पूरी दुनिया में फ़लस्तीनी शरणार्थियों की आबादी कितनी है?

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माना जाता है कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों की संख्या 60 लाख से अधिक है. इस लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी शरणार्थी आबादी है.
फ़लस्तीनी शरणार्थी मुख्य रूप से फ़लस्तीनी इलाक़ों और पड़ोसी देशों में रहते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अक्टूबर में इसराइल के हमले के बाद ग़ज़ा में 18 लाख फ़लस्तीनी आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं.
हालांकि विदेशों में रहने वाले फ़लस्तीनियों की आबादी पूरी दुनिया के कई देशों में है लेकिन बहुसंख्यक आबादी पश्चिम एशिया में ही बसी हुई है.
लेकिन ऐसा क्यों हुआ कि फ़लस्तीनी इलाक़े में अपने पैतृक निवास को इन्हें छोड़ना पड़ा और फिर इन्होंने किन देशों की ओर रुख़ किया और क्यों?
अब हम इस समस्या से जुड़े कुछ सवालों के जवाब तलाशेंगे.
इतनी बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी रिफ़्यूजी क्यों हैं?

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जब इसराइल का गठन हुआ उसके बाद से फ़लस्तीनी इतिहास में विस्थापन और पलायन की अहम भूमिका रही है.
द्वितीय विश्वयुद्ध के कुछ ही समय बाद, साल 1947 में ताज़ा ताज़ा बने संयुक्त राष्ट्र में 'प्रस्ताव 181' पास किया गया.
यह प्रस्ताव असल में, बरतानवी शासन के अधीन फ़लस्तीनी आने वाले इलाक़े को अरब और यहूदी राज्यों में विभाजित करने की योजना के बारे था.
फ़लस्तीन पर 1922 से ही बरतानी हुक़ूमत थी और यूरोप में नाज़ी अत्याचारों से भाग कर यहूदियों की एक बड़ी आबादी यहां पहुंच रही थी. इस वजह से यहां अरबों और यहूदियों में तनाव बढ़ता जा रहा था.
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में रिफ़्यूजी स्टडीज़ सेंटर में प्रोफ़ेसर डॉन शैटी के अनुसार, “इस समय तक जनसंहार के लिए यूरोप में एक किस्म का अपराधबोध बन गया था और वे मानकर चल रहे थे कि बड़ी संख्या में यूरोपीय यहूदियों का फ़लस्तीन में आगमन होगा. वे उन्हें बसाने की कोशिश कर रहे थे.”
हालांकि फ़लस्तीनी अरबों ने 'प्रस्ताव 181' (एक बड़े इलाक़े को छोटी सी यहूदी आबादी को दिए जाने) को ख़ारिज कर दिया, लेकिन इसराइल ने इस विभाजन योजना को आधार बना कर खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया.

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इसराइल के गठन को लेकर 1948 में युद्ध हुआ था, इस दौरान क़रीब 7.5 लाख फ़लस्तीनियों को अपने घर और ज़मीन (आज इसराइल) से भगा दिया गया या वे छोड़कर जाने पर मजबूर हो गए.
इस घटना को फ़लस्तीनी ‘नकबा’ के नाम से जानते हैं जिसका अरबी में मतलब होता है, ‘तबाही.’
1949 युद्ध जब ख़त्म हुआ तो इसराइल ने शरणार्थियों को वापस अपने घरों की ओर लौटने की इजाज़त देने के इनकार कर दिया.
बाद में 1967 में छह दिनों तक चले युद्ध के दौरान इसराइल ने पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी की भी नाकेबंदी कर दी.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इसके कारण 3.25 लाख फ़लस्तीनी फिर से बेघर हो गए.
आगले कुछ सालों तक इसराइली नियंत्रित इलाक़ों से हर साल औसतन 21,000 फ़लस्तीनी विस्थापित होते रहे.
किसी भी शांति समझौते में शरणार्थियों की वापसी की फ़लस्तीनी मांग को इसराइल ने ख़ारिज दिया.
पूरी दुनिया में कितने फ़लस्तीनी रिफ़्यूजी हैं?

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फ़लस्तीनी रिफ़्यूजी के लिए चलाए जाने वाले सहायता कार्यक्रमों की देख रेख के लिए 1949 में यूनाइटेड नेशंस रिलीफ़ एंड वर्क्स एजेंसी फॉर फ़लस्तीनी रिफ़्यूजीज़ (यूएनआरडब्ल्यूए) का गठन किया गया.
यूएनआरडब्ल्यूए के अनुसार, ‘फ़लस्तीनी रिफ़्यूजी’ वो हैं जो “एक जून 1946 से 15 मई 1948 के बीच फ़लस्तीन के निवासी थे और 1948 के संघर्ष में उनका घर और आजीविका दोनों छिन गई.”
इस परिभाषा में आने वाले लोगों के बच्चे, जिनमें गोद लिए बच्चे भी शामिल हैं, खुद को रिफ़्यूजी के रूप में पंजीकृत कराने के हक़दार हैं.
एजेंसी के अनुसार, जब यूएनआरडब्ल्यूए ने 1950 में काम करना शुरू किया तो वह 7.50 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थियों की ज़रूरतों का ख्याल रख रही थी.
आज क़रीब 59 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थी यूएनआरडब्ल्यूए की मदद के हक़दार हैं.
इनमें 15 लाख लोग यूएनआरडब्ल्यूए द्वारा मान्यता प्राप्त 58 रिफ़्यूजी कैंपों में रहते हैं.
ये कैंप जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, ग़ज़ा पट्टी और पूर्वी यरूशलम समेत वेस्ट बैंक में हैं.
हालांकि इन मान्यता प्राप्त कैंपों के बाहर भी कई इलाक़े हैं जहां फ़लस्तीनी शरणार्थियों की संख्या सघन है, जैसे सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास यारमोक इलाक़ा.
ग़ज़ा और वेस्ट बैंक में फ़लस्तीनियों के लिए रिफ़्यूजी कैंप क्यों हैं?

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प्रोफ़ेसर डॉन शैटी के अनुसार, जब इसराइल का गठन हुआ तो यहूदी राज्य के लिए निर्दिष्ट इलाक़ों में रह रहे फ़लस्तीन के अधिकांश अरब लोग, उन हिस्सों में पलायन कर गए जो अरबों के लिए निर्धारित थे.
वो कहती हैं, “उन्होंने ग़ज़ा और वेस्ट बैंक में शरण ली. वे 1948 के रिफ़्यूजी बने.”
वेस्ट बैंक में 8.71 लाख से अधिक रजिस्टर्ड रिफ़्यूजी हैं. यूएनडब्ल्यूआरए के अनुसार, इनमें से एक चौथाई 19 रिफ़्यूजी कैंपों में रहते हैं.
ग़ज़ा में 17 लाख रिफ़्यूजी हैं. इनमें क़रीब 6.20 लाख यूएनआरडब्ल्यूए के आठ मान्यता प्राप्त कैंपों में रहते हैं.
फ़लस्तीनी प्रवासी समाज कितना बड़ा है?

वेस्ट बैंक में 33 लाख और ग़ज़ा में 17.5 लाख फ़लस्तीनी रहते हैं. इसराइल में 17 लाख फ़लस्तीनी रहते हैं, जोकि इसराइल की कुल आबादी का 20% है.
इन इलाक़ों से बाहर जो फ़लस्तीनी रहते हैं वो व्यापक फ़लस्तीनी प्रवासी समुदाय का हिस्सा हैं. इनमें वे सभी शामिल हैं जो 1948 से पहले चले गए (और जो संयुक्त राष्ट्र की गिनती में नहीं हैं), उनके बच्चे और वे लोग भी हैं जिन्होंने अपने पैतृक निवास को छोड़ दिया लेकिन कभी रिफ़्यूजी के तौर पर रजिस्टर नहीं हुए.
फ़लस्तीनी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स द्वारा मुहैया कराए गए ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, क़रीब 73 लाख फ़लस्तीनी प्रवासी पूरी दुनिया में पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं.
हालांकि ब्यूरो उन्हीं फ़लस्तीनियों को अपनी गिनती में शामिल करता है जिनके पास पहचना पत्र है या रिफ़्यूजी के तौर पर पंजीकृत हैं. इसलिए फ़लस्तीनी प्रवासियों की कुल आबादी इससे कहीं अधिक हो सकती है.
ब्यूरो के अनुसार, अरब देशों में कुल मिलाकर 60 लाख से अधिक फ़लस्तीनी आबादी रहती है और इनमें से आधे निर्वासित लोग जॉर्डन में रहते हैं, जोकि इसराइली सीमा के पूरब में है.
जॉर्डन में रहने वाले अधिकांश फ़लस्तीनियों को पूर्ण नागरिकता मिली हुई है और वहां के नागरिकों जैसे अधिकार मिले हुए हैं.

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एक अनुमान के अनुसार, लेबनान, सीरिया और मिस्र में 10 लाख से अधिक फ़लस्तीनी रिफ़्यूजी रहते हैं.
लेबनान में अधिकांश फ़लस्तीनी रिफ़्यूजी 1948 से ही शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं और उन्हें नागरिक या सामाजिक अधिकार नहीं मिले हैं.
जबकि दूसरी तरफ़ सीरिया में रहने वाले फ़लस्तीनियों को सीरियाई नागरिकों के बराबर ही सामाजिक अधिकार मिले हुए हैं. हालांकि सीरियाई युद्ध शुरू होने के बाद अधिकांश फ़लस्तीनी देश छोड़ कर चले गए.
अपनी किताब ‘पैलेस्टीनियन वर्ल्ड वाइडः अ डेमोग्राफ़िक स्टडी’ में यूसेफ़ कोहबेग और हाला नोफ़ाल ने लिखा है, “खाड़ी के अरब देशों में फ़लस्तीनी लोगों की मौजूदगी क़रीब एक सदी पहले दर्ज की गई.”
उनके अनुसार, "द्वितीय खाड़ी युद्ध से पहले 90% फ़लस्तीनी कामगार सऊदी अरब और कुवैत में जाते थे, इसके बाद अधिकांश फ़लस्तीनी कामगारों का रुख़ क़तर और संयुक्त अरब अमीरात की ओर हो गया."
प्रोफ़ेसर डॉन शैटी कहती हैं कि खाड़ी के देशों में फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मांग इसलिए भी अधिक थी क्योंकि उन्हें ऐसे शिक्षित कामगारों की बहुत ज़रूरत थी जो अंग्रेज़ी और अरबी दोनों बोल सकें.
यूएनआरडब्ल्यूए कैंपों में मिली अच्छी शिक्षा के कारण फ़लस्तीनी वहां ऊंचे पदों पर पहुंचे.
पश्चिम एशिया से बाहर फ़लस्तीनी आबादी

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इस समय पश्चिम एशिया से बाहर जो अधिकांश फ़लस्तीनी प्रवासी आबादी है, उसने 19वीं सदी के अंत में पयालन किया था. उस समय यह इलाक़ा ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था.
प्रथम अरब राष्ट्रवादी आंदोलनों के दमन और आर्थिक संकट ने ईसाई फ़लस्तीनी व्यापारियों के पलायन को बढ़ावा दिया, ख़ासकर उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका की ओर.
अगले पलायन की लहर ऑटोमन साम्राज्य के विघटन के बाद शुरू हुई और फिर इसराइल के गठन के बाद.
हालांकि सही सही आंकड़ा पता करना मुश्किल है.
कोहबेग और नोफ़ाल के अनुसार, “दक्षिण अमेरिका में फ़लस्तीनियों की संख्या स्पष्ट नहीं है क्योंकि उन्हें ”अरबों” की एक अकेली श्रेणी में रखा गया है.”
चिली में फ़लस्तीनी आबादी पांच लाख के आस पास मानी जाती है जो इसे पश्चिम एशिया के बाहर सर्वाधिक फ़लस्तीनी आबादी वाला देश बनाती है.
इसके अलावा होंडूरास, ग्वाटेमाला और ब्राज़ील में अच्छी ख़ासी संख्या में फ़लस्तीनी हैं.
अमेरिका में फ़लस्तीनियों का पलायन भी 19सदी के अंत से शुरू हुआ और इस समय यहां क़रीब दो लाख फ़लस्तीनी हैं.
यूरोप में सबसे अधिक फ़लस्तीनी आबादी जर्मनी में है, उसके बाद ब्रिटेन, ग्रीस, फ़्रांस, डेनमार्क और स्वीडेन का नंबर आता है.
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