इसराइल ग़ज़ा युद्ध: क्यों दूर-दूर तक नहीं है जंग थमने के आसार?

अब इसराइली सेना ख़ान यूनिस पर ताबड़तोड़ हमले कर रही है.

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चंद दिनों के संघर्ष विराम के बाद इसराइल ने ग़ज़ा में नए सिरे से बमबारी शुरू कर दी है.

खून-ख़राबा खत्म होता देखने वालों को उम्मीद थी कि शायद ये छोटा संघर्ष विराम थोड़ा और बढ़े तो शांति का रास्ता निकल सकता है.

लेकिन अब दक्षिण ग़ज़ा में भी इसराइल के हमले को देखते हुए इसकी उम्मीद धूमिल होती जा रही है.

इन हालात को देख कर इसराइल और हमास को थोड़े समय के लिए संघर्ष विराम के लिए राजी करने वाले क़तर के प्रधानमंत्री ने कहा है कि इसराइल की बमबारी ने नए ‘समझौते के मौके कम’ कर दिए हैं.

प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल-थानी ने दोहा फोरम में कहा कि कतर इसराइल और हमास दोनों पर युद्धविराम के लिए दबाव डालता रहेगा.

कतर ने नवंबर के आखि़र में अल्प संघर्ष विराम के लिए इसराइल और हमास के बीच सौदेबाजी में अहम भूमिका निभाई थी. इसी समझौते की वजह से दोनों ओर के बंधकों की अदलाबदली हो सकी थी.

इस बीच, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा,''युद्ध पूरी रफ़्तार से जारी है.''

उन्होंने कहा कि हाल कि दिनों में ''हमास के दर्जनों आतंकवादियों’’ ने समर्पण किया है. वो अपने हथियार सौंप रहे थे और खुद को हमारे जांबाज सैनिकों के हवाले कर रहे थे.''

नेतन्याहू ने कहा,''ये हमास के अंत की शुरुआत है.''

नेतन्याहू के इस बयान के बीच ग़ज़ा में मानवीय संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

रविवार दोपहर को ग़ज़ा में हमास की ओर से चलाई जा रही हेल्थ एजेंसी ने कहा है कि इसराइली हमले में अब तक 18 हजार फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.

हमास के हथियाबंद विंग ने अल जज़ीरा को भेजे एक ऑडियो में कहा कि अस्थायी युद्धविराम ने अपनी विश्वसनीयता साबित कर दी है. लेकिन अब जब तक इसराइल बातचीत के लिए आगे नहीं आता तब तक कोई बंधक नहीं छोड़ा जाएगा.

इसराइल ने अब ख़ान यूनिस से आम लोगों को बाहर निकलने को कहा है.

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हमास के प्रवक्ता अबु उबैदा ने कहा है कि हमास के लड़ाकों ने इसराइली सेना के कम से कम 180 सैन्य वाहनों को या पूरी तरह या आंशिक तौर पर ध्वस्त कर दिया है और ''बड़ी तादाद'' में इसराइली सैनिकों को मार गिराया है.

ये चोट अभी भी इसराइली सेना को महसूस हो रही है. लेकिन अब ''उसे और बड़ी चोट पहुंचने वाली'' है.

दोहा में एक सम्मेलन में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए बनी यूएन एजेंसी यूएनआरडब्लूए के प्रमुख फिलीप लज़ारिनी ने कहा,''ग़ज़ा तो इस ‘धरती का नरक’ बन गया है. मेरी नजर में ये अब तक के सबसे खराब हालात हैं.''

इस सम्मेलन में फ़लस्तीन के प्रधानमंत्री मोहम्मद सतायेह ने कहा,''इसराइल को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के उल्लंघन की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए.''

उन्होंने इसराइल के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध की मांग की है.

मोहम्मद सतायेह फ़लस्तीन अथॉरिटी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो वेस्ट बैंक का प्रशासन देखता है.

दोहा में मीटिंग चल रही थी और ग़ज़ा के दक्षिण में भीषण जंग.

नेतन्याहू पश्चिमी सहयोगियों को भी आड़े हाथों लेते दिख रहे हैं.

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इसराइल ने उत्तरी ग़ज़ा में हमलों के दौरान लोगों को दक्षिण की ओर जाने को कहा था. अब दक्षिणी ग़ज़ा का शहर ख़ान यूनिस भयंकर बमबारी का शिकार हो रहा है.

अब इसराइल ख़ान यूनिस में लोगों से शहर के मध्य से हटने को कह रहा है.

बीबीसी न्यूज़ से बात करते हुए इसराइली सरकार के सलाहकार मार्क रेगेव ने कहा ख़ान यूनिस में जंग और मुश्किल होने वाली है. और इसराइल आम लोगों से सुरक्षित इलाक़ों में जाने को कहता रहेगा.

रविवार दोपहर ख़ान यूनिस के मध्य में इसराइल टैंक पहुँच गए थे.

तस्वीरों में शहर के लोगों को शवों के पास देखा जा सकता है. कई लोग अपने परिजनों की मौत का शोक मनाते देखे जा सकते हैं.

जब रेगेव से सुरक्षित इलाक़ों में हालात के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वहां आम लोगों को सुरक्षित रखने के लिए ‘अधिकतम प्रयास’ किए जा रहे हैं.

ग़ज़ा में आम लोगों को अल-मवासी जाने के लिए कहा गया है. इसराइल ने इसे सुरक्षित ज़ोन बताया है.

अल-मवासी 8.5 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है. ये लंदन की हीथ्रो एयरपोर्ट से भी छोटा इलाक़ा है.

यहां न के बराबर इमारतें हैं. अल-मवासी में अधिकतर रेत के टीले और कुछ जगहों पर खेत हैं.

इसी बीच इसराइल ने अपनी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति भी तेज़ कर दी है. वो अपने सहयोगियों के रवैया पर सवाल उठा रहा है.

अपनी कैबिनेट से मुख़ातिब होते हुए नेतन्याहू ने कहा है,''आप एक तरफ़ हमास के ख़ात्मे का समर्थन और दूसरी तरफ़ युद्ध को रोकने की बात नहीं कर सकते. बिना युद्द के हमास को ख़त्म नहीं किया जा सकता.”

नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र में 13 देशों द्वारा युद्ध रोकने के प्रस्ताव का समर्थन करने के बाद बोल रहे थे. अमेरिका ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था. ब्रिटेन वोटिंग से ग़ैर-हाज़िर रहा था.

इसराइल ने संयुक्त राष्ट्र के उस दावे का भी खंडन किया है कि जिसमें उस पर आरोप था कि वो ग़ज़ा के लोगों को मिस्र के रेगिस्तान में धकेलने का प्रयास कर रहा है.

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