कि किताब में पकवान किसी विशेष श्रेणी या खंड के तहत नहीं हैं. पिदाथला का कहना है कि उन्होंने महिलाओं से खाना पकाने की केवल सार्थक विधियां शेयर करने को कहा.

मैंने उनसे पूछा, "आप अपने आप को प्लेट के ज़रिए कैसे पेश करेंगी? आप अपनी पहचान को मेज़ पर कैसे पेश करेंगी?"

मसूर की दाल विशेष तौर पर बंगाली समुदाय में बहुत पसंद की जाती है.

मनीषा कैराली ने, जिन्हें उनके दोस्त मॉली पुकारते हैं, दाल बनाने की एक विधि पेश की है. उनके पिता बंगाली हैं.

पिदाथला ने अपनी किताब में लिखा है, "मॉली ने सूप जैसी दाल बनाना अपनी बंगाली दादी से सीखा जिन्होंने उन्हें यह सिखाया कि खाने को अच्छा या ख़ास होने के लिए इसमें बहुत सारी चीज़ों का होना ज़रूरी नहीं. सरसों के तेल में कलौंजी और नींबू के रस से इस आम सी डिश का स्वाद बढ़ जाता है. इसमें एक ही समय में मसाले और खट्टेपन का ज़ायक़ा पैदा होता है."

मसूर की दाल इस तरह से कुछ ही मिनट में बनाई जा सकती है और इससे भात या चपाती के साथ मज़े से खाया जा सकता है या केवल सूप के तौर पर पिया जा सकता है.

मनीषा कैराली ने दाल बनाने की एक विधि अपनी दादी से सीखी.

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मसूर दाल बनाने की विधि (4 लोगों के लिए)

पहला चरण

एक कप लाल मसूर की दाल को अच्छी तरह से धोकर एक छलनी में निकाल लें.

उसे प्रेशर कुकर में डालें और ढाई कप पानी डालें और तीन सीटियों (लगभग 10-12 मिनट) तक प्रेशर कुकर में पकाएं.

जब प्रेशर निकल जाए तो मसूर की दाल को अच्छी तरह से फेंट लें और उसमें हल्दी पाउडर डालकर मिलाएं.

या फिर दूसरी तरह से आप दाल को लगभग गल जाने तक 15 मिनट तक उबालें.

दूसरा चरण

दाल को बघारने (छौंक लगाने) के लिए सरसों तेल को गहरे और मोटे तले वाले बर्तन में गर्म करें.

इसमें कलौंजी, सूखी लाल मिर्च और हरी मिर्च डालें और 20 सेकंड तक इस मध्यम आंच पर भून लें.

पकी हुई दाल को इस तैयार किए हुए मसाले में डालें और साथ में स्वाद के अनुसार नमक डालें और दो मिनट तक पकने दें.

इसमें ऊपर से धनिया पत्ती डालें और इसे गरमा गरम चावल के साथ पेश करें.

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