रोते हुए पुलिस कॉन्स्टेबल का वीडियो वायरल, क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो

इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA

इमेज कैप्शन, सिपाही मनोज कुमार
    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बुधवार को फ़िरोज़ाबाद पुलिस लाइन के बाहर हाइवे पर सिपाही मनोज कुमार अपने हाथ में खाने की थाली लेकर पहुँचे. सिपाही मनोज कुमार ने थाली से रोटी उठाकर उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए. लोगों को रोटी दिखाते हुए सिपाही ने कहा कि इस रोटी को जानवर भी नहीं खा सकते हैं. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हुआ.

इस घटना से जुड़े कई अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. एक वीडियो में आरक्षी मनोज कुमार सड़क की डिवाइडर पर बैठ कर, रोते हुए, हाथ हिलाते हुए कह रहे हैं, "कोई सुनाने वाला नहीं है." आते जाते वो ट्रैफ़िक को भी रोकते हए अपनी थाली दिखाते हैं.

फ़िरोज़ाबाद पुलिस की डबरई मेस में खींचे एक वायरल वीडियो में आरक्षी मनोज कुमार कह रहे हैं, "कच्ची रोटी खा-खा कर पुलिस परेशान है. मैंने इस सम्बन्ध में आरआई साहब को, सीओ सिविल लाइन्स को अवगत कराया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. दाल पानी जैसी है. इसलिए अधिक से अधिक वीडियो शेयर करो."

सड़क पर मीडिया के सामने वो वहां मौजूद लोगों को नंबर दिखाते हुए डीजीपी को भी फ़ोन करते हैं, "मैं कांस्टेबल 380 मनोज कुमार बोल रहा हूँ. सर मैं थाली लेकर कप्तान साहब के सामने पेश हुआ. उन्होंने न ही मेरी तरफ़ कोई रुख़ किया, न ही कोई कार्रवाई की. मैं थाली लेकर बीच सड़क पर खड़ा हूँ महोदय. कोई मेरी सुनने वाला नहीं है."

दूसरी तरफ़ से आवाज़ आती है, "परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, रिस्पांस आ रहा है."

एक वायरल वीडियो में रोते-रोते आरक्षी मनोज कुमार कहते हैं, "मुख्यमंत्री जी ने अक्टूबर में घोषणा की थी कि हम उत्तर प्रदेश के सभी कर्मचारियों को पौष्टिक आहार के लिए भत्ता देते हैं. आप बताइए, यही पौष्टिक आहार मिल रहा है. आप लोग चाहते हैं कि पुलिस अच्छा कार्य करे लेकिन पेट में रोटी नहीं जाएगी, आप यह तो देख लीजिए."

पास में खड़े एक और पुलिसकर्मी मनोज कुमार को कहते हैं, "चलो चौकी चलो."

मनोज कुमार रोते हुए कहते हैं, "देखिए कोई सुनने वाला नहीं है, सब दबाव बनाने वाले हैं."

बाद में मौजूद दूसरे पुलिसकर्मी उन्हें पकड़ कर जीप में ले जाते हैं.

वायरल वीडियो

इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA

क्या है फ़िरोज़ाबाद पुलिस का कहना?

बीबीसी ने फ़िरोज़ाबाद के एसएसपी से इस बारे में फ़ोन पर बात करना चाही लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

बाद में SSP आशीष तिवारी ने जांच सीओ लाइन हीरालाल कनौजिया को सौंप दी और साथ ही एक ट्वीट शेयर किया जिसमें लिखा है, "मेस के खाने की गुणवत्ता से सम्बन्धित शिकायती ट्वीट प्रकरण में खाने की गुणवत्ता सम्बन्धी जांच सीओ सिटी कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि उक्त शिकायतकर्ता आरक्षी को आदतन अनुशासनहीनता, ग़ैरहाज़िरी व लापरवाही से सम्बन्धित 15 दण्ड विगत वर्षों में दिए गए हैं."

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

स्थानीय मीडिया में इन 15 दण्डों की एक सूची भी वायरल है लेकिन पुलिस ने इस बारे में कोई औपचारिक बयान या ट्वीट नहीं जारी किया.

मनोज कुमार से बीबीसी ने बात की

आरक्षी मनोज कुमार ने बीबीसी को बताया कि वह फ़िरोज़ाबाद ज़िले में चार साल से तैनात हैं.

तो आख़िरकार सड़क पर इस तरह से सबके सामने खाने की शिकायत करने की नौबत क्यों आई?

इस पर मनोज कुमार कहते हैं, "बताइए, इस प्रकार के पौष्टिक खाने को खाकर हम किस प्रकार से जीवित रह सकते हैं. शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान रहते हैं और आए दिन हम बीमार हो जाते हैं."

आरक्षी मनोज कुमार कहते हैं कि "मैंने आरआई महोदय को, सीओ लाइन साहब को, एसपी आरए साहब को, सीओ सीटी साहब को, कप्तान साहब को, एडीजी, डीजी साहब को अवगत कराया. मैं क्रम के हिसाब से चला और सरकारी नंबर के ज़रिए सबको बताया."

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

तो क्या पुलिस मेस में फ़िक्स्ड मेनू के हिसाब से खाना मिलता है?

मनोज कुमार कहते हैं, "खाने की कोई फ़िक्स्ड डाइट नहीं है. जो पुरानी नियमावली चली आ रही है उसी हिसाब से खाना बनता है. जैसे संडे की फिक्स है, कि संडे को कढ़ी बनेगी तो कढ़ी बनेगी और बुधवार को लौकी और दाल बनेगी तो वही बनेगी. जो पहले चला आ रहा है. वही चल रहा है. और खाने की गुणवत्ता इतनी डाउन है कि आप लोग देख ही चुके हैं की रोटियां कैसी हैं. कच्ची रोटियां थी. दाल में बहुत पानी था. उसी खाने को लेकर अपनी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस का सिपाही आपके सामने आया था."

अगर खाना इतना ख़राब है तो दूसरे सिपाही मनोज कुमार की तरह क्यों नहीं विरोध कर रहे है? मनोज कुमार कहते हैं, "कोई शिकायत नहीं करता है. मेरा जी किया तो मैं ख़ुद ही आगे आया हूँ. एक दो कह भी देते हैं लेकिन सामने ख़ुद नहीं आते हैं."

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

क्या मनोज कुमार ने समस्या के समाधान का इंतज़ार किया?

बीबीसी ने मनोज कुमार से यह भी पूछा कि अगर उन्होंने औपचारिक शिकायत सिर्फ़ दो दिन पहले ही की थी तो वो इस तरह से सार्वजनिक तरीक़े से विरोध क्यों किया?

मनोज कुमार कहते हैं, "मुझे जो उचित लगा, मैं परेशान था खाने के लिए. मैं रात में मोहर्रम की ड्यूटी करके आया था. मैंने रात में मेस प्रबंधक को जानकारी दी कि मैं 30 से 40 किलोमीटर ड्यूटी करने गया था और अपने लिए खाना रखने को कहा था. मैं पिछले चार साल से समस्या झेलते आ रहा हूँ. आज मुझे लगा कि बर्दाश्त की सारी हदें पार हो चुकी हैं. कोई मेरी समस्या को सुनने को तैयार नहीं है. हार कर के मैं आप लोगों के (मीडिया के) बीच में पहुंचा."

क्या मनोज कुमार ने ख़राब खाने की शिकायत ज़िले के एसएसपी से करने की कोशिश की थी? सिपाही मनोज कुमार ने बताया कि वह थाली लेकर पेश हुआ था. उन्होंने कहा, "क्योंकि कप्तान साहब के पास 12 बजे एक जिम ट्रेनर जाते हैं उनको जिम कराने मैं उनके साथ थाली लेकर कप्तान साहब के पास गया था लेकिन वो एक बार भी झांके नहीं हैं मेरी तरफ. न ही कोई रिस्पॉन्स दिया."

फ़िलहाल फ़िरोज़ाबाद एसएसपी ने सीओ सिटी स्तर की जांच बैठा दी है. सिपाही मनोज कुमार कहते हैं कि उनको शिकायत करने के बाद से ये डर सता रहा है कि उन पर पुलिस विभाग कोई न कोई बड़ा एक्शन ले लेगा. वहीं साथ ही वह यह भी दोहराते हैं कि शिकायत करने का उनका उद्देश्य केवल इतना था कि उनको बेहतर खाना मिले जिससे कि वो मन लगाकर अपनी ड्यूटी कर सकें.

इस पूरी घटना के बाद क्या आरक्षी मनोज कुमार को सुनवाई की उम्मीद है?

वे कहते हैं, "कुल मिलकर यह षडयंत्र रचा जा रहा है. केवल इस आरक्षी को दबा कर रगड़ कर घर भेज दिया जाएगा."

अंत में मनोज कुमार कहते हैं कि वो तीन भाई और तीन बहन हैं. और वे सबसे बड़े हैं. उन्होंने अपनी माँ को दिसंबर 2019 में खोया और कहते हैं कि परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं के कन्धों पर है. पिता का वो इलाज करा रहे हैं. इसलिए वो आम जनता का समर्थन चाहते हैं.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 3
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 3

विपक्ष ने साधा निशाना

सिपाही मनोज कुमार के इस शिकायती वीडियो के वायरल होने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया, "अमृत महोत्सव के छद्म उत्सव के शोर शराबे में भूख से रोते यूपी के पुलिस वाले की बात सुनने वाला कोई है क्या? महोत्सव के नाम पर भूखोत्सव क्यों?"

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)